Srij Singh v. Greater Noida Industrial Development Authority

High Court of Allahabad · 05 Jan 2023
Krishna Murari; Bela M. Vitravedi
Civil Appeal No. 26491/2018
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that appellate courts must consider cross-objections filed in land acquisition compensation appeals and remanded the matter for fresh adjudication due to the High Court's failure to do so.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या...........… वर्ष! 2023
(विवशेर्ष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 26491/2018 से उद्भू )
ीरज सिंसह ... अपीलार्थी8 (गण)
बनाम
ग्रेटर नोएडा औद्योविगक विवकास प्राति करण और अन्य ... प्रत्यर्थी8 (गण)

े सार्थी
सिसविवल अपील संख्या...........… 2023
(विवशेर्ष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 31320/ 2018 से उद्भू )
जगदीश सिंसह ... अपीलार्थी8 (गण)
बनाम

े सार्थी
(विवशेर्ष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 1468/2019 से उद्भू )
रघुबीर सिंसह ... अपीलार्थी8 (गण)
बनाम
उद्घोर्षणा
“क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण!य वादी क
े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबHति प्रयोग क
े लिलए है और विकसी अन्य
उद्देश्य क
े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क
े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी
संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विVयान्वयन क
े उद्देश्यों क
े लिलए मान्य होगा।"

े सार्थी
(विवशेर्ष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 31322/2018 से उद्भू )
रम सिंसह ... अपीलार्थी8 (गण)
बनाम
ग्रेटर नोएडा औद्योविगक विवकास प्राति करण और अन्य ... प्रति वादी (गण)

े सार्थी
(विवशेर्ष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 31321/2018 से उद्भू )
)रणजी सिंसह ... अपीलार्थी8 (गण)
बनाम

े सार्थी
(विवशेर्ष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 32192/2018 से उद्भू )
हर भजन सिंसह ... अपीलार्थी8 (गण)
बनाम
विनण!य
न्यायमूर्ति क
ृ ष्ण मुरारी
विवलंब को माफ विकया जा ा है।
JUDGMENT

2. अनुमति अनुदत्त की जा ी है।

3. व !मान अपील इलाहाबाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय (ए स्मिस्मनपश्चा "उच्च न्यायालय" क े रूप में संदर्भिभ ) द्वारा पारिर आक्षेविप विनण!य और आदेश विदनांक 05.01.2017 क े लिfलाफ विनदgणिश हैं, सिजसक े ह यहां अपीलक ा!ओं द्वारा की गई अपील fारिरज कर दी गई। थ्य

4. सुविव ा क े लिलए, व !मान अपीलों क े विनण!य क े लिलए आवश्यक प्रासंविगक थ्य, उत्तर प्रदेश की प्रत्यर्थी8 राज्य सरकार ने विदनांक 30.04.1993 को भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 17 सपविm ारा 4(1) क े ह एक अति सू)ना जारी की र्थीी, सिजसक े ह अपीलार्भिर्थीयों की भूविम सविह भूविम का एक बड़ा विहस्सा ग्रेटर नोएडा क े उद्देश्य क े लिलए अति ग्रविह विकया गया र्थीा।अति विनयम की ारा 6 क े अं ग! उक्त भूविमयों की घोर्षणा विदनांक 25.06.1993 को जारी की गई र्थीा विदनांक 13.08.1993 से 31.05.1994 क े मध्य विवणिभन्न ति णिर्थीयों पर उक्त भूविमयों का कब्जा लिलया गया।

5. उक्त भूविम क े अति ग्रहण क े बाद, विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी ने आदेश विदनांक 27.08.1994 द्वारा, भूfंडों का बाजार मूल्य ीन अलग-अलग दरों यानी 32.52/- रुपये, 22.44/- रुपये और 16.46/- रुपये प्रति वग! गज विन ा!रिर विकया।

6. उपरोक्त विनण!य से व्यणिर्थी होकर, अपीलार्भिर्थीयों ने भूविम अति ग्रहण अति विनयम की ारा 18 क े संदभ! ह मांग की और आसपास क े क्षेत्र में अति ग्रही अन्य भूविम की समान ा क े आ ार पर 350/- रुपये से 500/- रुपये प्रति वग! गज की दर से मुआवजे का दावा विकया।उपरोक्त संदभ! में विवद्वान सिजला न्याया ीश ने अपने विनण!य विदनांक 09.05.2002 द्वारा, उक्त जमीनों का बाजार मूल्य 400/- रुपये विन ा!रिर विकया, लेविकन विवकास शुल्क क े लिलए 1/3 राणिश काट ली, और बाजार मूल्य 267/- रुपये प्रति वग! गज य विकया और 80/- रुपये प्रति वग! गज की दर से 9% और 15% प्रति वर्ष! की दर से ब्याज और कब्जे क े हस् ां रण की ारीf से बाजार मूल्य पर 12% प्रति वर्ष! की दर से अति रिरक्त मुआवजे की सहाय ा प्रदान की।

7. इसक े लिfलाफ, प्रत्यर्थी8 ग्रेटर नोएडा ने उच्च न्यायालय में एक अपील दायर की, सिजस पर अपीलक ा!ओं ने वृतिw की मांग कर े हुए अपनी प्रति अपील दायर की।

8. इसक े बाद, उच्च न्यायालय ने विनण!य और आदेश 04.01.2017 विदनांविक क े माध्यम से, विवद्वान सिजला न्याया ीश द्वारा विन ा!रिर मुआवजे की पुविx की।यहां अपीलक ा!ओं का क ! है विक उच्च न्यायालय ने अपना फ ै सला सुना े समय उनक े द्वारा दायर की गई आपलित्तयों पर विव)ार नहीं विकया।

9. अपीलक ा!ओं ने वृतिw क े लिलए उनकी आपलित्तयों पर mीक से विव)ार न विकये जाने पर व्यणिर्थी होकर एक पुनर्विव)ार याति)का दायर की, हालांविक इसे विनण!य और आदेश 05.01.2017 विदनांविक क े माध्यम से fारिरज कर विदया गया र्थीा। इसलिलए, व !मान विवशेर्ष अनुमति याति)का।

10. स्पx ा क े लिलए, यह उल्लेf करना आवश्यक है विक व !मान अपीलों क े माध्यम से भूविम क े अति ग्रहण को )ुनौ ी नहीं दी जा रही है, और सीविम )ुनौ ी क े वल उक्त भूविम क े अति ग्रहण क े लिलए विदए गए मुआवजे की मात्रा क ही सीविम है।

11. मौजूदा मुद्दे की समझने और सही विनष्कर्ष! पर पहुं)ने क े लिलए, हमें उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश का विवश्लेर्षण यह देfने क े लिलए करना )ाविहए विक क्या यहां अपीलक ा!ओं द्वारा दायर की गई आपलित्तयों पर उच्च न्यायालय द्वारा विव)ार विकया गया है, और यविद इस रह क े विव)ार को ध्यान में नहीं रfा गया है, ो यह न्यायालय विकस हद क राह दे सक ा है। विवश्लेर्षण

12. आदेश 41 विनयम 22, जो व !मान मामले में शासी कानून है, प्रर्थीम अपील की अदाल में प्रति वादी क े लिलए उपलब् उपायों क े बारे में विवस् ार से ब ाया गया है जहां एक मूल तिडVी को )ुनौ ी दी गई है।हमारी राय में, व !मान मामले पर विनण!य लेने क े लिलए उक्त प्राव ान का विवश्लेर्षण आवश्यक है।

13. ऐसे मामलों में जहां प्रर्थीम दृxया न्यायालय द्वारा पारिर तिडVी पूरी रह से प्रति वादी क े पक्ष में है, ऐसी परिरस्मिस्र्थीति में, ऐसी तिडVी को अपील करने क े लिलए प्रति वादी क े पक्ष में कोई उपाय मौजूद नहीं है, क्योंविक अपील करने का कोई अति कार विकसी पक्ष पर विनविह नहीं विकया जा सक ा है, जो सफल है।

14. हालांविक, ऐसे मामलों में जहां प्रर्थीम दृxया न्यायालय द्वारा दी गई तिडVी, आंणिशक रूप से प्रत्यर्थी8 क े पक्ष में है, लेविकन आंणिशक रूप से प्रत्यर्थी8 क े विवरुw भी है, आदेश 41 विनयम 22 क े अं ग! दो उपाय प्रत्यर्थी8 क े पास रह े हैं, (i)) अपनी प्रति -आपलित्त दज! करने क े लिलए और, (i)i)) तिडVी का समग्र रूप से समर्थी!न करना। कानून में एक ीसरा उपाय भी मौजूद है, जो एक प्रति अपील दायर करने का अति कार है, सिजस पर भी संक्षेप में ))ा! की जाएगी।

15. ऐसे मामलों में जहां विवरो ी पक्ष मूल तिडVी क े आंणिशक या संपूण! क े विवरुw प्रर्थीम अपील दायर कर ा है, और उक्त प्रर्थीम अपील में प्रति वादी, तिडVी का आंणिशक या संपूण! भाग उनक े पक्ष में होने क े कारण, पहली बार में अपील दायर करने से ब) ा है, ऐसे मामलों में, यह सुविनतिश्च करने क े लिलए विक प्रत्यर्थी8 को भी सुनवाई का उति) मौका विदया जा ा है, उसे दूसरे पक्ष द्वारा पहले से ही शुरू की गई अपील क े भी र अपनी प्रति आपलित्तयां दज! करने का अति कार विदया जा ा है, न क े वल दूसरे पक्ष द्वारा उmाए गए विववादों क े लिfलाफ, लेविकन प्रर्थीम दृxया न्यायालय द्वारा पारिर तिडVी क े आंणिशक या संपूण! क े विवरुw भी।

16. इसी रह की परिरस्मिस्र्थीति में, जहां दूसरे पक्षकार ने पहली बार में प्रति आपलित्तयों क े उप)ार क े अलावा एक अपील को प्रार्थीविमक ा दी है, प्रत्यर्थी8 इस प्रकार विन ा!रिर सीमा अवति क े भी र एक प्रति अपील भी दायर कर सक ा है, जो संक्षेप में अपने आप में एक अलग अपील है, जो दूसरे पक्षकार द्वारा दायर अपील से स्व ंत्र, मूल तिडVी क े विहस्से या पूरे को )ुनौ ी दे ी है।प्रत्यर्थी8 को विन)ली अदाल द्वारा पारिर मूल तिडVी का पूरा समर्थी!न करने का भी अति कार है।

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17. व !मान मामले में, यहाँ अपीलार्थी8गणों ने प्रर्थीम अपील क े न्यायालय में एक प्रति -आपलित्त दायर की। इसमें अपीलार्भिर्थीयों का दावा है विक उच्च न्यायालय द्वारा विववाविद विनण!य पारिर कर े समय उनकी प्रति -आपलित्त पर विव)ार नहीं विकया गया र्थीा।इस स् र पर, यह ध्यान विदया जाना )ाविहए विक जबविक प्रति आपलित्तयां, एक विनयविम अपील क े विवपरी, पहले से मौजूद अपील क े भी र दायर की जा ी हैं, हालांविक, सी. पी. सी. क े आदेश 41 विनयम 22 क े अनुसार, Vॉस आपलित्तयों में एक विनयविम अपील क े सभी अंश हो े हैं, और इसलिलए, उसी पर विनण!य देने वाले न्यायालय द्वारा पूण! रूप से विव)ार विकया जाना )ाविहए।

18. आक्षेविप आदेश क े परिरशीलन से प ा )ल ा है विक अपीलक ा!ओं द्वारा अपनी आपलित्तयों में उmाए गए मुद्दों पर उच्च न्यायालय द्वारा विव)ार नहीं विकया गया है।उक्त विनण!य में अपीलार्भिर्थीयों द्वारा दायर प्रति आपलित्तयों का कोई उल्लेf नहीं पाया गया है।जबविक उच्च न्यायालय ने अपील में उmाए गए अन्य सभी मुद्दों और विन)ली अदाल क े दोनों आदेशों का विवस् ृ विवश्लेर्षण विकया है, हालांविक, विवशेर्ष रूप से प्रति आपलित्तयों पर कोई ))ा! नहीं हो ी है, यहां क विक एक उल्लेf भी नहीं विमल ा है।

19. सं ोर्ष हजारी बनाम पुरुर्षोत्तम ति वारी (मृ ) द्वारा विवति क प्रति विनति 1 क े मामले में, इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक अपील न्यायालय का क !व्य है विक वह अपने समक्ष उmाए गए सभी मुद्दों पर विव)ार करे, और ऐसे क !व्य का विनव!हन करने क े लिलए, उसे उmाए गए ऐसे सभी मुद्दों क े लिfलाफ अपने विनष्कर्ष! भी दज! करने )ाविहए। सुविव ा क े लिलए, उक्त विनण!य का प्रासंविगक अनुच्छेद यहाँ विनकाला जा रहा हैः 1 (2001) 2 SC 407 "अपीलीय न्यायालय क े पास विव)ारण न्यायालय क े विनष्कर्षˆ को उलटने या पुविx करने का क्षेत्राति कार है। प्रर्थीम अपील पक्षों का एक मूल्यवान अति कार है और जब क विक कानून द्वारा प्रति बंति न हो।पूरा मामला थ्य और कानून दोनों क े प्रश्नों पर पुनः सुनवाई पर विव)ार करने क े लिलए है।इसलिलए, अपीलीय न्यायालय क े विनण!य को उसक े विव)ार करने को प्रति बिंबविब करना )ाविहए, और अपीलीय न्यायालय क े लिलए पक्षकारों द्वारा प्रस् ु विकए गए सभी मुद्दों क े सार्थी उत्पन्न होने वाले सभी मुद्दों पर कारणों द्वारा समर्भिर्थी विनष्कर्षˆ को अणिभलिललिf करना )ाविहए। विकसी थ्य क े विनष्कर्ष! को उलट े समय अपीलीय न्यायालय को विव)ारण न्यायालय द्वारा विदए गए क ! क े करीब आना )ाविहए और विफर एक अलग विनष्कर्ष! पर पहुं)ने क े लिलए अपने स्वयं क े कारण ब ाने )ाविहए। इससे आगे की अपील पर सुनवाई करने वाली न्यायालय सं ुx हो जाएगी विक प्रर्थीम अपीलीय न्यायालय ने उससे अपेतिक्ष क !व्य का विनव!हन विकया है।"

20. म ुकर और अन्य बनाम संग्राम और अन्य[2] क े मामले में, इस न्यायालय ने सं ोर्ष हजारी (उपरोक्त) क े विनण!य में विन ा!रिर सिसwां ों को दोहरा े हुए कहा विक प्रर्थीम अपीलीय न्यायालय का क !व्य है विक वह उसक े समक्ष उmाए गए सभी मुद्दों पर अपने विनष्कर्षˆ को दज! करे, और ऐसे मामलों में जहां उच्च न्यायालय ऐसा करने में विवफल रह ा है, ो मामले को नए फ ै सले क े लिलए विफर से उसी न्यायालय में भेजा जाना )ाविहए।

21. इसक े अलावा, सिज ेंद्र प्रसाद नायक बनाम अनं क ु मार साह और अन्य[3] क े मामले में, इस न्यायालय ने एक ऐसी ही परिरस्मिस्र्थीति में, सिजसमें अपीलक ा! द्वारा दायर प्रति -आपलित्तयों पर प्रर्थीम अपीलीय न्यायालय द्वारा विव)ार नहीं विकया गया र्थीा, अणिभविन ा!रिर विकया विक मामले को उच्च न्यायालय को वापस भेज विदया गया और विनम्नानुसार विटप्पणी की गईः ".......बेशक, बेदfली क े दो आ ारों में से एक क े अस्मिस् त्व को प्रर्थीम अपीलीय अदाल द्वारा अस्वीकार विकए जाने क े लिfलाफ अपीलक ा!-मकान मालिलक द्वारा एक प्रति -आपलित्त दायर की गई र्थीी। र्थीाविप, दूसरे आ ार पर प्रर्थीम अपील न्यायालय क े विवरुw प्रत्यर्थी8-विकरायेदार की अपील का विनण!य कर े समय, उच्च न्यायालय द्वारा प्रति -आपलित्त का अस्मिस् त्व इस परिरणाम क े सार्थी छ ू ट गया प्र ी हो ा है विक प्रति -आपलित्त पर कोई विनण!य नहीं विदया गया है।इसलिलए, अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी इस कारण से आक्षेविप विनण!य को बरकरार नहीं रfा जा सक ा है। हमारी यह भी राय है विक वास् विवक आवश्यक ा क े आ ार क े अस्मिस् त्व से संबंति प्रश्न, सिजसका विनण!य विकरायेदार क े पक्ष में विकया गया है, को विकराए क े भुग ान में )ूक से संबंति अन्य बिंबदु क े सार्थी-सार्थी उच्च न्यायालय द्वारा नए सिसरे से विन ा!रण की आवश्यक ा है, जो प्रति -आपलित्त का विवर्षय-वस् ु र्थीा………….”

22. उपयु!क्त ))ा!ओं और विनण!यों को जब व !मान मामले क े संदभ! में प्रस् ु विकया जा ा है, ो यह प ा )ल ा है विक उच्च न्यायालय अपीलार्भिर्थीयों द्वारा दायर

विवणिभन्न आपलित्तयों पर विव)ार करने क े लिलए बाध्य र्थीा।)ूंविक अपील में विनण!य पारिर कर े समय इस रह क े दातियत्व का विनव!हन नहीं विकया गया र्थीा, इसलिलए हमारी यह सुविव)ारिर राय है विक यह मामला अपीलक ा!ओं द्वारा अपील क े दौरान प्रति आपलित्तयों में उmाए गए आ ारों पर नए सिसरे से विनण!य लेने क े लिलए उच्च न्यायालय में प्रति प्रेर्षण क े लिलए उपयुक्त है। दनुसार, इसलिलए व !मान अपीलें इस हद क स्वीकार की जा ी हैं।.................................................... (न्यायमूर्ति क ृ ष्ण मुरारी).................................................… (न्यायमूर्ति बेला एम. वित्रवेदी) नई विदल्ली;