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भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या - 2342/2023
(विवशेष अनुमति याति(का (आपराति क) संख्या - 50/2023 से उत्पन्न)
इकबाल @ बाला एवं अन्य अपीलार्थी3
बनाम
उत्तर प्रदेशराज्यअन्य प्रत्यर्थी3 (गण)
विन ण9 य
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला,
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. यह अपील यहां अपीलक ा9ओं (क्रमशः मूल आरोपी संख्या 1, 2 और
6) द्वारा दायर आपराति क प्रकीण[9] रिरट याति(का संख्या 8905/2022 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 13.07.2022 को पारिर एक आदेश से उत्पन्न हुई है जिजसक े ह उच्च न्यायालय ने रिरट याति(का को खारिरज कर विदया और भार ीय दंड संविह ा (आईपीसी) की ारा 376, 323 और 354 (ए) और यौन अपरा ों से बच्चों का संरक्षण अति विनयम, 2012 की ारा 7 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और 8 क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए 21.06.2022 की उपरोक्त अपरा ों क े लिलए मविहला पुलिलस स्टेशन, विमर्ज़ाा9पुर, जिजला सहारनपुर में पंजीक ृ प्रर्थीम सू(ना रिरपोट[9] (एफआईआर) संख्या 122/2022 को रद्द करने से इनकार कर विदया। थ्यात्मक मैविट_क्स
3. 21.06.2022 विदनांविक प्रार्थीविमकी इस प्रकार हैः- "हिंहदी भाषा में लिलखी गई वरिरष्ठ पुलिलस अ ीक्षक, जिजला-सहारनपुर को शिशकाय की प्रति महोदय, मैं अनुरो करना (ाह ा हूं विक मेरा नाम एक्स पत्नी वाई र्थीाना - विमजा9पुर, जिजला-सहारनपुर का विनवासी हूँ। शिशकाय क ा9 3 साल पहले सहारनपुर क े कसवा विमजा9पुर क े हाजी इकबाल उफ 9 बल्ला पुत्र अब्दुल वाविहद आवास क े सामने काम कर ा र्थीा।मैं यह कहना (ाह ी हूं विक इकबाल @बल्ला बहु प्रभावशाली व्यविक्त हैं जिजनका पकड़ काफी प्रभावशाली व्यविक्तयों से है। कु छ विदनों क सब क ु छ सु(ारू रूप से (ल ा रहा। ब इकबाल ने मुझे अपने घर से बाहर जाने से रोक विदया। अपने घर में उन्होंने मेरे रहने क े लिलए एक कमरा विदया है। विफर एक विदन रा में अच्छा अवसर पाकर उक्त इकबाल ने मेरे सार्थी बलात्कार विकया। हालाँविक; यह साव9जविनक शम[9] क े कारण और उक्त इकबाल क े प्रभाव क े कारण, मैं उस समय क ु छ भी नहीं बोल सकी। इसक े बाद इकबाल और उसका भाई महमूद दोनों मौका पाकर हर विदन मेरे सार्थी बलात्कार कर े र्थीे। मैं अपने पति क े सामने व 9मान थ्य का खुलासा करना (ाह ी र्थीी। लेविकन, वहाँ क े लोगों को वहाँ से बाहर नहीं विनकलने विदया जा ा र्थीा। कभी-कभी मेरी बेटी सालिलया और मेरा बेटा अकमल वहाँ विमलने आ े र्थीे। विफर, इकबाल क े बेटे जावेद, अलीशान और अफजल मेरी बेटी पर बुरी नर्ज़ार vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd रख े र्थीे। वे उसे अलग कमरे में ले जाने क े बाद, मेरी बेटी क े सार्थी अश्लील हरक ें कर े र्थीे। यह ब है जब मेरी बेटी की उम्र 14-15 वष[9] र्थीी। यह उस समय है; साहस करने क े बाद, मैं इसका विवरो करना (ाह ा र्थीा।हालाँविक, जावेद और विदलशाद (इकबाल क े बहनोई) ने मुझे बेरहमी से पीटा और मेरे जिसर में फ्र ै क्(र कर विदया।यह उस समय है जब मेरे जिसर क े सामने 12 टांक े लगाए गए र्थीे।मैंने ब पुलिलस स्टेशन क े सामने इसकी जानकारी देने की कोशिशश की र्थीी।हालाँविक, मैं इसकी जानकारी देने में असमर्थी9 र्थीी।यह वहाँ से 4-5 महीने रहने क े बाद वहाँ विदन मौका विमलने क े बाद है, मैं वहाँ से भाग आयी। इसक े बाद अपने बच्चों को लेने क े बाद मैं अपने रिरश् ेदारों क े सार्थी रहने लगी।अब मुझे प ा (ला विक इकबाल क े लिखलाफ क ु छ लोगों ने अपनी आवाज उठाई। इसलिलए; यह मेरे सार्थी हुए अन्याय से न्याय मांगने क े लिलए मैं आपसे न्याय पाने की उम्मीद में आपक े समक्ष उपस्थिस्र्थी हुआ हूं।इसलिलए, मैं आपसे अनुरो कर ा हूं विक आप मेरी रिरपोट[9] दज[9] करें और आवश्यक कानूनी कार9वाई करें।"
4. इस प्रकार उपरोक्त से यह प्र ी हो ा है विक कासवा, विमजा9पुर, सहारनपुर का विनवासी पीविड़ एक्स (प्रति वादी संख्या 4) अपीलक ा9 संख्या 1 अर्थीा9 ् इकबाल उपनाम बाला क े घर में काम कर ी र्थीी और उसक े आवास में एक अलग कमरे में रह ी र्थीी।पीविड़ द्वारा यह आरोप लगाया गया है विक अपीलक ा9 संख्या 1 और 2 क्रमशः उसक े सार्थी विनयविम रूप से बलात्कार कर े र्थीे और जब भी उसकी बेटी (जो लगभग 14 से 15 वष[9] की र्थीी) उससे विमलने क े लिलए अपीलक ा9 संख्या 1 क े आवास पर जा ी र्थीी, जावेद, अलीशान और अफजल (अपीलक ा9 संख्या 1 क े बेटे क्रमशः 3,[4] और 5) उसक े सार्थी दुव्य9वहार कर े र्थीे और उसक े सार्थी अश्लील हरक े vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd कर े र्थीे।यह आगे आरोप लगाया गया है विक एक बार जब पीविड़ ा ने विवरो विकया, ो सह-आरोपी जावेद (आरोपी संख्या 3) और विदलशाद (अपीलक ा9 संख्या 3) ने उसे मारा, जिजसक े परिरणामस्वरूप उसक े जिसर पर फ्र ै क्(र हो गया। अपीलार्थिर्थीयों की दलीले
5. अपीलार्थिर्थीयों की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री जिसद्धार्थी9 दवे ने अपनी लिललिख दलीलों में इस प्रकार कहा हैः- "क) यह सम्मानपूव9क प्रस् ु विकया जा ा है विक कशिर्थी प्रर्थीम सू(ना रिरपोट[9] दुभा9वना पू्ण[9] और स्वाभाविवक रूप से असंभव है क्योंविक उक्त प्रार्थीविमकी को स्पष्ट रूप से पढ़ने पर, भार ीय दंड संविह ा की ारा 376,323,354 (ए) और पॉक्सो अति विनयम, 2012 की ारा 7 और 8 क े ह अपरा स्पष्ट रूप से याति(काक ा9ओं क े लिखलाफ नहीं बन ी है।प्रार्थीविमकी में आरोप अस्पष्ट हैं क्योंविक प्रार्थीविमकी में घटना क े समय, ति शिर्थी, स्र्थीान का कोई उल्लेख नहीं है। अन्यर्थीा उक्त शिशकाय दज[9] करने में 3 वष[9] से अति क की अत्यति क देरी हो ी है, जिजसका कारण प्रार्थीविमकी में अस्पष्ट छोड़ विदया गया है बी) प्रार्थीविमकी में लगाए गए आरोप सभी मनगढ़ं और अनुति( हैं क्योंविक वे उन ाराओं की आवश्यक ा को पूरा नहीं कर े हैं जो याति(काक ा9ओं ने कशिर्थी रूप से की हैं।यह क े वल इस कारण से है विक यह आरोप विक याति(काक ा9 संख्या 1 और 2 ने कई मौकों पर शिशकाय क ा9 क े सार्थी बलात्कार विकया, पूरी रह से अस्पष्ट है क्योंविक मेतिडको लीगल कॉज (एम. एल. सी.) में डॉक्टर को सुनाई गई घटना का विववरण क े वल यह ब ा ा है विक उक्त याति(काक ा9ओं ने यौन हिंहसा का प्रयास विकया र्थीा।इसक े अलावा, याति(काक ा9 संख्या 3 क े लिखलाफ एकमात्र आरोप यह है विक उसने vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd शिशकाय क ा9 को पीटा र्थीा, जिजससे उसक े जिसर पर फ्र ै क्(र हो गया र्थीा जिजसक े परिरणामस्वरूप 12 टांक े लगे र्थीे, जो पूरी रह से विनरा ार है क्योंविक शिशकाय क ा9 का एमएलसी ऐसे विकसी भी आरोप का समर्थी9न नहीं कर ा है।अं में, पॉक्सो अति विनयम की ारा 7 और 8 क े ह शिशकाय क ा9 की बेटी क े लिखलाफ लगाए गए आरोपों क े संबं में, यह प्रस् ु विकया जा ा है विक यह आरोप अशिभयुक्त संख्या 3,[4] और 5 क े लिखलाफ है जैसा विक प्रार्थीविमकी क े ह विन ा9रिर विकया गया है, न विक व 9मान याति(काक ा9ओं क े लिखलाफ है।अन्यर्थीा भी, यह प्रस् ु विकया जा ा है विक इस संबं में शिशकाय क ा9 की बेटी का कोई मेतिडकल रिरकॉड[9] /एमएलसी नहीं है, जिजसक े लिखलाफ पॉक्सो अति विनयम क े ह कशिर्थी अपरा विकए गए हैं। ग) प्रति वादी द्वारा लगाया गया आरोप विक याति(काक ा9ओं क े लिखलाफ पहले से ही कई मामले लंविब हैं, भ्रामक है और इसमें कोई औति(त्य नहीं है क्योंविक उक्त मामलों की व 9मान स्थिस्र्थीति का कोई उल्लेख नहीं है।यह प्रस् ु विकया जा ा है विक वष[9] 2017 में उत्तर प्रदेश राज्य में सरकार बदलने क े बाद, सत्तारूढ़ दल सत्ता में आया और सरकार बदलने क े ुरं बाद, याति(काक ा9ओं और उनक े परिरवार क े सदस्यों को सत्तारूढ़ दल क े कहने पर 30 से अति क आपराति क मामलों में झूठा फ ं साया गया। याति(काक ा9ओं को प्रत्यर्थी3 राज्य द्वारा अपने प्रशासविनक और पुलिलस ंत्र का दुरुपयोग करक े अनावश्यक रूप से परेशान विकया जा रहा है।यह उल्लेख करना उति( है विक राज्य क े अति कारिरयों ने याति(काक ा9ओं क े ीन आवासीय घरों को अवै रूप से ध्वस् कर विदया है और प्रत्यर्थी3 राज्य याति(काक ा9ओं क े लिखलाफ दज[9] आपराति क मामलों पर बहु अति क भरोसा कर रहा है ाविक यह विदखाया जा सक े विक वे आद न अपरा ी हैं और हर बार जब याति(काक ा9 या उनक े परिरवार क े सदस्यों को इस माननीय न्यायालय या माननीय उच्च न्यायालय से सुरक्षा (अवि„म जमान या विगरफ् ारी पर रोक) विमल ी है, ो स्र्थीानीय पुलिलस ुरं उनक े लिखलाफ झूठे मामले दज[9] कर ी है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd घ) यह सम्मानपूव9क प्रस् ु विकया जा ा है विक माननीय उच्च न्यायालय ने यह अशिभविन ा9रिर कर े हुए प्रार्थीविमकी को रद्द करने से इनकार कर े हुए गंभीर त्रुविट की है विक रद्द करने क े लिलए कोई आ ार मौजूद नहीं है और एक संज्ञेय अपरा बनाया गया है।यह प्रस् ु विकया जा ा है विक प्रर्थीम सू(ना रिरपोट[9] में लगाए गए आरोप प्रर्थीमदृष्टया विकसी अपरा का गठन नहीं कर े हैं या े लिखलाफ भार ीय दंड संविह ा की ारा 376,323,354 (ए) और पॉक्सो अति विनयम, 2012 की ारा 7 और 8 क े ह मामला नहीं बना े हैं और इसलिलए, माननीय उच्च न्यायालय को प्रार्थीविमकी को रद्द कर देना (ाविहए र्थीा। यह उल्लेख करना उति( है विक आरोप पत्र दायर विकए जाने क े बाद भी, प्रार्थीविमकी को रद्द करने की याति(का अदाल की शविक्तयों क े ह है [क ृ पया देखें]:आनंद क ु मार मोहत्ता और एक अन्य बनाम राज्य (एन. सी. टी. विदल्ली), गृह और एक अन्य विवभाग (2019) 11 एस. सी. सी. 706 पैरा„ाफ 14 और 16 पर। ई) विक इस माननीय न्यायालय ने यह अशिभविन ा9रिर विकया है विक ऐसे मामले में (व 9मान मामले की रह) अशिभयोजन वारंट करने की कोई आवश्यक ा नहीं है जहां लगाए गए आरोप विवशेष और विवशिशष्ट होने क े बजाय सामान्य और सव9व्यापी हैं [क ृ पया देखें कहकशान कौसर और अन्य बनाम विबहार राज्य और अन्य (2022) 6 पर एस. सी. सी. 599] क े पैरा„ाफ 18 पर। () यह आगे प्रस् ु विकया जा ा है विक विदनांविक 10.05.2022 की कशिर्थी लुक आउट नोविटस व 9मान प्रार्थीविमकी संख्या 122/2022 क े पंजीकरण से बहु पहले जारी विकया गया र्थीा जो 21.06.2022 पर दज[9] विकया गया र्थीा। छ) ऊपर वर्थिण कारणों से, विवशेष अनुमति याति(का की अनुमति दी जा सक ी है और 2022 की प्रार्थीविमकी आर. संख्या 122 विदनांक 21.06.2022 को रद्द आदेशने से इनकार आदेशने वाले माननीय उच्च न्यायालय क े आदेश को अपास् विकया जा ा है।" vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd राज्य की रफ से दलीलेंः
6. दूसरी रफ राज्य की रफ से उपस्थिस्र्थी वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता सुश्री गरिरमा प्रसाद ने अपनी लिललिख अशिभकर्थीन में इस प्रकार कहा हैः- “ए) उपरोक्त एफआईआर /अपरा संख्या 122/2022 में आईपीसी की ारा 376, 323, 354 (क े ए) और पोक्सो अति विनयम, 2012 की ारा 7, 8 क े ह, मविहला र्थीाना, जिजला सहारनपुर में दज[9] विकया गया है जिजसमें क ु ल छह (6) आरोपी हैं, इकबाल उफ 9 बाला, महमूद, जावेद, अलीशान, अफजाल, विदलशाद, लेविकन क े वल ीन आरोपी (याति(काक ा9) उक्त एफआईआर को रद्द करने क े लिलए माननीय न्यायालय क े समक्ष आए हैं। ख) इसक े अलावा, जां( अति कारी ने स्व ंत्र गवाहों का बयान भी दज[9] विकया ाविक यह प ा (ल सक े विक शिशकाय क ा9 े घर जा ी र्थीी या नहीं, स्व ंत्र गवाहों ने इस सच्चाई का खुलासा विकया है विक शिशकाय क ा9 विवषम नौकरिरयों क े लिलए याति(काक ा9ओं क े घर जा ी र्थीी, क ु छ समय बाद वह वहां रहने भी लगी र्थीी।गवाहों ने सुना विक शिशकाय क ा9 और पीविड़ को याति(काक ा9ओं और उसक े परिरवार क े सदस्यों द्वारा प्र ाविड़ विकया गया और पीटा गया। ग) जाँ( पूरी हो (ुकी है और याति(काक ा9ओं क े लिखलाफ आरोप पत्र दायर करने क े लिलए ैयार है, लेविकन इस माननीय न्यायालय क े विदनांविक 02.01.2023 क े स्र्थीगन आदेश क े कारण आरोप पत्र प्रस् ु नहीं विकया जा सका। घ) अन्य अशिभयुक्त व्यविक्तयों क े लिखलाफ आरोप पत्र दायर कर विदया गया है और मुकदमा शुरू कर विदया गया है।विव(ारण क े दौरान, शिशकाय क ा9 और पीविड़ का बयान पीडब्लू -1 और पीडब्लू-2 क े रूप में दज[9] विकया गया, जिजसमें शिशकाय क ा9 विवशेष रूप से कह ा है विक याति(काक ा9 इकबाल उफ 9 बाला ने घर में vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd बलात्कार विकया कर े र्थीे और उसक े बाद, अन्य आरोपी शिशकाय क ा9 क े सार्थी बलात्कार कर े र्थीे और शिशकाय क ा9 की बेटी क े सार्थी छेड़छाड़ कर े र्थीे।(पीडब्लू-1 और पीडब्लू-2 क े बयान आइए संख्या 127360/2023 विदनांविक 07.07.2023 @पृष्ठ संख्या 13 और 101 में संलग्न है)। ई) जां( क े दौरान, ारा 161 Cr.P.C क े ह शिशकाय क ा9/पीविड़ का बयान दज[9] विकया गया र्थीा, जिजसमें पीविड़ ने खुलासा विकया है विक याति(काक ा9 संख्या 1 मोहम्मद इकबाल क े विगरोह क े सदस्यों द्वारा उपरोक्त प्रार्थीविमकी संख्या 122/2022 में समझौ ा करने क े लिलए उस पर दबाव डाला गया र्थीा।इसक े अलावा, यह भी ब ाया गया विक खुश3द पुत्र असगर, फारूक पुत्र मु ाक, मेहराज पुत्र फारूक और सुलेमान कबाड़ी पुत्र खुरफान ने पीविड़ को मकी दी है और सुलेमान कबाड़ी ने विपस् ौल विदखाई है और (े ावनी दी है विक अगर उसने समझौ ा नहीं विकया ो उसे परिरणाम भुग ने होंगे। () यह प्रस् ु विकया जा ा है विक याति(काक ा9 संख्या 1 पूव[9] में एमएलसी र्थीा और शविक्तशाली व्यविक्त हैं और वह पूव[9] की सरकार में काफी पकड़ है और याति(काक ा9 द्वारा विदए गए डर और मकी क े कारण, शिशकाय क ा9 ने याति(काक ा9 संख्या 1 और उसक े परिरवार क े सदस्यों क े लिखलाफ अपनी आवाज नहीं उठाई। उपरोक्त थ्यात्मक और कानूनी प्रस् ुति यों को ध्यान में रख े हुए, यह अत्यं सम्मानपूव9क प्रस् ु विकया जा ा है विक याति(काक ा9ओं की व 9मान विवशेष अनुमति याति(का अनुकरणीय लाग क े सार्थी खारिरज की जा सक ी है और आपराति क प्रकीण[9] रिरट याति(का संख्या - 8905/2022 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विकए गए आक्षेविप आदेश को बरकरार रखा जा ा है।" विवश्लेषण vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
7. पक्षों की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता को सुनने क े बाद और अशिभलेख पर उपस्थिस्र्थी दस् ावेजों का अवलोकन करने क े पश्चा, एकमात्र सवाल जो हमारे विव(ार क े लिलए उत्पन्न् हो ा है वह यह है विक क्या प्रार्थीविमकी को रद्द कर देना (ाविहए?
8. यहां ध्यान देना प्रासंविगक है विक पीविड़ ने कशिर्थी अपरा करने की ारीख और समय क े संबं में कोई जानकारी प्रस् ु नहीं की है।सार्थी ही हम इस थ्य पर भी ध्यान दे े हैं विक जां( पूरी हो (ुकी है और आरोप पत्र दालिखल करने क े लिलए ैयार है।यद्यविप प्रार्थीविमकी में लगाए गए आरोप विवशेष रूप से कशिर्थी अपरा ों की विकसी विवशिशष्ट ति शिर्थी, समय आविद की अनुपस्थिस्र्थीति में में विकसी भी विवश्वास को प्रेरिर नहीं कर े हैं, विफर भी हमारा विव(ार है विक अपीलक ा9ओं को दंड प्रविक्रया संविह ा (सी. आर. पी. सी.) की ारा 227 क े ह विव(ारण न्यायालय क े समक्ष आरोपमुक्त करने क े आवेदन को प्रार्थीविमक ा देनी (ाविहए।हम ऐसा इसलिलए कह े हैं क्योंविक राज्य क े अनुसार भी जां( समाप्त हो गई है और सक्षम न्यायालय क े समक्ष आरोप पत्र दायर करने क े लिलए ैयार है।ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यों में, विव(ारण न्यायालय को उन सामवि„यों को देखने की अनुमति दी जानी (ाविहए जो जां( अति कारी ने आरोप पत्र क े विहस्से क े रूप में एकत्र की होंगी।यविद ऐसा कोई आरोपमुक्त करने का आवेदन दायर विकया जा ा है, ो विव(ारण न्यायालय साम„ी की जां( करेगा और यह य करेगा विक आरोपमुक्त करने क े लिलए कोई मामला बन ा है या नहीं।
9. इस स् र पर, हम प्रार्थीविमकी में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क े संबं में कोई अंति म राय व्यक्त नहीं कर े हैं। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
10. इस स् र पर, हम क ु छ महत्वपूण[9] अवलोकन करना (ाहेंगे।जब भी कोई अशिभयुक्त न्यायालय क े समक्ष दंड प्रविक्रया संविह ा (सी. आर. पी. सी.) की ारा 482 क े ह अं र्निनविह शविक्तयों या संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह असा ारण अति कार क्षेत्र का उपयोग कर े हुए प्रार्थीविमकी प्राप्त करने क े लिलए आ ा है या आपराति क काय9वाही को अविनवाय[9] रूप से इस आ ार पर रद्द कर विदया जा ा है विक ऐसी काय9वाही स्पष्ट रूप से ुच्छ या परेशान करने वाली हो ी है या प्रति शो लेने क े गुप्त उद्देश्य से शुरू की जा ी है, ो ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यों में न्यायालय का क 9व्य है विक वह प्रार्थीविमकी को साव ानी से और र्थीोड़ी अति क बारीकी से देखे। हम ऐसा इसलिलए कह े हैं क्योंविक एक बार जब शिशकाय क ा9 व्यविक्तग प्रति शो आविद क े लिलए आरोपी क े लिखलाफ आगे बढ़ने का फ ै सला कर ा है, ो वह यह सुविनतिश्च करेगा विक सभी आवश्यक अशिभव(नों क े सार्थी प्रार्थीविमकी /शिशकाय का बहु अच्छी रह से मसौदा ैयार विकया गया है।शिशकाय क ा9 यह सुविनतिश्च करेगा विक एफ. आई. आर./शिशकाय में विकए गए कर्थीन ऐसे हों विक वे कशिर्थी अपरा का गठन करने क े लिलए आवश्यक साम„ी का खुलासा करें।इसलिलए, न्यायालय क े लिलए क े वल यह सुविनतिश्च करने क े उद्देश्य से विक कशिर्थी अपरा का गठन करने क े लिलए आवश्यक साम„ी का खुलासा विकया गया है या नहीं, क े वल एफ. आई. आर./शिशकाय में विकए गए कर्थीनों पर गौर करना पया9प्त नहीं होगा। ुच्छ या परेशान करने वाली काय9वाविहयों में, न्यायालय का क 9व्य है विक वह अशिभकर्थीनों क े अलावा मामले क े रिरकॉड[9] से उभरने वाली कई अन्य उपस्थिस्र्थी परिरस्थिस्र्थीति यों पर गौर करे और यविद आवश्यक हो, ो उति( साव ानी क े सार्थी पंविक्तयों क े बी( vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd पढ़ने का प्रयास करे। सी. आर. पी. सी. की ारा 482 या संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह अपने अति कार क्षेत्र का प्रयोग कर े समय न्यायालय को स्वयं को क े वल मामले क े (रण क ही सीविम रखने की आवश्यक ा नहीं है, बस्थि–क उसे मामले की शुरुआ /पंजीकरण क े सार्थी- सार्थी जां( क े दौरान एकत्र की गई साम„ी की सम„ परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रखने (ाविहए।व 9मान मामलें को उदाहरण क े ौर पर ले सक े है।इस अवति में कई प्रार्थीविमविकयां दज[9] की गई हैं।यह ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यों की पृष्ठभूविम में है विक कई प्रार्थीविमविकयों का पंजीकरण महत्वपूण[9] है, जिजससे विनजी या व्यविक्तग द्वेष से बदला लेने का मुद्दा आकर्निष हो ा है जैसा विक आरोप लगाया गया है।
11. उपरोक्त दृविष्टकोण में, हम अपीलार्थिर्थीयों को विव(ारण न्यायालय क े समक्ष दंड प्रविक्रया संविह ा की ारा 227 क े ह आरोपमुक्त करने क े आवेदन को प्रार्थीविमक ा देने की स्व ंत्र ा क े सार्थी इस अपील का विनस् ारण कर े हैं। ………………………... न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ………………………….. न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला नई विदल्ली; 08 अगस्, 2023. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd