Full Text
भारतीय सवȾÍच Ûयायालय
आपराͬधक अपीलȣय अͬधकाǐरता
आपराͬधक अपील संÉया 465/2017
कमल ... अपीलकता[(गण)
बनाम
राÏय (Ǒदãलȣ रा.रा.¢े.) ... Ĥ×यथȸ (गण)
सह
आपराͬधक अपील संÉया /2023
[ͪव.अनु.या. (आप.) संÉया 6213/2021 से उ×पÛन]
Ǔनण[य
बी.आर. गवई, Ûया.
JUDGMENT
1. 2021 कȧ ͪव.अनु.या.(आप.) संÉया 6213 से उ×पÛन अपील मɅ अनुमǓत Ĥदान कȧ जाती है।
2. अपीलɅ 2013 कȧ आपराͬधक अपील संÉया 1242, 936 और 1136 मɅ नई Ǒदãलȣ िèथत Ǒदãलȣ उÍच Ûयायालय ɮवारा पाǐरत 5 अगèत 2014 क े Ǔनण[य और आदेश को चुनौती देती हɇ, िजससे अǓतǐरÈत सğ Ûयायाधीश-II (उƣर- पिæचम), रोǑहणी कोट[, Ǒदãलȣ (इसक े बाद 'ͪवचारण Ûयायालय' क े Ǿप मɅ संदͧभ[त) ɮवारा पाǐरत 17 मई 2013 क े Ǔनण[य और आदेश कȧ पुिçट होती है, िजसक े तहत ͪवचारण Ûयायालय ने तीन मूल अͧभयुÈतɉ को भारतीय दंड संǑहता, 1860 (इसक े बाद 'भा.दं.सं.' क े Ǿप मɅ संदͧभ[त) कȧ धारा 302 सहपǑठत धारा 34 क े तहत दंडनीय अपराध क े ͧलए दोषी ठहराया और उÛहɅ आजीवन कारावास कȧ सजा सुनाई।
3. संͯ¢Üत मɅ, अͧभयोजन प¢ कȧ कहानी Ǔनàनानुसार है:- 3.[1] 10 ͧसतंबर 2009 को शाम लगभग 04.15 बजे, ͧशकायतकता[-सूरत ͧसंह, मृतक होͧशयार ͧसंह का भाई, मृतक क े घर आया और उसे चारपाई पर मृत पाया। इसी बीच उसका बड़ा भाई जय ͧसंह (अͧभ.सा.-20) भी मौक े पर पहुंच गया। मृतक को अèपताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोͪषत कर Ǒदया गया। 3.[2] मृतक क े पुğ Ĥेम ͧसंह पर संदेह åयÈत करते हुए Ĥथम सूचना ǐरपोट[ (सं¢ेप मɅ, 'Ĥाथͧमकȧ') दज[ कȧ गई, Èयɉͩक उसका मृतक क े साथ संपͪƣ ͪववाद था। यह अͧभयोजन प¢ का मामला है ͩक पहले भी अͧभयुÈत ने मृतक को पीटा था और उसे जान से मारने कȧ धमकȧ भी दȣ थी। 3.[3] यह अͧभयोजन प¢ का मामला है ͩक Ĥेम ͧसंह घटना èथल से भाग गया और उसे 12 ͧसतàबर, 2009 को पकड़ ͧलया गया। पूछताछ क े दौरान, उसने अपने सहयोͬगयɉ कमल ͩकशोर और मनोज, वत[मान अपीलकता[, क े नामɉ का खुलासा ͩकया। इसक े बाद, अपीलकता[ओं को भी पकड़ा गया। अͧभयुÈत कमल ͩकशोर कȧ Ǔनशानदेहȣ पर एक जंग लगी लोहे कȧ रॉड बरामद कȧ गई। अͧभयुÈत मनोज कȧ Ǔनशानदेहȣ पर एक èवेटर बरामद ͩकया गया, िजसका इèतेमाल मृतक का गला घɉटने क े ͧलए ͩकया गया था। 3.[4] जांच पूरȣ होने पर ÛयाǓयक दंडाͬधकारȣ, Ĥथम Įेणी क े Ûयायालय मɅ तीनɉ अͧभयुÈतɉ क े ͨखलाफ आरोप-पğ दायर ͩकया गया। चूंͩक मामला ͪवशेष Ǿप से सğ Ûयायाधीश ɮवारा सुनवाई योÊय था, इसͧलए मामले को सğ Ûयायाधीश को सɋप Ǒदया गया था। ͪवचारण Ûयायालय ने Ǒदनांक 17 मई, 2013 क े Ǔनण[य और आदेश क े तहत सभी तीन अͧभयुÈतɉ को भारतीय दंड संǑहता कȧ धारा 302 और धारा 34 क े तहत दोषी ठहराया और उÛहɅ आजीवन सĮम कारावास कȧ सजा सुनाई और Ĥ×येक पर 50,000/- ǽपये का जुमा[ना लगाया। 3.[5] तीनɉ अͧभयुÈतɉ ने उÍच Ûयायालय क े सम¢ अपील दायर कȧ। 5 अगèत 2014 क े आ¢ेͪपत Ǔनण[य और आदेश ɮवारा, उÍच Ûयायालय ने उनकȧ सभी अपीलɉ को खाǐरज कर Ǒदया। इसͧलए, वत[मान अपील अिèत×व मɅ आई।
4. हमने अपीलकता[ओं कȧ ओर से पेश हुए ͪवɮवान अͬधवÈता Įी आर.क े. कपूर और सुĮी क े. शारदा देवी और Ĥ×यथȸ कȧ ओर से पेश वǐरçठ अͬधवÈता सुĮी सोǓनया माथुर और Įी ए.क े. पांडा को सुना है।
5. Įी कपूर ने Ĥèतुत ͩकया ͩक वत[मान मामला पǐरिèथǓतजÛय साêय का मामला है। यह Ĥèतुत ͩकया जाता है ͩक जब तक अͧभयोजन पǐरिèथǓतयɉ का एक अटूट संबंध èथाͪपत नहȣं करता है, तब तक पǐरिèथǓतजÛय साêय क े आधार पर दोषͧसɮͬध अनु£ेय नहȣं होती है।
6. Įी कपूर ने Ĥèतुत ͩकया ͩक अͧभयोजन प¢ मुÉय Ǿप से जय ͧसंह (अͧभ.सा. -20) और नरेश क ु मार (अͧभ.सा. -21) कȧ गवाहȣ पर Ǔनभ[र करता है।
7. सुĮी माथुर और Įी पांडा ने इसक े ͪवपरȣत, Ĥèतुत ͩकया ͩक उÍच Ûयायालय और ͪवचारण Ûयायालय ने साêयɉ कȧ उͬचत ͪववेचना पर, समवतȸ Ǿप से अपीलकता[ओं को दोषी ठहराया है। यह Ĥèतुत ͩकया जाता है ͩक वत[मान अपीलɉ मɅ ͩकसी भी हèत¢ेप कȧ आवæयकता नहȣं है।
8. जहां तक नरेश क ु मार (अͧभ.सा.-21) का सवाल है, तो वह बताता है ͩक घटना कȧ तारȣख को दोपहर करȣब 03.15 बजे उसने देखा ͩक अͧभयुÈत Ĥेम ͧसंह मृतक होͧशयार ͧसंह क े कमरे क े सामने अपनी गाड़ी टोयोटा Èवाͧलस मɅ मौजूद था, और अपने वाहन क े एÈसीलेटर को लगातार दबा रहा था और गाड़ी कȧ आवाज ऊ ं ची कर रहा था। इसका कारण पूछे जाने पर, अͧभयुÈत Ĥेम ͧसंह ने जवाब Ǒदया ͩक गाड़ी èटाट[ नहȣं हो रहȣ थी। अͧभ.सा.-21 ने आगे कहा है ͩक इस बीच, उÛहɉने मृतक होͧशयार ͧसंह क े कमरे से दो लड़कɉ को बाहर आते देखा। जब अͧभ.सा.-21 ने अͧभयुÈत Ĥेम ͧसंह से उन लड़कɉ क े बारे मɅ पूछा तो उसने जवाब Ǒदया ͩक वे ͩकरायेदार हɇ। अͧभ.सा.-21 ने कहा है ͩक इसक े बाद वह गोपाल नगर िèथत अपनी दुकान कȧ ओर गया।
9. इसक े अलावा, मुÉय परȣ¢ण मɅ, अͧभ.सा.-21 ने कहा है ͩक 16 ͧसतंबर 2009 को उसे मृतक होͧशयार ͧसंह क े घर पर पुͧलस ɮवारा बुलाया गया था और वह वहां गया और देखा ͩक मनोज और कमल ͩकशोर नामक दो åयिÈत पुͧलस कȧ Ǒहरासत मɅ थे। अͧभ.सा.-21 ने आगे कहा है ͩक पुͧलस ने उसे बताया था ͩक उÛहɉने होͧशयार ͧसंह कȧ ह×या कȧ थी। इस सा¢ी को अपने बयान से मुकर जाने कȧ घोषणा कȧ गई है और अǓतǐरÈत लोक अͧभयोजक (अǓत.लो.अͧभ.) ɮवारा िजरह मɅ उसने इन दोनɉ åयिÈतयɉ कȧ पहचान उन åयिÈतयɉ क े Ǿप मɅ कȧ है, िजÛहɅ उसने होͧशयार ͧसंह क े घर से बाहर Ǔनकलते हुए देखा था। तथाͪप, अǓत.लो.अͧभ. ɮवारा िजरह मɅ आगे उसने पुनः èवीकार ͩकया है ͩक उसने अͧभयुÈत åयिÈतयɉ को पहलȣ बार 12 ͧसतàबर, 2009 को पुͧलस थाने मɅ देखा था। उसने आगे èवीकार ͩकया ͩक पुͧलस अͬधकाǐरयɉ ने उसे बताया ͩक वहां कमल ͩकशोर नाम का एक åयिÈत था और उसे अͧभयुÈत मनोज क े बारे मɅ भी बताया। अंǓतम बार देखे गए ͧसɮधांत हेतु एक और सा¢ी जय ͧसंह (अͧभ.सा. -20) है, जो मृतक होͧशयार ͧसंह का छोटा भाई है। उÛहɉने नरेश क ु मार (अͧभ.सा.-21) कȧ तज[ पर गवाहȣ दȣ है।
10. िजरह मɅ जय ͧसंह (अͧभ.सा.-20) कȧ उपिèथǓत माğ को हȣ Úवèत कर Ǒदया गया है। हालांͩक, मुÉय परȣ¢ण मɅ, उसने कहा ͩक वह और सूरत ͧसंह मृतक को अèपताल ले गए थे, उसने कहा ͩक सूरत ͧसंह क े कपड़े खून से सने हुए थे लेͩकन उसक े कपड़े गंदे नहȣं थे Èयɉͩक यह सूरत ͧसंह था जो वाèतव मɅ होͧशयार ͧसंह को उठा रहा था और वह क े वल अपने हाथɉ से उसकȧ मदद कर रहा था।
11. हालांͩक जय ͧसंह (अͧभ.सा.-20) का कहना है ͩक उसने पुͧलस को अͧभयुÈत क े ͪववरण क े बारे मɅ सूͬचत ͩकया था, यानी, उसने पुͧलस को बताया ͩक एक लड़का गोरा था और दूसरा गेहुंआ रंग का था, लेͩकन इसमɅ काफȧ सुधार हुआ है Èयɉͩक दंड ĤͩĐया संǑहता, 1973 कȧ धारा 161 क े तहत दज[ उसक े बयान मɅ ऐसा ͪववरण नहȣं है। उसने आगे कहा ͩक उसका घर उस कमरे से 40 फȧट दूर है जहां घटना हुई थी। उसने आगे èवीकार ͩकया है ͩक उसक े घर और होͧशयार ͧसंह क े घर क े बीच एक घर िèथत है। इस Ĥकार, इस अͧभयुÈत कȧ उपिèथǓत माğ हȣ संǑदÊध Ĥतीत होती है।
12. यह Úयान रखना उͬचत है ͩक उÍच Ûयायालय क े ͪवɮवान Ûयायाधीशɉ ने èवयं उãलेख ͩकया है ͩक नरेश क ु मार (अͧभ.सा.-21) ने अपनी िजरह मɅ कहा है ͩक उसे 12 ͧसतंबर 2009 को कमल ͩकशोर और मनोज को पुͧलस थाने मɅ Ǒदखाया गया था जहां कͪवता और जय ͧसंह भी मौजूद थे और इसͧलए, उनक े ɮवारा ͧशनाÉत परेड (टȣआईपी) क े ͧलए इनकार करना उͬचत था। उÍच Ûयायालय ने åयÈत ͩकया है ͩक साͯ¢यɉ ने अपीलकता[ओं को कटघरे मɅ पहचान ͧलया है, यह मानने क े ͧलए पया[Üत है ͩक साͯ¢यɉ ɮवारा उनकȧ ͪवͬधवत पहचान कȧ गई है और अͧभयुÈतɉ का अपराध साǒबत होता है।
13. हम इस Ǔनçकष[ क े औͬच×य कȧ ͪववेचना नहȣं कर पाते हɇ। यǑद अͧभयुÈतɉ को पहले से हȣ पुͧलस थाने मɅ साͯ¢यɉ को Ǒदखा Ǒदया गया है, तो Ûयायालय क े सम¢ टȣआईपी कȧ पͪवğता संǑदÊध है।
14. अÛय पǐरिèथǓत िजन पर अͧभयोजन प¢ Ǔनभ[र करता है, वे कॉल ͫडटेल अͧभलेख (सीडीआर) है। Ǔनचलȣ अदालतɉ ने इस पǐरिèथǓत पर भरोसा ͩकया है ͩक जब घटना हुई थी, तो अͧभयुÈत मनोज और कमल ͩकशोर ɮवारा इèतेमाल ͩकए गए मोबाइल क े सीडीआर कȧ पहचान से पता चला ͩक उनकȧ लोक े शन घटना क े èथान पर थी।
15. सबसे पहले, यह Úयान Ǒदया जाना चाǑहए ͩक से मोबाइल नंबरɉ मɅ से एक 9278453468 िजसे अͧभयुÈत मनोज ɮवारा इèतेमाल ͩकया जाना बताया गया है, मनोज क े नाम पर नहȣं है, बिãक कानपुर क े सुभाष नगर Ǔनवासी Įी कृ çण क ु मार क े बेटे अशोक क ु मार क े नाम पर है। यह Ǒदखाने क े ͧलए अͧभलेख पर कोई साêय नहȣं रखा गया है ͩक उÈत ͧसम अͧभयुÈत मनोज क े कÞजे मɅ क ै से आया। इसक े अलावा, यǑद घटना क े समय दोनɉ एक हȣ èथान पर थे और अͧभयोजन प¢ क े अनुसार मृतक होͧशयार ͧसंह क े घर क े अंदर थे, और वे टेलȣफोन पर एक-दूसरे से बात कर रहे थे, तो यह अपने आप मɅ अͧभयोजन प¢ क े बयान पर संदेह पैदा करता है।
16. Ǔनͪव[वाद Ǿप से, वत[मान मामला एक ऐसा मामला है जो पǐरिèथǓतजÛय साêय पर Ǒटका हुआ है। पǐरिèथǓतजÛय साêय क े आधार पर दोषͧसɮͬध क े संबंध मɅ कानून शरद ǒबरधीचंद सारदा बनाम महाराçĚ राÏय क े मामले मɅ बहुत अÍछȤ तरह से èपçट ͩकया गया है।
17. शरद ǒबरधीचंद सारदा (पूवȾÈत) क े मामले मɅ हम इस Ûयायालय कȧ Ǔनàनͧलͨखत ǑटÜपͨणयɉ का लाभदायक Ǿप से उãलेख करते हɇ:- "151. यह अÍछȤ तरह से èथाͪपत है ͩक अͧभयोजन प¢ को अपने मामले क े ͧलए èवयं पर Ǔनभ[र रहना होगा और यह बचाव प¢ कȧ कमजोरȣ से कोई बल हाͧसल नहȣं कर सकता है। यह कठोर कानून है और ͩकसी भी Ǔनण[य ने इसक े ͪवपरȣत Ǻिçटकोण नहȣं ͧलया है। क ु छ मामलɉ मɅ क े वल यहȣ कहा गया है: जहां एक Įृंखला मɅ ͪवͧभÛन कͫड़यां अपने आप मɅ पूण[ हɇ, तो एक झूठा अͧभवचन या झूठे बचाव कȧ क े वल Ûयायालय को आæवासन देने क े ͧलए सहायता लȣ जा सकती है। दूसरे शÞदɉ मɅ, अǓतǐरÈत कͫड़यɉ का उपयोग करने से पहले यह साǒबत ͩकया जाना चाǑहए ͩक Įृंखला मɅ सभी कͫड़यां पूण[ हɇ और ͩकसी भी दुब[लता से Ēèत नहȣं हɇ। यह कानून नहȣं है ͩक जहां अͧभयोजन प¢ क े मामले मɅ कोई खामी या कमी है, उसे झूठे बचाव या अͧभवचन, िजसे Ûयायालय ɮवारा èवीकार नहȣं ͩकया जाता है, क े ɮवारा ठȤक या उसकȧ आपूǓत[ कȧ जा सकती है।.......
153. इस Ǔनण[य क े बारȣकȧ से ͪवæलेषण से पता चलेगा ͩक ͩकसी अͧभयुÈत क े ͨखलाफ मामले को पूरȣ तरह से èथाͪपत करने से पहले Ǔनàनͧलͨखत शतɟ को पूरा ͩकया जाना चाǑहए:- (1) िजन पǐरिèथǓतयɉ से अपराध का Ǔनçकष[ Ǔनकाला जाना है, उÛहɅ पूरȣ तरह से èथाͪपत ͩकया जाना चाǑहए। यहां यह Úयान Ǒदया जा सकता है ͩक इस Ûयायालय ने संक े त Ǒदया ͩक संबंͬधत पǐरिèथǓतयɉ को "èथाͪपत ͩकया जाना चाǑहए या होना चाǑहए" और यह नहȣं ͩक उÛहɅ "èथाͪपत नहȣं ͩकया जा सकता है"। "साǒबत ͩकया जा सकता है" और "साǒबत ͩकया जाना चाǑहए या साǒबत होना चाǑहए" क े बीच न क े वल एक åयाकरͨणक अंतर है, बिãक एक कानूनी अंतर भी है, जैसा ͩक इस Ûयायालय ने ͧशवाजी सहबराव बोबड़े बनाम महाराçĚ राÏय [(1973) 2 एससीसी 793: 1973 एससीसी (सीआरआई) 1033: 1973 सीआरएल एलजे 1783] मɅ कहा था, जहां ǑटÜपͨणयां कȧ गई थीं:- [एससीसी पैरा 19, पृçठ 807: एससीसी (सीआरआई) पी. 1047] "Ǔनिæचत Ǿप से, यह एक Ĥाथͧमक ͧसɮधांत है ͩक अͧभयुÈत को Ûयायालय ɮवारा दोष ͧसɮध ठहराए जाने से पूव[ वह दोषी होना चाǑहए और न ͩक यह कȧ वह क े वल दोषी हो सकता है और 'हो सकता है' और 'होना चाǑहए' क े बीच अ×यͬधक बौɮͬधक अंतर है और यह अèपçट अनुमानɉ को Ǔनिæचत Ǔनçकषɟ से ͪवभािजत करता है। (2) इस Ĥकार èथाͪपत तØय क े वल अͧभयुÈत क े अपराध कȧ पǐरकãपना क े अनुǾप होने चाǑहए, अथा[त्, उÛहɅ ͩकसी अÛय पǐरकãपना पर समझाने योÊय नहȣं होना चाǑहए, ͧसवाय इसक े ͩक अͧभयुÈत दोषी है, (3) पǐरिèथǓतयाँ Ǔनणा[यक Ĥकृ Ǔत और Ĥवृͪƣ कȧ होनी चाǑहए, (4) उÛहɅ साǒबत होने वालȣ पǐरकãपना को छोड़कर हर संभव पǐरकãपना को अपविज[त करना चाǑहए, और (5) साêयɉ कȧ एक ऐसी Įृंखला होनी चाǑहए जो इतनी पǐरपूण[ हो ͩक अͧभयुÈत कȧ बेगुनाहȣ क े अनुǾप Ǔनçकष[ क े ͧलए कोई उͬचत आधार न छोड़ा जा सक े और यह Ǒदखाया जाना चाǑहए ͩक सभी मानवीय संभावनाओं मɅ यह काय[ अͧभयुÈत ɮवारा ͩकया गया होगा।
154. ये पांच सुनहरे ͧसɮधांत, यǑद हम ऐसा कहɅ तो, पǐरिèथǓतजÛय साêय क े आधार पर ͩकसी मामले क े साêय का पंचशील बनाते हɇ।
18. इस Ĥकार यह देखा जा सकता है ͩक इस Ûयायालय ने माना है ͩक िजन पǐरिèथǓतयɉ से अपराध का Ǔनçकष[ Ǔनकाला जाना है, उÛहɅ पूरȣ तरह से èथाͪपत ͩकया जाना चाǑहए। यह माना गया है ͩक संबंͬधत पǐरिèथǓतयɉ को "èथाͪपत ͩकया जाना चाǑहए या होना चाǑहए" और न ͩक "वे èथाͪपत हो सकती हɇ"। यह माना गया है ͩक "साǒबत ͩकया जा सकता है" और "साǒबत ͩकया जाना चाǑहए या साǒबत होना चाǑहए" क े बीच न क े वल एक åयाकरͨणक अंतर है, बिãक एक कानूनी अंतर भी है। यह माना गया है ͩक इस तरह से èथाͪपत तØय क े वल अͧभयुÈत क े अपराध कȧ पǐरकãपना क े अनुǾप होने चाǑहए, अथा[त्, उÛहɅ ͩकसी अÛय पǐरकãपना पर समझाने योÊय नहȣं होना चाǑहए, ͧसवाय इसक े ͩक अͧभयुÈत दोषी है। यह माना गया है ͩक पǐरिèथǓतयां Ǔनणा[यक Ĥकृ Ǔत और Ĥवृͪƣ कȧ होनी चाǑहए और उÛहɅ उस पǐरकãपना िजसे साǒबत करने कȧ मांग कȧ गई है को छोड़कर हर संभव पǐरकãपना को अपविज[त करना चाǑहए, और यह ͩक साêयɉ कȧ एक Įृंखला इतनी पǐरपूण[ होनी चाǑहए ͩक अͧभयुÈत कȧ बेगुनाहȣ क े अनुǾप Ǔनçकष[ क े ͧलए कोई उͬचत आधार न छोड़ा जाए और यह Ǒदखाया जाना चाǑहए ͩक सभी मानवीय संभावना मɅ यह कृ ×य अͧभयुÈत ɮवारा ͩकया गया होगा।
19. यह कानून का èथाͪपत ͧसɮधांत है ͩक संदेह ͩकतना भी मजबूत Èयɉ न हो, यह उͬचत संदेह से परे साêय नहȣं हो सकता है। इन माग[दश[क ͧसɮधांतɉ क े आलोक मɅ, हमɅ वत[मान मामले पर ͪवचार करना होगा।
20. हम पाते हɇ ͩक अͧभयोजन प¢ मामले को साǒबत करने मɅ पूरȣ तरह से ͪवफल रहा है Èयɉͩक उÛहɅ उͬचत संदेह से परे आपͪƣजनक पǐरिèथǓतयɉ को साǒबत करने कȧ आवæयकता है। ͪपछले देखे गए ͧसɮधांत क े संबंध मɅ साêय पूरȣ तरह से अͪवæवसनीय है। सीडीआर क े संबंध मɅ साêय भी ऐसा है जो ͩकसी भी ͪवæवास को Ĥेǐरत नहȣं करता है। इस Ĥकार, हम पाते हɇ ͩक अपीलɉ को अनुमǓत दȣ जानी चाǑहए।
21. पǐरणाम मɅ, अपीलɉ को अनुमǓत दȣ जाती है। 2013 कȧ आपराͬधक अपील संÉया 1242, 936 और 1136 मɅ नई Ǒदãलȣ िèथत Ǒदãलȣ उÍच Ûयायालय ɮवारा पाǐरत 5 अगèत 2014 क े Ǔनण[य और आदेश और ͪवचारण Ûयायालय ɮवारा पाǐरत 17 मई 2013 क े Ǔनण[य और आदेश को रɮद ͩकया जाता है और दरͩकनार ͩकया जाता है।
22. अपीलकता[ओं को उनक े ͨखलाफ लगाए गए सभी आरोपɉ से बरȣ ͩकया जाता है। ͩकसी अÛय मामले मɅ उनकȧ आवæयकता नहȣं होने पर उÛहɅ ǐरहा करने का Ǔनदȶश Ǒदया जाता है। अपीलकता[ओं क े जमानतपğɉ को उÛमोͬचत ͩकया जाता है।
23. लंǒबत आवेदन(नɉ), यǑद कोई हɉ, का Ǔनपटान ͩकया जाता है।...................................... Ûया. [बी.आर. गवई]............................................. Ûया. [Ĥशांत क ु मार ͧमĮा] नई Ǒदãलȣ; 07 अगèत, 2023। (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अèवीकरण: देशी भाषा मɅ Ǔनण[य का अनुवाद मुकɮɮमेबाज़ क े सीͧमत Ĥयोग हेतु ͩकया गया है ताͩक वो अपनी भाषा मɅ इसे समझ सक Ʌ एवं यह ͩकसी अÛय Ĥयोजन हेतु Ĥयोग नहȣं ͩकया जाएगा| समèत काया[लयी एवं åयावहाǐरक Ĥयोजनɉ हेतु Ǔनण[य का अंĒेज़ी èवǾप हȣ अͧभĤमाͨणत माना जाएगा और काया[Ûवयन तथा लागू ͩकए जाने हेतु उसे हȣ वरȣयता दȣ जाएगी।