M/s E Narayafa v. United India Insurance Company Limited

Supreme Court of India · 08 Aug 2023
A. S. Bopanna; Sanjay Kumar
Civil Appeal No 1077 of 2013
insurance appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that the appellant shrimp farmer was entitled to insurance compensation for loss due to disease, rejecting insurer's claim denial and fixing compensation based on minimum valuation with interest.

Full Text
Translation output
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय े ािधकार
िस वल अपील सं या 1077/2013
मेसस इ नार ए वा फा स .....अपीलकता
बनाम
यूनाइटेड इं डया इ शुर स क
ं पनी िलिमटेड ..... यथ
िनणय
या.,संजय क
ु मार
JUDGMENT

1. इस यायालय क े सम मुकदमेबाजी का दूसरा दौर होने क े नाते, इस अपील म वचार क े िलए उठने वाले मु े एक संक ण े क े भीतर आते ह।

2. वष 1994 क े दौरान, अपीलकता, एक पंजीकृ त साझेदार फम, ने त कालीन वशाखाप नम जले क े एस. रायवरम मंडल क े वकापाडु गांव म 68 एकड़ क े जल- सार े क े साथ 100 एकड़ क े े म झींगे( ॉन) क खेती शु क । इसने यथ बीमा क ं पनी से 7-10.09.1994 से पांच मह ने क अविध क े िलए अपने संचालन म सभी 37 तालाब क े संबंध म बीमा कवरेज ा कया, जसम 22,67,000 झींगे शािमल थे, जसका अिधकतम बीिमत मू य. 1,20,00,000/- था। अपीलकता ने. 12,240/- क े व य कर क े साथ. 2,44,800/- क े क ु ल ीिमयम का भुगतान कया और उसे 25.11.1994 को यथ बीमा क ं पनी ारा 'खारा पानी झींगा बीमा पॉिलसी' जार क गई। बीमा क े समय, झींगे क े लावा को पीएल 20 चरण म बताया गया था और तालाब म उनक े भंडारण क तार ख 7- 10.09.1994 थी। बीमा पॉिलसी ने संक े त दया क वजन क े संदभ म 22,67,000 झींगा लावा क े िलए अपे त उपज 80.400 कलो ाम थी और पूण आकार म, झींग का औसत शर रक वजन 11 ाम से 33.[5] ाम तक था। फसल कटाई क संभा वत तार ख 07-02-1995 से 11-02-1995 तक थी। पॉिलसी म ावधान कया गया था क बीमा अविध को पखवाड़े म वभा जत कया जाएगा और येक क ै लडर मह ने को दो पखवाड़े क े प म माना जाएगा, चाहे मह ने म कतने भी दन ह । नीित म यह भी िनधा रत कया गया है क इसक े अंतगत कवर कए गए कसी भी संकट क े कारण होने वाली हािन को, य द कसी वशेष चरण पर हािन ितशत तालाब म झींग क क ु ल आबाद क े 80% क े बराबर या उससे अिधक था, क ु ल हािन माना जाएगा और य द कसी भी कवर कए गए खतरे क े कारण तालाब म हािन ितशत 80% से कम था तो नीित क े तहत कोई दावा वीकाय नह ं होगा। पॉिलसी म एक अलग तािलका संल न क गई थी, जो बीमा पॉिलसी ारा कवर कए गए दस पखवाड़े क े दौरान बीमा रािश क े ितशत क े संदभ म अिधकतम देयता को दशाती है।

3. तब तक, आं देश क े पूव तट पर ' हाइट पॉट डजीज' नामक एक जीवाणु रोग का बड़ा कोप हुआ, जसक े कारण अपीलकता क े खेत स हत े म झींग क बड़े पैमाने पर मृ यु हो गई। इसक े कारण अपीलकता ारा बीमा पॉिलसी का आ ान कया गया। हालां क, अपीलकता ारा इसक े तहत दावा तुत करने और उसक े वयं क े कहने पर दो अलग-अलग सव ण कए जाने क े बाद, यथ बीमा क ं पनी ने 15.07.1997 क े प क े तहत अपीलकता क े दावे को पूर तरह से अ वीकार कर दया। बीमा क ं पनी क े अनुसार, अपीलकता ारा पॉिलसी शत का उ लंघन कया गया था, य क रकॉड ठ क से और सट क प से बनाए नह ं रखा गया था; सव ण क े समय रकॉड को तुत नह ं कया गया था; और जो भी रकॉड पेश कए गए वे िनराधार थे।

4. इससे यिथत होकर, अपीलकता ने रा ीय उपभो ा ववाद िनवारण आयोग, नई द ली [सं ता क े िलए, 'एनसीड आरसी'] क े सम 1996 क मूल यािचका सं या 55 था पत क । अपीलकता ने उसे हुई हािन क े िलए. 75,98,362/- पये क रािश क े साथ-साथ 24% ित वष क दर से याज और 10,00,000/- पये क े मुआवजे क े साथ ाथना क । दनांक 29.04.2004 क े समान आदेश ारा, एनसीड आरसी ने अपीलकता क 1996 क मूल यािचका सं या 55 और 1996 क मूल यािचका सं या 54, जो आं देश क े वशाखाप नम क े एक समान प से थत झींगा कसान ी वीवी रामा राजू ारा यथ बीमा क ं पनी क े खलाफ दायर क गई थी, का िनपटान कर दया। एनसीड आरसी ने इसम एक प िन कष दज कया क यथ बीमा क ं पनी ारा अपीलकता क े दावे का खंडन अनुिचत था। यह उ लेख कया गया क 25.11.1994 को बीमा क ं पनी क े व र अिधका रय ारा अपीलकता क े तालाब क े गहन िनर ण क े बाद बीमा कवरेज दान कया गया था, जो सभी मामल म पूर तरह से संतु थे, और उसक े बाद ह, ीिमयम क े भुगतान पर पॉिलसी जार क गई थी। इसिलए एनसीड आरसी ने राय य क क बीमा क ं पनी क ओर से यह आरोप लगाना पूर तरह से अनुिचत था क अपीलकता 2-3.12.1994 को उिचत रकॉड नह ं रख रहा था। दो सव क क रपोट का संदभ िलया गया और उनम से एक ारा सुझाए गए बचाव मू य को वीकार करते हुए, एनसीड आरसी ने कहा क अपीलकता 01.07.1995 से वसूली तक 9% ित वष क दर से याज क े साथ. 17,64,097/- क रािश का हकदार था। झींगा उगाने वाले अ य कसान ी वी.वी. रामा राजू ारा दायर 1996 क मूल यािचका सं या 54 का भी इसी तज पर िनपटान कया गया और उ ह 9% ित वष क दर से याज क े साथ. 24,97,609/- क रािश दान क गई।

5. एनसीड आरसी ारा पा रत समान आदेश से असंतु, दावेदार और बीमा क ं पनी दोन ने 2004 क िस वल अपील सं या 5294, 7091, 8051 और 4182 क े एक बैच क े मा यम से इस यायालय का दरवाजा खटखटाया। दनांक 10.11.2009 क े आदेश ारा, इस यायालय ने अपील का िनपटान करते हुए कहा क एनसीड आरसी ने दावेदार को भुगतान कए जाने वाले याज स हत मुआवजे क उिचत गणना नह ं क थी। तदनुसार, इस मामले को एनसीड आरसी को ित े षत कर दया गया ता क इस संबंध म शी िनणय िलया जा सक े ।

6. यह इस ित ेषण आदेश क श थी जसक े आधार पर एनसीड आरसी ने फर से दावेदार को भुगतान क जाने वाली रािश और उ ह दए जाने वाले याज क मा ा का िनधारण करने क कवायद क, जसक े प रणाम व प वह आदेश हुआ जसे अपीलकता ारा वतमान म आ े पत कया गया है। जहां तक अपीलकता का संबंध है, एनसीड आरसी ने बीमा क ं पनी ारा मैसस क एंड फ े यर इ वे टगेटस, राजमुंदर से ा दनांक 01-09-1995 क सव ण रपोट पर यान दया, जसम यह पु क गई क यह बीमार क े कारण गंभीर नुकसान का मामला था। एनसीड आरसी ने आं देश, वशाखाप नम क े े ीय उप िनदेशक और म य शाखा, वशाखाप नम क े िनर क ारा जार दनांक 01.05.1995 क े मृ यु माण प पर भी यान दया, जसने मा णत कया क मृत झींग का क ु ल वजन 50,585 कलो ाम था; मृत झींग का औसत शर रक वजन 17.78 ाम येक था; और यह क मृ यु क े समय झींग का क ु ल मू य, खच कए गए खच क े संदभ म,. 94,97,952/- था। झींग क मौत का कारण इस माण प म ' हाइट पॉट रोग' क े प म दज कया गया था। जहां तक बीमा क ं पनी ारा ए.आर. राव, पी.एस. रामनाथन और बी. नागे र राव क ट म से ा दनांक 22.09.1995 क दूसर सव ण रपोट का संबंध है, एनसीड आरसी ने पाया क उसम दए गए कई िन कष/ ट प णयां मू य िनणय/अनुमान क कृ ित म थीं, जो अिभलेख पर मौजूद सा य या यहां तक क रपोट क साम ी ारा समिथत नह ं थीं। एनसीड आरसी ने इन सव क क इस ट पणी को क अपीलकता स हत सभी या कसी भी कसान ारा रकॉड तुत नह ं कए गए थे, एक ‘ यापक ट पणी’ क े प म खा रज कर दया। ऐसा कहने क े बाद, एनसीड आरसी ने आ यजनक प से इन सव क ारा येक झींगे क े औसत शर र क े वजन का अनुमान 9.086 ाम और उसक े आधार पर क ु ल नुकसान का मू यांकन. 30,69,486.80/- क े प म वीकार कया। एनसीड आरसी ने हालां क इन सव क ारा ता वत इस रािश म से कटौती को खा रज कर दया और अपीलकता क े क ु ल नुकसान का आकलन. 30,69,486.80/- क े प म कया। िशकायत क तार ख से 10% ित वष क दर से उस पर साधारण याज दया गया था। रािश क मा ा और उस पर दए गए याज से असंतु, अपीलकता फर से इस यायालय क े सम है।

7. गौरतलब है क बीमा पॉिलसी ने ह वीकाय नुकसान क गणना क विध दान क थी। इसम िन नानुसार कहा गया है:- नुकसान क थित म, सब कार का नुकसान समायोजन घो षत मू य/इकाई लागत क े आधार पर या िन व लागत (उ पादन लागत) क े आधार पर, जो भी कम हो, कया जाएगा। कसी हािन को वीकाय बनाने क े िलए सहमत मृ यु दर नुकसान से पहले क तार ख तक अविश टॉक पर होगी। अविश मा ा लागू पखवाड़े क े िलए मू यांकन तािलका क े अनुसार संचयी मृ यु दर ितशत क े अनुसार या तालाब रकॉड क े अनुसार वा त वक होगी, जो भी कम हो।

8. इसिलए, वीकाय नुकसान क गणना करने क े तीन तर क े ह:– (i) िन व लागत विध: नुकसान क तार ख पर िनवेश क े मू य का 80%। (ii) इकाई लागत विध: वा त वक उ रजी वता सं या क गणना नुकसान से पहले क तार ख पर क जाती है। चिलत औसत शर रक वजन को उस सं या पर लागू कया जाता है और फर. 1.50 ित कलो ाम क इकाई लागत से गुणा कया जाता है। (iii) पा क मू यांकन विध: चूं क फसल अविध दस पखवाड़े तक थी, इसिलए पहले पखवाड़े म वीकाय अिधकतम दावा बीिमत रािश का 25% है और पखवाड़ म आनुपाितक प से बढ़ता है।

9. वीकाय नुकसान उपरो तीन गणना विधय क े बल पर गणना कए गए मू य का यूनतम है। अपीलकता ारा नुकसान क े िन निल खत मू य को िनकाला गया था:- िन व लागत विध –. 75,98,361/-; इकाई लागत विध –. 75,87,750/-; और पा क मू यांकन विध –. 79,20,000/- हालां क, यथ बीमा क ं पनी उसी को चुनौती देती है। इस कार, सं म मु ा मु य प से उपयु तीन प ितय क े संदभ म अपीलकता को देय बीमा रािश क मा ा िनधा रत करना है।

10. जैसा क यहां पहले उ लेख कया गया है, एनसीड आरसी ने तीन सव क क दनांक 22.09.1995 क रपोट क े एक ह से पर भरोसा करना उिचत समझा, बावजूद इसक े क इसम क गई कई ट प णय को आधारह न मू य िनणय और अनुमान क े प म खा रज कर दया गया था। ऐसी थित म, उन मू यांकनकताओं ारा मू यांकन कए गए येक झींगे का औसत शर रक वजन समान प से सं द ध था। यह भी यान दया जा सकता है क मैसस क एंड फ े यर इ वे टगेटस क दनांक 01-09-1995 क पूव रपोट ने मृत झींग /बचे गए झींग क े शर र का औसत वजन 10 ाम से 12 ाम क े बीच होने का अनुमान लगाया था। इस रपोट म यह भी दज कया गया है क समु जीव संसाधन वभाग क े ोफ े सर एम. रामा शेषैया ने 02.12.1994 को अपीलकता क े झींगे क े फाम का दौरा कया था और देखा था क जब 6 से 8 तालाब म क चा जाल खींचा गया था, तो बच गए झींगे/मृत झींगे येक का वजन 12 ाम से अिधक नह ं था। इसी तरह, सीएमईआरआई क े वै ािनक डॉ. जी. सुधाकर राव ने कहा था क मृत झींग का औसत वजन 10 ाम से अिधक नह ं था। यह एक वीकृ त त य है क मृ यु क े बाद झींग क े शर र का औसत वजन तेजी से कम होगा। इसिलए, य द पहले क सव ण रपोट म मृत झींग क े शर र का औसत वजन 10 ाम से 12 ाम क े बीच रखा गया था, तो जी वत रहते हुए उनका वजन कह ं अिधक होता। यह अनुमान म य िनदेशालय, आं देश, वशाखाप टनम ारा दनांक 01.05.1995 को जार मृ यु माणप से पु होता है, जसने पु क क मृ यु/नुकसान क े समय येक झींगे का औसत वजन 17.78 ाम रहा होगा। यह आंकड़ा अिधक ता कक और वीकाय है, य क बीमा पॉिलसी म ह उपज क े समय झींगे क े शर र का औसत वजन 33 ाम तक जाने क प रक पना क गई थी, जो घातक बीमार क े कोप क े िसफ दो मह ने बाद था।

11. यथ बीमा क ं पनी दनांक 01.05.1995 क े पूवघो षत मृ यु माण प से अपना प ला झाड़ना चाहती है और इसे पूर तरह से खा रज कर देना चाहती है। हालां क, यह यान दया जा सकता है क एनसीड आरसी क े सम दायर अपने िल खत बयान म, बीमा क ं पनी ने खुद कहा था क यह दावाकता/बीमाधारक का कत य है क वह समु उ पाद िनयात वकास ािधकरण (एमपीईड ए), वा ण य और उ ोग मं ालय, भारत सरकार या रा य म य पालन वभाग से मृ यु माणप ा करे। बीमा क ं पनी ारा अपीलकता को संबोिधत अपने दनांक 17.04.1995 क े प का संदभ िलया गया था, जसम उसने बताया था क दावा प म यह प प से उ लेख कया गया था क मृ यु माणप पर एमपीईड ए अिधका रय या रा य म य पालन वभाग ारा ह ता र कए जाने चा हए और अपीलकता से इनम से कसी भी ािधकरण से माणप ा करने और इसे आगे क कारवाई क े िलए क ं पनी को तुत करने को कहा गया था। बीमा क ं पनी क े अपने िनदश और इन वतं िनकाय म से कसी से भी मृ यु माण प से जुड़े मू य और मह व क मौन मा यता क े आलोक म, म य िनदेशालय, वशाखाप टनम क े अिधका रय ारा जार दनांक 01.05.1995 क े मृ यु माण प को खा रज करने का वक प उसक े िलए खुला नह ं है। उ लेखनीय है क बीमा पॉिलसी क े खंड 10 क े तहत, दावा या क े तहत बीिमत य /दावेदार क े िलए म य िनदेशालय/एमपीईड ए क े अिधका रय ारा मा णत ववरण स हत मृ यु माणप क े साथ पूर तरह से भरा हुआ दावा प तुत करना आव यक था।

12. यान दया जाए, जनरल ए योरस सोसाइट िलिमटेड बनाम चंदूमुल जैन और एक अ य [एआईआर 1966 एससी 1644] क े मामले म, एक सं वधान पीठ ने बीिमत य क े संदभ म ट पणी क थी क बीमा क े अनुबंध म उबे रमा फाइ स, यानी स ावना, आव यक है। हाल ह म, जैकब पु नेन और एक अ य बनाम यूनाइटेड इं डया इं योरस क ं पनी िलिमटेड [(2022) 3 एससीसी 655] म, इस यायालय ने मॉडन इ सुलेटस िलिमटेड बनाम ओ रएंटल इं योरस क ं पनी िलिमटेड [(2000) 2 एससीसी 734] म पहले िनधा रत आदेश क पु क और दोहराया क यह बीमा कानून का मौिलक िस ांत है क अनुबंध करने वाले प ारा अ यिधक स ावना का पालन कया जाना चा हए; यह क स ावना कसी भी प को उन त य का खुलासा न करने से रोकती है ज ह प कार जानता है; और यह क बीिमत य क े खुलासा करेने क े कत य क तरह बीमा क ं पनी का भी कत य है क वे अपने ान क े भीतर सभी मह वपूण त य का खुलासा करे य क सदभावना का दािय व दोन पर समान प से लागू होता है। यह दािय व और कत य दोन प पर न क े वल बीमा क े अनुबंध क शु आत म ब क इसक े पूरे अ त व म और उसक े बाद भी होगा।

13. वतमान म इस मानक को लागू करते हुए, यह यान दया जा सकता है क 22.09.1995 क दूसरे सव क क रपोट म अपीलकता क े नुकसान क मा ा. 17,64,097/- िनधा रत होने क े बावजूद, यथ बीमा क ं पनी ने अपीलकता क े दावे को पूर तरह से अ वीकार करने का वक प चुना, जो पूर तरह से िनराधार दावे पर आधा रत था क अपीलकता उिचत रकॉड बनाए रखने और दान करने म वफल रहा था। यह इसक े पहले क े सव क, मैसस क एंड फ े यर इ वे टगेटस क े इस प िन कष क े बावजूद भी था, क अपीलकता को पूण नुकसान उठाना पड़ा था। इसक े अलावा, इसक नीित और इसक िनधा रत दावा या म एमपीईड ए/रा य मा यक वभाग ारा दए गए मृ यु माणप को अ यिधक मह व देने पर भी, बीमा क ं पनी ने वशाखाप टनम म रा य म य पालन वभाग क े अिधका रय ारा तुत दनांक 01.05.1995 क े मृ यु माण प को दर कनार कर दया। क े वल इसिलए क इसक वषय-व तु उसक े हत क े अनु प नह ं थी, बीमा क ं पनी इसे नजरअंदाज नह ं कर सकती थी और इसे छ ु पा नह ं सकती थी। इसक े अलावा, इस तरह क े माणीकरण मह वपूण कद क े िन प और वतं िनकाय ारा कए जा रहे थे और शायद, यह कारण था क बीमा क ं पनी ने अपने मानदंड म इसे इतना मह व दया था। कसी भी थित म, कसी बीमा क ं पनी क े िलए यह वक प खुला नह ं है क यायासंगत अपवाद क े अधीन, वह कसी माणप या द तावेज को अनदेखा करे या उस पर कारवाई करने म वफल रहे, जसे उसने वयं वतं और िन प अिधका रय से मांगा था क े वल इसिलए क वह इसक े खलाफ है या इसक े िलए नुकसानदायक है। विन द थितय म संभा वत नुकसान क े िलए बीिमत य को ितपूित करने का वचन देने क े बाद, एक बीमा क ं पनी से उ मीद क जाती है क वह अपने वादे को सह और िन प तर क े से पूरा करेगी और न क े वल अपने वयं क े मुनाफ े क देखभाल और इसक पूित करेगी। यवहा रक प से, म य िनदेशालय, वशाखाप टनम ारा जार दनांक 01.05.1995 क े मृ यु माण प पर कारवाई करने से इनकार करने वाली बीमा क ं पनी क कारवाई को वीकार नह ं कया जा सकता है।

14. आ े पत आदेश क े पैरा 21 म अपीलकता ारा क गई और एनसीड आरसी ारा दज गणनाएं, अथात. 75,98,361/- (िन व लागत विध क े अनुसार) और. 75,87,750/- (इकाई लागत विध क े अनुसार) दनांक 01.05.1995 क े मृ यु माणप म उ ल खत आंकड़ क े संदभ म सट क पाई गई ह। पा क मू यांकन विध क े अनुसार, नुकसान 79,20,000/- पये होगा। बेशक, अपीलकता उपयु तीन मू यांकन म से यूनतम. 75,87,750/- का हकदार होगा। चूं क यथ क ं पनी ने अपीलकता को एनसीड आरसी ारा आ े पत आदेश म िनधा रत रािश अथात. 30,69,486.80/- का भुगतान पहले ह कर दया होगा, इसिलए अपीलकता. 45,18,263.20/- क शेष रािश ा करने का हकदार होगा। अपीलकता क े दावे को िन प और समयब तर क े से िनपटाने म बीमा क ं पनी क ओर से देर इसे यायसंगत ठहराती है क वह इस आदेश क े संदभ म अपीलकता को बकाया और देय रािश पर याज का भुगतान करे।

15. य प अपीलकता का दावा है क व ीय वष 1995-1996 क े दौरान बक जमा याज दर 12% से 13% क े बीच थीं, हम इस संबंध म भरोसा कए गए आरबीआई क े बयान से पाते ह क व ीय वष 1994-95 क े िलए याज दर 11% थी और वष 1996-97 क े िलए, यह 11% से 13% क े बीच थी। ऐसा होने पर, एनसीड आरसी ारा िनधा रत याज दर अथात 10% को उिचत और यायसंगत माना जाता है।

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16. यथ बीमा क ं पनी ारा. 45,18,263.20/- क रािश अपीलकता को उस पर िशकायत क तार ख से वसूली क तार ख तक 10% क दर से साधारण याज क े साथ, आज से छह स ाह क े भीतर दान क जाए। तदनुसार अपील का िनपटान कया जाता है। प कार अपनी लागत वयं वहन करगे।................................................ या., [ए.एस. बोप ना]................................................ या., [संजय क ु मार] नई द ली; 8 अग त, 2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी।