Mohammad Wajid v. Uttar Pradesh State

Supreme Court of India · 08 Aug 2023
B. R. Gavai; D. Y. Pardiwala
Criminal Appeal No 2340 of 2023
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court quashed an FIR alleging robbery and intimidation, holding that the allegations were vague, improbable, and did not prima facie disclose offences under Sections 395, 504, 506, and 323 IPC.

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Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या 2340/2023
(विवशेष अनुमति याति'का (आपराति क) संख्या 10656/2022 से उद्भू )
मोहम्मद वाजि4द एवं अन्य … अपीलक ा7(गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ... प्रति वादी (गण)
विनण7य
न्यायमूर्ति 4े.बी. पारदीवाला
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गई।

2. यह अपील भार ीय दण्ड संविह ा की ारा 395, 504, 506 और 323 क े ह द47 अपरा पं4ीकरण सं. 224/2022 विदनांविक 19.09.2022 थाना- विम4ा7पुर, जि4ला सहारनपुर, उ.प्र. की प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] (एफआईआर) क े मूल आरोपी सं. 1 और 2 की ओर से की गई है, और विNविमनल विमससेलेविनयस रिरर्ट याति'का सं. 15174/2022 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 17.10.2022 विदनांविक आदेश क े खिTलाफ की गई है जि4सक े द्वारा उच्च न्यायालय ने व 7मान अपीलक ा7ओं द्वारा दायर रिरर्ट याति'का को Tारिर[4] कर विदया अस्वीकरण: “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण7य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग क े खिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े खिलए प्रयोग नहीं विकया 4ा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े खिलए, विनण7य का अंग्रे4ी संस्करण प्रामाणिणक माना 4ाएगा था विनष्पादन और विNयान्वयन क े उद्देश्यों क े खिलए मान्य होगा।" और उपरोक्त एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर विदया गया। थ्यात्मक आ ार

3. व 7मान प्रति वादी सं. 4 अथा7 ् राम क ु मार ने ऊपर ब ाए गए अपरा ों क े खिलए ऊपर संदर्भिभ थाने में एफआईआर सं. 224 वष[7] 2022 द47 की। एफआईआर इस प्रकार है:- “… अ ोहस् ाक्षरी रामक ु मार पुत्र सा ुराम काजिसमपुर, थाना विम4ा7पुर का विनवासी है। मैं कहना 'ाह ा हूं विक हा4ी इकबाल, उसक े बेर्टे 4ावेद, वाजि4द, अलीशान, अफ4ाल और इकबाल क े भाई महमूद अली ने हमें काफी समय से 4बरदस् ी यह कहना शुरू कर विदया था विक ग्राम मायापुर में स्थिस्थ हमारी भूविम जि4सका Tसरा नंबर 256/1 है, उनकी है। वष[7] 2021 की बा है 4ब Tे ी का समय आया ो मैं और मेरा भाई रा4क ु मार विम4ा7पुर में अब्दुल वाविहद क े बेर्टे इकबाल क े घर गये। हमने उनसे अनुरो विकया विक आप लोग हम लोगों की सुT, शांति में Tलल डाल रहे हैं। हमने कहा, हम दीन हीन हैं। इस पर इक़बाल, उसका भाई महमूद और उसक े बेर्टे ज़ाबेद, वाजि4द, अलीशान और अफ़4ल हम पर बहु Nोति हुए। वे हमारे खिTलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगे। हमने उनसे अभद्र भाषा का प्रयोग बंद करने का अनुरो विकया। उसी समय इन सभी लोगों ने हमें बहु देर क अपने हाथ और मुक्कों से पीर्टा। इसक े बाद उन्होंने मेरे माथे पर विपस् ौल ान कर मेरी 4ेब में रTे 2 लाT रूपये 4बरदस् ी छीन खिलए। इसक े बाद इन सभी लोगों ने कहा विक अगर हम इस बारे में विकसी से बा करेंगे ो वे हमारे परिरवार क े सभी सदस्यों को मार डालेंगे। भी अस्वीकरण: े इकबाल ने मुझे स्र्टाम्प पेपर पर हस् ाक्षर करने क े खिलए कहा। हमें डराने- मकाने क े बाद, उन्होंने हम दोनों भाइयों को स्र्टांप पेपर पर हस् ाक्षर करने को म4बूर विकया। लुर्टकर हम 'ुप'ाप अपने घर लौर्ट आये। इसक े बाद हमने अपने परिरवार क े सदस्यों को व 7मान थ्य ब ाया। हालाँविक इन लोगों क े डर क े कारण ही हमारे परिरवार क े विकसी भी सदस्य ने इन लोगों क े खिTलाफ हमारा समथ7न नहीं विकया। बहु सो'ने और साहस 4ुर्टाने क े बाद मैं आ[4] आपक े थाने में रिरपोर्ट[7] द47 कराने आया हूं। आवेदक ह./-रा4क ु मार 19.09.2022-राम क ु मार पुत्र सा ुराम विनवासी कासिंसपुसर,थाना विम4ा7पुर, जि4ला सहारनपुर, मो.नं. 9758031420।” (प्रभाव वर्ति )

4. इस प्रकार उपरोक्त एफआईआर से प ा 'ल ा है विक पहला सू'नादा ा ग्राम काजिसमपुर, विमज़ा7पुर, जि4ला सहारनपुर का विनवासी है। उनका नाम ग्राम मायापुर, जि4ला सहारनपुर स्थिस्थ Tसरा सं. 256/1 वाली क ृ विष भूविम क े Tा ेदार क े रूप में द47 है। उसने आरोप लगाया है विक व 7मान अपीलक ा7 कु छ अन्य सह - अणिभयुक्तों क े साथ Tसरा नंबर 256/1 वाली भूविम क े माखिलक होने का गल दावा कर रहा है। उसका पक्ष यह है विक वष[7] 2021 में विकसी समय, वह अपने भाई रा4क ु मार क े साथ विमज़ा7पुर स्थिस्थ अपीलक ा7 सं. 2 क े घर गया था और उनसे अनुरो विकया था विक वे संबंति भूविम क े उनक े वै कब्4े और स्वाविमत्व में हस् क्षेप न करें। उसका पक्ष यह है विक उस समय अपीलक ा7ओं और अन्य सह- अणिभयुक्तों ने पहले सू'नादा ा और उसक े भाई रा4क ु मार को गाखिलयां दीं और उसक े बाद सभी आरोविपयों ने हाथ-मुक्कों से पहले सू'नादा ा और उसक े भाई की विपर्टाई की। आगे आरोप है विक उसी समय आरोविपयों ने विपस् ौल क े बल पर पहले सू'नादा ा की 4ेब से 2 लाT रुपये 4बरन छीन खिलये। आरोविपयों पर यह अस्वीकरण: े भी आरोप है विक उन्होंने पहले सू'नादा ा को मकी दी थी विक अगर वह घर्टना क े बारे में विकसी से बा करेगा ो उसक े परिरवार क े सभी सदस्यों को मार विदया 4ाएगा। अं में प्रथम सू'नादा ा ने आरोप लगाया है विक आरोविपयों ने 4बरन सादे स्र्टांप पेपर पर प्रथम सू'नादा ा एवं उसक े भाई का हस् ाक्षर ले खिलया। कणिथ घर्टना क े बाद, पहले सू'नादा ा और उसक े भाई रा4क ु मार ने व 7मान अपीलक ा7 सं. 2 क े घर से 'ले गए।

5. गौर लब है विक वष[7] 2021 में हुई कणिथ घर्टना क े खिलए एफआईआर वष[7] 2022 में द47 कराई गई थी। यह भी ध्यान देने योग्य है विक एफआईआर में कणिथ घर्टना की कोई ारीT और समय नहीं ब ाया गया है। पहले सू'नादा ा द्वारा इस बा का कोई विवश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं विदया गया विक एफआईआर द47 करने में अत्यति क देरी क्यों हुई।

6. व 7मान अपीलक ा7गण ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष विNविमनल विमससेलेविनयस रिरर्ट याति'का सं. 15174 वष[7] 2022 दायर की और प्रश्नग एफआईआर रद्द करने की प्राथ7ना की। उच्च न्यायालय ने रिरर्ट आवेदन पर विव'ार करने से इनकार कर विदया और इसे यह कह े हुए Tारिर[4] कर विदया: - “याति'काक ा7ओं क े विवद्वान अति वक्ता और राज्य प्रत्यथ•गण की ओर से विवद्वान ए.4ी.ए. को सुना। इस याति'का में मांगी गई राह एफ.आई.आर. विदनांविक 19.09.2022, मुकदमा अपरा सं. 0224 सन् 2022 अन् ग[7] ारा 395, 504, 506, 323 भा.दं.सं., थाना विमज़ा7पुर, 4नपद सहारनपुर को रद्द करने क े खिलए थी। विवद्वान ए4ीए ने एफआईआर रद्द करने की प्राथ7ना का विवरो विकया का, 4ो संज्ञेय अपरा का Tुलासा कर ी है। अस्वीकरण: े आक्षेविप प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] क े अवलोकन से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपरा घविर्ट होने का प ा 'ल ा है। इसखिलए, हरिरयाणा राज्य एवं अन्य बनाम भ4न लाल एवं अन्य, 1992 Supp. (1) SCC 335 और मेसस[7] विनहारिरका इंफ्रास्र्ट्रक्'र प्रा. खिलविमर्टेड बनाम महाराष्ट्र राज्य मेसस[7] विनहारिरका इंफ्रास्र्ट्रक्'र प्रा. खिलविमर्टेड बनाम महाराष्ट्र राज्य AIR 2021 SC 1918 और विवशेष अनुमति याति'का (दाण्डक) 3262/2021 (लीलाव ी देवी @ लीलाव ी एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) विनण• विदनांक 07.10.2021 क े मामलों में माननीय सव च्च न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति क े मद्देन4र आक्षेविप प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] में हस् क्षेप का कोई मामला नहीं बन ा है। अ: याति'काक ा7ओं को विवति क े ह अनुमन्य और विवति क े अनुसार अविग्रम 4मान /4मान क े खिलए सक्षम अदाल क े समक्ष आवेदन करने का विवकल्प दे े हुए रिरर्ट याति'का Tारिर[4] की 4ा ी है।'' इससे व्यणिथ और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, अपीलक ा7गण व 7मान अपील क े साथ इस न्यायालय क े समक्ष उपस्थिस्थ हैं। अपीलक ा7गण की ओर से क

7. अपीलक ा7गण की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री जिसद्धाथ[7] दवे ने अपने द्वारा दायर खिलखिT क 7 में विनम्नानुसार कहा है: - “1. याति'काक ा7 4ो एफआईआर सं. 224 वष[7] 2022 में Nमशः आरोपी संख्या 6 और 1 हैं, ने विNविमनल विमससेलेविनयस रिरर्ट याति'का सं. 15174/2022, में माननीय उच्च न्यायालय, अस्वीकरण: े इलाहाबाद द्वारा पारिर आक्षेविप विनण7य और अस्थिन् म आदेश विदनांविक 17.10.2022 क े खिTलाफ व 7मान विवशेष अनुमति याति'का दायर की है जि4समें माननीय उच्च न्यायालय ने भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह याति'काक ा7ओं द्वारा दायर उक्त रिरर्ट याति'का को Tारिर[4] कर विदया है, जि4समें भार ीय दंड संविह ा की ारा 395,504, 506 और 323 क े ह छः आरोविपयों अथा7 ् मोहम्मद इकबाल उफ 7 बाला (व 7मान याति'काक ा7 सं.2), महमूद अली (याति'काक ा7 सं.[2] का भाई), अफ4ाल (याति'काक ा7 सं. 2 का बेर्टा), अलीशान (याति'काक ा7 सं.[2] का बेर्टा), 4ावेद (याति'काक ा7 सं. 2 का बेर्टा), और मोहम्मद वाजि4द (व 7मान याति'काक ा7 सं. 1 और याति'काक ा7 सं. 2 का बेर्टा) क े खिTलाफ द47 एफआईआर संख्या 224/2022 विदनांविक 19.09.2022 थाना विमज़ा7पुर, जि4ला सहारनपुर को रद्द करने की मांग की गई थी।

2. उक्त एफआईआर संख्या 224/2022 विदनांविक 19.09.2022 में आरोप यह है विक णिशकाय क ा7 राम क ु मार (व 7मान प्रति वादी सं.4), 4ो ग्राम काजिसमपुर, विमज़ा7पुर, जि4ला सहारनपुर का विनवासी है, का नाम Tसरा संख्या 256/1, ग्राम मायापुर, विमज़ा7पुर, जि4ला सहारनपुर में स्थिस्थ भूविम क े Tा ेदार क े रूप में द47 है। यह भी आरोप लगाया गया है विक आरोपी हा4ी इकबाल (व 7मान याति'काक ा7 सं. 2) और उसक े बेर्टे 4ावेद, मोहम्मद वाजि4द (व 7मान याति'काक ा7 सं.1), अलीशान, अफ4ाल और उसक े भाई महमूद अली ने पहले दावा विकया था विक Tसरा सं. 256/1 की उक्त भूविम उनकी थी। वष[7] 2021 में, 4ब अस्वीकरण: े णिशकाय क ा7 और उसका भाई रा4 क ु मार याति'काक ा7 सं. 2 क े विमज़ा7पुर, सहारनपुर स्थिस्थ घर गए और उससे अनुरो विकया विक वे उसकी 4मीन की शांति को भंग न करें जि4स पर याति'काक ा7 सं. 2 इकबाल, महमूद अली, 4ावेद, याति'काक ा7 सं. 1, महमूद वाजि4द, अलीशान और अफ4ल ने णिशकाय क ा7 क े को गाली दी और उसक े बाद उन्होंने उस पर और उसक े भाई रा4 कु मार पर अपने हाथों और मुक्कों से हमला विकया। आगे यह भी आरोप है विक आरोपी व्यविक्तयों ने णिशकाय क ा7 क े माथे पर विपस् ौल ान दी और णिशकाय क ा7 की 4ेब से 4बरन 2 लाT रूपये छीन खिलए। आरोविपयों ने णिशकाय क ा7 को मकी दी विक अगर उसने घर्टना क े बारे में विकसी को ब ाया ो उसक े सभी सदस्यों को Tत्म कर विदया 4ाएगा। आगे आरोप है विक आरोपी व्यविक्तयों ने णिशकाय क ा7 और उसक े भाई से 4बरन एक सादे स्र्टांप पेपर पर हस् ाक्षर कराया और अपने पैसे लुर्टने क े बाद णिशकाय क ा7 और उसका भाई 'ुप'ाप घर लौर्ट आए।

3. सविवनय दलील दी गई है विक कणिथ प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] विबल्क ु ल झूठी और ुच्छ है, और उक्त एफआईआर को पढ़ने पर, याति'काक ा7ओं क े खिTलाफ डक ै ी का अपरा स्पष्ट रूप से नहीं बन ा है। यह बेहद संदेहास्पद है विक णिशकाय क ा7, 4ो याति'काक ा7 सं. 2 इकबाल क े आपराति क इति हास से अवग था, भारी रकम यानी 2 लाT रुपये अपनी 4ेब में लेकर आरोपी याति'काक ा7 सं. 2 क े घर 4ाएगा और कणिथ घर्टना क े बाद वह एक साल क 'ुप रहेगा। हालांविक यह आरोप है विक णिशकाय क ा7 और उसक े भाई रा4 क ु मार पर आरोपी व्यविक्तयों द्वारा हमला विकया अस्वीकरण: े गया था, हालांविक उक्त आरोप को साविब करने क े खिलए विकसी भी रह की 'ोर्ट या मेतिडकल रिरपोर्ट[7] नहीं है।

4. प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] में आरोप न क े वल अस्पष्ट हैं, बस्थिल्क अत्यति क असंभाव्य भी हैं, क्योंविक इस आरोप क े अलावा विक घर्टना वष[7] 2021 में हुई थी, एफआईआर में घर्टना की ारीT और समय का कोई उल्लेT नहीं है। उक्त घर्टना कणिथ ौर पर वष[7] 2021 में हुई, 4बविक प्राथविमकी 1 वष[7] की अत्यति क देरी क े बाद, यानी 19.09.2022 को द47 की गई है। एफआईआर को पढ़ने से प ा 'ल ा है विक पूरा विववाद Tसरा नंबर 256/1, ग्राम मायापुर, विमज़ा7पुर, जि4ला सहारनपुर स्थिस्थ 4मीन को लेकर है। यह उल्लेT करना प्रासंविगक है विक याति'काक ा7 न ो भूविम क े माखिलक हैं और न ही उनका उक्त भूविम से कोई लेना -देना है और इसखिलए याति'काक ा7ओं द्वारा णिशकाय क ा7 को मकाने और हमला करने का कोई सवाल ही नहीं है।

5. यह कहा गया है विक वष[7] 2017 में उत्तर प्रदेश राज्य में सरकार बदलने क े बाद, सत्तारूढ़ दल सत्ता में आया और सरकार बदलने क े ुरं बाद याति'काक ा7ओं को सत्तारूढ़ दल क े इशारे पर उनक े परिरवार क े सदस्यों क े साथ 30 से अति क आपराति क मामलों में झूठा फ ं साया गया। याति'काक ा7ओं को पुखिलस सविह राज्य मशीनरी द्वारा अनावश्यक रूप से परेशान विकया 4ा रहा है। हालाँविक प्रति वादी राज्य यह विदTाने क े खिलए विक वे आद न अपरा ी हैं, याति'काक ा7ओं और उनक े खिTलाफ द47 आपराति क मामलों पर बहु अति क भरोसा कर रहा है, लेविकन आ[4] क याति'काक ा7ओं को विकसी भी अदाल द्वारा अस्वीकरण: े दोषी नहीं ठहराया गया है और इसक े अलावा 4ब भी याति'काक ा7ओं या उनक े सदस्यों को इस माननीय न्यायालय या माननीय उच्च न्यायालय से सुरक्षा (अविग्रम 4मान या विगरफ् ारी पर रोक) विमल ी है, स्थानीय पुखिलस ुरं उनक े खिTलाफ झूठे मामले द47 कर ले ी है।

6. यह कहा गया है विक कणिथ लुक आउर्ट नोविर्टस विदनांविक 10.05.2022 व 7मान एफआईआर सं. 224/2022 क े पं4ीकरण से बहु पहले 4ारी विकया गया था 4ो 19.09.2022 को द47 विकया गया था और इस रह अप्रासंविगक है।

7. यह सविवनय विनवेदन विकया गया है विक कणिथ प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] प्रति शो लेने और याति'काक ा7 सं. 2 मोहम्मद इकबाल उफ 7 बाला क े साथ रा4नीति क प्रति द्वंविद ा क े कारण उत्तर प्रदेश राज्य में व 7मान सत्तारूढ़ दल क े इशारे पर दुभा7वनापूण[7] रूप से की गई है क्योंविक वह एक प्रति द्वंद्वी रा4नीति क दल से है और वह 2011 से 2016 क विव ान परिरषद क े सदस्य भी थे। याति'काक ा7 संख्या 2 मोहम्मद इकबाल उफ 7 बाला सहारनपुर क े एक इज्ज दार परिरवार से ाल्लुक रT ा है और वह कई मा7थ[7] संस्थान 'ला रहे हैं।

8. प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया विकसी अपरा का गठन नहीं कर े हैं या याति'काक ा7 क े खिTलाफ आईपीसी की ारा 395, 504, 506 और 323 क े ह मामला नहीं बना े हैं और इस प्रकार, एफआईआर रद्द की 4ा सक ी है। यह उल्लेT करना उति' है विक आरोप पत्र दायर होने क े बाद भी, अस्वीकरण: े एफआईआर को रद्द करने की याति'का अदाल की शविक्तयों क े भी र है [क ृ पया देTें: एनंद क ु मार मोहत्ता एवं एक अन्य बनाम राज्य (एनसीर्टी विदल्ली), गृह विवभाग एवं अन्य (2019) 11 एससीसी 706 पैरा 14 और 16 पर]

9. ऊपर उजिल्लखिT कारणों से, विवशेष अनुमति याति'का को अनुमति दी 4ा सक ी है और एफआईआर संख्या 224/2022 विदनांविक 19.09.2022 को रद्द करने से इनकार करने क े माननीय उच्च न्यायालय क े आदेश को रद्द विकया 4ा सक ा है।” राज्य की ओर से क

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8. उ.प्र. राज्य की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान अपर महाति वक्ता सुश्री गरिरमा प्रसाद ने अपने खिलखिT क 7 में विनम्नानुसार कहा है:- “क. आरोपी इकबाल @ हा4ी इकबाल @ बाला द्वारा कोई हलफनामा या वकाल नामा दाखिTल नहीं विकया गया, आरोपी महमूद और विदलशाद- ीसरे पक्ष द्वारा दायर याति'का पर कोई राह नहीं दी 4ा सक ी।  यह विक व 7मान एसएलपी विकसी ीसरे पक्ष द्वारा दायर की गई है। अणिभयुक्त इकबाल उफ 7 हा4ी इकबाल उफ 7 बाला और न ही अन्य याति'काक ा7ओं ने वकाल नामा और हलफनामे पर हस् ाक्षर विकए हैं और इकबाल कानून से फरार है। यहां क विक, सीआरपीसी की ारा 482 क े ह माननीय उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरर्ट याति'का भी इकबाल द्वारा हस् ाक्षरिर नही है। उन लोगों को कोई राह नहीं दी 4ा सक ी जि4न्होंने इस माननीय न्यायालय से संपक 7 नहीं विकया है। अस्वीकरण: े  अणिभयुक्त इकबाल इस माननीय न्यायालय क े क्षेत्राति कार से भाग गया है और पूरी संभावना है विक वह देश से भाग गया है। सविवनय विनवेदन है विक 4ो व्यविक्त इस माननीय न्यायालय क े क्षेत्राति कार में नहीं है और जि4सने विकसी शपथ पत्र या वकाल नामे पर हस् ाक्षर नहीं विकया है, वह विकसी भी राह का हकदार नहीं हो सक ा है।  अणिभयुक्तगण ने अति क 4घन्य और गंभीर मामलों को छोड़कर क े वल क ु छ 'ुनिंनदा मामले ही इस माननीय न्यायालय क े समक्ष लाए हैं।

T. इकबाल उफ 7 हा4ी इकबाल उफ 7 बाला विम4ा7पुर जि4ला सहारनपुर क े क्षेत्र में नागरिरकों क े मन में आ ंक पैदा करने वाला मोस्र्ट वांर्टेड अपरा ी है। वह एक क ु ख्या रे माविफया है, जि4सने सरकारी भूविम, वन भूविम, गरीब विकसानों की भूविम पर कब्4ा कर 700 एकड़ से अति क क्षेत्र में ग्लोकल यूविनवर्सिसर्टी, सहारनपुर नामक एक विवश्वविवद्यालय का विनमा7ण कराया है। काया7लय वरिरष्ठ पुखिलस अ ीक्षक, मेरठ 4ोन, मेरठ ने अपने काया7लय ज्ञापन विदनांविक 11.02.2023 क े माध्यम से इकबाल उफ 7 बाला को 1,00,000/-रुपये की पुरस्कार राणिश वाला सवा7ति क वांणिछ अपरा ी घोविष विकया है।  विपछली सरकार का संरक्षण: यह स्पष्ट है विक आरोपी इकबाल और उसक े परिरवार की अापराति क दुविनया विपछली सरकार/सरकारों क े समथ7न से विपछले दशकों में बढ़ी है, और यही कारण है विक 1990- 1993 क े दौरान उसक े खिTलाफ द47 आपराति क मामले विपछली सरकार द्वारा वापस ले खिलए गए थे। आरोपी इकबाल ने अस्वीकरण: े लोगों को आ ंविक विकया, वह जि4ला सहारनपुर या पतिŸमी उत्तर प्रदेश राज्य क े क्षेत्र में आ ंक का एक 4ाना पह'ाना नाम है, जि4सक े कारण आरोपी इकबाल और उसक े खिTलाफ कोई एफआईआर/आपराति क मामला द47 नहीं विकया गया।  लुक आउर्ट नोविर्टस: आरोपी इकबाल प्रविNया से भाग रहा है और उसक े खिTलाफ कई लुक आउर्ट सक ु7 लर 4ारी विकये गये हैं। लेविकन आरोपी इकबाल विकसी भी मामले में एक बार भी पेश नहीं हुआ और पहले ही फरार हो 'ुका है। 4ो व्यविक्त 4ां' में सहयोग नहीं करेगा, उसे कोई राह नहीं दी 4ा सक ी।  ारा 41 क े ह नोविर्टस: सीआरपीसी की ारा 41 ए क े ह बड़ी संख्या में नोविर्टस कई मामलों में आरोपी इकबाल उफ 7 बाला को 4ारी विकए गए हैं। नोविर्टस की ामील क े बाव4ूद, आरोपी इकबाल विकसी भी आपराति क मामले में न ो उपस्थिस्थ हुआ और न ही 4ां' में शाविमल हुआ।  विहस्र्ट्रीशीर्टर गैंगस्र्टर गैंग लीडर: अणिभयुक्त हा4ी इकबाल उफ 7 मो. इकबाल उफ 7 बाला एक विहस्र्ट्रीशीर्टर, गैंग लीडर, आ ंक का 4ाना पह'ाना नाम है, यविद ऐसे अपराति यों को, 4ो साव74विनक रूप से बलात्कार क े मामलों, डक ै ी क े मामलों, ोTा ड़ी क े मामलों, 4मीन हड़पने क े मामलों, 4बरन वसूली क े मामलों आविद में शाविमल हैं, राह दी 4ा ी है ो इससे समा4 में गल संदेश/संक े 4ाएगा और 4ो व्यविक्त/पीविड़ इन गल काम करने वालों क े खिTलाफ आएंगे उन्हें कभी न्याय नहीं विमलेगा और भविवष्य अस्वीकरण: े में कोई भी इन अपराति यों क े खिTलाफ आवा4 नहीं उठाएगा।  4हां क सवाल है, सरकार बदलने क े साथ ही णिशकाय क ा7/भयभी लोग, पीविड़ लोग, आरोपी इकबाल क े खिTलाफ णिशकाय द47 कराने या द47 कराने क े खिलए आगे आने में सक्षम हो गए हैं। विपछली सरकारों क े अवै समथ7न क े कारण, उनक े खिTलाफ कोई णिशकाय या आपराति क मामले द47 नहीं विकए गए थे। अब, वे अपनी णिशकाय ें द47 कराने क े खिलए आगे आए हैं। व 7मान सरकार में, बड़ी संख्या में पीविड़ लोग, भयभी लोग/णिशकाय क ा7 आरोपी इकबाल क े खिTलाफ मामला द47 कराने या आवा4 उठाने क े खिलए आगे आने में सक्षम हुए हैं। आपराति क णिशकाय क े आ ार पर आरोपी इकबाल और उसक े परिरवार क े खिTलाफ कार7वाई की गई।  भले ही ये झूठे मामले हों, ईमानदार या कानून का पालन करने वाले व्यविक्तयों को 4ां' में शाविमल होना 'ाविहए, लेविकन आरोपी इकबाल सभी नोविर्टसों से ब' रहा है और विकसी भी आपराति क मामले की 4ां' में शाविमल नहीं हुआ है, और इसखिलए लुक आउर्ट नोविर्टस 4ारी विकए गए हैं।  यहां यह उल्लेT करना उति' है विक सभी आपराति क मामलों में णिशकाय क ा7 अलग-अलग हो े हैं और अपरा अलग-अलग हो ा है और क ु छ आरोपी भी अलग-अलग हो े हैं।  इसक े अलावा, यह उल्लेT करना उति' है विक आरोपी इकबाल और उसका परिरवार विनयविम रूप से गवाहों को मकी दे ा था।  अणिभयुक्त इकबाल को इस माननीय न्यायालय या विकसी भी अस्वीकरण: े न्यायालय क े समक्ष पेश होने क े खिलए कहा 4ाना 'ाविहए।  अणिभयुक्त इकबाल एक भू -माविफया, रे माविफया, बलात्कारी, गैंगस्र्टर है।  अणिभयुक्त इकबाल ने शुरुआ ी विदनों में ोTा ड़ी, 'ोरी और डक ै ी क े मामले करना शुरू कर विदया।आखिTरकार, वह अवै Tनन मामलों में शाविमल हो गया और विगरोह का ने ा बन गया। इसक े बाद आरोपी इकबाल ने सहारनपुर जि4ले में वन भूविम क े साथ-साथ सरकारी भूविम पर भी कब्4ा करना शुरू कर विदया। उनक े सदस्यों और करीबी सहयोविगयों ने भी गरीब लोगों की 4मीन हड़पना शुरू कर विदया।  अणिभयुक्त मोहम्मद इकबाल उफ 7 बाला उत्तर प्रदेश राज्य क े पतिŸमी भाग में Tनन माविफया है और उसक े और उसक े सदस्यों क े खिTलाफ कई आपराति क मामले द47 हैं।  अणिभयुक्त मोहम्मद सहारनपुर जि4ला क े विनवासी और उत्तर प्रदेश विव ान परिरषद (बी. एस. पी. एम. एल. सी.) क े पूव[7] सदस्य इकबाल विवणिभन्न आपराति क गति विवति यों में शाविमल हैं।मोहम्मद क े खिTलाफ मुख्य आरोप इकबाल इस प्रकार हैंः  आय से अति क परिरसंपखित्तयाँ;  क ं पनी अति विनयम, 1956 क े ह कई नकली क ं पविनयों को शाविमल विकया गया, जि4नमें से कई क े पास नकली विनदेशक या काल्पविनक शेयर ारक हैं;  सहारनपुर में प्रयुक्त गोलबल विवश्वविवद्यालय (700 एकड़ से अति क अस्वीकरण: े क्षेत्र में स्थिस्थ, 4हां वे संस्थापक क ु लाति पति हैं और अब्दुल वहीद ए4ुक े शनल एंड पू 7 न्यास द्वारा प्रबंति हैं, एक र्ट्रस्र्ट जि4से उनक े विप ा क े नाम पर उनक े साथ र्ट्रस्र्टी क े रूप में स्थाविप विकया गया था, Tनन अनुबं ों द्वारा से अवै रूप से अर्सि4 न से संपखित्त बनाने क े खिलए। अणिभयुक्त हा4ी इकबाल उफ बाला और उसक े सदस्य अवै Tनन मामलों, भूविम हड़पने क े मामलों, ोTा ड़ी क े मामलों और बलात्कार, डक ै ी और अन्य आपराति क मामलों में शाविमल हैं।  अणिभयुक्त इकबाल उफ 7 बाला, विगरोह का ने ा होने क े ना े, और उसक े विगरोह क े सदस्य आपराति क विदमाग वाले व्यविक्त हैं और असामाजि4क गति विवति यों में खिलप्त हैं और याति'काक ा7, अवै न प्राप्त करने क े खिलए, अवै Tनन व्यवसाय में शाविमल हैं, अवै कब्4ा लेकर सरकारी और गैर-सरकारी भूविम हड़प रहे हैं।  यह प्रस् ु विकया 4ा ा है विक यह थ्य विक णिशकाय ें रा4नीति क प्रति शो क े कारण शुरू की गई हो सक ी हैं, लेविकन यह आपराति क काय7वाही को रद्द करने क े खिलए अपने आप में आ ार नहीं है।  यह विक Cr.P.C की ारा 482 क े बारे में ब ा ी हैः- "482 - उच्च न्यायालय की अं र्निनविह शविक्तयों की ब' -इस संविह ा की कोई भी बा उच्च न्यायालय की अं र्निनविह शविक्तयों को सीविम या प्रभाविव आदेश वाली नहीं मानी 4ाएगी 4ो इस संविह ा क े ह विकसी भी आदेश को प्रभावी बनाने क े खिलए या विकसी भी न्यायालय की प्रविNया क े दुरुपयोग को रोकने क े खिलए या अन्यथा न्याय क े अस्वीकरण: े उद्देश्यों को सुरतिक्ष रTने क े खिलए आवश्यक हो।"  यह विक इस माननीय न्यायालय ने मोविनका क ु मार (डॉ.) बनाम उत्तर उत्तर प्रदेश राज्य (2008) 8 एस. सी. सी. 781 क े रूप में रिरपोर्ट[7] विकए गए मामले में अणिभविन ा7रिर विकया है, 4ो विक दंड प्रविNया संविह ा की ारा 482 क े ह विनविह अति कार क्षेत्र है एवं संविह ा का प्रयोग संयम, साव ानी क े साथ और क े वल भी विकया 4ाना 'ाविहए 4ब इस रह क े अभ्यास को अनुभाग में विवशेष रूप से विन ा7रिर परीक्षणों द्वारा उति' ठहराया 4ाए।  इसक े अलावा, यह उल्लेT करना उति' है विक इस माननीय न्यायालय ने ए. आई. आर. 1990 एस. सी. 494 क े रूप में रिरपोर्ट[7] की गई श्रीम ी नलक्ष्मी बनाम आर. प्रसन्ना क ु मार मामले में विनण7य विदया है विक असा ारण मामलों में, न्यायालय की शविक्तयों को रोकने क े खिलए, उच्च न्यायालय आपराति क दण्ड प्रविNया संविह ा की ारा 482 क े ह अपनी अं र्निनविह शविक्तयों का प्रयोग कर सक ा है एवं आपराति क काय7वाही को रद्द कर सक ा है। हालाँविक, हस् क्षेप क े वल भी उति' होगा 4ब णिशकाय में विकसी अपरा का Tुलासा नहीं विकया गया हो, या स्पष्ट रूप से ुच्छ, परेशान करने वाला या दमनकारी हो। व 7मान मामले में, प्रथविमकी/अपरा संख्या - 122/2022 में आई. पी. सी. की ारा 376,323,354 (ए) और पॉक्सो अति विनयम, 2012 की ारा 7,[8] क े ह थाना- मविहला थाना, जि4ला सहारनपुर में द47 की गई थी, जि4समें स्पष्ट थ्यों का Tुलासा विकया गया था और आरोपी इकबाल और अन्य अणिभयुक्तों क े खिTलाफ गंभीर आरोप हैं।प्राथविमकी संख्या 122/2022 क े थ्य प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपरा क े क ृ त्यों का Tुलासा कर े हैं। अस्वीकरण: े अणिभयुक्त हा4ी इकबाल उफ 7 बाला 1990 से बलात्कार क े मामलों, अवै Tनन, भूविम हड़पने, ोTा ड़ी क े मामलों, हमले क े मामलों और अन्य आपराति क मामलों सविह 45 से अति क आपराति क मामलों में शाविमल रहा है।अणिभयुक्त इकबाल क े खिTलाफ पहली प्राथविमकी 1990 में द47 की गई थी, अथा7 आई. पी. सी. की ारा 379,411 और वन अति विनयम की ारा 26 क े ह प्राथविमकी संख्या 57/1990 विम4ा7पुर पुखिलस स्र्टेशन में द47 की गई थी।हालांविक, पहले की सरकार क े समथ7न क े कारण, आरोपी इकबाल और उसक े खिTलाफ कोई कानूनी कार7वाई नहीं की गई।अणिभयुक्त इकबाल क े खिTलाफ विनम्नखिलखिT आपराति क मामले द47 विकए गए हैंः- Nम संख्या एफ. आई. आर./ अपरा सं. क े ह ारा थाना जि4ला

1. 57/1990 भा.दं.सं. की ारा 379,411 और वन अति विनयम की ारा 26 क े ह विम4ा7पुर सहारनपुर

2. 53/1991 53/1991 भा.दं.सं. की ारा 379, 411 और वन अति विनयम की ारा ति'ल्काना सहारनपुर

3. 217/1993 भा.दं.सं. की ारा 147, 323, 504, बेहर्ट सहारनपुर

4. 303/2016 भा.दं.सं. की ारा 420, 467, 468, इकोर्टेक थड[7] गौ मबुद्ध नगर

5. 196/2017 भा.दं.सं. की ारा 420,406,506 विम4ा7पुर सहारनपुर

6. 246/2017 भा.दं.सं. की ारा 452, 323, 504, 506, 354, 147, 148, 386, 420, 467, 468, 471, 120 बी सदर बा4ार सहारनपुर

7. 39/2018 भा.दं.सं. की ारा 420, 467, 468, 471 4नकपुरी, सहारनपुर

8. 52/2018 भा.दं.सं. की ारा 147, 148, 149, 352, 504, 147, 148, 386, 420, 467, 468, 471, 120 बी ए. एस. सी./एस. र्टी. सदर बा4ार सहारनपुर अस्वीकरण: े अति विनयम और ारा 7 आपराति क कानून संशो न अति विनयम ारा 3 (2) (5)

9. 65/2018 भा.दं.सं. की ारा 403, 447, 506, 120 बी

10. 165/2018 गैंगस्र्टर एक्र्ट की ारा 2/3 विम4ा7पुर सहारनपुर

11. 177/2019 भा.दं.सं. की ारा 420, 504, 506, 467, 468, 471

12. 178/2019 भा.दं.सं. की ारा 406, 342, 392, 504, 506, 354

13. 587/2019 भा.दं.सं. की ारा 120 बी, 167, 467, 468, 471 सदर बा4ार सहारनपुर

14. 519/2021 भा.दं.सं. की ारा 420, 466, 467, 468, 471, 120 बी

15. 83/2022 गैंगस्र्टर एक्र्ट की ारा 2/3 विम4ा7पुर सहारनपुर

16. 97/2022 भा.दं.सं. की ारा 504, 506, 386 विम4ा7पुर सहारनपुर

17. 101/2022 भा.दं.सं. की ारा 504, 506 विम4ा7पुर सहारनपुर

18. 102/2022 भा.दं.सं. की ारा 420, 467, 468, 471

19. 89/87-88 बडकला वन श्रृंTला

20. 29/89-90 बडकला

21. 173/89-90 बडकला

22. 53/91 वन अति विनयम की ारा 4/10 बेहर्ट सहारनपुर

23. 70/91-92 बेहर्ट सहारनपुर

24. 71/91-92 बेहर्ट सहारनपुर

25. 72/91-92 बेहर्ट सहारनपुर

26. 103/1992 भा.दं.सं. की ारा 379, 411 और वन अति विनयम की ारा 26

27. 104/1994 भा.दं.सं. की ारा 379,411 और बेहर्ट सहारनपुर अस्वीकरण: े

28. 105/1992 भा.दं.सं. की ारा 379,411 और

29. 32/2001 भा.दं.सं. की ारा147, 148, 306 यमुना नगर, यमुना नगर, हरिरयाणा प्राथविमकी संख्या 224/2022 मे आई. पी. सी. की ारा 395,504,506,323 क े ह - ग) याति'काक ा7ओं और अन्य अणिभयुक्तों ने णिशकाय क ा7 और उसक े भाई को लूर्ट खिलया और उपरोक्त भूविम क े स्र्टांप पेपरों पर 4बरन हस् ाक्षर करवा खिलए। घ) इसक े अलावा, यह आरोप लगाया गया था विक याति'काक ा7ओं और उनक े आ ंक क े कारण, परिरवार क े विकसी अन्य सदस्य ने णिशकाय द47 करने का समथ7न नहीं विकया है, लेविकन यह देTने क े बाद विक अन्य पीविड़ व्यविक्त याति'काक ा7ओं और उनक े खिTलाफ कार7वाई कर रहे हैं, णिशकाय क ा7 ने उक्त आपराति क घर्टना क े खिलए याति'काक ा7ओं और अन्य आरोपी व्यविक्तयों क े खिTलाफ णिशकाय द47 करने का फ ै सला विकया। ङ) 4ां' अति कारी ने स्व ंत्र गवाहों का बयान भी द47 विकया और याति'काक ा7ओं और अन्य अणिभयुक्त व्यविक्तयों क े खिTलाफ अन्य भौति क साक्ष्य एकत्र विकए, 4ो प्रथमदृष्टया दशा7 ा है विक याति'काक ा7ओं और अन्य अणिभयुक्त व्यविक्तयों ने गंभीर अपरा विकए हैं। ') 4ाँ' पूरी हो 'ुकी है और याति'काक ा7ओं क े खिTलाफ आरोप पत्र दायर करने क े खिलए ैयार है, लेविकन इस माननीय न्यायालय क े विदनांविक 28.11.2022 क े स्थगन आदेश क े कारण आरोप पत्र प्रस् ु नहीं विकया 4ा सका। विवलम्ब क े सम्ब ं में दलीले अस्वीकरण: े क) आक्षेविप प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपरा का Tुलासा कर ी है और 4ो विवश्वास को प्रेरिर कर ी है विक प्राथविमकी की सामग्री से यह स्पष्ट है विक याति'काक ा7ओं और अन्य अणिभयुक्त व्यविक्तयों द्वारा गंभीर अपरा विकया गया था। T) डक ै ी को आई. पी. सी. भा.दं.सं. की ारा 391 क े ह परिरभाविष विकया गया है, जि4समें कहा गया है विक 4ब पां' या अति क व्यविक्त संयुक्त रूप से या डक ै ी करने का प्रयास कर े हैं या 4हां पूरी संख्या में व्यविक्त संयुक्त रूप से डक ै ी कर े हैं या डक ै ी करने का प्रयास कर े हैं, और ऐसे काय[7] या प्रयास में उपस्थिस्थ और सहाय ा करने वाले व्यविक्त पां' या उससे अति क हो े हैं, ो ऐसा करने, प्रयास करने या सहाय ा करने वाले प्रत्येक व्यविक्त को "डक ै ी" करने वाला कहा 4ा ा है। ग) इसक े अलावा, डक ै ी को आई. पी. सी. की ारा 390 क े ह परिरभाविष विकया गया है, जि4समें कहा गया है विक 'ोरी "डक ै ी" है, यविद 'ोरी करने क े खिलए, या 'ोरी से प्राप्त संपखित्त को ले 4ाने या ले 4ाने का प्रयास करने क े खिलए, भा.दं.सं. क े ह स्वेच्छा से विकसी भी व्यविक्त की मौ या 'ोर्ट या गल रीक े से रोकने का प्रयास कर ा है, या त्काल मौ या त्काल 'ोर्ट का डर पैदा कर ा है, या ुरं गल रीक े से रोकने का प्रयास कर ा है। व 7मान मामले में, अन्य अणिभयुक्त व्यविक्तयों (क ु ल 6 अणिभयुक्त व्यविक्तयों) ने णिशकाय क ा7 को लूर्टा और 4बरन वसूली की है।प्राथविमकी की सामग्री से प्रथमदृष्टया प ा 'ल ा है विक णिशकाय क ा7, 4ब वे याति'काक ा7ओं क े घर गए, ो उन्हें याति'काक ा7ओं द्वारा लूर्टा गया और गल रीक े से रोका गया। याति'काक ा7 और अन्य आरोपी व्यविक्त, 4ैसे विक प्रथमदृष्टया प्राथविमकी में उजिल्लखिT अपरा ों में शाविमल हैं। अस्वीकरण: े घ) हाल ही में, इस माननीय न्यायालय ने महेंद्र प्रसाद ति वारी बनाम अविम क ु मार ति वारी और अन्य मामले में देरी से प्राथविमकी द47 करना आरोप मुक्त करने का आ ार नहीं बनाया गया है। ङ) इस माननीय न्यायालय ने ठाक ु र राम बनाम विबहार राज्य (1966) 2 एस. सी. आर. 740 क े मामले में, यह अणिभविन ा7रिर विकया है विक क ु छ अपवादों को छोड़कर, आपराति क मामलों में जि4स पक्ष को पीविड़ पक्ष माना 4ा ा है, वह राज्य है 4ो बड़े पैमाने पर समुदाय क े सामाजि4क विह ों का संरक्षक है और इसखिलए यह राज्य का काम है विक वह उस व्यविक्त को लाने क े खिलए सभी आवश्यक कदम उठाए जि4सने समुदाय क े सामाजि4क विह ों क े खिTलाफ काम विकया है। ') इस माननीय न्यायालय ने शीओनानंदन पासवान बनाम विबहार राज्य, (1987) 1 एस. सी. सी. 288 मामले में अव ारिर विकया है।

17. यह विनस्संदेह स' है विक डॉ. 4गन्नाथ विमश्रा क े खिTलाफ अणिभयो4न डॉ. 4गन्नाथ विमश्रा क े सत्ता से बाहर होने क े बाद कपू7री ठाक ु र की उत्तराति कारी सरकार द्वारा शुरू विकया गया था। लेविकन यह अपने आप में इस विनष्कष[7] का समथ7न नहीं कर सक ा है विक अणिभयो4न की शुरुआ रा4नीति क प्रति शो या दुभा7वना से की गई थी क्योंविक यह काफी संभव है विक डॉ. 4गन्नाथ विमश्रा क े खिTलाफ अणिभयो4न की शुरुआ को उति' ठहराने वाली सामग्री हो और उत्तराति कारी सरकार ने वै रूप से महसूस विकया होगा विक अणिभयो4न शुरू करने क े खिलए एक मामला था और इसखिलए अणिभयो4न शुरू विकया गया था।ऐसा करने में उत्तराति कारी सरकार की ओर से क ु छ भी गल नहीं होगा और इस कारण से अणिभयो4न को दूविष नहीं कहा 4ा सक ा है।संविव ान पीठ की ओर से बोल े हुए न्यायमूर्ति विहदाय ुल्ला ने क ृ ष्ण वल्लभ सहाय बनाम 4ां' आयोग (ए. आई. आर. 1969 एस. सी. 258: (1969) 1 एस. सी. आर. अस्वीकरण: े 387,393:1969 सी. आर. आई. एल. 4े. 520) में ठीक यही ब ाया गया हैः "इस क 7 का विक उत्तराति कारी मंत्रालय द्वारा शविक्त का प्रयोग नहीं विकया 4ा सक ा है, इस न्यायालय द्वारा दो मामलों में पहले ही 4वाब विदया 4ा 'ुका है।दोनों में से पहले वाले को पहले ही उच्च न्यायालय द्वारा संदर्भिभ विकया 4ा 'ुका है।पी. वी. 4गन्नाथ राव बनाम उड़ीसा राज्य [ए. आई. आर. 1969 एस. सी. 215: (1968) 3 एससीआर 789] क े त्काल मामले में।यह कहने क े खिलए शायद ही विकसी प्राति करण की आवश्यक ा है विक 4ां' का आदेश मंत्री द्वारा अपने खिTलाफ नहीं बस्थिल्क विकसी और द्वारा विदया 4ाएगा।4हाँ कोई मंत्रालय पद से बाहर हो 4ा ा है, वहाँ उसका उत्तराति कारी विकसी भी स्पष्ट आरोप पर विव'ार कर सक ा है और यविद उति' हो, ो 4ाँ' का आदेश दे सक ा है।अन्यथा, प्रत्येक मंत्रालय अपने खिलए एक कानून बन 4ाएगा और इसक े मंवित्रयों का भ्रष्ट आ'रण 4ां' से परे रहेगा।" ये विर्टप्पणिणयां डॉ. 4गन्नाथ विमश्रा की ओर से आग्रह विकए गए इस क 7 का पूरा 4वाब दे ी हैं विक इस न्यायालय को अणिभयो4न वापस लेने में हस् क्षेप नहीं करना 'ाविहए क्योंविक कपू7री ठाकु र या श्योनंदन पासवान की उत्तराति कारी सरकार रा4नीति क प्रेरणा या प्रति शो से प्रेरिर थी।"

9. सुश्री गरिरमा प्रसाद ने इस न्यायालय क े संज्ञान में लाया विक 4ां' पूरी हो 'ुकी है और अपीलार्भिथयों और अन्य सह-अणिभयुक्तों क े खिTलाफ आरोप पत्र प्रस् ु करने क े खिलए ैयार है, हालांविक, इस न्यायालय द्वारा 28.11.2022 पर पारिर अं रिरम आदेश क े कारण, 4ां' अति कारी संबंति विन'ली विव'ारण न्यायालय क े समक्ष आरोप पत्र दायर नहीं कर पाए हैं। विवश्लेषण अस्वीकरण: े

10. पक्षों की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान अति वक्ता को सुनने और अणिभलेT पर सामग्री को देTने क े बाद, विनम्नखिलखिT प्रश्न इस न्यायालय द्वारा विव'ार क े खिलए आ े हैंः-

1. क्या प्राथविमकी को सी े पढ़ने से आई. पी. सी. की ारा 395 क े ह दंडनीय डक ै ी क े अपरा का प ा 'ल ा है?दूसरे शब्दों में कहें ो, भले ही अणिभयो4न का पूरा मामला स' माना 4ा ा है, क्या आई. पी. सी. की ारा 395 क े ह दंडनीय डक ै ी क े भा.दं.सं क े ह गठन करने वाले त्वों का Tुलासा विकया 4ा ा है?

2. क्या आपराति क मकी का कोई मामला बन ा है ो आई. पी. सी. की ारा 504 और 506 (2) क े ह दण्डनीय है।

3. क्या प्राथविमकी में लगाए गए आरोप इस थ्य पर विव'ार कर े हुए विकसी विवश्वास को प्रेरिर कर े हैं विक प्राथविमकी वष[7] 2022 में वष[7] 2021 क े कणिथ अपरा क े खिलए द47 की गई थी और विवशेष रूप से, कणिथ घर्टना की ारीT और समय क े संबं में कोई विववरण प्रस् ु विकए विबना ही की द47 की गई थी?

4. क्या मामला आपराति क मामले को रद्द करने क े उद्देश्य से हरिरयाणा राज्य बनाम भ4न लाल, ए. आई. आर. 1992 एस. सी. 604 क े मामले में इस न्यायालय द्वारा विन ा7रिर मापदंडों में से विकसी एक क े भी र आ ा है? परिर''ा7 डक ै ी का अपरा ः-

11. डक ै ी का आई. पी. सी. क े अध्याय XVII क े अं ग[7] आ ा है 4ो संपखित्त क े खिTलाफ भा.दं.सं से संबंति है। ारा 390 ब ा ी है विक "डक ै ी" क्या है ो यह अस्वीकरण: े ब ाया 4ा ा है ो कब 'ोरी डक ै ी है और कब 4बरन वसूली डक ै ी है। ारा 390 दृष्टां ों क े साथ इस प्रकार हैः " ारा 390 -डक ै ी- सभी लूर्ट में या ो 'ोरी हो ी है या 4बरन वसूली। 4ब 'ोरी डक ै ी हो ी है - 'ोरी “डक ै ी” है, अगर 'ोरी करने क े खिलए, या 'ोरी करने में, या 'ोरी से प्राप्त संपखित्त को ले 4ाने या दूर ले 4ाने का प्रयास करने क े खिलए, अपरा ी, उस उद्देश्य क े खिलए स्वेच्छा से कारण बन ा है या करने का प्रयास कर ा है विकसी भी व्यविक्त की मृत्यु या 'ोर्ट या सदोष अवरो, या त्काल मृत्यु या त्काल उपहति, या त्काल सदोष अवरो का भय उत्पन्न् कर ा है। 4ब 4बरन वसूली लूर्ट हो ी है -4ब 4बरन वसूली लूर्ट है। 4बरन वसूली “डक ै ी” है यविद अपरा ी, 4बरन वसूली कर े समय, भय में डाले गए व्यविक्त की उपस्थिस्थति में हो ा है, और उस व्यविक्त को त्काल मृत्यु, त्काल 'ोर्ट, या त्काल गल होने क े भय में डालकर 4बरन वसूली कर ा है। उस व्यविक्त या विकसी अन्य व्यविक्त क े खिलए संयम, और इस प्रकार भय में डाल कर, उस व्यविक्त को उस समय भयभी करने क े खिलए उत्प्रेरिर कर ा है 4ब वह लूर्टी गई वस् ु को सौंप दे ा है। स्पष्टीकरण - अपरा ी को उपस्थिस्थ कहा 4ा ा है यविद वह दूसरे व्यविक्त को त्काल मृत्यु, त्काल उपहति, या त्काल सदोष अवरो क े भय में डालने क े खिलए पया7प्त रूप से विनकर्ट है। दृष्टां (क) ए ने 4ेड को नी'े रTा और 4ेड की सहमति क े विबना 4ेड क े कपड़ों से 4ेड क े पैसे और गहने ोTे से ले खिलए। यहां ए ने 'ोरी की है, और उस 'ोरी को करने क े खिलए, 4ेड को स्वेच्छा से गल रीक े से अवरोति विकया है। इसखिलए ए ने डक ै ी की है। अस्वीकरण: े (T) ए उच्च सड़कों पर 4ेड से विमल ा है, एक विपस् ौल विदTा ा है, और 4ेड क े बर्टुए की मांग कर ा है। Z परिरणामस्वरूप, अपना पस[7] सरेंडर कर दे ा है। यहाँ क ने झर्टपर्ट 'ोर्ट लगने क े डर से, और 4बरन वसूली कर े समय उसकी उपस्थिस्थति में रह े हुए, ज़ेड से पस[7] वापस ले खिलया है। इसखिलए ए ने डक ै ी की है। (ग) ए उच्च सड़क पर 4ेड और 4ेड क े बच्चे से विमल ा है। A बच्चे को ले 4ा ा है और मकी दे ा है विक 4ब क Z अपना पस[7] नहीं दे दे ा, ब क वह उसे एक Tाई में नी'े फ ें क देगा। Z, परिरणाम में अपना पस[7] ब'ा ा है। यहां ए ने 4ेड से पस[7] छीन खिलया है, जि4ससे 4ेड को वहां मौ4ूद बच्चे को ुरं 'ोर्ट लगने का डर है। इसखिलए A ने Z पर लूर्ट की है। (घ) ए यह कहकर 4ेड से संपखित्त प्राप्त कर ा है- “आपका बच्चा मेरे विगरोह क े हाथों में है, और अगर आप हमें दस ह4ार रुपये नहीं भे4 े हैं ो उसे मौ क े घार्ट उ ार विदया 4ाएगा”। यह 4बरन वसूली है, और दंडनीय है; लेविकन यह डक ै ी नहीं है, 4ब क विक Z को अपने बच्चे की त्काल मृत्यु क े भय में न डाला 4ाए। ”

12. भा.दं.सं. की ारा 391 "डक ै ी" को परिरभाविष कर ी है। ारा 391 इस प्रकार हैः - " ारा 391- डक ै ी-4ब पां' या अति क व्यविक्त संयुक्त रूप से लूर्ट कर े हैं या लूर्ट करने का प्रयास कर े हैं, या 4हां सामूविहक रूप से डक ै ी करने वाले या करने का प्रयास करने वाले व्यविक्तयों की पूरी संख्या, और ऐसे कमीशन या प्रयास में उपस्थिस्थ और सहाय ा करने वाले व्यविक्तयों की संख्या पां' या अति क हो ी है, ो ऐसा करने वाला प्रत्येक व्यविक्त, प्रयास करना या सहाय ा करना, “डक ै ी” करने क े खिलए कहा 4ा ा है।”

13. ारा 395 में डक ै ी क े अपरा क े खिलए स4ा का प्राव ान है। ारा 395 अस्वीकरण: े इस प्रकार हैः - " ारा 395- डक ै ी क े खिलए दंड - 4ो कोई डक ै ी करेगा, वह आ4ीवन कारावास से, या कविठन कारावास से, जि4सकी अवति दस वष[7] क की हो सक े गी, दस्थिण्ड विकया 4ाएगा और 4ुमा7ने से भी दण्डनीय होगा।”

14. यविद 'ोरी करने क े खिलए, या 'ोरी करने में, या 'ोरी से प्राप्त संपखित्त को ले 4ाने या ले 4ाने का प्रयास करने पर, उस उद्देश्य क े खिलए अपरा ी, स्वेच्छा से विकसी व्यविक्त की मृत्यु या 'ोर्ट या गल अवरो, या त्काल मृत्यु का भय या त्काल 'ोर्ट, या त्काल गल संयम का कारण बन ा है या प्रयास कर ा है ो 'ोरी 'डक ै ी' क े बराबर हो ी है। इससे पहले विक 'ोरी को 'डक ै ी' माना 4ाए, अपरा ी ने स्वेच्छा से विकसी व्यविक्त की मौ या 'ोर्ट पहुँ'ाने या गल रीक े से रोकने का प्रयास विकया होगा, या त्काल मृत्यु या त्काल 'ोर्ट लगने का डर, या त्काल गल रीक े से रोकने का प्रयास विकया होगा।दूसरा आवश्यक घर्टक यह है विक यह 'ोरी करने में, या 'ोरी करने क े खिलए, या 'ोरी से प्राप्त संपखित्त को ले 4ाने या ले 4ाने का प्रयास करने क े खिलए होना 'ाविहए। ीसरा आवश्यक घर्टक यह है विक अपरा ी को स्वेच्छा से विकसी व्यविक्त को 'ोर्ट आविद पहुं'ाने का प्रयास करने, अथा7 'ोरी करने क े खिलए या 'ोरी करने क े प्रयो4न क े खिलए या 'ोरी से प्राप्त संपखित्त को ले 4ाने या ले 4ाने का प्रयास करने क े खिलए आवश्यक होना 'ाविहए।यह पया7प्त नहीं है विक लेन-देन में 'ोरी, 'ोर्ट आविद कारिर हुई हो। यविद 'ोरी क े समय 'ोर्ट आविद लगी है, लेविकन भा.दं.सं. की ारा 390 में विनर्निदष्ट वस् ु क े अलावा विकसी अन्य वस् ु क े खिलए, 'ोरी डक ै ी नहीं होगी।यह भी पया7प्त नहीं है विक सामान की 'ोरी करने क े दौरान 'ोर्ट पहुं'ाई गई थी।

15. 'ोरी को डक ै ी में बदलने से पहले भार ीय दंड संविह ा की ारा 390 में उजिल्लखिT ीन घर्टकों को हमेशा सं ुष्ट विकया 4ाना 'ाविहए। और इसे विबशंभर अस्वीकरण: े नाथ बनाम एम्परर, ए.आई.आर. 1941 अव 476, में विनम्नखिलखिT शब्दों में समझाया गया है-- “ ारा 390 में "उस अं क े खिलए" शब्दों का स्पष्ट अथ[7] यही है विक अपरा ी द्वारा पहुं'ाई गई 'ोर्ट का स्पष्ट उद्देश्य 'ोरी को अं4ाम देना आसान बनाना होना 'ाविहए, या ब होना 'ाविहए 4ब अपरा ी 'ोरी कर रहा हो या 'ोरी से प्राप्त संपखित्त को ले 4ा रहा हो या ले 4ाने का प्रयास कर रहा हो।इसका म लब यह नहीं है विक हमला या 'ोर्ट उसी लेन-देन में या उसी परिरस्थिस्थति यों में होनी 'ाविहए।"

16. करुप्पा गौंडेन बनाम एम्पेरर, ए.आई.आर. 1918 मद्रास 821 मामले में, 4ो ओ ारुद्दी मांझी बनाम कविफलुद्दी मांझी, (1900-01) 5 सी. डब्ल्यू. एन. 372, और निंकग एम्पेरर बनाम मथुरा ठाक ु र, (1901-02) 6 सी.डब्ल्यू.एन. 72 मामले में कलकत्ता क े दो मामलों का अनुसरण कर ा है, इसे पृष्ठ 824 पर विनम्नानुसार देTा गया हैः - "अब यह हमारा क 7व्य है विक हम" उस उद्देश्य क े खिलए "शब्दों को लागू करें।विव ातियका क े पास इसका विवकल्प होगा विक अन्य शब्दों का उपयोग करेगी 4ो यहां उत्पन्न होने वाली कविठनाई को नहीं बढ़ा ी है।लोक अणिभयो4क को यह क 7 देने क े खिलए म4बूर विकया गया है विक "उस उद्देश्य क े खिलए" को 'उन परिरस्थिस्थति यों में' क े अथ[7] क े रूप में पढ़ा 4ाना 'ाविहए।मेरी राय में हम दंड संविह ा की विकसी ारा का अथ[7] लगाने में ऐसा नहीं कर सक े।विनस्संदेह, 'उन परिरस्थिस्थति यों में' शब्द इस ारा क े अनुप्रयोग को व्यापक बना देंगे और हमें ऐसा करने की अनुमति नहीं है।इस मामले पर कलकत्ता उच्च न्यायालय क े दो फ ै सलों जि4नमें से एक ओर्टारूद्दी मांझी बनाम अस्वीकरण: े काविफलुद्दी मांझी (1900-01) 5 C.W.N. 372 है, में विव'ार विकया गया है। माननीय न्यायमूर्ति ने प्रश्न को इस रह रTाः- "हमें ऐसा लग ा है विक पूरा सवाल" उस उद्देश्य क े खिलए "शब्दों पर बदल 4ा ा है।क्या कोई 'ोर्ट या त्काल 'ोर्ट का डर, 4ो व 7मान मामले में हुआ था, 'ोरी की घर्टना क े अं क े कारण हुआ था?हमें नहीं लग ा है।हमें ऐसा लग ा है विक 4ो भी निंहसा हुई उसका उपयोग उन व्यविक्तयों को बेदTल करने क े उद्देश्य से विकया गया 4ो पहले से ही प्रश्नग परिरसर पर कब्ज़ा कर 'ुक े थे और जि4नका 'ोरी से कोई संबं नहीं था, हालाँविक 'ोरी उसी समय की गई थी।"

17. सामान्य ः, यविद 'ोरी क े समय निंहसा या 'ोर्ट पहुं'ाई 4ा ी है, ो यह विनष्कष[7] विनकालना उति' होगा विक निंहसा या 'ोर्ट 'ोरी को सुविव ा4नक बनाने क े खिलए या 'ोरी की गई संपखित्त को ले 4ाने की सुविव ा क े खिलए या ऐसा करने क े प्रयास को सुविव ा4नक बनाने क े खिलए की गई थी।लेविकन साक्ष्य में यह इंविग करने क े खिलए क ु छ हो सक ा है विक 'ोर्ट या निंहसा इस उद्देश्य क े खिलए नहीं बस्थिल्क एक अलग उद्देश्य क े खिलए की गई थी।हमारा विव'ार है विक अणिभयो4न पक्ष ने आंTों पर पट्टी बां कर और "डक ै ी" क े अपरा क े वास् विवक उद्देश्य को समझे विबना भार ीय दंड संविह ा की ारा 395 क े ह दंडनीय अपरा क े खिलए प्राथविमकी द47 की और डक ै ी क े अपरा क े खिलए आरोप पत्र भी ैयार करने क े खिलए आगे बढ़े।

18. भले ही हम प्रथम सू'नादा ा द्वारा रTे गए पूरे मामले पर विवश्वास कर े हैं या स्वीकार कर े हैं, लेविकन डक ै ी का अपरा करने वाली विकसी भी सामग्री अस्वीकरण: े का Tुलासा नहीं विकया गया है।हम एक बार विफर प्रथम सू'नादा ा क े मामले को दोहरा े हैं।यह घर्टना कणिथ ौर पर अपीलाथ• संख्या 2 क े घर पर हुई है।कहा 4ा ा है विक यह प्रथम सू'नादा ा और उसका भाई है, 4ो एक विदन अपीलाथ• संख्या 2 क े घर गए थे।उस समय, अन्य सह-अणिभयुक्तों को भी उपस्थिस्थ विदTाया गया है।प्रथम सू'नादा ा की ओर से इस बारे में कोई अच्छा या प्रशंसनीय स्पष्टीकरण नहीं विमला है विक वह अपनी 4ेब में 2 लाT रुपये क्यों ले 4ा रहा था।प्रथम सू'नादा ा द्वारा प्रस् ु विकया गया पूरा मामला मनगढ़ं प्र ी हो ा है।यविद हम क ु छ समय क े खिलए मान लें विक प्रथम सू'नादा ा वास् व में अपनी 4ेब में 2 लाT रुपये ले 4ा रहा था और कणिथ घर्टना क े समय यह राणिश आरोपी व्यविक्तयों द्वारा 4बरन छीन ली गई थी, ो क्या यह 2 लाT रुपये छीनने का मामला है? क्या प्रथम सू'नादा ा की 4ेब से 2 लाT रुपये विनकाल लेना आईपीसी की ारा 390 में आने वाले "उस उद्देश्य क े खिलए" शब्दों क े दायरे में आएगा। इसका उत्तर प्रभावकारी "नहीं" है।यहां क विक प्रथम सू'नादा ा क े अनुसार, विववाद क ृ विष भूविम से संबंति था।प्रथम सू'नादा ा कह ा है विक वह प्रश्नग भूविम का वै माखिलक है, 4बविक उसक े अनुसार, आरोपी व्यविक्त गल रीक े से भूविम क े वै माखिलक होने का दावा कर रहे हैं। कणिथ रूप से इस विववाद क े समझौ े क े उद्देश्य से, प्रथम सू'नादा ा और उसक े भाई ने अपनी म4• से अपीलाथ• संख्या 2 क े घर गये थे।अपीलाथ• संख्या 2 क े घर पहुं'ने क े बाद ही कणिथ ौर पर पूरी घर्टना हुई है।हमें इस थ्य का ध्यान रTना 'ाविहए विक हम भार ीय दंड संविह ा 4ैसे आपराति क अति विनयम क े प्राव ानों से सम्बस्थिन् हैं। विकसी भी आपराति क अति विनयम क े प्राव ानों का कड़ाई से अथ[7] लगाया और व्याख्या की 4ानी 'ाविहए।

19. दंडात्मक प्राव ान की व्याख्या को विनयंवित्र करने वाला सामान्य विनयम यह है विक इसका सख् ी से अथ[7] लगाया 4ाना 'ाविहए।Nॉफड[7] क े शब्दों में सख् अस्वीकरण: े व्याख्या का अथ[7] है:-- "यविद विकसी अति विनयम का कड़ाई से अथ[7] लगाया 4ाना है, ो उसक े दायरे में ऐसा क ु छ भी शाविमल नहीं विकया 4ाना 'ाविहए 4ो स्पष्ट रूप से उपयोग की गई भाषा क े अथ[7] क े भी र न आए।इसकी भाषा को विनविह ाथ[7] या न्यायसंग विव'ारों क े आ ार पर विबना विकसी विवस् ार क े सर्टीक और कनीकी अथ[7] विदया 4ाना 'ाविहए; या उपयुक्त रूप से दावा विकया गया है, इसका सं'ालन क़ानून क े पत्र क े साथ-साथ इसकी भावना और कारण क े भी र स्पष्ट रूप से आने वाले मामलों क ही सीविम होना 'ाविहए।या शायद अति क संतिक्षप्त रूप से कहा 4ाए ो यह शास्थिब्दक या पाठ्य व्याख्या का विनकर्ट और रूविढ़वादी पालन है।"

20. सदरलैंड क े अनुसार, सख् विनमा7ण क े विनयम का म लब यह नहीं है विक क़ानून को कठोर या संकीण[7] रूप से समझा 4ाएगा, बस्थिल्क इसका म लब यह है विक इसक े सं'ालन से हर उस 'ीज़ को बाहर रTा 4ाएगा 4ो स्पष्ट रूप से इस् ेमाल की गई भाषा क े दायरे में नहीं आ ी है।

21. 4ब यह कहा 4ा ा है विक सभी दंडात्मक क़ानूनों की कड़ाई से व्याख्या की 4ानी 'ाविहए, इसका म लब क े वल यह है विक न्यायालय को यह देTना 'ाविहए विक जि4स 'ीज़ पर आरोप लगाया गया है वह इस् ेमाल विकए गए शब्दों क े स्पष्ट अथ[7] क े भी र एक अपरा है और शब्दों पर दबाव नहीं डालना 'ाविहए।

22. ऊपर उजिल्लखिT परिरस्थिस्थति यों में, हम इस विनष्कष[7] पर पहुं'े हैं विक भार ीय दंड संविह ा की ारा 395 व 7मान मामले पर लागू नहीं हो ी है। भार ीय दंड संविह ा की ारा 503,504 और 506

23. भार ीय दंड संविह ा क े अध्याय XXII आपराति क अणिभत्रास, अपमान और पीड़ा से संबंति है। ारा 503 इस प्रकार हैः - अस्वीकरण: े " ारा 503- आपराति क अणिभत्रास – 4ो कोई विकसी अन्य व्यविक्त क े शरीर, ख्याति या सम्पखित्त को, या विकसी ऐसे व्यविक्त क े शरीर या ख्याति को, जि4ससे विक वह व्यविक्त विह बद्ध हो कोई क्षति करने की मकी उस अन्य व्यविक्त को इस आशय से दे ा है विक उसे संत्रास कारिर विकया 4ाए, या उससे ऐसे मकी क े विनष्पादन का परिरव47न करने क े सा न स्वरूप कोई ऐसा काय[7] कराया 4ाए, जि4से करने क े खिलए वह वै रूप से आबद्ध न हो, या विकसी ऐसे काय[7] को करने का लोप कराया 4ाए, जि4से करने क े खिलए वह वै रूप से हकदार हो, वह आपराति क अणिभत्रास कर ा है। स्पष्टीकरण– विकसी ऐसे मृ व्यविक्त की ख्याति को क्षति करने की मकी जि4ससे वह व्यविक्त, जि4से मकी दी गई है, विह बद्ध हो इस ारा क े अन् ग[7] आ ा है। दृष्टां जिसविवल वाद 'लाने से प्रति विवर रहने क े खिलए T को उत्प्रेरिर करने क े प्रयो4न से T क े घर को 4लाने की मकी क दे ा है। क आपराति क अणिभत्रास का दोषी है।” ारा 504 इस प्रकार हैः - " ारा 504 - लोकशांति भंग कराने को प्रकोविप करने क े आशय से साशय अपमान —4ो कोई विकसी व्यविक्त को साशय अपमाविन करेगा और द्द्वारा उस व्यविक्त को इस आशय से, या यह सम्भाव्य 4ान े हुए, प्रकोविप करेगा विक ऐसे प्रकोपन से वह लोक शास्थिन् भंग या कोई अन्य अपरा कारिर करेगा, वह दोनों में से विकसी अस्वीकरण: े भांति क े कारावास से, जि4सकी अवति दो वष[7] क की हो सक े गी, या 4ुमा7ने से, या दोनों से, दस्थिण्ड विकया 4ाएगा|” ारा 506 इस प्रकार हैः - " ारा 506- आपराति क अणिभत्रास क े खिलए दण्ड –4ो कोई आपराति क अणिभत्रास का अपरा करेंगा, वह दोनों में से विकसी भाँति क े कारावास से, जि4सकी अवति दो वष[7] क की हो सक े गी, या 4ुमा7ने से, या दोनों से, दस्थिण्ड विकया 4ायेगा। यविद मकी मृत्यु या घोर उपहति इत्याविद कारिर करने की हो – था यविद मकी मृत्यु या घोर उपहति कारिर करने की, या अवि» द्वारा विकसी सम्पखित्त का नाश कारिर करने की या मृत्यु दण्ड से या आ4ीवन कारावास से, या सा वष[7] की अवति क क े कारावास से दण्डनीय अपरा कारिर करने की, या विकसी स्त्री क े अस ीत्व पर लांछन लगाने की हो, ो वह दोनों में से विकसी भाँति क े कारावास से, जि4सकी अवति सा वष[7] क की हो सक े गी, या 4ुमविन से, या दोनों से, दस्थिण्ड विकया 4ायेगा। ”

24. ारा 503 क े ह विकसी अपरा में विनम्नखिलखिT त्व हो े हैंः -1) विकसी व्यविक्त को विकसी भी 'ोर्ट क े साथ मकी देना; (i) उस व्यविक्त की प्रति ष्ठा या संपखित्त को; या (ii) उस व्यविक्त को, या विकसी ऐसे व्यविक्त की प्रति ष्ठा को, जि4समें वह व्यविक्त रुति' रT ा है।

2) मकी इरादे से होनी 'ाविहए; (i) उस व्यविक्त को 'े ावनी देना; या (ii) उस व्यविक्त को कोई ऐसा काय[7] करने क े खिलए प्रेरिर करना 4ो वह ऐसी अस्वीकरण: े मकी से ब'ने क े सा न क े रूप में करने क े खिलए कानूनी रूप से बाध्य न हो; या (iii) उस व्यविक्त को ऐसा कोई भी काय[7] करने क े खिलए प्रेरिर करना 4ो वह व्यविक्त ऐसी मकी देने से ब'ने क े सा न क े रूप में करने का कानूनी रूप से हकदार है।

25. भार ीय दंड संविह ा की ारा 504 क े ह 4ानबूझकर विकसी व्यविक्त का अपमान करना शाविमल है और इस प्रकार अपमाविन व्यविक्त को शांति भंग करने क े खिलए उकसाना या 4ानबूझकर विकसी व्यविक्त का अपमान करना, यह 4ान े हुए विक अपमाविन व्यविक्त को उकसाया 4ाना 'ाविहए जि4ससे लोक शांति भंग हो या कोई अन्य अपरा हो सक े ।क े वल दुरुपयोग इस ारा क े दायरे में नहीं आ सक ा। लेविकन, विकसी विवशेष मामले में दुव्य7वहार क े शब्द 4ानबूझकर विकए गए अपमान की श्रेणी में आ सक े हैं 4ो अपमाविन व्यविक्त को लोक शांति का उल्लंघन करने या कोई अन्य अपरा करने क े खिलए उकसा े हैं।यविद अपमान4नक भाषा का उपयोग 4ानबूझकर विकया 4ा ा है और ऐसी प्रक ृ ति का है विक घर्टनाओं क े सामान्य Nम में अपमाविन व्यविक्त शांति भंग करने या कानून क े ह अपरा करने क े खिलए प्रेरिर हो सक ा है और मामले को क े वल इसखिलए ारा क े दायरे से बाहर नहीं विकया 4ा ा है क्योंविक अपमाविन व्यविक्त ने वास् व में शांति भंग नहीं की है या आत्म -विनयंत्रण का प्रयोग कर े हुए या अपरा ी द्वारा घोर आ ंक का णिशकार होने पर कोई अपरा नहीं विकया है। यह विनण7य करने में विक क्या विवशेष अपमान4नक भाषा आईपीसी की ारा 504 क े अं ग[7] आ ी है, न्यायालय को यह प ा लगाना होगा विक, सामान्य परिरस्थिस्थति यों में, इस् ेमाल की गई अपमान4नक भाषा का क्या प्रभाव होगा, न विक णिशकाय क ा7 ने वास् व में अपने अ4ीब स्वभाव या शां स्वभाव या अनुशासन की भावना क े परिरणामस्वरूप क्या विकया।यह अपमान4नक भाषा की सामान्य अस्वीकरण: े सामान्य प्रक ृ ति है 4ो इस बा पर विव'ार करने क े खिलए परीक्षण है विक क्या अपमान4नक भाषा एक 4ानबूझकर विकया गया अपमान है 4ो अपमाविन व्यविक्त को शांति भंग करने क े खिलए उकसाने की संभावना है, न विक णिशकाय क ा7 क े विवशेष आ'रण या स्वभाव क े कारण।

26. क े वल दुव्य7वहार, असभ्य ा, अणिशष्ट ा या बद मी4ी, भार ीय दंड संविह ा की ारा 504 क े अथ[7] क े अं ग[7] 4ानबूझकर विकया गया अपमान नहीं हो सक ा है, यविद इसमें अपमाविन व्यविक्त को अपरा की शांति भंग करने क े खिलए उकसाने की संभावना का आवश्यक त्व नहीं है, और अणिभयुक्त का अन्य त्व अपमाविन व्यविक्त को शांति भंग करने क े खिलए उकसाने का इरादा रT ा है या यह 4ान े हुए विक अपमाविन व्यविक्त शांति भंग करने की संभावना रT ा है। अपमान4नक भाषा क े प्रत्येक मामले का विनण7य उस मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्थति यों क े आलोक में विकया 4ाना 'ाविहए और यह सामान्य प्रस् ाव नहीं हो सक ा विक कोई भी भार ीय दंड संविह ा की ारा 504 क े ह अपरा नहीं करेगा यविद वह णिशकाय क ा7 क े खिTलाफ क े वल अपमान4नक भाषा का उपयोग कर ा है। रा4ा सम्रार्ट बनाम 'ुन्नीभाई दयाभाई, (1902) 4 बॉम एल. आर. 78 में, बॉम्बे उच्च न्यायालय की एक Tण्ड पीठ ने कहा- " भार ीय दंड संविह ा की ारा 504 क े ह एक अपरा करने क े खिलए यह पया7प्त है यविद अपमान एक प्रकार का है 4ो दूसरे पक्षकार को अपना आपा Tोने और क ु छ अपशब्द कहने या करने क े खिलए प्रेरिर कर ा है।अपशब्दों क े साथ-साथ काय¿ से भी लोक शांति भंग हो सक ी है।" अस्वीकरण: े

27. भार ीय दंड संविह ा की ारा 506 क े क े वल अवलोकन से यह स्पष्ट हो ा है विक इसका एक विहस्सा आपराति क मकी से संबंति है।आपराति क मकी का अपरा बनाने से पहले, यह स्थाविप विकया 4ाना 'ाविहए विक आरोपी का इरादा णिशकाय क ा7 को परेशान करने का था।

28. मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्थति यों में और विवशेष रूप से, प्राथविमकी में लगाए गए आरोपों की प्रक ृ ति पर विव'ार कर े हुए, भार ीय दण्ड़ संविह ा की ारा 506 क े ह दंडनीय अपरा का गठन करने क े खिलए प्रथमदृष्टया कोई मामला प्रकर्ट होना संभव ः कहा 4ा सक ा लेविकन भार ीय दण्ड़ संविह ा की ारा 504 क े ह मामला बन ा हुआ नहीं कहा 4ा सक ा। भार ीय दण्ड़ संविह ा की ारा 504 क े ह दंडनीय अपरा क े संबं में आरोपों को भी एक अलग दृविष्टकोण से देTा 4ा सक ा है। प्राथविमकी में, प्रथम सू'नादा ा ने क े वल इ ना कहा है विक आरोपी व्यविक्तयों द्वारा अभद्र भाषा का इस् ेमाल विकया गया था। गाखिलयों क े रूप में वास् व में क्या कहा गया था, यह प्राथविमकी में नहीं ब ाया गया है। आईपीसी की ारा 504 क े ह अपरा का गठन करने वाले आवश्यक त्वों में से एक यह है विक कोई काय[7] या आ'रण होना 'ाविहए था 4ो साशय अपमान का गठन करे। 4हाँ वह काय[7] अपमान4नक शब्दों का उपयोग है, यह 4ानना आवश्यक है विक वे शब्द क्या थे ाविक यह य विकया 4ा सक े विक उन शब्दों का उपयोग साशय अपमान होगा या नहीं।इन शब्दों क े अभाव में, यह य करना संभव नहीं है विक साशय अपमान का घर्टक मौ4ूद है या नहीं।

29. हालांविक, 4ैसा पहले पाया गया है, प्रथम सू'नादा ा द्वारा सामने रTा गया पूरा मामला मनगढ़ं और बनावर्टी प्र ी हो ा है।इस स् र पर, हम भ4न लाल (पूव क्त) क े मामले में प्राथविमकी को रद्द करने क े खिलए इस न्यायालय द्वारा विन ा7रिर मापदंडों का उल्लेT कर सक े हैं।मापदंड इस प्रकार हैंः - अस्वीकरण: े "(1) 4हां प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] या परिरवाद में लगाए गए आरोप, भले ही उन्हें उनक े वास् विवक रूप में खिलया गया हो और उनकी संपूण[7] ा को स्वीकार विकया गया हो, प्रथमदृष्टया विकसी अपरा का गठन नहीं कर े हैं या आरोपी क े खिTलाफ मामला नहीं बना े हैं। (2) 4हां प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] में आरोप और प्राथविमकी क े साथ अन्य सामग्री, यविद कोई हो, एक संज्ञेय अपरा का Tुलासा नहीं कर ी हैं, ो संविह ा की ारा 155 (2) क े दायरे में मजि4स्र्ट्रेर्ट क े आदेश क े जिसवाय संविह ा की ारा 156(1) क े ह पुखिलस अति कारिरयों द्वारा विववे'ना को उति' ठहरा े हैं। (3) 4हां प्राथविमकी या परिरवाद में लगाए गए विनर्निववाद आरोप और उसक े समथ7न में एकत्र विकए गए साक्ष्य विकसी भी अपरा क े होने का Tुलासा नहीं कर े हैं और आरोपी क े खिTलाफ मामला नहीं बना े हैं। (4) 4हां, प्राथविमकी में आरोप एक संज्ञेय अपरा का गठन नहीं कर े हैं, बस्थिल्क क े वल एक असंज्ञेय अपरा का गठन कर े हैं, वहां पुखिलस अति कारी द्वारा मजि4स्र्ट्रेर्ट क े आदेश क े विबना विकसी भी विववे'ना की अनुमति नहीं दी 4ा ी है 4ैसा विक संविह ा की ारा 155 (2) क े ह परिरकस्थिल्प विकया गया है। (5) 4हां प्राथविमकी या परिरवाद में लगाए गए आरोप इ ने बे ुक े और स्वाभाविवक रूप से असंभव हैं, जि4सक े आ ार पर कोई भी विववेकपूण[7] व्यविक्त कभी भी इस विनष्कष[7] पर नहीं पहुं' सक ा है विक अणिभयुक्त क े खिTलाफ काय7वाही करने क े खिलए पया7प्त आ ार है। अस्वीकरण: े (6) 4हां संविह ा या संबंति अति विनयम (जि4सक े ह आपराति क काय7वाही संस्थिस्थ की 4ा ी है) क े विकसी भी प्राव ान में काय7वाही को संस्थिस्थ करने और 4ारी रTने पर स्पष्ट कानूनी रोक है और/या 4हां संविह ा में या संबंति अति विनयम में कोई विवणिशष्ट प्राव ान है, 4ो पीविड़ पक्ष की णिशकाय क े खिलए प्रभावी विनवारण प्रदान कर ा हो। (7) 4हां विकसी आपराति क काय7वाही को स्पष्ट रूप से असद्भावी रीक े से पेश विकया 4ा ा है और/या 4हां काय7वाही असद्भावी रीक े से अणिभयुक्त से बदला लेने क े खिलए और विन4ी व व्यविक्तग द्वेष क े कारण उसे ंग करने क े उद्देश्य से शुरू की 4ा ी है।" हमारा विव'ार है विक व 7मान मामला पूव क्त उद् ृ मामले क े मापदण्ड़ संख्या 1, 5 और 7 क े अं ग[7] आ ा है।

30. इस स् र पर, हम क ु छ महत्वपूण[7] देTना 'ाहेंगे। 4ब भी कोई अणिभयुक्त आपराति क प्रविNया संविह ा (सीआरपीसी) की ारा 482 क े ह अं र्निनविह शविक्तयों या संविव ान क े ह असा ारण अति कारिर ा का प्रयोग करक े प्राथविमकी या आपराति क काय7वाही को अविनवाय[7] रूप से इस आ ार पर रद्द कराने कराने क े खिलए न्यायालय क े समक्ष आ ा है विक ऐसी काय7वाही स्पष्ट रूप से ुच्छ या परेशान करने वाली है या प्रति शो लेने क े खिलए गुप्त उद्देश्य से शुरू की 4ा ी है, ो ऐसी परिरस्थिस्थति यों में न्यायालय का क 7व्य है विक वह प्राथविमकी को साव ानी से और थोड़ी अति क बारीकी से देTे। हम ऐसा इसखिलए कह े हैं क्योंविक एक बार 4ब परिरवादी व्यविक्तग प्रति शो आविद क े खिलए एक गुप्त उद्देश्य क े साथ आरोपी क े खिTलाफ काय7वाही करने का फ ै सला कर ा है, ो वह यह सुविनतिŸ करेगा विक सभी आवश्यक अणिभव'नों क े साथ प्राथविमकी /परिरवाद अस्वीकरण: े का बहु अच्छी रह से मसौदा ैयार विकया 4ाये। परिरवादी यह सुविनतिŸ करेगा विक प्राथविमकी/परिरवाद में विकए गए कथन ऐसे हों विक वे कणिथ अपरा का गठन करने क े खिलए आवश्यक त्वों को प्रकर्ट करें।इसखिलए न्यायालय को एफआईआर/ परिरवाद में विकए गए कथनों पर क े वल यह सुविनतिŸ करने क े उद्देश्य से गौर करना पया7प्त नहीं होगा विक कणिथ अपरा का गठन करने क े खिलए आवश्यक त्व प्रकर्ट हो े हैं या नहीं। ुच्छ या परेशान करने वाली काय7वाविहयों में, न्यायालय का क 7व्य है विक वह अणिभकथनों क े अलावा मामले क े अणिभलेT से उभरने वाली कई अन्य उपस्थिस्थ परिरस्थिस्थति यों पर गौर करे और यविद आवश्यक हो, ो उति' साव ानी और स 7क ा क े साथ उसक े पीछे णिछपे कारण को पह'ानें।न्यायालय को दंड प्रविNया संविह ा की ारा 482 या संविव ान क े ह अपने अति कारिर ा का प्रयोग कर े समय Tुद को क े वल मामले क े 'रण क ही सीविम रTने की आवश्यक ा नहीं है, बस्थिल्क मामले की शुरुआ /द47 करने क े खिलए समग्र परिरस्थिस्थति यों क े साथ -साथ विववे'ना क े दौरान एकत्र की गई सामग्री को ध्यान में रTने का अति कार है।उदाहरण क े खिलए व 7मान मामले को लें।समय- समय पर कई एफआईआर द47 विकए गए हैं।ऐसी परिरस्थिस्थति यों की पृष्ठभूविम में कई एफआईआर का द47 होना महत्वपूण[7] हो 4ा ा है, जि4ससे विन4ी या व्यविक्तग द्वेष क े कारण प्रति शो लेने का मुद्दा सामने आ ा है, 4ैसा विक आरोप लगाया गया है।

31. आंध्र प्रदेश राज्य बनाम गोलकोंडा लिंलगा स्वामी, (2004) 6 एससीसी 522 क े मामले में, इस न्यायालय की दो-न्याया ीशों की पीठ ने विवस् ार से ब ाया विक उच्च न्यायालय एक प्राथविमकी को रद्द करने क े खिलए विकस प्रकार की सामग्री का आकलन कर सक ा है। न्यायालय ने साक्ष्य क े रूप में प्रस् ु की गई सामग्री पर विव'ार करने और ऐसे साक्ष्य का मूल्यांकन करने क े बी' एक अच्छा अं र विनकाला। प्राथविमकी को रद्द करने क े खिलए क े वल ऐसी सामग्री पर विव'ार विकया 4ा सक ा है 4ो स्पष्ट रूप से प्राथविमकी में लगाए गए आरोप को साविब करने में अस्वीकरण: े विवफल रह ी है। न्यायालय ने अणिभविन ा7रिर विकयाः- “5. … न्याय की प्रगति क े खिलए न्यायालय का अति कार मौ4ूद है और यविद उस अति कार का दुरुपयोग करने का कोई प्रयास विकया 4ा ा है ाविक अन्याय विकया 4ा सक े, ो न्यायालय क े पास इस रह क े दुरुपयोग को रोकने की शविक्त है। विकसी भी काय7वाही की अनुमति देना अदाल की प्रविNया का दुरुपयोग होगा जि4सक े परिरणामस्वरूप अन्याय होगा और न्याय को बढ़ावा विमलने में बा ा आएगी। शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए अदाल विकसी भी काय7वाही को रद्द करने क े खिलए न्यायोति' होगी यविद उसे लग ा है विक इसका संस्थन या विनरं र ा अदाल की प्रविNया का दुरुपयोग करने क े समान होगी या अन्यथा इन काय7वाही को रद्द करने से न्याय का उद्देश्य पूरा होगा।4ब परिरवाद द्वारा कोई अपरा प्रकर्ट नहीं हो ा, ो अदाल थ्य क े प्रश्न की 4ां' कर सक ी है।4ब विकसी परिरवाद को रद्द करने की मांग की 4ा ी है, ो यह आकलन करने क े खिलए सामग्री को देTने की अनुमति है विक परिरवादी ने क्या आरोप लगाया है और क्या कोई अपरा बन ा है, भले ही आरोप पूरी रह से स्वीकार विकए गए हों।

6. आर. पी. कपूर बनाम पं4ाब राज्य, एआईआर 1960 एससी 866:1960 सीआरआई एल. 4े. 1239 क े मामले में, इस न्यायालय ने उन मामलों की क ु छ श्रेणिणयों का संतिक्षविप्तकरण विकया 4हां काय7वाही को रद्द करने क े खिलए अं र्निनविह शविक्त का उपयोग विकया 4ा सक ा है और विकया 4ाना 'ाविहएः (एआईआर पृष्ठ 869, प्रस् र 6) अस्वीकरण: े (i) 4हां यह स्पष्ट रूप से प्र ी हो ा है विक संस्थन या 4ारी रTने क े खिTलाफ कोई कानूनी बा ा है 4ैसे विक मं4ूरी की आवश्यक ा; (ii) 4हां प्रथम सू'ना रिरपोर्ट[7] या परिरवाद में लगाए गए आरोप उनक े वास् विवक रूप में खिलए 4ाएं और उनकी संपूण[7] ा में स्वीकार विकए 4ाएं, वे कणिथ अपरा का गठन नहीं कर े हैं; (iii) 4हां आरोप एक अपरा का गठन कर े हैं, लेविकन कोई कानूनी साक्ष्य प्रस् ु नहीं विकया गया है या प्रस् ु विकया गया साक्ष्य स्पष्ट रूप से या अणिभव्यक्त ः आरोप को साविब करने में विवफल रह ा है।

7. अंति म श्रेणी से विनपर्ट े समय, ऐसे मामले क े बी' क े अं र को ध्यान में रTना महत्वपूण[7] है 4हां कोई विवति क साक्ष्य नहीं है या 4हां ऐसा साक्ष्य है 4ो स्पष्ट रूप से लगाए गए आरोपों क े साथ असंग है और एक ऐसा मामला 4हां विवति क साक्ष्य है, 4ो मूल्यांकन करने पर, आरोपों का समथ7न कर सक ा है या नहीं भी कर सक ा है।संविह ा की ारा 482 क े ह अति कारिर ा का प्रयोग कर े समय, उच्च न्यायालय सामान्य रूप से इस बा की 4ां' शुरू नहीं करेगा विक क्या प्रश्नग साक्ष्य विवश्वसनीय है या नहीं या क्या इसक े उति' मूल्यांकन पर आरोप कायम नहीं रहेगा।यही विव'ारण न्याया ीश का काय[7] है।इसमें कोई संदेह नहीं है विक न्यातियक प्रविNया उत्पीड़न या अनावश्यक शोषण का सा न नहीं होनी 'ाविहए। न्यायालय को विववेकाति कार का प्रयोग करने में 'ौकस और विववेकपूण[7] होना 'ाविहए और प्रविNया 4ारी करने से अस्वीकरण: े पहले सभी सुसंग थ्यों और परिरस्थिस्थति यों को ध्यान में रTना 'ाविहए, ऐसा न हो विक यह विकसी विन4ी परिरवादी क े हाथ में प्रति शो की भावना से विकसी व्यविक्त को अनावश्यक रूप से परेशान करने का एक सा न बन 4ाए।साथ ही यह ारा विकसी अणिभयुक्त को अणिभयो4न को समाप्त करने और उसको विनष्प्रभावी बनाने क े खिलए सौंपा गया सा न नहीं है।....." प्राथविमकी द47 कराने में देरी

32. यह कहा गया है विक यह कणिथ घर्टना वष[7] 2021 में विकसी समय हुई थी। प्राथविमकी में घर्टना की विकसी ारीT या समय का कोई उल्लेT नहीं है। आरोप बहु अस्पष्ट और सामान्य हैं। अगर यह ुरं प्राथविमकी द47 कराने का मामला हो ा, ो शायद पुखिलस अणिभयुक्त व्यविक्तयों क े कब्4े से 2 लाT रुपये बरामद करने में समथ[7] हो ी 4ो कणिथ रूप से प्रथम सू'नादा ा की 4ेब से 4बरन छीन खिलए गए थे।प्राथविमकी में एक दस् ावेज़ क े बारे में भी कहा गया है जि4स पर प्रथम सू'नादा ा और उसक े भाई को अपने हस् ाक्षर करने क े खिलए म4बूर विकया गया था।हमे आŸय[7] है विक क्या 4ाँ' ए4ेंसी विववे'ना क े दौरान अणिभयुक्त व्यविक्तयों से उनक े हस् ाक्षर वाले ऐसे विकसी भी दस् ावेज़ को इकट्ठा करने या बरामद करने की स्थिस्थति में थी, विवशेष रूप से 4ब राज्य कह ा है विक विववे'ना समाप्त हो गई है और आरोप पत्र भी ैयार है।इन सभी सामग्री की अनुपस्थिस्थति में, राज्य अणिभयुक्त व्यविक्तयों क े खिTलाफ अपने मामले को क ै से साविब करने 4ा रहा है।आपराति क मामले में एफआईआर विव'ारण में पेश मौखिTक साक्ष्य की पुविष्ट करने क े उद्देश्य से एक अत्यं महत्वपूण[7] और मूल्यवान साक्ष्य है।अपरा करने क े संबं में पुखिलस में प्राथविमकी द47 करने पर 4ोर देने का उद्देश्य उन परिरस्थिस्थति यों क े बारे में 4ल्द अस्वीकरण: े 4ानकारी प्राप्त करना है जि4नमें अपरा विकया गया था, वास् विवक दोविषयों क े नाम और उनक े द्वारा विनभाई गई भूविमका क े साथ-साथ घर्टना स्थल पर मौ4ूद 'श्मदीद गवाहों क े नाम की 4ानकारी प्राप्त करना है।

33. उपरोक्त संदभ[7] में, हम स्पष्ट कर सक े हैं विक एफआईआर द47 करने में देरी, अपने आप में, एफआईआर को रद्द करने का आ ार नहीं हो सक ी है। यद्यविप अणिभयो4न पक्ष द्वारा प्रस् ु पूरे मामले को स्वाभाविवक रूप से असंभव बना े हुए मामले क े अणिभलेT से उभरने वाली अन्य उपस्थिस्थ परिरस्थिस्थति यों में देरी, कभी- कभी एफआईआर और परिरणामी काय7वाही को रद्द करने का एक अच्छा आ ार बन सक ी है।यविद एफआईआर, मौ4ूदा मामले की रह, कणिथ घर्टना की ारीT और समय का Tुलासा विकए विबना और इस रह की देरी क े खिलए विकसी भी स्वीकाय[7] और ठोस स्पष्टीकरण क े विबना एक वष[7] से अति क की अवति क े बाद द47 कराई 4ा ी है, ो आरोपी से मुकदमे में अपना ब'ाव करने की उम्मीद क ै से की 4ा ी है।यह कहना पूरी रह से अलग है विक विकसी मामले में, विववे'ना क े दौरान 4ां' ए4ेंसी घर्टना की ारीT और समय आविद का प ा लगाने में समथ[7] हो सक ी है। क ु छ अणिभयो4नकारी वस् ुओं की बरामदगी भी कभी-कभी एफ़आईआर में लगाए गए आरोपों को विवश्वासनीय बना सक ी है। हालांविक क े वल अस्पष्ट और प्राथविमकी में लगाए गए सामान्य आरोपों क े आ ार पर ऐसी सभी सामविग्रयों क े अभाव में, आरोपी पर मुकदमा नहीं 'लाया 4ा सक ा है।

34. राज्य की ओर से पेश विवद्वान अपर महाति वक्ता ने 4ोरदार रीक े से क विदया विक हमारे समक्ष अपीलार्भिथयों क े सकल आपराति क इति हास पर विव'ार कर े हुए, आपराति क काय7वाही को रद्द नहीं विकया 4ा सक ा है।राज्य की ओर से पेश विवद्वान अपर महाति वक्ता ने अपनी खिलखिT अणिभकथन में अपीलार्भिथयों क े पूव[7] - इति हास क े संबं में विववरण प्रस् ु विकया है। 'ार्ट[7] पर सरसरी नज़र डालने से यह आभास हो सक ा है विक अपीलाथ•गण विहस्र्ट्रीशीर्टर और दुदाY अपरा ी हैं। अस्वीकरण: े हालाँविक, 4ब प्राथविमकी या आपराति क काय7वाही को रद्द करने की बा आ ी है, ो आपराति क काय7वाही को रद्द करने से इनकार करने क े खिलए अणिभयुक्त का आपराति क इति हास एकमात्र विव'ार नहीं हो सक ा है। अणिभयुक्त को न्यायालय क े समक्ष यह कहने का वै अति कार है विक उसका पूव[7] -इति हास विक ना भी बुरा क्यों न हो, विफर भी यविद प्राथविमकी विकसी अपरा का Tुलासा करने में विवफल रह ी है या उसका मामला भ4न लाल (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा विन ा7रिर मापदंडों में से विकसी क े भी र आ ा है, ो न्यायालय को आपराति क मामले को क े वल इस आ ार पर रद्द करने से इनकार नहीं करना 'ाविहए विक अणिभयुक्त एक विहस्र्ट्रीशीर्टर है। अणिभयो4न शुरू करने से अणिभयुक्त क े रूप में नाम4द व्यविक्तयों क े खिलए प्रति क ू ल और कठोर परिरणाम हो े हैं। रा4स्व विनदेशालय और एक अन्य बनाम मोहम्मद विनसार होखिलया, (2008) 2 एससीसी 370 में, इस न्यायालय ने विबना पया7प्त कारणों क े परेशान न विकए 4ाने क े अति कार को अणिभव्यक्त रूप से मान्य ा दी है 4ो विक संविव ान क े अनुच्छेद 21 क े अं र्निनविह अति देशों में से एक है। इस प्रकार, कानून क े प्रव 7न की शविक्त को सं ुखिल करने की अपेक्षा और आवश्यक ा को और अन्याय व उत्पीड़न से नागरिरकों की सुरक्षा को बनाए रTा 4ाना 'ाविहए। कहने की 4रूर नहीं है विक यह सुविनतिŸ करना राज्य का क 7व्य है विक कोई भी अपरा ी स4ा से ब'ने न पाये, लेविकन साथ ही उसका यह भी क 7व्य है विक वह यह सुविनतिŸ करे विक विकसी को भी अनावश्यक रूप से परेशान न विकया 4ाए।

35. मामले क े समग्र दृविष्टकोण से, हम आश्वस् हैं विक सहारनपुर क े विम4ा7पुर पुखिलस थाने में द47 प्राथविमकी संख्या 224/2022 से उत्पन्न आपराति क मामले को 4ारी रTना कानून की प्रविNया क े दुरुपयोग करना क े अलावा और क ु छ नहीं होगा। इस मामले क े विवणिशष्ट थ्यों और परिरस्थिस्थति यों में, हम व 7मान अपीलार्भिथयों की ओर से रTे गए मामले को स्वीकार करने क े खिलए इच्छ ु क हैं। अस्वीकरण: े

36. परिरणामस्वरूप, यह अपील सफल हो 4ा ी है और ए द्द्वारा इसकी अनुमति दी 4ा ी है। उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश को ए द्द्वारा अपास् विकया 4ा ा है। सहारनपुर, उत्तर प्रदेश राज्य क े विम4ा7पुर पुखिलस थाने में द47 10.01.2023 विदनांविक प्राथविमकी संख्या 0007/2023 से उत्पन्न आपराति क काय7वाही को ए द्द्वारा रद्द विकया 4ा ा है।

37. यह स्पष्ट करने की आवश्यक ा नहीं है विक इस विनण7य में की गई विर्टप्पणिणयां क े वल प्रश्नग प्राथविमकी और परिरणामी आपराति क काय7वाही क े उद्देश्य क े खिलए सुसंग हैं। इन विर्टप्पणिणयों में से विकसी का भी विकसी भी लंविब आपराति क अणिभयो4न या विकसी अन्य काय7वाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।.................................… (न्यायमूर्ति बी. आर. गवई).................................… (न्यायमूर्ति 4े. बी. पारदीवाला) नई विदल्ली; 8 अगस् 2023 अस्वीकरण: े