Vinod Kumar v. Sila Magistrate Mau

High Court of Allahabad · 28 Feb 2020
B. R. Gavai; J. B. Pardiwala
Civil Appeal No 5107 of 2022
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that disputes over division of compensation among co-owners under the National Highways Act, 1956 must be referred to the civil court having original jurisdiction, and set aside the Magistrate's order interfering with the acquisition officer's compensation determination.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 5107 वर्ष 2022
विवनोद क
ु मार एवं अन्य ... अपीलार्थी* (गण)
बनाम
सि0ला मसि0स्ट्रेट मऊ एवं अन्य ... प्रति वादी (गण)
विनणय
न्यायमूर्ति 0े.बी. पारदीवाला
यह अपील असफल मूल रिरट याति9काक ाओं की ओर से है और 28
फरवरी, 2020 को इलाहाबाद में उच्च न्यायालय की एक खण्ड पीठ द्वारा रिरट सी
सं. 7310 वर्ष 2020 में पारिर विनणय क
े विवरुद्ध है, सि0सक
े द्वारा उच्च न्यायालय
ने अपीलार्थी* द्वारा दायर रिरट आवेदन को यह विव9ार रख े हुए खारिर0 कर विदया
विक सि0ला मसि0स्ट्रेट राष्ट्रीय रा0माग प्राति करण अति विनयम , 1956 (संक्षेप में
'अति विनयम 1956') की ारा 3 छ (5) क
े ह विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी
उद्घोर्षणा
“क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनणय वादी क
े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग क
े लिलए है और विकसी अन्य
उद्देश्य क
े लिलए प्रयोग नहीं विकया 0ा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क
े लिलए, विनणय का अंग्रे0ी
संस्करण प्रामाणिणक माना 0ाएगा र्थीा विनष्पादन और विcयान्वयन क
े उद्देश्यों क
े लिलए मान्य होगा।"
(संक्षेप में 'एसएलएओ') द्वारा पारिर आदेश की वै ा और वै ाविनक ा की 0ाँ9
करने में सक्षम है।
थ्यात्मक आ ार
JUDGMENT

2. क ें द्र सरकार ने अति विनयम 1956 की ारा 3 क (1) क े ह शविi का प्रयोग कर े हुए राष्ट्रीय रा0माग संख्या 29 क े 9ार लेन 9ौड़ीकरण क े उद्देश्य से सि0ला मऊ में स्थिस्र्थी क ु छ भूखंड का अति ग्रहण करने का प्रस् ाव कर े हुए एक अति सू9ना 0ारी की। उi अति सू9ना में गाटा संख्या 158, 160 और 161 गाँव अविहरानी बु0ग, सि0ला मऊ (यूपी) की भूविम शाविमल र्थीी।

3. उपरोi संदभ में, अति विनयम 1956 की ारा 3 घ क े ह एक और अति सू9ना 0ारी की गई र्थीी सि0समें घोर्षणा की गई र्थीी विक वनों वाली भूविम का अति ग्रहण साव0विनक उद्देश्य क े लिलए विकया 0ाएगा। ऐसी अति सू9ना 0ारी होने पर, भूविम क ें द्र सरकार क े पास विनविह हो 0ा ी है।

4. सक्षम प्राति कारी अर्थीा विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी ने अति विनयम 1956 की ारा 3 छ क े ह पारिर 28.11.2016 विदनांविक पं9ाट क े माध्यम से अति ग्रविह भूविम क े लिलए भूविम मालिलकों (हमारे समक्ष पक्षकारों) को विदए 0ाने वाले मुआव0े का विन ारण विकया। सक्षम प्राति कारी द्वारा पारिर पं9ाट का प्रासंविगक भाग इस प्रकार हैः हस् ां रणीय भूविम क े लिलए विन ारिर स्टाम्प दर क े रूप में रू. 4, 50,00, 000.00 मान े हुए, गाँव अविहरानी बु0ग में स्थिस्र्थी 3.269 हेक्टेयर भूविम 0ो अति ग्रही की 0ा रही है,का मुआव0ा रू. 14, 71,05, 000.00 आ ा है, सि0सकी दोगुनी राणिश रू. 29, 42,10, 000.00 हो ी है और संर9ना और पेड़ की क्षति पूर्ति रू. 8, 01, 582.00 हो ा है, सि0सकी क ु ल दोगुनी राणिश रू. 15, 29,06, 582.00 आ ी है। इस राणिश पर 100% क्षति पूर्ति राणिश रू. 30, 00,11, 582.00 विनकल ी है। 6 मा9, 2015 को ारा 3 क क े अंति म प्रकाशन से रू.3, 16,66,

953.00 का अति रिरi मुआव0ा 12% की दर से देय है। इस प्रकार, क ु ल मुआव0े की राणिश रू. 63, 16,90, 117.00 (63 करोड़ 16 लाख नब्बे ह0ार एक सौ सत्रह रुपये मात्र) विनकल ी है, सि0सक े संबं में मैंने पं9ाट की घोर्षणा की है। मुआव0े की कु ल राणिश क े 10% की दर से अति ग्रहण ख[9] रू. 6,31,69,012.00 की वसूली करक े और कम भूविम रा0स्व क े पं0ीक ृ मूल्य का 100 गुना 0ो अति ग्रहण प्राति करण से रु. 7476.00 आ ा है, इसे विन ारिर खा ा शीर्ष में 0मा कराया 0ाए। दनुसार, प्रविवविष्ट करने की कायवाही क े लिलए संबंति हसील को सू9ना भे0ी 0ाए। भार ीय राष्ट्रीय रा0माग प्राति करण, गोरखपुर को पं9ाट आदेश की एक प्रति उपलब् करा े हुए, विव9ारा ीन पं9ाट क े ह आने वाली पूरी राणिश उपलब् कराने क े लिलए पत्र भे0ा 0ाए।"

5. विदनांक 11.12.2019 को मामले क े प्रति वादीगण ने उनक े और इस मामले क े अपीलार्थी*गण क े बी9 मुआव0े क े विवभा0न क े संबं में विववाद उठाया। ीनों भूखंडों क े संबं में, प्रति वादीगण ने गाटा सं. 158 में मुआव0े का आ ा विहस्सा और गाटा सं. cमशः 160 और 161 में, मुआव0े का 1/3 विहस्सा मांगा, 0बविक मामले क े अपीलार्थी*गण ने गाटा सं. 158 में मुआव0े का 5/8 वां विहस्सा और गाटा सं. cमशः 160 और 161 में 13/16 वां विहस्सा मांगा।

6. विव ायी यो0ना अर्थीा अति विनयम 1956 की ारा 3 0 (3) क े अनुसार, सक्षम प्राति कारी द्वारा मुआव0े में भूविम मालिलकों क े विहस्सों का विन ारण करना अपेतिक्ष हो ा है। इन परिरस्थिस्र्थीति यों में, सक्षम प्राति कारी ने रा0स्व अति कारिरयों से एक रिरपोट मांगी। रा0स्व अति कारिरयों ने अपनी रिरपोट विदनांविक 11.04.2019 क े माध्यम से मामले क े अपीलार्थी* और प्रति वादीगण क े विहस्से की सू9ना दी। यह रिरपोट अपीलार्थी*गण क े पक्ष में र्थीी। रिरपोट का प्रासंविगक विहस्सा इस प्रकार हैः. "4. यह विक खसरा सं. 1353 की प्रति क े आ ार पर गाटा सं. 213 का उल्लेख विकया गया है सि0समें व मान सं. 232/51 विमन. और र्थीा गाटा संख्या 213 बी की व मान संख्या 232 विम./183 है र्थीा 213 की व मान संख्या 232 विम./519 है। इसी प्रकार गाटा संख्या 233 की व मान संख्या 214/ 644 एकड़ है र्थीा भूविम का प्रकार "बाग दीगर" अंविक है। इसक े अति रिरi गाटा संख्या 208 की व मान संख्या 227/1.440 एकड़ है सि0समें "बाग दीगर" का उल्लेख है, 0ो सही है।

5. यह विक महादव शाही पुत्र सी ाराम शाही और भोलानार्थी पुत्र गंगा और सरयू पुत्र बृ0मोहन 0ाति क ं डू क े नाम खा ा नं. 46 अविहरानी बु0ग,फसली वर्ष 1348 ख ौनी की प्रति में अंविक है। सि0समें गाटा सं. 232 एकड़ 0मीन द0 है और महादव शाही पुत्र सी ाराम शाही और भोलानार्थी पुत्र गंगा और सरयू पुत्र बृ0मोहन 0ाति क ं डू क े नाम फसली वर्ष 1348 क े लिलए गाटा सं. 128 में द0 है। इसमें गाटा सं. 232/0.284 एकड़ का उल्लेख है और महादेव पुत्र सी ाराम शाही और भोलानार्थी पुत्र बृ0 मोहन,0ाति क ं डू क े नाम खा ा सं. 92.गाटा सं. 232/0.539 और गाटा सं. 233/0.644 दो गाटा का उल्लेख है 0ो 1.163 एकड़ क े हैं, 0ो सही है। फसली वर्ष 1348 क े आ ार पर, सि0सका उल्लेख 0मन 12 क े रूप में विकया गया है। इसक े आ ार पर, गाटा सं. 227/1.440 में 1⁄2 बराबर विहस्सा, गाटा सं. 232 विम./ 0.551, 232/ 0.183, 232/ 0.539 और 233/1.624 में सलूम क े बराबर विहस्से विन ारिर विकए गए हैं 0ो सड़क हाणिशया दोहरीघाट से गाज़ीपुर क े दोनों ओर स्थिस्र्थी है, सि0समें आवेदक को गाटा सं. 232 और 233 में एक ति हाई विहस्सा विमला है और आवेदकों को गाटा सं. 227/1.440 एकड़ में 1⁄2 विहस्सा विमला है और व मान गाटा सं. 158, सि0सक े संबं में अपर सिसविवल न्याया ीश, आ0मगढ़ द्वारा 31.05.1976 को पारिर आदेश क े अनुसार, आवेदकों सुरेश और अन्य को गाटा सं. 232, 233 अर्थीा व मान में गाटा सं. 158 में सि0सकी माप 0.583 और गाटा सं. 160 और 161 में 1/16 वां विहस्सा।

7. मामले क े प्रति वादीगण ने उपरोi रिरपोट पर आपलि• 0 ाई। दोनों पक्षों को अपने दस् ावे0 दालिखल करने का अवसर विदया गया। पक्षकारों को सुनवाई का अवसर भी विदया गया और उसक े बाद सक्षम प्राति कारी अर्थीा एसएलएओ, मऊमाउ ने विदनांक 11.12.2019 विदनांविक आदेश द्वारा विव9ारा ीन भूविम में विवणिभन्न पक्षों क े पक्षों का विन ारण विकया। यह आदेश अति विनयम 1956 की ारा 3 0 (3) क े ह पारिर विकया गया र्थीा। एसएलएओ ने सिसविवल न्यायालय क े 31.05.1976 विदनांविक विनणय का अवलंब लिलया। अपीलार्थी*गण का पक्ष यह है विक एसएलएओ ने पक्षों क े बी9 विहस्सों का सही विन ारण विकया है। सक्षम प्राति कारी/एसएलएओ द्वारा पारिर आदेश का प्रासंविगक भाग इस प्रकार हैः. "उपरोi पक्षों को सुना गया है और फाइल में उपलब् सबू ों का विवति व परिरशीलन विकया गया। आपलि•क ा द्वारा अपने समर्थीन में प्रस् ु की गई फसली वर्ष 1348 की ख ौनी की 0ां9 की गई। फसली वर्ष 1423-1428, सी. ए[9]. प्रपत्र 41 और 45 और प्रपत्र 11,विपछली ख ौनी और अपर सिसविवल न्याया ीश, आ0मगढ़ क े माननीय न्यायालय द्वारा पारिर विदनांक 31.05.1976 का परिरशीलन विकया गया। माननीय अपर सिसविवल न्याया ीश की अदाल ने अपने पारिर आदेश में ही परिरवार की वंशावली का उल्लेख विकया है, सि0सका उल्लेख हसीलदार घोसी ने सभी दस् ावे0ों का परिरशीलन कर े हुए विकया है। इसमें उसिल्ललिख यह वंशावली और विहस्सा रिरपोट में रखे गए क की पुविष्ट कर ा है। माननीय सिसविवल न्यायालय ने मुद्दा सं.[1] ैयार कर े समय मुकदमे में विहस्सेदारी क े मुद्दे पर स्पष्ट रूप से बा की है "क्या वादी सह- मालिलक है और सू9ी क क े पेड़ों पर 1/4 कब्0ा है और सू9ी ख पर 1/8 और सू9ी ग क े पेड़ों पर 1/12 कब्0ा है, 0ैसा विक वाद में आरोप लगाया गया है?" उपयुi मुद्दे क े सार्थी-सार्थी अन्य मुद्दों पर विनणय ले े समय, अपर सिसविवल न्याया ीश, आ0मगढ़ की माननीय अदाल ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख विकया है, "उपरोi वंशावली और दस् ावे0ों को देख े हुए, भोला और सुकदेव क े विप ा गंगा का विहस्सा भूखंड सं. 208 (नई संख्या 158) क े बाग में 1/4 विहस्सा र्थीा।" इसक े अलावा," ऊपर 0ो 99ा की गई है, उसे देख े हुए, मैं इस अप्रति रोध्य विनष्कर्ष पर पहुँ9ा विक भोला का भूखंड संख्या 208 (पुराना 227) में 1 विहस्सा; भूखंड सं. 213 और 214 (232 और 233 पुराना) में 1/32 विहस्सा और प्लॉट नं. 233 दोहारीघाट-ग़ाज़ीपुर रोड क े पेड़ में 1/16 वां विहस्सा र्थीा।उपरोi न्यातियक आदेश में, भूविम और विहस्सों क े सार्थी पेड़ों क े विवभा0न का उल्लेख विमल ा है, लेविकन सं ुलन प्रत्यर्थी* विवनोद क े पक्ष में पड़ रहा है। मेरे विव9ार में, सभी लोग 0ो संयुi खा ेदार /सह-खा ेदारी में मौ0ूद हैं, उनका विहस्सा वंशावली क े आ ार पर य विकया 0ाना 9ाविहए। इसलिलए, 0ब वंशावली का विनणय एक सक्षम दीवानी न्यायालय द्वारा विकया गया है, सि0सक े लिखलाफ प्रति वाविदयों ने कभी अपील नहीं की है, ो न्यातियक विवविनश्चय भी उसी में विकया 0ा ा है। दनुसार, श्री सुरेश गुप्ता का दावा उति9 नहीं है। इससे पहले भी,व मान वाद में हसील घोसी से विहस्से क े विन ारण पर आपलि• क े संबं में रिरपोट मांगी गई र्थीी, सि0से दोनों पक्षों को सुनवाई का पयाप्त अवसर दे े हुए, हसीलदार घोसी द्वारा विहस्से का विन ारण कर े समय प्रस् ु विकया गया र्थीा। अदाल क े समक्ष उपस्थिस्र्थी होकर भी दोनों पक्षों ने इस थ्य क े संबं में सहमति व्यi की है विक सूर0, गंगा, बलदेव सालिलक और रा ाक ृ ष्णन श्री बृ0मोहन की सं ानें र्थीीं, सि0समें बलदेव की विबना सं ान क े मृत्यु हो गई र्थीी और इस प्रकार, उन सभी का बृ0मोहन की संपलि• में 1/4 वां विहस्सा होगा। गंगा क े दो बच्चे र्थीे, भोलानार्थी और सुiदेव। आवेदक सुरेश पराग क े पुत्र श्री द्वारका क े उ•राति कारी हैं, सि0न्होंने नीलामी में भोलानार्थी से संपलि• खरीदी र्थीी। दनुसार, भोलानार्थी क े वल उसी की नीलामी कर सक े हैं सि0सका वे कानूनी रूप से मालिलक हैं। इस थ्य का भी उल्लेख करना उति9 होगा विक अविहरानी बु0ग गाँव में 9कबंदी की कायवाही पहले ही की 0ा 9ुकी है, सि0सक े बाद ही व मान रिरकॉड सीए[9] फॉम 11, 23, 41 और 45 ैयार विकए गए हैं और उनक े आ ार पर ख ौनी का गठन विकया गया है। आवेदक सुरेश गुप्ता या उनक े परिरवार क े विकसी सदस्य ने न ो अदाल क े समक्ष इस संबं में कोई आपलि• 0 ाई है और न ही अदाल में कोई कायवाही शुरू करने का कोई सबू पेश विकया है, इसलिलए, उन्हें 0ो ों क े समेकन अति विनयम की ारा 49 द्वारा वर्जि0 विकया गया है। आदेश इस प्रकार, फाइल पर उपलब् साक्ष्य क े अनुसरण में, व मान ख ौनी, त्कालीन हसीलदार, घोसी की रिरपोट और अपर सिसविवल न्याया ीश क े माननीय न्यायालय क े आदेश, फाइल पर प्रस् ु विकए गए विहस्से सं ोर्ष0नक और सही हैं। दनुसार, मुआव0े क े भुग ान क े लिलए फाइल ैयार करक े उसे प्रस् ु विकया 0ाए। आवश्यक काय करने क े बाद, फाइल को रिरकॉड रूम में भे0 विदया 0ाए। हस् ाक्षर/अपठनीय (अ ुल वत्स) सक्षम प्राति कारी/एसएलएओ मऊ 11.12.2019 "

8. एसएलएओ द्वारा पारिर उपरोi संदर्भिभ 11.12.2019 विदनांविक आदेश से असं ुष्ट प्रति वादीगण ने, अति विनयम 1956 की ारा 3 0 (5) क े ह सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ क े समक्ष याति9का दायर करक े इसे 9ुनौ ी दी। अपीलार्थी*गण का पक्ष यह है विक सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ ने विबना विकसी अति कारिर ा और आगे विबना अपीलार्थी*गण को सुनवाई का कोई अवसर विदए मुआव0े में प्रति वादीगण क े पक्ष में अति क विहस्सा प्रदान कर े हुए आदेश विदनांविक 16.01.2020 पारिर विकया। सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ द्वारा पारिर आदेश का विcयाशील भाग इस प्रकार हैः. "आदेश उपरोi परीक्षण क े आ ार पर, सक्षम अति कारी/विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी, मऊ क े 11.12.2019 विदनांविक आदेश को अपास् विकया 0ा ा है। फाइल को इस विनद•श क े सार्थी सक्षम अति कारी को वापस भे0ा 0ा ा है विक उपरोi पक्षों द्वारा प्रस् ु अणिभलेखों की विवति व 0ां9 कर े हुए, नीलामी में आपलि•क ाओं क े पूव0ों द्वारा अति ग्रविह भूविम क े स्वाविमत्व को ध्यान में रख े हुए और खा ेदार की अलग-अलग वंशावली क े अनुसार, खा ेदारों का विहस्सा विन ारिर विकया 0ाए और गल रिरपोट प्रस् ु करने वाले अति कारिरयों/कम9ारिरयों क े लिखलाफ कारवाई करने क े लिलए हसील से प्रस् ाव भी प्रस् ु विकया 0ाए।”

9. व मान मामले क े अपीलार्थी*गण, सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ द्वारा पारिर उपरोi आदेश से असं ुष्ट होने क े कारण, इसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट सं. 7310 वर्ष 2020 दायर करक े 9ुनौ ी दी। उi रिरट आवेदन को उच्च न्यायालय की एक खण्ड पीठ ने अपने 28.02.2020 विदनांविक आदेश क खारिर0 कर विदया। उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश इस प्रकार हैः. "1. याति9काक ाओं क े विवद्वान अति वiा श्री यादवेंद्र प्र ाप सिंसह और प्रति वादीगण क े विवद्वान स्र्थीायी अति वiा को सुना।

2. रिरट याति9का राष्ट्रीय रा0माग अति विनयम, 1956 (ए स्थिश्मनपश्चा "अति विनयम, 1956" क े रूप में संदर्भिभ ) की ारा 3 (छ) (5) क े ह शविi क े कणिर्थी प्रयोग में सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ द्वारा पारिर 16.01.2020 विदनांविक आदेश क े लिखलाफ है, सि0समें उन्होंने विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी, मऊ द्वारा पारिर आदेश को अपास् कर विदया है और मामले को पुनर्निन ारण क े लिलए भे0 विदया है।

3. याति9काक ाओं क े विवद्वान अति वiा ने कहा विक विन ारण पहले ही विकया 0ा 9ुका र्थीा लेविकन यह विववाविद नहीं कर सक े विक सि0ला मसि0स्ट्रेट विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी द्वारा पारिर आदेश की 0ां9 करने और विवति क े अनुसार उति9 विनणय लेने में सक्षम र्थीे और व मान रिरट याति9का में आक्षेविप आदेश अति कारिर ा रविह है। अन्यर्थीा कोई त्रुविट आक्षेविप आदेश में नहीं विदखाई 0ा सकी।

4. रिरट याति9का में मेरिरट का अभाव है। रद्द विकया 0ा ा है।

10. उपरोi संदर्भिभ परिरस्थिस्र्थीति यों में, अपीलार्थी*गण विवशेर्ष अनुमति याति9का दायर करक े इस न्यायालय क े समक्ष आए। इस अदाल ने 31.08.2020 विदनांविक आदेश क े माध्यम से नोविटस 0ारी विकया और सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ द्वारा पारिर 16.01.2020 विदनांविक आदेश क े सं9ालन पर रोक लगा दी। बाद में अनुमति प्रदान कर दी गई और अपील स्वीकार कर ली गई। अपीलार्थी*गण की ओर से विदए गए क

11. अपीलार्थी* की ओर से पेश विवद्वान अति वiा श्री गौरव अग्रवाल ने 0ोर देकर कहा विक उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश पारिर करक े गंभीर त्रुविट की है। उन्होंने कहा विक विदनांक 11.12.2019 को सक्षम प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश अति विनयम 1956 की ारा 3 0 (3) क े ह कहा 0ा सक ा है। यविद सक्षम प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश क े संबं में प्रति वादीगण को कोई णिशकाय र्थीी ो उनक े लिलए कानूनी रूप से उपलब् उपाय सक्षम प्राति कारी से संपक करना र्थीा ाविक सक्षम प्राति कारी मामले को दीवानी न्यायालय को भे0 सक े । विवद्वान अति वiा क े अनुसार, ऐसी प्रविcया अति विनयम 1956 की ारा 3 0 (4) क े ह विवविह की गई है।

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12. विवद्वान अति वiा ने आगे कहा विक सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ, 0ो क ें द्र सरकार द्वारा विनयुi एक मध्यस्र्थी हैं, क े पास मुआव0े क े विवभा0न पर विनणय लेने की कोई अति कारिर ा नहीं है। उन्हें एक मध्यस्र्थी क े रूप में अति विनयम 1956 की ारा 3 छ (5) क े ह क े वल मुआव0े की मात्रा य करने का अति कार है।

13. विवद्वान अति वiा ने कहा विक सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ क े समक्ष 9ुनौ ी सक्षम प्राति कारी द्वारा पारिर 11.12.2019 विदनांविक आदेश को दी गई र्थीी सि0से स्वीकार करने से वह इनकार कर सक े र्थीे। सि0ला मसि0स्ट्रेट द्वारा पारिर 16.01.2020 विदनांविक आदेश को अति कारिर ा रविह कहा 0ा सक ा है।

14. अं में, विवद्वान अति वiा ने क विदया विक अन्यर्थीा भी सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश को अति कारिर ा रविह कहा 0ा सक ा है क्योंविक अपीलार्थी*गण को नोविटस ामील नहीं की गई या सुनवाई का कोई भी अवसर नहीं विदया गया।

15. ऊपरोi संदर्भिभ परिरस्थिस्र्थीति यों में, विवद्वान अति वiा ने विनवेदन विकया है विक उसकी अपील में मेरिरट होने क े कारण, इसकी अनुमति दी 0ानी 9ाविहए और सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ द्वारा पारिर 16.01.2020 विदनांविक आदेश को रद्द व अपास् विकया 0ाए और उच्च न्यायालय क े समक्ष अपीलार्थी* द्वारा दायर रिरट याति9का को अनुमति दी 0ाए। प्रति वादी सं. 1-सि0ला मैसि0स्ट्रेट, मऊ एवं प्रत्यर्थी* सं.[2] सक्षम प्राति कारी/विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी, मऊ की ओर से विदए गए क

16. सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ (प्रति वादी सं. 1) और सक्षम प्राति कारी/विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी, मऊ (प्रति वादी सं. 2) की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वiा श्री वी.क े. शुक्ला ने बहु विनष्पक्ष रूप से कहा विक उच्च न्यायालय ने अपीलार्थी* द्वारा दायर रिरट आवेदन को अस्वीकार करक े त्रुविट की है। श्री शुक्ला ने क विदया विक सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ को प्रति वादी की ओर से सक्षम प्राति कारी द्वारा अति विनयम 1956 की ारा 3 0 (3) क े ह पारिर 11.12.2019 विदनांविक आदेश को 9ुनौ ी देने वाली याति9का को स्वीकार नहीं करना 9ाविहए र्थीा। उपरोi संदर्भिभ परिरस्थिस्र्थीति यों में, श्री शुक्ला ने कहा विक अपीलार्थी*गण क े पक्ष में उति9 राह दी 0ाए। प्रत्यर्थी* सं. 4, 6 और 16 क े क

17. प्रत्यर्थी* सं. 4, 6 और 16 की ओर से प्रस् ु विवद्वान अति वiा श्री अरविंवद क ु मार शुक्ला ने कहा विक उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेविप आदेश पारिर करने में कानून की विकसी भी त्रुविट बा छोविड़ए, विकसी प्रकार की कोई त्रुविट नहीं कही 0ा सक ी है। उन्होंने कहा विक विववाद, वास् व में, बंटवारे का नहीं है, बस्थिल्क विवर्षयग भूविम में विहस्से क े संबं में है। ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यों में, सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ क े पास सक्षम प्राति कारी द्वारा प्र ान सिसविवल न्याया ीश, आ0मगढ़ द्वारा सिसविवल वाद सं. 63 वर्ष 1970 में पारिर 31.05.1976 विदनांविक आदेश का अवलंब ले े हुए सक्षम प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश को 0ां9ने की अति कारिर ा र्थीी। ऐसी उसिल्ललिख परिरस्थिस्र्थीति यों में, विवद्वान अति वiा ने विनवेदन विकया विक व मान अपील में मेरिरट न होने क े कारण इसे खारिर0 विकया 0ाना 9ाविहए। विवश्लेर्षण

18. पक्षों की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वiागण को सुनने और अणिभलेख पर सामग्री को देखने क े बाद, एकमात्र प्रश्न 0ो हमारे विव9ार क े लिलए आ ा है वह यह है विक क्या उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश पारिर करक े कोई त्रुविट की है।

19. दोनों पक्षों की ओर से विदए गए क– पर ध्यान देने से पहले, हमें अति विनयम 1956 क े क ु छ प्रासंविगक प्राव ानों पर गौर करना 9ाविहए।

20. ारा 3 क इस प्रकार हैः- "3 क भूविम अति ग्रहण करने की शविi, आविद। (1) 0हाँ क ें द्र सरकार इस बा से सं ुष्ट है विक विकसी साव0विनक उद्देश्य क े लिलए विकसी राष्ट्रीय रा0माग या उसक े विहस्से क े विनमाण, रखरखाव, प्रबं न या सं9ालन क े लिलए विकसी भी भूविम की आवश्यक ा है, वह आति कारिरक रा0पत्र में अति सू9ना द्वारा ऐसी भूविम का अति ग्रहण करने क े अपने इरादे की घोर्षणा कर सक ी है। (2) उप- ारा (1) क े ह प्रत्येक अति सू9ना में भूविम का संतिक्षप्त विववरण विदया 0ाएगा। (3) सक्षम प्राति कारी अति सू9ना का सार दो स्र्थीानीय समा9ार पत्रों में प्रकाणिश कराएगा, सि0नमें से एक स्र्थीानीय भार्षा में होगा।”

21. ारा 3 ग आपलि•यों की सुनवाई का प्राव ान कर ी है। ारा 3 घ में अति ग्रहण की घोर्षणा का प्राव ान है। ारा 3 ङ कब्0ा लेने की शविi का उपबं कर ी है। ारा 3 छ मुआव0े क े रूप में देय राणिश क े विन ारण क े संबं में है। ारा 3 छ इस प्रकार हैः. "3 छ मुआव0े क े रूप में देय राणिश का विन ारण- (1) 0हां इस अति विनयम क े ह कोई भूविम अति ग्रही की 0ा ी है, वहां ऐसी राणिश का भुग ान विकया 0ाएगा 0ो सक्षम प्राति कारी क े आदेश द्वारा विन ारिर की 0ाए। (2) 0हां इस अति विनयम क े ह विकसी भी भूविम का सि0स पर उपयोगक ा क े विकसी अति कार या सुखाति कार की प्रक ृ ति का कोई अति कार है, अति ग्रही की 0ा ी है, वहां मालिलक और विकसी अन्य व्यविi को सि0सका उस भूविम में सुखाति कार इस रह क े अति ग्रहण क े कारण विकसी भी रह से प्रभाविव हुआ है, उस भूविम क े लिलए उप- ारा (1) क े ह विन ारिर राणिश का दस प्रति श पर गणना की गई राणिश का भुग ान विकया 0ाएगा। (3) उप- ारा (1) या उप- ारा (2) क े अ ीन राणिश विन ारिर करने से पहले, सक्षम प्राति कारी दो स्र्थीानीय समा9ार पत्रों में प्रकाणिश एक साव0विनक सू9ना देगा, सि0समें से एक स्र्थीानीय भार्षा में होगी सि0समें अति ग्रहण की 0ाने वाली भूविम में रुति9 रखने वाले सभी व्यविiयों से दावे आमंवित्र विकए 0ाएंगे। (4) ऐसी सू9ना में भूविम का विववरण विदया 0ाएगा और ऐसी भूविम से विह बद्ध सभी व्यविiयों को व्यविiग रूप से या विकसी अणिभक ा द्वारा या ारा 3 ग की उप- ारा (2) में विनर्निदष्ट विकसी विवति क प्रति विनति द्वारा ऐसी भूविम में अपने -अपने विह की प्रक ृ ति का अणिभकर्थीन करने क े लिलए सक्षम प्राति कारी क े समक्ष विनय समय और स्र्थीान पर उपस्थिस्र्थी होना होगा । (5) यविद उप- ारा (1) या उप- ारा (2) क े ह सक्षम प्राति कारी द्वारा विन ारिर राणिश विकसी भी पक्ष को स्वीकाय नहीं है, ो विकसी भी पक्ष क े आवेदन पर राणिश का विन ारण क ें द्र सरकार द्वारा विनयुi मध्यस्र्थी द्वारा विकया 0ाएगा। (6) इस अति विनयम क े प्राव ानों क े अ ीन, मध्यस्र्थी ा एवं सुलह अति विनयम, 1996 (1996 का 26) क े प्राव ान इस अति विनयम क े ह प्रत्येक मध्यस्र्थी ा पर लागू होंगे। (7) सक्षम प्राति कारी या मध्यस्र्थी उप- ारा (1) या उप- ारा (5),0ैसा भी वाद हो, क े ह राणिश का विन ारण कर े समय विनम्नलिललिख को ध्यान में रखेगा - (ए) ारा 3 क क े ह अति सू9ना क े प्रकाशन की ारीख को भूविम का बा0ार मूल्य; (ख) भूविम का कब्0ा लेने क े समय विह बद्ध व्यविi द्वारा ऐसी भूविम को अन्य भूविम से अलग करने क े कारण हुई क्षति, यविद कोई हो; (ग) भूविम का कब्0ा लेने क े समय विह बद्ध व्यविi को अति ग्रहण क े कारण विकसी भी रह से उसकी अ9ल संपलि• या उसकी 0मा को हुआ नुकसान,यविद कोई नुकसान हुआ हो; (घ) यविद भूविम क े अति ग्रहण क े परिरणामस्वरूप, विह बद्ध व्यविi को अपना विनवास या व्यवसाय स्र्थीान बदलने क े लिलए म0बूर विकया 0ा ा है, ो ऐसे परिरव न क े कारण होने वाला युविiयुi ख[9], यविद कोई हो।" (प्रभाव वर्ति )

22. ारा 3 0 0मा और राणिश क े भुग ान क े संबं में है। हमारे लिलए ारा 3 0 का उपखंड (4) ही प्रासंविगक है। उपखंड (4) इस प्रकार हैः. "3 0. 0मा और राणिश का भुग ान- (4) यविद राणिश या उसक े विकसी भाग क े विवभा0न या विकसी ऐसे व्यविi को सि0से वह या उसका कोई विहस्सा देय है, क े बारे में कोई विववाद उत्पन्न हो ा है ो सक्षम प्राति कारी विववाद को मूल क्षेत्राति कार वाले प्रमुख दीवानी न्यायालय, सि0सकी अति कारिर ा क े भी र वह भूविम स्थिस्र्थी है, क े विनणय क े लिलए संदर्भिभ करेगा।

23. अति विनयम 1956 की यो0ना और ऊपर विनर्निदष्ट वै ाविनक प्राव ान यह विबल्क ु ल स्पष्ट कर े हैं विक अति विनयम 1956 क े ह विकसी भी भूविम का अति ग्रहण हो 0ाने क े बाद, सक्षम प्राति कारी मुआव0े क े रूप में राणिश का भुग ान करने क े लिलए बाध्य है। अति विनयम 1956 की ारा 3 छ क े ह एक प्रविcया विवविह की गई है। ारा 3 छ का उपखंड (5) यह स्पष्ट कर ा है विक यविद ारा 3 छ की उप- ारा (1) या उप- ारा (2) क े ह सक्षम प्राति कारी द्वारा विन ारिर की गई राणिश विकसी भी एक पक्ष को स्वीकाय नहीं है, ो राणिश का विन ारण उस मध्यस्र्थी द्वारा विकया 0ाएगा सि0से क ें द्र सरकार द्वारा विकसी भी पक्ष क े आवेदन क े आ ार पर विनयुi विकया 0ाए। ारा 3 0 में प्राव ान है विक ारा 3 छ क े ह मुआव0े क े लिलए विन ारिर राणिश क ें द्र सरकार द्वारा विनयमों क े अनुसार 0मा की 0ानी होगी। सक्षम प्राति कारी द्वारा ऐसी राणिश 0मा करने क े बाद ही भूविम का कब्0ा लिलया 0ा सक ा है। ारा 3 0 का उपखंड (4) राणिश क े बारे में है। ारा 3 0 क े उपखंड (4) की भार्षा साफ और सरल है। इसमें प्राव ान है विक यविद राणिश या उसक े विकसी विहस्से क े संबं में कोई विववाद उत्पन्न हो ा है, ो सक्षम प्राति कारी विववाद को मूल क्षेत्राति कार वाले प्र ान दीवानी न्यायालय क े विनणय क े लिलए संदर्भिभ करने क े लिलए बाध्य है, सि0सकी अति कारिर ा क े भी र भूविम स्थिस्र्थी है।

24. ऐसा लग ा है विक इस वाद में उच्च न्यायालय ने अति विनयम 1956 क े प्राव ानों को पूरी रह से गल रीक े से पढ़ा है। इससे त्रुविट हो गई क्योंविक यह विवति क े सुस्र्थीाविप सिसद्धान् को लागू करने में विवफल रहा विक विवति क प्राव ान क े विनव9न में, पहला और सबसे महत्वपूण विनयम शास्थिब्दक विनमाण का है। न्यायालय को सबसे पहले क े वल यही देखना है विक प्राव ान में क्या कहा गया है। यविद प्राव ान स्पष्ट है और प्राव ान से विव ायी इरादा स्पष्ट है, ो न्यायालय को विव ान क े विनमाण क े अन्य विनयमों की सहाय ा लेने की आवश्यक ा नहीं है। विनमाण क े अन्य विनयमों की सहाय ा भी ली 0ा ी है 0ब विव ायी इरादा स्पष्ट नहीं हो ा है।

25. उपरोi संदभ में यह उल्लेख विकया 0ा सक ा है विक विनव9न की प्रत्येक प्रणाली में विकसी विव ान की क े विनव9न का पहला और सबसे महत्वपूण सिसद्धां शास्थिब्दक व्याख्या का विनयम है। विनव9न क े अन्य विनयम, उदाहरण क े लिलए, शरार विनयम/उद्देश्यपूण विनमाण, आविद का सहारा क े वल भी लिलया 0ा सक ा है 0ब विकसी विव ान क े सरल शब्द अस्पष्ट हों या कोई बो गम्य परिरणाम न दे या यविद शास्थिब्दक रूप से पढ़ा 0ाए ो विव ान क े उद्देश्य को ही रद्द कर देंगे। 0हाँ विकसी विव ान क े शब्द पूण रूप से स्पष्ट और साफ हैं, वहाँ शास्थिब्दक विनयम क े अलावा विनव9न क े अन्य सिसद्धां ों का सहारा नहीं लिलया 0ा सक ा है। विव ान में प्रयुi भार्षा विव ायी इरादे का विन ारक कारक है। ऐसा माना 0ा ा है विक विव ातियका ने कोई त्रुविट नहीं की। उप ारणा यह है विक यह वही कहना 9ाह ा र्थीा 0ो इसने कहा है। यह मान े हुए विक विव ातियका द्वारा प्रयुi शब्दों में कोई दोर्ष या 9ूक है, न्यायालय इस कमी को ठीक या पूरा नहीं कर सक ा है।

26. मुआव0े क े लिलए भुग ान की 0ाने वाली राणिश का विन ारण करने और राणिश क े बी9 अं र है। विव ातियका ने राणिश क े संबं में उत्पन्न विववाद को अणिभविन ारिर करने क े लिलए मूल क्षेत्राति कार वाले प्र ान सिसविवल न्यायालय को शविiयां प्रदान करना उति9 समझा। इसका एक कारण है विक विव ातियका ने मूल क्षेत्राति कार वाले प्र ान दीवानी न्यायालय को ऐसी शविi प्रदान करना उति9 समझा सि0सक े क्षेत्राति कार क े भी र वह भूविम स्थिस्र्थी है। हम आगे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे।

27. मुआव0े क े बंटवारे का सवाल कविठनाइयों से मुi नहीं है। मुआव0े को विवभासि0 करने की प्रविcया में, न्यायालय को प्रत्येक दावेदार को उस विहस्से क े बराबर का मूल्य देना हो ा है 0ो उसने अविनवाय अति ग्रहण क े कारण खो विदया है। इस प्रकार कहने में, प्रस् ाव सरल लग सक ा है, लेविकन इसक े व्यावहारिरक अनुप्रयोग में मुआव0े को विवभासि0 करने में कई 0विटल समस्याएं उत्पन्न हो ी हैं। कविठनाई का अनुभव विवणिभन्न प्रकार क े विह ों, अति कारों और भूविम पर दावों की प्रक ृ ति क े कारण हो ा है, सि0न्हें न क े संदभ में मूल्यांविक विकया 0ाना है। अविनवाय अति ग्रहण क े लिलए विदया गया मुआव0ा उन सभी विह ों का मूल्य है 0ो समाप्त हो 0ा े हैं और मुआव0े को विह बद्ध व्यविiयों क े बी9 समान रूप से विव रिर विकया 0ाना 9ाविहए और न्यायालय को मुआव0े को विवभासि0 करना 9ाविहए ाविक सभी विह ों का क ु ल मूल्य विदए गए मुआव0े की राणिश क े बराबर हो। लेविकन प्रति स्प * विह ों क े मूल्यांकन में, 0ो अपनी प्रक ृ ति क े कारण अविनतिश्च कारकों और अविनतिश्च आंकड़ों पर विनभर है, काफी कविठनाई का सामना करना पड़ ा है। विनर्निववाद रूप से, मुआव0े को विवभासि0 करने की प्रविcया में न्यायालय काल्पविनक विव9ारों क े आ ार पर काय नहीं कर सक ा, लेविकन खोए हुए संबंति विह ों क े मूल्य का सटीक विन ारण करने क े लिलए यर्थीासंभव काम कर सक ा है। न्यायालय को, प्रत्येक वाद में, परिरस्थिस्र्थीति यों और मूल्य क े सटीक विन ारण की संभावना को ध्यान में रख े हुए उपलब् सामग्री क े आ ार पर, मूल्यांकन की उस विवति को अपनाना 9ाविहए 0ो हकदार व्यविiयों क े बी9 मुआव0े को समान रूप से विव रिर कर ी है। [देलिखएः दोसीबाई नानाभॉय 0ी0ीभॉय बनाम पी.एम. भरु9ा, (1956) 60 बॉम एलआर 1208]

28. इस प्रकार, एकमात्र सामान्य सिसद्धां यह कहा 0ा सक ा है विक अति विनयम 1956 की ारा 3 0 क े उपखंड (4) क े ह विवभा0न पुनमूल्यांकन नहीं है, बस्थिल्क संबंति विह ों की प्रक ृ ति और मात्रा क े अनुसार अति ग्रविह भूविम में विह बद्ध कई व्यविiयों क े बी9 पहले से ही विन ारिर मूल्य का विव रण है। उन विह ों क े विन ारण में, उनक े सापेतिक्षक महत्व का विन ारण और सि0स रीक े से उन्होंने विन ारिर क ु ल मूल्य में योगदान विदया है, वे प्रत्येक वाद की परिरस्थिस्र्थीति यों और पक्षों क े अति कारों को विनयंवित्र करने वाले कानून क े प्रासंविगक प्राव ानों क े आलोक में य विकए 0ाने वाले प्रश्न हैं।प्रत्येक वाद में विवभा0न क े लिलए वास् विवक विनयम ैयार विकया 0ाना 9ाविहए ाविक भूविम में विह बद्ध व्यविiयों क े बी9 क ु ल मूल्य या मुआव0े का उति9 और न्यायसंग विव रण सुविनतिश्च विकया 0ा सक े ।

29. ऊपर उसिल्ललिख परिरस्थिस्र्थीति यों में, विव ातियका ने मूल क्षेत्राति कार वाले प्र ान सिसविवल न्यायालय को ही ऐसा काय सौंपना उति9 नहीं समझा।

30. हम प्रत्यर्थी* सं. 4, 6 और 16 ओर से विदए गए इस क से प्रभाविव नहीं हैं विक पक्षों क े बी9 विववाद विवभा0न का नहीं है, बस्थिल्क यह दीवानी अदाल द्वारा सिसविवल वाद सं. 63 वर्ष 1970 में में पारिर आदेश को प्रभावी बनाने क े संबं में है सि0सका विनणय 31.05.1976 को विकया गया र्थीा। संभव ः यह क विदया 0ाना 9ाविहए विक अति ग्रही भूविम में विहस्सों का विन ारण ऊपर विनर्निदष्ट दीवानी न्यायालय द्वारा पारिर विकसी आदेश क े आ ार पर विकया 0ाना 9ाविहए। इस प्रकार, यविद विन0ी प्रति वादीगण सिसविवल न्यायालय द्वारा पारिर आदेश का अवलंब लेना 9ाह े हैं, ो वे मूल क्षेत्राति कार क े प्र ान न्याया ीश क े न्यायालय क े समक्ष ऐसा कर सक े हैं।हमारा मानना है विक सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ क े पास राणिश क े विवभा0न क े संबं में कोई शविi या अति कारिर ा नहीं है।

31. हम यह समझ नहीं आ ा विक विकस आ ार पर उच्च न्यायालय ने अपने आक्षेविप आदेश में यह कहा विक सि0ला मसि0स्ट्रेट विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी द्वारा पारिर आदेश की 0ां9 करने और राणिश क े बारे में विववाद का विनणय लेने में सक्षम है।

32. शारदा देवी बनाम विबहार राज्य, 2003 एम. ए[9]. एल. 0े. ऑनलाइन (एस.सी.) 23 = ए. आई. आर. 2003 एस. सी. 942 क े मामले में विदए गए विनणय में, इस न्यायालय क े पास भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 30 और 31 क े दायरे और क्षेत्र पर विव9ार करने का अवसर र्थीा। इन प्राव ानों का विवश्लेर्षण और व्याख्या कर े हुए, इस न्यायालय ने विनम्नलिललिख ारिर विकया: "23. अति विनयम की ारा 18 और ारा 30 में कलेक्टर द्वारा संदर्भिभ करने की शविi अणिभकस्थिल्प करने वाले दो प्राव ानों क े ुलनात्मक अध्ययन की आवश्यक ा है। ारा 18 क े ह संदभ का विवर्षय विनम्नलिललिख में से एक या अति क क े बारे में विववाद हो सक ा हैः (i) ) भूविम क े माप क े बारे में, (i) i) ) मुआव0े की राणिश या मात्रा क े बारे में, (i) i) i) ) उन व्यविiयों क े बारे में सि0न्हें मुआव0ा देय है, (i) v) ) विह बद्ध व्यविiयों क े बी9 मुआव0े क े बारे में। ारा 30 क े ह विववाद का विवर्षय यह हो सक ा हैः (i) ) मुआव0े की राणिश या उसक े विकसी भाग का विवभा0न, (i) i) ) वे व्यविi सि0न्हें मुआव0े की राणिश या उसका कोई विहस्सा देय है। यद्यविप ारा 18 में प्रयुi शब्द 'मुआव0े की राणिश' है 0बविक ारा 30 में प्रयुi शब्द 'मुआव0े की राणिश या उसका कोई विहस्सा' है, विव ायी मसौदे में यह अं र महत्वहीन है और मुआव0े क े विहस्से क े हक या बंटवारे क े संबं में विववाद अति विनयम की ारा 18 क े अन् ग इस सिसद्धां पर भी शाविमल विकया 0ाएगा विक विहस्सा सम्पूण का ही एक भाग है। इस प्रकार, पहली बार में, ऐसा लग ा है विक ारा 30 आंणिशक रूप से ारा 18 को अति व्याप्त कर ी है; लेविकन 0ैसा विक इसक े बाद 0ल्द ही देखा 0ाएगा, ऐसा नहीं है।

24. डॉ. 0ी.ए[9]. ग्रान्ट बनाम विबहार राज्य (उपयुi) इस न्यायालय का ीन न्याया ीशों की पीठ का विनणय है सि0समें कलेक्टर द्वारा संदर्भिभ विकए 0ाने की शविi क े संदभ में अति विनयम की यो0ना न्यायालय क े विव9ार क े लिलए सामने आई। ीन न्याया ीशों की पीठ ने 2:1 क े बहुम से विनम्नलिललिख सिसद्धां प्रति पाविद विकया: (i) ) अति विनयम में दो प्राव ान हैं सि0नक े ह कलेक्टर न्यायालय को संदर्भिभ कर सक ा है, अर्थीा ् ारा 18 और ारा 30। दोनों ाराओं क े ह शविiयां अलग-अलग हैं और आकस्थिस्मक ा की स्थिस्र्थीति में लागू की 0ा सक ी हैं सि0नमें अति व्याविप्त नहीं हैं। पं9ाट क े उस भाग में विदखाया गया व्यविi 0ो मुआव0े क े बंटवारे से संबंति है, 0ो या ो व्यविiग रूप से या एक प्रति विनति क े माध्यम से उपस्थिस्र्थी है या सि0स पर ारा 12 (2) क े ह नोविटस 0ारी विकया गया है, उसे, यविद वह पं9ाट स्वीकाय नहीं है, ो कलेक्टर को आवेदन करना 9ाविहए विक वह ारा 18 क े ह विन ारिर समय क े भी र मामले को अदाल में भे0े।लेविकन कोई व्यविi 0ो कलेक्टर क े समक्ष अति ग्रहण की कायवाही में उपस्थिस्र्थी नहीं हुआ है, यविद उसे दालिखल करने की नोविटस नहीं दी गई है, ो वह बंटवारे क े बारे में या उन व्यविiयों क े बारे में विववाद उठा सक ा है सि0न्हें यह देय है और उस मुआव0े क े अपने अति कार क े लिलए ारा 30 क े ह संदभ क े लिलए अदाल में आवेदन कर सक ा है, 0ो पं9ाट से पहले मौ0ूद रहा, या 0ो पं9ाट क े बाद से उस पर हस् ां रिर हो गया हो। ारा 30 क े ह विकसी संदभ क े लिलए कोई सीमा अवति विन ारिर नहीं की गई है।

(i) i) ) यह ारा 30 क े ह संदभ बनाने की शविi क े प्रयोग क े बारे में नहीं कहा गया है विक कलेक्टर ने अपने पं9ाट द्वारा मुआव0े की राणिश का बंटवारा नहीं विकया है।

(i) i) i) ) ारा 11 क े ह कलेक्टर द्वारा विदया गया पं9ाट मुआव0े क े अति कार का स्रो नहीं है। सपाट रूप से एक पं9ाट क े वल अति ग्रहण क े लिलए अति सूति9 भूविम में विह रखने वाले व्यविi को सरकार द्वारा विदया गया प्रस् ाव हो ा है; विह बद्ध व्यविi इसे स्वीकार करना करने क े लिलए बाध्य नहीं है और सरकार ारा 48 क े ह अति ग्रहण को वापस भी लिलया 0ा सक ा है। सरकार द्वारा ारा 16 क े ह भूविम का कब्0ा ले लिलए 0ाने पर ही भूविम क े मालिलक का अति कार समाप्त हो ा है। इसलिलए अपीलार्थी* का यह क विक मुआव0े का अति कार पं9ाट की ारीख से ही प्राप्त हो ा है, स्वीकार नहीं विकया 0ा सक ा है।

(i) v) ) पं9ाट क े ह हकदार व्यविi को मुआव0े का भुग ान करने क े लिलए ारा 31 क े ह सरकार क े दातियत्व का म लब यह नहीं है विक क े वल वे व्यविi सि0न्हें पं9ाट क े ह मुआव0े का भुग ान करने का विनद•श विदया 0ा ा है, वे ारा 30 क े ह विववाद उठा सक े हैं। ारा 11 क े ह कलेक्टर द्वारा विवभा0न की यो0ना क े वल कलेक्टर और विह बद्ध व्यविiयों क े बी9 विनणायक हो ी है, न विक विह बद्ध व्यविiयों क े बी9 आपस में। पं9ाट में हकदार घोविर्ष व्यविiयों को ारा 31 क े ह मुआव0े का भुग ान राज्य को मुआव0े का भुग ान करने क े अपने दातियत्व का विनवहन कर ा है, सि0ससे दावेदार को ारा 30 क े ह या एक अलग मुकदमे द्वारा संदभ में अपने अति कार को क े संबं में विवरो करने का विवकल्प हो ा है। (v) ) विबहार भूविम सु ार अति विनयम क े ह अति ग्रहण क े लिलए देखी गई भूविम पर अपीलक ा का अति कार राज्य में विनविह हो गया और इसलिलए अति ग्रही भूविम क े लिलए मुआव0े का अति कार राज्य को हस् ां रिर कर विदया गया। इसक े बाद राज्य सरकार और अपीलक ा क े बी9 इस बा को लेकर विववाद पैदा हो गया विक "विकस व्यविi को" मुआव0ा देय र्थीा। राज्य को कलेक्टर क े पं9ाट की ारीख से पहले मौ0ूद शीर्षक क े ह भूविम क े लिलए देय मुआव0े का कोई अति कार नहीं र्थीा और ारा 18 क े अर्थी क े भी र विह बद्ध व्यविi क े रूप में उसक े द्वारा कोई आवेदन नहीं विकया 0ा सक ा र्थीा लेविकन मुआव0े क े न पर उनक े परस्पर विवरो ी दावों क े बारे में अपीलक ा और राज्य क े बी9 विववाद स्पष्ट रूप से ऐसा विववाद र्थीा सि0से अति विनयम की ारा 30 क े ह न्यायालय को भे0ा 0ा सक ा र्थीा। ारा 30 में ऐसा क ु छ भी नहीं है 0ो उस व्यविi द्वारा उठाए गए विववाद को न्यायालय क े संदभ से बाहर कर ा है, सि0स पर भूविम क े मालिलक का अति कार पं9ाट क े बाद से हस् ां रिर हो गया है।

30. अति विनयम की यो0ना से प ा 9ल ा है विक ारा 18 क े ह संदभ का उपाय क े वल 'विह बद्ध व्यविi' क े लिलए उपलब् होना 9ाविहए। ऐसा व्यविi 0ो व्यविiग रूप से या प्रति विनति क उपस्थिस्र्थी हो ा है या सि0स पर ारा 12 (2) क े ह नोविटस 9स्पा की गई हो, वह विन ारिर समय क े भी र न्यायालय को संदर्भिभ विकए 0ाने क े लिलए ारा 18 (2) क े ह कलेक्टर को आवेदन करने क े लिलए बाध्य है। सि0स शीर्षक क े आ ार पर ारा 18 क े ह संदभ मांगा 0ाएगा, वह स्पष्ट रूप से पं9ाट की ारीख क े संदभ में एक पूवव * शीर्षक होगा। ारा 29 भी ऐसी ही है, 0ो 'विह बद्ध व्यविiयों' की बा कर ी है। अति विनयम की ारा 12 (1) द्वारा ब ाया गया पं9ाट अंति म रूप एक ओर कलेक्टर और दूसरी ओर 'विह बद्ध व्यविiयों' क े बी9 हो ा है और (i) ) वास् विवक क्षेत्र, अर्थीा भूविम की माप (i) i) ) भूविम का मूल्य, अर्थीा मुआव0े की मात्रा, और (i) i) i) ) 'विह बद्ध व्यविiयों' क े बी9 मुआव0े का विवभा0न से संबंति हो ा है। 'विह बद्ध व्यविi' इस थ्य की परवाह विकए विबना पं9ाट से बाध्य होंगे विक वे cमशः कलेक्टर क े समक्ष उपस्थिस्र्थी हुए हैं या नहीं। ारा 29 द्वारा ब ाए गए पं9ाट की अंति म ा 'विह बद्ध व्यविiयों' क े बी9 है और यह विवभा0न की शुद्ध ा क े मुद्दे क सीविम हो ी है। ारा 30 अपने सं9ालन में क े वल 'विह बद्ध व्यविiयों' क ही सीविम नहीं है। इसलिलए, 'विह बद्ध व्यविiयों' द्वारा इसका प्रयोग विकए 0ाने का विवकल्प उपलब् होगा यविद वे न ो कलेक्टर क े समक्ष कायवाही में उपस्थिस्र्थी हुए हों और न ही उनका प्रति विनति त्व विकया गया हो, न ही अति विनयम की ारा 12 (2) क े ह नोविटस विदया गया हो या 0ब वे पं9ाट की घोर्षणा क े बाद स्वत्व क े आ ार पर दावा कर े हों। 'विह बद्ध व्यविi' की परिरभार्षा में 'मुआव0े में विह सृ0न' की बा कर ी है। पं9ाट क े बाद अस्थिस् त्व में आने वाला विह मुआव0े क े दावे को 0न्म दे ा है सि0से पहले से ही विन ारिर विकया 0ा 9ुका है। ऐसा व्यविi ारा 30 का भी सहारा ले सक ा है। विकसी भी स्थिस्र्थीति में, वह विववाद सि0सक े लिलए ारा 30 का उपयोग विकया 0ा सक ा है, क े वल (i) ) मुआव0े की राणिश या उसक े विकसी विहस्से क े बारे में, या (i) i) ) उन व्यविiयों क े बारे में सीविम रहेगा सि0न्हें मुआव0े की राणिश (पहले से विन ारिर ) या उसका कोई विहस्सा देय है। पूवव * अति कार क े आ ार पर दावा करने वाला राज्य 'विह बद्ध व्यविi' नहीं होगा, 0ैसा विक पहले ही ऊपर ब ाया गया है और अपने अति कार क े पूवव * होने क े कारण, राज्य, ऐसे वाद में, अपने कणिर्थी पूवव * अति कार क े लिलए ारा 18 या ारा 30 का सहारा लेने का हकदार नहीं होगा। पं9ाट की घोर्षणा क े बाद उपार्जि0 या हस् ां रिर स्वत्व अति कार का विन ारण कलेक्टर क े विववेक क े आ ार पर, परिरसीमा का ध्यान विदए विबना ारा 30 क े ह एक संदभ में विकया 0ा सक ा है। वैकस्थिल्पक रूप से, इस रह क े अति कार पर कलेक्टर द्वारा विकसी भी स्व ंत्र कानूनी कायवाही में अति विनणय का विवकल्प विदया 0ा सक ा है। यह दृविष्टकोण न्यायसंग, ठोस और ार्निकक है क्योंविक पं9ाट क े बाद पं9ाट की ारीख से स्वत्व का क नहीं विदया 0ा सक ा और ारा 30 क पहुं9 की मनाही कर उप9ार हीन नहीं छोड़ा 0ा सक ा। इस दृविष्टकोण से देखने पर, ारा 18 और 30 में अति व्याविप्त नहीं होगी एक दूसरे से स्व ंत्र क्षेत्र में काय करेंगे।

37. कलेक्टर भूविम अति ग्रहण अति विनयम क े ह कायवाही कर े समय राज्य क े प्रति विनति क े रूप में काय कर ा है।वास् व में, वह राज्य की ओर से कायवाही कर ा है। कलेक्टर का पं9ाट मुआव0े क े अति कार का स्रो नहीं है; यह पूवव * अति कार है सि0से कलेक्टर द्वारा आपलि•यों, यविद कोई हो, का विन ारण कर े समय विमले विनष्कर्ष– से मान्य ा विमल ी है। कलेक्टर राज्य द्वारा मान्य ा प्राप्त मालिलक को सरकार क े प्रस् ाव क े रूप में रखे 0ाने वाले मुआव0े की राणिश की मात्रा विन ारिर कर ा है। प्रस् ाविव ी प्रस् ाव को स्वीकार कर सक ा है या इनकार कर सक ा है। यविद वह प्रस् ाव स्वीकार कर ा है और सरकार भूविम पर कब्0ा कर ले ी है, ो प्रस् ाविव ी का अति कार समाप्त हो 0ा ा है और सभी प्रभाय– से मुi होकर आत्यंति क रूप से सरकार में विनविह हो 0ा ा है। ारा 11 क े ह पं9ाट देने और अति विनयम की ारा 18 या 30 क े ह संदभ की शविi एक वै ाविनक शविi है। विववादों को विन ारिर करने क े लिलए न्यायालय की अति कारिर ा का विवस् ार भी वै ाविनक है और ारा 17 या 30 द्वारा बनाई गई सीमाओं द्वारा विनयंवित्र हो ा है सि0सक े ह न्यायालय को संदभ विदया गया है। शविi का प्रयोग उस हद क विकया 0ाना 9ाविहए सि0स हद क इसे अति विनयम द्वारा प्रदान विकया गया है और पहले से मौ0ूद श – की उपलब् ा पर सि0सकी उपलब् ा पर ही शविi का प्रयोग विकया 0ा सक ा है।

38. कलेक्टर द्वारा कलेक्टर और 'विह बद्ध व्यविiयों' क े बी9 पं9ाट अंति म और विनणायक हो ा है, 9ाहे वे दो मुद्दों पर कलेक्टर क े समक्ष उपस्थिस्र्थी हुए हों या नहीं (i) ) वास् विवक क्षेत्रफल क े बारे में,अर्थीा अति ग्रही भूविम की माप, (i) i) ) भूविम क े मूल्य, अर्थीा मुआव0े की राणिश, और (i) i) i) ) 'विह बद्ध व्यविiयों' क े बी9 विफर मुआव0े क े बंटवारे का बारे में,पुनश्च कलेक्टर और से 'विह बद्ध व्यविiयों' क े बी9 न विक 'विह बद्ध व्यविiयों' क े बी9 आपस में। ारा 18 क े ह याति9 ा संदभ की स्थिस्र्थीति में, कलेक्टर का पं9ाट; यविद सिसविवल कोट द्वारा इन विवर्षयों पर णिभन्न पाया 0ा ा है, ो उस सीमा क हटा विदया 0ाएगा। अति विनयम की यो0ना इस मुद्दे पर कलेक्टर क े पं9ाट क े सार्थी एक समान अंति म ा नहीं रख ी विक विकस व्यविi को मुआव0ा देय है; कलेक्टर द्वारा पं9ाट क े बाव0ूद और संदभ मांगने में विवफल रहने पर भी, इस रह क े मुद्दे को विकसी भी सक्षम मं9 द्वारा विनणय लेने क े लिलए उपलब् छोड़ विदया गया है।

33. हमारा विव9ार है विक 0ब मुआव0े क े लिलए विन ारिर राणिश क े विवभा0न से संबंति विववाद को हल करने की बा आ ी है, ो ऐसा क े वल मूल क्षेत्राति कार वाला प्र ान दीवानी न्यायालय ही कर सक ा है। प्र ान सिसविवल न्यायालय का अर्थी है सि0ला न्याया ीश का न्यायालय।

34. हमारा अंति म विनष्कर्ष इस प्रकार हैः यविद राणिश या उसक े विकसी भाग क े विवभा0न क े बारे में कोई विववाद उत्पन्न हो ा है या विकसी ऐसे व्यविi सि0से वह या उसका कोई विहस्सा देय है, ो सक्षम प्राति कारी विववाद को मूल क्षेत्राति कार वाले प्र ान सिसविवल न्यायालय क े विनणय क े लिलए संदर्भिभ करेगा, सि0सकी अति कारिर ा की सीमाओं क े भी र भूविम स्थिस्र्थी है। सक्षम प्राति कारी क े पास सिसविवल न्यायालय की क ु छ शविiयाँ हो ी हैं, लेविकन उपरोi प्रक ृ ति क े विववाद की स्थिस्र्थीति में, ारा 3 0 की उप- ारा (3) क े ह सक्षम प्राति कारी की राय देने की संतिक्षप्त शविi उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा। यह विववाद सिसविवल न्यायालय द्वारा विव9ारणीय प्रक ृ ति का है सि0से कानून द्वारा मूल क्षेत्राति कार वाले प्र ान सिसविवल न्यायालय क े विनणय क े लिलए संदर्भिभ विकए 0ाने का उपबं विकया गया है। इसलिलए राणिश या उसक े विकसी भाग क े विवभा0न या विकसी ऐसे व्यविi को सि0से वह राणिश या उसका कोई विहस्सा देय है, क े संबं में विववाद का विनणय उस न्यायालय को करना होगा।

35. ऊपर उसिल्ललिख परिरस्थिस्र्थीति में, सि0ला मसि0स्ट्रेट, मऊ द्वारा पारिर 16.01.2020 विदनांविक आदेश को रद्द व अपास् विकया 0ा ा है। रिरट आवेदन सं. 7310 वर्ष 2020 स्वीक ृ विकया 0ा ा है। मुआव0े की राणिश क े बंटवारे क े संबं में पक्षों क े बी9 विववाद को देख े हुए, विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी अब विववाद को अति विनयम 1956 की ारा 3 0 क े उपखंड (4) क े अनुसार मूल क्षेत्राति कार वाले प्र ान सिसविवल न्यायालय को भे0ेगा।

36. दनुसार अपील को अनुमति प्रदान की 0ा ी है।

37. कॉस्ट क े बारे में कोई आदेश नहीं होगा।

38. लंविब आवेदन, यविद कोई हो, द्नुसार विनस् ारिर विकए 0ा े हैं।............................... न्यायमूर्ति बी.आर.गवई............................... न्यायमूर्ति 0े.बी.पारदीवाला नई विदल्ली;