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High Court of Punjab and Haryana
S. Ravi, Bh., J.
Criminal Application Nos. 1378-1379 of 2023
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The court upheld conviction for culpable homicide not amounting to murder under Section 304 Part II IPC and emphasized proportional and parity-based sentencing among co-accused in a fatal unlawful assembly case.

Full Text
Translation output
रपोटयो
भारत क
े सव ायालय म
आपरािधक अपीलीय ायपािलका
आपरािधक आवेदन संा (एस).1378-1379 ऑफ 2023
उ$सेन .......अपीलकता( गण )
बनाम
हरयाणा रा) और अ .......+ितवादी(गण)
िनणय
एस. रवीं, भ-, जे.
JUDGMENT

1. ये अपील, िवशेष अनुमित ारा, पंजाब और हरयाणा उ ायालय 2 ारा पारत िनणय और आदेश 1 से उ"# होती ह%, िजसम िनचली अदालत ारा भारतीय दंड संिहता, 1860 (इसक े बाद "आई. पी. सी".) की धारा 302 से आई. पी. सी. की धारा 304-भाग 2 म िदए गए दोषिस/0 क े िनणय को परवितत िकया गया है। इन अपीलों को सूचना देने वाले/िशकायतकता ारा 4ाथिमकता दी गई है।

2. अिभयोजन प[6] ने आरोप लगाया िक होिलका दहन की पूव सं7ा पर यािन की 07.03.2012 को, क ृ 9 (ए-1) ने सुभाष (मृतक) क े साथ दु:वहार िकया।अगले िदन, क ृ 9 (ए 6) क े बेटे <=जीत ने सुबह लगभग 10.00/11.00 सुभाष को डंडा मारा। इसक े कारण, दोपहर क े लगभग 03.00 बजे, जब पवन, उ>सेन और सुभाष (मृतक) अपने घर क े सामने बैठे थे, तो <=जीत उनक े घर क े पास आया और उA गाली देने लगा, िजससे /Bथित िबगड़ गई।इसक े बाद सभी आरोपी क ृ 9 (ए 2) का बेटा राजू, क ृ 9, परवीन (ए 3), अिमत (ए 4) का बेटा सुंदर, राजपाल (ए 8) का बेटा सुंदर, नर िसंह (ए 7), संदीप (ए 5) और अ हिथयार लेकर मौक े पर पEंचे।राजू ने सीता राम (पीडFू1) क े दािहने क ं धे पर 4हार िकया।क ृ 9 ने सीता राम की पीठ पर लोहे की नली से 4हार िकया और <=जीत ने सीता राम क े िसर क े दािहने िहGे पर फरसा का 4हार िकया।सुंदर क े पास एक रॉड थी; नर िसंह और संदीप अपने साथ फरसा ले जा रहे थे।उAोंने पवन, उ>सेन और सुभाष को घायल कर िदया। घायलों को अJताल ले जाया गया। 1 िदनांिकत 27.08.2019 और 03.09.2019 2 आपरािधक अपील सं.249 डी.बी ऑफ 2016 म

3. 09.03.2012 को सूचना िमलने पर, पुिलस ने आई. पी. सी. की धारा 147,148,149 और 323 क े तहत मामला दज िकया। सुभाष, जो कई चोटों क े कारण गंभीर Lप से घायल हो गए थे, उA अJताल ले जाया गया; बाद म, उनकी सजरी भी की गई। हालाँिक, वह बच नहीं पाए और 12.3.2012 पर उनका िनधन हो गया।इसक े बाद, 13.3.2012 को 4ाथिमकी म आई.पी.सी की धारा 302 जोड़ी गई।पोNमॉटम िकया गया, और डॉOर (पीडFू 5-डॉ. क ु णाल ख#ा) ने पोNमॉटम रपोट म दज िकया िक मृQु मृतक क े िसर पर लगी चोटों और उसकी परचर जिटलताओं क े कारण Eई थी।पुिलस ने आरोपी को िगरSार कर िलया।बाद म, उनक े ारा िदए गए 4कटीकरण बयानों क े आधार पर हिथयार बरामद िकए गए। पीडFू 1-सीता राम क े बयान पर, अिभयोजन प[6] ने एक अितरT आरोपी, सुंदर को बुलाने क े िलए दंड 4िUया संिहता (इसक े बाद "सी.आर.पी.सी") की धारा 319 क े तहत एक आवेदन दायर िकया।

4. सभी आठ अिभयुT:/Tयों पर आई. पी. सी. की धारा 148,323 और 302 आई. पी. सी. की धारा 149 क े साथ पिठत दंडनीय अपराधों क े िलए आरोप लगाया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया। अिभयोजन प[6] ने बाईस गवाहों से पूछताछ की और उनक े बयान दज िकए।पीडFू-3 -डॉ. संत लाल बेनीवाल ने सीता राम (पीडFू1), उ>सेन (पीडFू2) और पवन की िचिकWकीय-कानूनी जांच की। उAोंने िशकायतकताओं क े शरीर पर िविभ# चोटों को दज िकया और कहा िक चोटों की संभािवत अविध छह घंटे क े भीतर क ुं द हिथयार से थी। पीडFू8-डॉ. 4दीप क ु मार ने कहा िक सुभाष (मृतक) को क े वल एक चोट लगी थी।पीडFू4- धमXY िसंह ने नZा तैयार िकया।बचाव प[6] ने दो गवाहों से पूछताछ की।डी. ड[ू.1-िबUम िसंह ने अपदBथ िकया िक वह पेश करने क े िलए अिधक ृ त था, और तदनुसार एक क\]ूटरीक ृ त उप/Bथित रिजNर लाया िजसम कहा गया था िक 08.03.2012 को (घटना क े िदन), एक आरोपी, जो िक, परवीन परमार ने सुबह 07.00 बजे से शाम क े 07.00 बजे तक सुर6ा गाड क े Lप म अपने कत:ों का पालन िकया था। डी. ड[ू. 2-डॉ. नरेश क ु मार, िजAोंने आरोपी क ृ 9 और <=जीत की कानूनी Lप से जांच की थी और क ृ 9 की दािहनी ^ैिवकल ह_ी का ` ै aर और <=जीत की नाक की ह_ी का ` ै aर दज िकया था, ने भी बचाव प[6] क े प[6] म गवाही दी।

5. िनचली अदालत ने कहा िक हिथयारों से लैस सभी आरोपी एक साथ मौक े पर पEंचे और मृतक सिहत पीिड़तों पर उनक े हमले ने घातक चोटों को पEँचाने क े िलए एक गैरकानूनी सभा क े इरादे को 4दिशत िकया।मृतक पर पाई गई चोटों की 4क ृ ित ने संक े त िदया िक सभा का सामा इरादा मृQु का कारण बना, जो वाbव म Eआ था।िनचली अदालत ने माना िक अिभयुTों पर लगी चोटों की:ाcा करने म अिभयोजन प[6] की असमथता उA हमले और सुभाष की मौत क े कारण की उनकी भूिमका से मुT नहीं करती है, dोंिक सबूत िवeसनीय थे।दो गवाहों क े साf ने पुिलस क े साथ-साथ अदालत म भी अपने बयानों म अिभयोजन प[6] क े मामले का लगातार समथन िकया।उनकी गवाही की पुिg िचिकWा साf ारा की गई थी। िनचली अदालत 3 ने सभी अिभयुTों को दोषी ठहराया और उA आई. पी. सी. की धारा 302 सह पिठत धारा 149 क े तहत आजीवन कारावास और आई. पी. सी. की धारा 148 क े तहत एक साल क े कठोर कारावास की सजा सुनाई; आई. पी. सी. की धारा 149 क े साथ पिठत धारा 323 क े तहत अपराध क े िलए छह महीने क े कठोर कारावास की सजा सुनाई।

6. अिभयुTों ने उ ायालय म अपील की, िजसने िववािदत िनणय ारा उनकी यािचकाओं को आंिशक Lप से hीकार कर िलया और उनकी दोषिस/0 को आई. पी. सी. की धारा 302 सह पिठत धारा 149 से cnydj 304 भाग II सह पिठत धारा 149 आई. पी. सी. म परवितत कर िदया। हालाँिक, इसने आई. पी. सी. की धारा 148 और धारा 323 क े साथ धारा 149 क े तहत दोषिस/0 की पुिg की। उ ायालय ने कहा िक क ृ 9 और भारमजीत ारा 4ाi चोटों क े बारे म Jgीकरण की कमी ने अिभयोजन प[6] की कहानी को कमजोर कर िदया और पीडFू.8-डॉ. 4दीप क ु मार क े अनुसार, मृतक सुभाष को क े वल एक चोट लगी थी।अंत म, उ ायालय ने माना िक मामला आई. पी. सी. की धारा 300 क े अपवाद 4 क े तहत आता है, dोंिक प6ों क े बीच गुGा बढ़ रहा था, और जब िशकायतकता प[6] क ृ 9 क े घर क े सामने पEंचा तो अचानक लड़ाई हो गई, िजसका अथ था िक आरोपी ने पूव- िनयोिजत तरीक े से काम नहीं िकया। पीिड़त, सूचना देने वाले उ>सेन ने दोषिस/0 क े Lपांतरण और सजा म कमी क े /खलाफ इस अदालत म अपील की।

7. सुनवाई क े दौरान, इस अदालत ने संक े त िदया िक ये अपील एक ही अपराध करने क े िलए अलग-अलग अिभयुT:/Tयों ारा दी गई सजा की उपयुTता तक सीिमत होंगी।दोिषयों ारा गुजारी गई िविभ# अविधयाँ इस 4कार ह%ः क ृ 9 को छ ू ट क े साथ 9 साल, 5 महीने और 4 िदन का कारावास; राजू को 3 साल, 1 महीने और 1 िदन का कारावास; परवीन को 1 साल, 11 महीने और 27 िदन का कारावास; सुंदर पुl अिमत लाल को 2 साल और 5 िदन का कारावास; संदीप को 1 साल, 11 महीने और 12 िदन का कारावास; <=जीत को 08 साल, 11 महीने और 19 िदन का कारावास (छ ू ट सिहत); नर िसंह को 1 साल और 4 महीने का कारावास और सुंदर पुl राजपाल को 11 महीने और 16 िदन का कारावास Eआ था।

8. अपीलािथयों ने तक िदया िक उ ायालय का यह िनmष िनकालना गलत था िक चोट अचानक लड़ाई क े कारण लगी थीं। अिधवTा ने इस बात पर 4काश डाला िक िजन अिभयुTों को समवतn Lप से दोषी ठहराया गया था, वे जानबूझकर सूचना देने वाले/पीिड़तों क े घर क े पास घातक चोटों का कारण बने थे-वाbव म, सूचना देने वाले प6ों म से एक की परणामhLप मृQु हो गई।Bथािपत तpों को 7ान म रखते Eए, सभा का उqेr इस तरह क े बल का उपयोग करना था, िजसक े परणामhLप मृQु हो गई।इसिलए, वतमान मामले म सजा उिचत और उपयुT होनी चािहए थी, और आ6ेिपत िनणय ने सजा क े मानक को अपनाने म गंभीर Lप से गलती की, िजसक े परणामhLप:ापक Lप से अलग और 3.सl परी6ण सं.160 ऑफ 30.07.2012, 275 ऑफ 04.12.2012, 114 ऑफ 15.04.2013 म िनणय िदनांिकत 11.02.2016 और आदेश िदनांिकत 17.02.2016। असमान परणाम सामने आए।मुकदमे क े एक छोर पर, अिभयुTों म से एक (सुंदर पुl राजपाल) को 11 महीने से थोड़ा अिधक समय तक कारावास का सामना करना पड़ा, जबिक क ृ 9 को 9 साल, 5 महीने और 4 िदन का कारावास भुगतना पड़ा था।अपीलकता मुखिबरों ने आ>ह िकया िक इस अदालत को क ु छ हद तक समान सजा मानक अपनाना चािहए जब 4Qेक अिभयुT की भूिमका:ावहारक Lप से अ4भेs थी।

9. अिभयुT की ओर से यह बताया गया िक उ ायालय ने वाbव म इस ायालय ारा बताए गए िहतकारी िस0ांतों का पालन िकया था, िजसम अिभयुT की सापे6 आयु, उनकी पारवारक पर/Bथितयाँ, िहरासत म िबताए गए समय की अविध, साथ ही साथ अपराध करने क े बाद से गुजरे समय की अविध, सभी पर िवचार िकया गया था।

10. इस अदालत ने बार-बार कहा है िक आनुपाितकता क े िस0ांत को सजा देने की 4िUया का मागदशन करना चािहए। अहमद Eसैन वली मोहtद सैयद बनाम गुजरात राu,[4] म यह अिभिनधारत िकया गया था िक सजा को "अपराधी को कानून को तोड़ने क े िलए घोिषत उqेr को 4ाi करने से रोकना चािहए", और "उिचत सजा" देने का 4यास िकया जाना चािहए।" "अदालत ने यह भी माना िक "क े वल समय बीतने क े कारण" "मामूली सजा" देना 4ितक ू ल होगा। इसी तरह, जमील बनाम यू. पी. राu 5, म यह वकालत करते Eए िक सजा देना तp पर िनभर अvास होना चािहए, अदालत ने इस बात पर भी जोर िदया िक "कानून को तpाwक मैिटxy क े आधार पर सुधाराwक तंl या 4ितरोध को अपनाना चािहए। क ु शल मॉzूलेशन ारा, सजा देने की 4िUया जहाँ होनी चािहए वहाँ कठोर होनी चािहए, और जहाँ होनी चािहए वहाँ दया क े साथ संयिमत होना चािहए।4Qेक मामले म तp और दी गई पर/Bथितयाँ, अपराध की 4क ृ ित, िजस तरीक े से इसकी योजना बनाई गई थी और िकया गया था, अपराध करने का उqेr, अिभयुT का आचरण, उपयोग िकए गए हिथयारों की 4क ृ ित और अ सभी उप/Bथत पर/Bथितयाँ 4ासंिगक तp ह% जो िवचार क े 6ेl म 4वेश करगे।"

11. िफर से, गु{ बासवराज बनाम कनाटक राu 6, म अदालत ने जोर देकर कहा िक "यह देखना अदालत का कत: है िक अपराध करने और सामािजक:वBथा पर इसक े 4भाव क े संबंध म उिचत सजा दी जाए" और उस सजा म "पयाi सजा" शािमल है।