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Supreme Court of India · 01 Aug 2023
A. S. Bopanna; M. M. Sundresh
Civil Appeal Nos. 1162-1171 of 2016
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the validity of amendments to Rajasthan's mineral concession rules replacing 'first come, first served' with auction and lottery, holding no vested right exists in prior applicants and emphasizing the State's regulatory authority.

Full Text
Translation output
रपोट करने यो य
भारत का सव च यायालय
स वल अपील य े ा धकार
स वल अपील सं या 1162-1171/2016
राज थान रा य एवं अ य - अपीलाथ
बनाम
वण क
ु मार क
ु मावत एवं अ य - यथ

े साथ
सीए सं या 1212-1214/2016
सीए सं या 1207-1211/2016
सीए सं या 1202-1206/2016
सीए सं या 1182-1186/2016
सीए सं या 1172-1176/2016
सीए सं या 1177-1181/2016
सीए सं या 1187-1189/2016
सीए सं या 1197-1199/2016
सीए सं या 1195-1196/2016
सीए सं या 1200-1201/2016
सीए सं या 1190-1194/2016
नणय
एम. एम. सुंदरेश, याया धप त
JUDGMENT

1. इन सभी अपील म अपीलकता राज थान उ च यायालय, जयपुर पीठ क ख ड पीठ क े उस नणय को पलट देना चाहते ह िजसम उसने राज थान लघु ख नज रयायत नयम, 1986 (इसक े बाद नयम क े प म संद भत) क े नयम 4 क े उप- नयम (10) और नयम 7 क े उप- नयम (3) को असंवैधा नक घो षत कया था।

2. अपीला थय क ओर से व र ठ अ धव ता डॉ. मनीष संघवी और तवाद क ओर से अ धव ता सु ी शोभा गु ता और अ धव ता सु ी अं कता गु ता उपि थत हु । नयम का ववरण:

3. खान और ख नज ( वकास और व नयमन) अ ध नयम, 1957 (इसक े बाद "1957 अ ध नयम" क े प म संद भत) क खंड 15 वारा द शि तय का योग करते हुए थम अपीलकता वारा खदान लाइसस, खनन प ट और अ य ख नज रयायत क े अनुदान को व नय मत करने क े लए नयम को क़ानून म लाया गया था। नयम का दूसरा अ याय प ट क े अनुदान से संबं धत है। नयम 7 क ु छ यि तय क े तरजीह अ धकार क बात करता है। उ त नयम क े अनुसार, 28.01.2011 पर कए गए संशोधन से पहले अि त व म, एक आवेदक को अपना आवेदन समय से पहले कए जाने क े एकमा आधार पर दूसर पर तरजीह अ धकार होगा। यह तरजीह अ धकार कसी सरकार क ं पनी या नगम से आवेदन ा त होने पर उपल ध नह ं कराया गया था। यह यान दया जाना चा हए क यह नयम सामा य प से नयम म उ चत संशोधन करने म पहले अपीलकता क े रा ते म नह ं आता है। नयम 7 क े उप- नयम (2) ने सं थाओं क एक सूची दान क है, जो ाथ मकता क े आदेश पर प टे क े हकदार ह।

4. उपरो त नयम म संशोधन कए गए। दनांक 1 क अ धसूचना वारा, नयम 4 म उप- नयम (10) पेश कया गया था, िजसम यह शत रखी गई थी क संगमरमर और ेनाइट को छोड़कर कसी सरकार भू म म खनन प टा नह ं हो सकता है, जब तक क े का सीमांकन नह ं कया जाता है और उसक े बाद आवेदन आमं त कए जाते ह। हालां क, परंतुक म कहा गया है क अ धसूचना क तार ख को लं बत आवेदन का नपटान इससे पहले क े च लत नयम क े अनुसार कया जाएगा। शायद यह उ च यायालय वारा पा रत आदेश क गलत समझ क े कारण हुआ होगा।

5. उप- नयम (3) क े त थापन क े मा यम से नयम 7 म एक और संशोधन कया गया था।(3) उपरो त उप नयम (1) और (2) म क ु छ भी न हत होने क े बावजूद, संगमरमर और ेनाइट क े अलावा अ य ख नज क े लए सरकार भू म म खनन प टे क े लए े नयम 73 क े तहत प रसीमन क े बाद आवंटन क े लए आर त कया जाएगा। नई णाल अ धसूचना जार होने क तार ख से भावी होगी और अ धसूचना से पहले ा त आवेदन का नपटान इस अ धसूचना से पहले लागू च लत नयम क े अनुसार कया जाएगा। प रसीमन से पहले वभाग वारा सभी आव यक एन. ओ. सी. खर दे जाएंगे। इन सीमां कत भूखंड म से 50 तशत नीलामी वारा आवं टत कए जाएंगे और शेष 50 तशत न न ल खत े णय क े यि तय को आवं टत कए जाएंगे, येक ेणी क े खलाफ इं गत तशत क े अनुसारः - (i) ऐसे यि त जो शर/ख नज आधा रत उ योग था पत करने का काय करते ह; 10 तशत (ii) खान म कायरत अनुसू चत जा तय /अनुसू चत जनजा तय /अ य पछड़े वग / वशेष पछड़े वग से संबं धत मैनुअल मक; 5 तशत (iii) खान म अनुसू चत जा तय /अनुसू चत जनजा तय /अ य पछड़े वग / वशेष पछड़े वग क े अलावा अ य काम करने वाले मक; 5 तशत (iv) अनुसू चत जा त/अनुसू चत जनजा त/अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग क े यि त 20 तशत (v) गर बी रेखा से नीचे क े प म पहचाने गए यि त; 10 तशत (vi) राज थान से संबं धत अधसै नक बल क े सद य स हत पूव सै नक, जो थायी प से वकलांग हो गए ह या उन लोग क े आ त ह िजनक सेवा क े दौरान मृ यु हो गई है; 5 तशत (vii) राज थान रा य सरकार क े कमचार जो यूट क े दौरान थायी प से वकलांग हो गए ह या उन लोग क े आ त ह िजनक सेवा क े दौरान मृ यु हो गई है; 5 तशत (viii) राज थान क े बेरोजगार युवाओं क स म तयाँ; 30 तशत (ix) अ य यि त; 10 तशतआर त े म अ धसूचना क े 30 दन क े बाद आवेदन आमं त कए जाएंगे और अ धसूचना क े 30 दन क े बाद 30 दन क अव ध क े भीतर ा त आवेदन को उसी दन ा त माना जाएगा। आवेदन का नपटारा लॉटर क े मा यम से कया जाएगा। (vi) मौजूदा उप- नयम (4) क े बाद न न ल खत नया उप- नयम (5) जोड़ा जाएगा, अथात ्ः - "(5) य द कसी ऐसे ठेक े दार से अ पका लक अनुम त आवेदन ा त होता है िजसे रा य/रा य राजमाग (सड़क नमाण प रयोजना) क े लए काम दया गया है, तो उसे खनन प टे क े आवेदन पर ाथ मकता द जाएगी। अ पका लक पर मट आवेदन क तार ख से 3 मह ने पहले क अव ध न न ल खत शत क े अधीन - (ए) अनुबंध देने क तार ख से 6 मह ने क े भीतर अ पका लक पर मट आवेदन दायर कया गया है; (ख) रा य/रा य राजमाग (सड़क नमाण प रयोजना) आवेदन कए गए अ पका लक पर मट े से 100 क. मी. से अ धक दूर नह ं है; और (ग) अ पका लक अनुम त नयम 63 क शत क े अधीन होगी। बशत क यह उप नयम (5) 31 माच, 2012 तक लागू रहेगा और इसक े बाद सरकार वारा उनक फर से समी ा क जाएगी।"

6. पहल बार, थम अपीलकता ने नीलामी क या शु करना उ चत समझा, जब क यह प ट कया क 27.01.2011 से पहले ा त आवेदन का नपटान पहले लागू च लत नयम क े अनुसार कया जाएगा।

7. उपरो त नयम म अ धसूचना दनांक 03.04.2013 वारा से और संशोधन कया गया, िजसक े वारा सभी लं बत आवेदन को अ वीकार कया जाना है। नयम 4 उप- नयम (10): "(10) सरकार भू म म कोई भी खनन प टा, िजसम वन भू म भी शा मल है, िजसक े लए क सरकार वारा वन (संर ण) अ ध नयम, 1980 क े तहत मोड़ दया जाता है, आवेदक वारा आवेदन पर तब तक नह ं दया जाएगा जब तक क े का सीमांकन नह ं कया जाता है और सरकार वारा आवेदन आमं त नह ं कए जाते ह। नयम 3एन या नयम 11 क े उप- नयम (1) क े तहत तरजीह अ धकार रखने वाले यि त वारा तुत आवेदन को छोड़कर, िजनक े संबंध म नयम 19 क े अनुसार प टा वलेख न पा दत नह ं कया गया है, वे सभी आवेदन जो 27-01- 2011 तक सरकार भू म म तुत कए जाते ह, अ वीकार कर दए जाएंगे।" नयम 7 उप- नयम (1):

7. प टा देने क याः-(1) सरकार भू म म, खनन प टा पहले े का प रसीमन कए जाने क े बाद दया जाएगा, भूखंड को उपयु त प से मां कत कया जाएगा और आवेदन आमं त करने वाल अ धसूचना दो दै नक समाचार प म का शत क जाएगी, िजनम से कम से कम एक रा य तर पर है और दूसरा उस े म यापक चार करता है जहां प टा आवं टत कया जा रहा है। अ धसूचना आवेदन आमं त करने क इि छत त थ से कम से कम 30 दन पहले का शत क जाएगी और इसम वह त थ या अव ध होगी िजसक े भीतर आवेदन ा त कए जाएंगे। नयम 23ए क े उप- नयम (3) क े तहत ग ठत स म त क े इन न द ट भूखंड म से 50 तशत भूखंड आर त ह गे जो नीलामी/ न वदा वारा आवं टत कए जाएंगे और शेष 50 तशत येक ेणी क े खलाफ उि ल खत तशत क े अनुसार न न ल खत े णय क े यि तय को लॉटर क े मा यम से आवं टत कए जाएंगेः - (i) ऐसे यि त जो शर/ख नज आधा रत उ योग था पत करने का काय करते ह; 10 तशत (ii) खान म कायरत अनुसू चत जा त/अनुसू चत जनजा त/अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग से संबं धत शार रक मक और शार रक मक क वधवाएँ; 5 तशत (iii) खान म कायरत अनुसू चत जा तय /अनुसू चत जनजा तय /अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग क े अलावा मैनुअल मक और मैनुअल मक क वधवाएँ; 5 तशत (iv) अनुसूची जा त/अनुसूची जनजा त/अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग से संबं धत यि त; 20 तशत (v) "गर बी रेखा से नीचे" क े प म पहचाने गए यि त; 10 तशत (vi) राज थान से संबं धत अधसै नक बल क े सद य स हत वतं ता सेनानी/पूव सै नक जो थायी प से अ म हो गए ह या सेवा म रहते हुए मारे गए लोग क े आ त ह; 5 तशत (vii) राज थान रा य सरकार क े कमचार जो यूट क े दौरान थायी प से वकलांग हो गए ह या उन लोग क े आ त ह िजनक सेवा क े दौरान मृ यु हो गई है; 5 तशत (viii) उपरो त े णय (vi) और (vii) म शा मल यि तय क े अलावा वकलांग यि त ( वकलांग यि त); 5 तशत (ix) राज थान क े बेरोजगार युवाओं क स म तयाँ; और 25 तशत (x) अ य यि तः 10 तशत बशत क ख नज बाजर क े लए खनन प टे क े वल न वदा या नीलामी क े मा यम से दए जाएंगे।

8. हम डॉ. संघवी वारा बार म सू चत कया गया है क इन नयम म भी ई-नीलामी क े मा यम से एक नई या बनाने क े लए और संशोधन कए गए ह। उ त नवेदन पर यान देते हुए, हम उस संबंध म क ु छ नह ं कहना चाहते ह।

9. अंत म, ववा दत नयम, जो क दो काय करता ह-नीलामी क या जो पहले मौजूद थी, और जो सभी लं बत आवेदन को एक समान अवसर दान करता था, अथात पहले आओ पहले पाओ क े आधार पर वचार कया जाता था, वो नर त घो षत कया गया । पृ ठभू म त यः

10. अपीला थय वारा दनांक 23.05.2003 क अ धसूचना क े मा यम से लघु ख नज को प टे पर देने क े लए आवेदन आमं त कए गए थे। सैकड़ लोग ने अपने आवेदन कए। दनांक 5 क अ धसूचना 23.05.2003 क े बाद दनांक 24.04.2007 क अ धसूचना जार क गई िजसम चार गाँव क े लए कए गए आवेदन को नयम क े नयम 65ए क े तहत द शि त का योग करते हुए खा रज कर दया गया। नए आवेदन क े बाद प रसीमन क कवायद शु होने क उ मीद थी। इस कार, यह अ धसूचना, और बाद क अ धसूचना, े क त है, जो चार गाँव तक सी मत है और वह भी बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए जो पहले वाले क े उप-उ पाद क े अलावा और क ु छ नह ं है। क ु छ आवेदक वारा राज थान उ च यायालय क े सम रट या चकाएं दायर क गई थीं। तदनुसार उ ह अनुम त द गई थी, अ य बात क े साथ-साथ यह मानते हुए क इस तरह का तबंध क े वल चार िजल क े लए लागू होता है और कानून क नजर म इसे बनाए नह ं रखा जा सकता है य क ख नज वकास क े क थत हत म नयम क े नयम 65ए को लागू करने क े लए कोई साम ी उपल ध नह ं है। दनांक 1 क अ धसूचना को र द करते हुए, उ च यायालय ने वशेष प से अपीला थय को नदश दया क वे उसम रट या चकाकताओं क े आवेदन को पुनज वत कर और उन पर कानून क े अनुसार वचार कर।

11. 21.05.2009 पर उ च यायालय वारा पा रत आदेश क े बाद, 28.01.2011 क अ धसूचना क े मा यम से नयम म संशोधन कए गए, जैसा क हमने पहले उ लेख कया था। इसक े बाद, उ च यायालय क े आदेश क े अनुपालन म, उ च यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले उन आवेदक को राहत देने क े लए 16.11.2011 पर एक सरकार आदेश पा रत कया गया। कसी भी प टे क े अनुदान से पहले चनाई प थर क े आवेदक वारा रॉय ट क े भुगतान क े लए एक प रणामी सरकार आदेश भी 28.11.2011 पर पा रत कया गया था। इन दोन आदेश को रट या चकाकताओं क े अलावा क ु छ अ य आवेदक वारा पहले क े दौर म चुनौती द गई थी, अ य बात क े साथ-साथ यह तक देते हुए क समान लाभ उ ह भी दए जाने चा हए।

12. उ च यायालय ने दनांक 13.03.2013 का एक आदेश पा रत कया, िजसम कहा गया था क पहले क े नणय को आर. ई. एम. म एक नणय क े प म माना जाना चा हए, ले कन इस शत क े अधीन क सभी लं बत आवेदन पर नयम 4 और 7 क अ धसूचना दनांक 28.01.2011 वारा कए गए संशोधन क े अनुसार वचार कया जाना चा हए। "(i) क यथ रा य छह मह ने क अव ध क े भीतर रेत प थर और चनाई प थर क े लए उपल ध सभी खनन े का प रसीमन, सीमांकन और न द ट करने का काय करेगा, जैसा क व वान अ त र त महा धव ता वारा रा य क ओर से कहा गया है। (ii) इसक े बाद, रा य सरकार बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए खनन प ट क े अनुदान क े लए ऐसे च त े को इस शत क े साथ फर से अ धसू चत करेगी क य द चनाई प थर क े लए दए गए खनन प ट म बलुआ प थर भी उपल ध पाया जाता है तो बलुआ प थर क े लए रॉय ट और मृत कराए का भुगतान लागू होगा। (iii) क ऐसे खनन प ट क े लए अब तक दायर कए गए सभी आवेदन को पुनज वत और आगे क े आवेदन क े साथ माना जाएगा, जो अब बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए खनन प ट क े लए उपल ध च त े क े इस तरह क े पुनः अ धसूचना पर दायर कए जा सकते ह। पहले क े आवेदक को अपने पहले क े आवेदन को वापस लेने और इस तरह क े पुनः अ धसूचना क े अनुसरण म नए आवेदन दायर करने क वतं ता होगी। (iv) क उपरो त पैरा 10 (viii) क े अनुसार रा य सरकार क े तु तकरण क े अनुसार उस रा य ने अब तक ववा दत आदेश क े अनुसरण म कोई कारवाई नह ं क है, यह नदश दया जाता है क ववा दत आदेश अनुल नक क े अनुसरण म बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए कोई खनन प टा नह ं दया जाएगा। 11 दनां कत 16/11/2011 और अनुल नक। 13 दनांक 28/11/2011 जब तक क इस नणय म दए गए नदश क े अनुसार ऐसे सभी आवेदन पर नणय नह ं लया जाता है। (v) क सभी आवेदन पर आज से एक वष क े भीतर एम. एम. सी. आर., 1986 क े संशो धत नयम 7 (3) क े अनुसार लॉटर क े आधार पर या नीलामी क े मा यम से नणय लया जाएगा, िजसे रा य सरकार वारा उ चत माना जा सकता है, ले कन 'पहले आओ पहले पाओ' स धांत क े आधार पर नह ं।"

13. मुकदमेबाजी क े पहले दौर क तरह, दूसरे दौर म भी पा रत आदेश को चुनौती नह ं द गई और इस लए दोन ह अं तम हो गए। यह यान देने यो य है क उ च यायालय ने 7 अपीला थय को खनन प टा देने क े लए पहले आओ पहले पाओ क े आधार को अपनाने का नदश देकर या चकाकताओं को राहत नह ं द, ले कन क े वल संशो धत नयम क े अनुसार।

14. पा रत आदेश से संक े त लेते हुए, 03.04.2013 पर एक और अ धसूचना जार क गई िजसम ववा दत संशोधन को पेश कया गया। जैसा क कहा गया है, सभी आवेदन को खा रज घो षत कर दया गया था, जब क नीलामी वारा से प ट क े 50 तशत अनुदान क सु वधा दान क गई थी, इसक े तहत उि ल खत े णय को छोड़कर जो वर यता क े हकदार ह। ववा दत आदेश वारा, उ च यायालय क ख ड पीठ ने संशोधन को तीन ाथ मक आधार पर अवैध घो षत कर दया, अथात ्- आवेदक क सुनवाई नह ं क गई है, और उनक े आवेदन को यायालय वारा वैध अपे ा और उनम न हत अ धकार क े स धांत पर पा रत पहले क े आदेश को देखते हुए पुनज वत कया जाना चा हए। अपीला थय का नवेदनः

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15. अपीला थय क ओर से पेश व र ठ अ धव ता डॉ. संघवी ने कहा क उ च यायालय क े पहले क े नणय क े वल छोटे ख नज और बलुआ प थर से संबं धत ह और वह भी चार िजल क े व श ट संदभ म। उ च यायालय ने ववा दत आदेश म इस त य पर यान नह ं दया,और सभी छोटे ख नज क े लए लागू होने वाले नयम को पूर तरह से र द कर दया। उ च यायालय क े पहले क े फ ै सल का व धवत पालन कया गया था, और इस लए इसक े वपर त न कष त या मक प से गलत है। इसे न हत होने का दावा करने क े लए कोई तरजीह अ धकार उपल ध नह ं है। तवाद ओं को खनन म मौ लक अ धकार नह ं हो सकता है। उ च यायालय त थापन क या वारा से नए नयम को लागू करने वारा से संशोधन से जुड़े मामले म वैध अपे ा और ाकृ तक याय को नयं त करने वाले स धांत म जाने म गलत है। उ ह ने आगे कहा क ववा दत आदेश को दर कनार कया जा सकता है य क वे रा य क े सभी छोटे ख नज क े लए लागू कए जा रहे नए संशो धत नयम क े माग म बाधा बनगे। उ रदाताओं का नवेदनः

16. तवाद क ओर से अ धव ता-ऑन- रकॉड सु ी शोभा गु ता और अ धव ता-ऑन- रकॉड सु ी अं कता गु ता ने कहा क उ च यायालय का यह मानना सह था क ववा दत संशोधन और क ु छ नह ं बि क यायालय क े पहले क े फ ै सले को दर कनार करने का यास है। दशक से आवेदन को लं बत रखने का कोई औ च य नह ं है। य द आवेदन पर पहले वचार कया जाता तो प टे दए जाते। तवाद वारा खनन क े लए मांगे गए े बहुत बड़े नह ं ह और इस लए उनक े आवेदन पर त काल न ासं गक नयम क े तहत वचार कया जाना चा हए। ववा दत नयम को लागू करने वारा से कानून म वेष है। प रचचाःसह न हत

17. यह बहुत हद तक तय है क कसी भी कार क भू म, िजस पर सरकार का न हत अ धकार और नयामक नयं ण है, म सरकार भू म या म ट क े नीचे क े ख नज क े प टे क मांग करने वाले आवेदन पर कोई अ धकार न हत नह ं है। दूसरे श द म, क े वल आईपीएसओ फ ै टो 9 आवेदन दा खल करने से कोई अ धकार नह ं बनता है। संशोधन करने क सरकार क शि त, एक वतं होने क े नाते, लं बत आवेदन रा ते म नह ं आते ह। न हत होने क े अ धकार क े लए एक वैधा नक मा यता होनी चा हए। इस तरह क े अ धकार को अिजत करना होगा और कसी भी नणय को प रणामी त पैदा करनी होगी। जब कसी स म ा धकार वारा नीलामी जैसी बेहतर या वक सत करक े जन हत म कोई नणय लया जाता है, तो सरकार भू म पर प टे क मांग करने वाले आवेदक का अ धकार, य द कोई हो, अपने आप वाि पत हो जाता है। एक आवेदक को ख नज क े लाइसस क े अनुदान क मांग करने का वशेष अ धकार नह ं हो सकता है जब तक क एक अ ध नयम वारा तदनुसार सु वधा दान नह ं क जाती है। त मलनाडु रा य बनाम हंद टोन और अ य, (1981) 2 एस. सी. सी. 205: - "13. नवीनीकरण क े लए आवेदन पर वचार करने क े संबंध म व वान अ धव ता का एक और नवेदन यह था क G.O.Ms सं या 1312 (2 दसंबर, 1977) क तार ख से साठ दन या उससे अ धक समय पहले कए गए आवेदन को इस तरह नपटाया जाना चा हए जैसे क नयम 8-सी लागू नह ं हुआ था। यह भी तक दया गया क G.O.Ms सं या 1312 क तार ख से बहुत पहले कए गए प ट क े लए आवेदन को भी ऐसे नपटाया जाना चा हए जैसे क नयम 8-सी लागू नह ं हुआ था। नवेदन यह था क सरकार प टे क े अनुदान और नवीनीकरण क े लए आवेदन को लंबे समय तक लं बत रखने और फर नयम 8-सी क े आधार पर उ ह अ त हण करना करने क े लए तैयार नह ं थी, इस त य क े बावजूद क आवेदन उस तार ख से बहुत पहले कए गए थे िजस दन नयम 8-सी लागू हुआ था। हालां क यह सच है क ऐसे आवेदन को उ चत समय क े भीतर नपटाया जाना चा हए, ले कन इस कारण से यह नह ं कहा जा सकता है क एक उ चत समय म एक आवेदन का नपटान करने का अ धकार एक आवेदक को प टे क े लए आवेदन करने क े अ धकार क े साथ आवेदन करने क े समय लागू नयम क े आधार पर नपटाने का अ धकार देता है। कसी को भी प टे क े अनुदान या नवीनीकरण का न हत अ धकार नह ं है और कोई भी वशेष ावधान को लागू करक े कसी वशेष तर क े से नपटाए गए प टे क े अनुदान या नवीनीकरण क े लए आवेदन करने क े न हत अ धकार का दावा नह ं कर सकता है। कसी म भी कसी भी न हत अ धकार क अनुपि थ त म म, प टा क े लए आवेदन को इस त य क े बावजूद क आवेदन करने म लंबी देर हुई है, आवेदन क े नपटारे क तार ख को लागू नयम क े अनुसार नपटाया जाना आव यक है। इस लए, हम व वान अ धव ता क े इस नवेदन को त हण करना करने म असमथ ह क G.O.Ms सं या 1312 क तार ख से बहुत पहले कए गए प ट क े नवीनीकरण क े लए आवेदन को इस तरह नपटाया जाना चा हए जैसे क नयम 8-सी मौजूद नह ं था।" (जोर दया गया) 10 मौ लक अ धकार

18. खनन म मौ लक अ धकार नह ं रखने वाले आवेदक का सवाल अब एक कृ त नह ं है, मोनेट इ पात एंड एनज ल मटेड बनाम भारत संघ, (2012) 11 एस. सी. सी. 1 क ु छ काश डाल सकता है, "खनन म कोई मौ लक अ धकार नह ं है

133. अपीलकताओं ने झारखंड सरकार (पूववत बहार) से संबं धत भू म म खनन प टे क े लए आवेदन कया है और यह लौह अय क क े लए है जो 1957 क े अ ध नयम क अनुसूची I म शा मल एक ख नज है, िजसक े संबंध म क सरकार क पूव मंजूर क े बना कोई खनन प टा नह ं दया जा सकता है। यह कहने क ज रत नह ं है क कोई भी यि त 1957 क े अ ध नयम और 1960 क े नयम क े अलावा सरकार से संबं धत कसी भी भू म या सरकार से संबं धत कसी भी भू म म कसी भी अ धकार का दावा नह ं कर सकता है। कसी भी यि त को यह दावा करने का कोई मौ लक अ धकार नह ं है क उसे सरकार से संबं धत कसी भी भू म म खनन प टा या पूव ण लाइसस या अनुम त ा त टोह संचालन दया जाना चा हए। ओ. च ना पा रे डी, जे. क े हंद टोन [(1981) 2 एस. सी. सी. 205] (एस. सी. सी. पी. 233, पैरा 6) म न न ल खत कथन को उ धृत करना उपयु त है, हालां क लघु ख नज क े संदभ म, "6. िजस जन हत ने संसद को खंड 2 म न हत घोषणा करने क े लए े रत कया, वाभा वक प से खान क े व नयमन और ख नज क े वकास से संबं धत सभी मामल म सव प र वचार होना चा हए। उ ह ने आगे कहाः ( हंद टोन मामला [(1981) 2 एस. सी. सी. 205], एस. सी. सी. पृ ठ 217, पैरा 10)"

10. िजस अ ध नयम से हम संबं धत ह, खान और ख नज ( वकास और व नयमन) अ ध नयम का उ दे य ख नज का संर ण और ववेकपूण और भेदभावपूण दोहन करना है। नि चत प से, दुलभ ख नज क े मामले म, रा य या उसक एजसी वारा दोहन क अनुम त देना और नजी एज सय वारा दोहन को तबं धत करना संर ण और ववेकपूण दोहन का सबसे भावी तर का है। य द आप भ व य क े लए संर ण करना चाहते ह, तो आपको वतमान म नषेध करना चा हए। (जोर दया गया) 11 वैध अपे ा

19. वैध अपे ा एक कमजोर और शांत अ धकार है जैसा क एक क़ानून वारा नधा रत कया गया है। जब सरकार सभी पा यि तय को समान शत पर चुनाव लड़ने क सु वधा दान करने क े लए नीलामी क े मा यम से न प खेल शु करने का नणय लेती है, तो नि चत प से कोई यह तक नह ं दे सकता है क वह क े वल एक लं बत आवेदन क े आधार पर प टे का हकदार है। अ धकार अ ध नयमी नह ं होने क े कारण, अि त वह न होने क े अलावा, यह नि चत प से लागू करने यो य नह ं हो सकता है। ट. एन. बनाम हंद टोन (1981) 2 एस. सी. सी. 205 म दशक पहले तय कए गए इन पहलुओं पर अ ध नयम क े स धांत को समय-समय पर दोहराया जा रहा है। मोनेट इ पात एंड एनज ल मटेड (ऊपर): - "वैध अपे ा क े स धांत

183. चूँ क वचन नरोध और वैध अपे ा क े स धांत क े बीच समानताएँ ह य क ये दोन स धांत न प ता क अवधारणा पर आधा रत ह और ाकृ तक याय से उ प न होते ह, इस लए यह उ चत है क वैध अपे ा क े स धांत को भी यहाँ क े वल वचन नरोध और वैध अपे ा क े स धांत क े आधार पर था पत अपीला थय क े मामले क सराहना करने क े लए देखा जाता है। XXX XXX XXX

188. इस यायालय क े नणय को गुणा करना आव यक नह ं है। यह देखने क े लए पया त है क वैध अपे ा क े स धांत क े संबंध म न न ल खत स धांत अब अ छ तरह से था पत ह◌ः XXX XXX XXX 188.[3] जहां कसी ा धकरण का नणय कायकार नी त या कानून क े अनुसार सावज नक हत म था पत कया जाता है, वहां यायालय वैध अपे ा क े स धांत को लागू करक े इस तरह क े नणय म ह त ेप करने क े लए अ न छ ु क होगा। य द ऐसा करना जन हत म है तो शास नक नी त म प रवतन को रोकने क े लए वैध अपे ा स धांत का उपयोग नह ं कया जा सकता है। 188.[4] वैध अपे ा याशा से अलग है और एक याशा एक मुखर अपे ा क े बराबर नह ं हो सकती है। ऐसी अपे ाएं यायो चत, वैध और संर ण यो य होनी चा हए। 188.[5] वैध अपे ा क े संर ण क े लए अपे ा क पू त क आव यकता नह ं होती है जहां एक मुख सावज नक हत अ यथा क आव यकता होती है। दूसरे श द म, यि तगत लाभ को सावज नक हत को रा ता देना चा हए और वैध अपे ा क े स धांत को लागू नह ं कया जाएगा जो नजी लाभ क े लए सावज नक हत को अव ध कर सकता है।" (जोर दया गया)

20. क े रल रा य पेय (एम एंड एम) नगम ल मटेड बनाम पी. पी. सुरेश, (2019) 9 एस. सी. सी. 710: -

14. तवाद क ओर से मु य तक यह था क सरकार अपने वादे से बंधी हुई थी और इससे पीछे नह ं हट सकती थी। उ ह नरंतर रोजगार क एक अ य वैध अपे ा थी, जो सरकार आदेश दनांक 20-2-2002 से उपजी थी िजसे वापस नह ं लया जा सकता था। उ रदाताओं क ओर से आगे यह तुत कया गया क िजन लाभ का वादा कया गया था, उसे छ नने से पहले उ ह कोई अवसर नह ं दया गया था। उ रदाताओं क े इस तक क सराहना करने क े लए, वैध अपे ा क अवधारणा को समझना आव यक है।

15. इस यायालय ने भारत संघ बनाम हंदु तान वकास नगम मामले म वैध अपे ा क े स धांत को मा यता द है। [(1993) 3 एस. सी. सी. 499] य द कसी ा धकार वारा कया गया वादा प ट, प ट और प ट है, तो कोई यि त यह दावा कर सकता है क ा धकरण को पूर न प ता से वादे क े वपर त काय नह ं करना चा हए।

16. एम. जग नाथ राव, जे. ने पंजाब क यु नक े शंस ल मटेड बनाम भारत संघ [(1999) 4 एस. सी. सी. 727] म वैध अपे ा पर व तार से प ट कया। उ ह ने उ लेख कया (एस. सी. सी. पीपी म। 741-42, पैरा 27) स वल सेवा संघ प रषद बनाम स वल सेवा मं ी [1985 ए. सी. 374: (1984) 3 ड यू. एल. आर. 1174: (1984) 3 ऑल ई. आर. 935 (एच. एल.)] क े नणय म िजसम लॉड ड लॉक ने कहा था क एक वैध अपे ा उ प न होने क े लए, शास नक ा धकरण क े नणय को यि त को क ु छ लाभ या लाभ से वं चत करक े भा वत करना चा हए जो, "27. (i) उसे अतीत म नणय नमाता वारा आनंद लेने क अनुम त द गई थी और िजसे वह वैध प से तब तक जार रखने क अनुम त देने क उ मीद कर सकता है जब तक क उसे इसे वापस लेने क े लए क ु छ तकसंगत आधार नह ं बताए गए ह, िजस पर उसे ट पणी करने का अवसर दया गया है; या (ii) उसे नणय नमाता से आ वासन मला है क उ ह पहले यह तक देने क े लए कारण दए बना वापस नह ं लया जाएगा क उ ह वापस नह ं लया जाना चा हए। (एसी पी. 408)"

17. राव, जे. ने इस मामले म कहा क वैध अपे ा का या मक भाग एक अ यावेदन से संबं धत है क नणय लेने से पहले सुनवाई या अ य उपयु त या क जाएगी। स धांत का मूल भाग यह है क य द यह त न ध व कया जाता है क मूल कृ त का लाभ दया जाएगा या य द यि त पहले से ह लाभ क ाि त म है, तो इसे जार रखा जाएगा और इसम काफ बदलाव नह ं कया जाएगा, तो इसे लागू कया जा सकता है।

18. यह आर. वी. वारा आयोिजत कया गया है। रवीं न, जे. राम वेश संह बनाम बहार रा य [(2006) 8 एस. सी. सी. 381:2006 एस. सी. सी. (एल. एंड. एस.) 1986] म क वैध अपे ा एक कानूनी अ धकार नह ं है। अ धकार नह ं होने क े कारण, यह लागू करने यो य नह ं है। यह एक गभवती को हकदार बना सकता हैः (एस. सी. सी. पृ ठ 391, पैरा 15) (एस. सी. सी. पी. 391, पैरा 15)(क) अपे ा क े वफल होने से पहले कारण दखाने का अवसर; या(ख) इनकार क े कारण क े बारे म प ट करण देना। उ चत मामल म, अदालत एक नदश दे सकती ह िजसम ा धकरण को वादा क गई या या था पत था का पालन करने क आव यकता होती है। पया त वैध अपे ा

19. कसी यि त वारा क गई अपे ा को नी त या कानून क े क ु छ तक ू ल वचार क े अि त व क े कारण वैध नह ं पाया जा सकता है। [एच. ड यू. आर. वेड और सी. एफ. फो सथ, शास नक यव था ( यारहवां सं करण, ऑ सफोड यू नव सट ेस, 2014)।] शास नक नी तयाँ बदलती प रि थ तय क े साथ बदल सकती ह, िजसम सरकार क े राजनी तक रंग म बदलाव भी शा मल ह। इस तरह क े प रवतन करने क वतं ता क ु छ ऐसी है जो सरकार क े हमारे संवैधा नक प म न हत है। [ यूजेस बनाम वा य और सामािजक सुर ा वभाग, 1985 एसी 776,788: (1985) 2 ड यूएलआर 866 (एचएल)]

20. सावज नक हत म नी त को बदलने क नणय नमाताओं क वतं ता को मूल वैध अपे ा क े स धांत को लागू करने से बा धत नह ं कया जा सकता है।[फाइंडले, पुनः, 1985 एसी 318:(1984) 3 ड यू. एल. आर. 1159:(1984) 3 सभी ई. आर. 801 (एच. एल.)] जब तक सरकार मनमाने ढंग से या अनु चत तर क े से काय नह ं करती है, तब तक नी त म प रवतन कसी यि त या यि तय क े समूह क े परािजत होने क वैध अपे ा क े आधार पर या यक समी ा वारा ह त ेप क आव यकता नह ं है। व वेषपूण कानून

21. य य प तवाद क ओर से उपि थत व वान अ धव ताओं वारा यह तक दया गया है क ववा दत नयम क े वल नणय क े भाव को र द करने क े लए लाए गए ह, जैसा क चचा क गई है, हम ऐसा नह ं सोचते ह। अपीलकताओं ने पा रत आदेश का व धवत पालन कया है। अ यथा भी, अ ध नयम काफ हद तक तय है क कसी नणय क े आधार को हटाया जा सकता है और अदालत क े नणय को क़ानून क तरह नह ं माना जा सकता है, वशेष प से जब काय करने क शि त उपल ध हो और तदनुसार इसका उपयोग जन हत म कया जाता है। इस मामले को देखते हुए, हम संशोधन म कोई अ ध नयमी 14 वेष नह ं पाते ह। हम कलाभारती व ापन बनाम हेमंत वमलनाथ नर च नया, (2010) 9 एस. सी. सी. 437, को उ धृत करना चाहते ह। " व वेषपूण कानून

25. रा य वा तव म या कानून म दुभावना या वेष क े बना न प प से काय करने क े लए बा य है। "कानूनी वेष" या "कानून म वेष" का अथ है कानूनी बहाने क े बना कया गया क ु छ। यह एक ऐसा काय है जो बना कसी उ चत या संभा वत कारण क े गलत तर क े से और जानबूझकर कया गया है, और ज र नह ं क यह एक ऐसा काय है जो बुर भावना और बावजूद क े कया गया हो। यह दूसर क े अ धकार क उपे ा म जानबूझकर कया गया काय है। जहाँ वेष का ेय रा य को दया जाता है, वहाँ यह कभी भी रा य क ओर से यि तगत दुभावना या बावजूद का मामला नह ं हो सकता है। यह एक ऐसा काय है िजसे एक तरछ या अ य व तु क े साथ लया जाता है। इसका अथ है "उन वदेशी उ दे य क े लए वैधा नक शि त का योग िजनक े लए यह कानून म अ भ ेत है।" इसका अथ है दूसरे क े पूवा ह क े त कानून का सचेत उ लंघन, दूसर क े अ धकार क अवहेलना करने क े लए ा धकरण क ओर से एक ट झुकाव, जो इरादे इसक े हा नकारक काय से कट होते ह। (ए. डी. एम. जबलपुर बनाम शवकांत शु ला [(1976) 2 एस. सी. सी. 521: ए. आई. आर. 1976 एस. सी. 1207], एस. आर. वकटरमण बनाम भारत संघ [(1979) 2 एस. सी. सी. 491: 1979 एस. सी. सी. (एल एंड एस) 216: ए. आई. आर. 1979 एस. सी. 49], ए. पी. रा य बनाम गोवधनलाल प ट [(2003) 4 एस. सी. सी. 739: ए. आई. आर. 2003 एस. सी. 1941], बी. पी. एल. ल मटेड बनाम एस. पी. गु राजा [(2003) 8 एस. सी. सी. 567] और ड यू. बी. एस. ई. बी. बनाम दल प क ु मार रे [(2007) 14 एस. सी. सी. 568: (2009) 1 एस. सी. सी. (एल. एंड. एस.) 860]। भा वत नणय:

22. कसी भी मामले म, पहले दए गए उ च यायालय क े नणय ववा दत संशोधन क े रा ते म नह ं आते ह। वे क े वल बलुआ प थर क े संबंध म थे, जब क ववा दत फ ै सले म उ च यायालय ने इसे सभी छोटे ख नज पर लागू कया। उ च यायालय वारा दनांक 13.03.2013 म दए गए नणय म सभी आवेदन पर संशो धत नयम क े अनुसार वचार करने का नदश दया गया था। वा तव म, ववा दत आदेश म उ च यायालय का तक पहले पा रत आदेश क े वपर त है। ववा दत नयम को 1957 क े अ ध नयम क खंड 15 क े तहत द शि त का योग करते हुए पेश कया गया है। जैसा क इस यायालय वारा ऊपर न द ट नणय म कहा गया है, न तो कोई अ धकार है और न ह यह सरकार भू म पर कए गए आवेदन वारा से न हत होता है। कानून ऐसा करने क े लए स म ा धकार वारा संशोधन लाने म प को सुनने क सु वधा नह ं देता है। उ च 15 यायालय ने, हमारे सु वचा रत वचार म, इस त य को नजरअंदाज करते हुए मु द का पूर तरह से गलत अथ नकाला है क पहले अपीलकता को शि त का एक यायोजन है िजसका 1957 क े अ ध नयम क खंड 15 क े तहत दान कए जाने क े अनुसार सह उपयोग कया गया था।

23. पूवगामी कारण से, हम ववा दत नणय को दर कनार करने म कोई संकोच नह ं है और हम ऐसा करते ह। तदनुसार, ये सभी अपील वीकार क जाती ह। नतीजतन, लं बत आवेदन (आवेदन), य द कोई ह, तो उनका भी नपटारा कर दया जाता है। कोई लागत नह ं। याया धप त (ए. एस. बोप ना) याया धप त (एम. एम. सुंदरेश) नई द ल; 1 अग त, 2023 यह अनुवाद आ ट फ शयल इंटे लजस टूल 'सुवास'क े ज रए अनुवादक क सहायता से कया गया है। अ वीकरण: यह नणय प कार को उसक भाषा म समझाने क े लए सी मत उपयोग क े लए थानीय भाषा म अनुवा दत कया गया है और कसी अ य उ दे य क े लए इसका उपयोग नह ं कया जा सकता है। सभी यावहा रक और आ धका रक उ दे य क े लए, नणय का अं ेजी सं करण मा णक होगा और न पादन और काया वयन क े उ दे य से अं ेजी सं करण ह मा य होगा ।