Full Text
भारत का सव च यायालय
स वल अपील य े ा धकार
स वल अपील सं या 1162-1171/2016
राज थान रा य एवं अ य - अपीलाथ
बनाम
वण क
ु मार क
ु मावत एवं अ य - यथ
क
े साथ
सीए सं या 1212-1214/2016
सीए सं या 1207-1211/2016
सीए सं या 1202-1206/2016
सीए सं या 1182-1186/2016
सीए सं या 1172-1176/2016
सीए सं या 1177-1181/2016
सीए सं या 1187-1189/2016
सीए सं या 1197-1199/2016
सीए सं या 1195-1196/2016
सीए सं या 1200-1201/2016
सीए सं या 1190-1194/2016
नणय
एम. एम. सुंदरेश, याया धप त
JUDGMENT
1. इन सभी अपील म अपीलकता राज थान उ च यायालय, जयपुर पीठ क ख ड पीठ क े उस नणय को पलट देना चाहते ह िजसम उसने राज थान लघु ख नज रयायत नयम, 1986 (इसक े बाद नयम क े प म संद भत) क े नयम 4 क े उप- नयम (10) और नयम 7 क े उप- नयम (3) को असंवैधा नक घो षत कया था।
2. अपीला थय क ओर से व र ठ अ धव ता डॉ. मनीष संघवी और तवाद क ओर से अ धव ता सु ी शोभा गु ता और अ धव ता सु ी अं कता गु ता उपि थत हु । नयम का ववरण:
3. खान और ख नज ( वकास और व नयमन) अ ध नयम, 1957 (इसक े बाद "1957 अ ध नयम" क े प म संद भत) क खंड 15 वारा द शि तय का योग करते हुए थम अपीलकता वारा खदान लाइसस, खनन प ट और अ य ख नज रयायत क े अनुदान को व नय मत करने क े लए नयम को क़ानून म लाया गया था। नयम का दूसरा अ याय प ट क े अनुदान से संबं धत है। नयम 7 क ु छ यि तय क े तरजीह अ धकार क बात करता है। उ त नयम क े अनुसार, 28.01.2011 पर कए गए संशोधन से पहले अि त व म, एक आवेदक को अपना आवेदन समय से पहले कए जाने क े एकमा आधार पर दूसर पर तरजीह अ धकार होगा। यह तरजीह अ धकार कसी सरकार क ं पनी या नगम से आवेदन ा त होने पर उपल ध नह ं कराया गया था। यह यान दया जाना चा हए क यह नयम सामा य प से नयम म उ चत संशोधन करने म पहले अपीलकता क े रा ते म नह ं आता है। नयम 7 क े उप- नयम (2) ने सं थाओं क एक सूची दान क है, जो ाथ मकता क े आदेश पर प टे क े हकदार ह।
4. उपरो त नयम म संशोधन कए गए। दनांक 1 क अ धसूचना वारा, नयम 4 म उप- नयम (10) पेश कया गया था, िजसम यह शत रखी गई थी क संगमरमर और ेनाइट को छोड़कर कसी सरकार भू म म खनन प टा नह ं हो सकता है, जब तक क े का सीमांकन नह ं कया जाता है और उसक े बाद आवेदन आमं त कए जाते ह। हालां क, परंतुक म कहा गया है क अ धसूचना क तार ख को लं बत आवेदन का नपटान इससे पहले क े च लत नयम क े अनुसार कया जाएगा। शायद यह उ च यायालय वारा पा रत आदेश क गलत समझ क े कारण हुआ होगा।
5. उप- नयम (3) क े त थापन क े मा यम से नयम 7 म एक और संशोधन कया गया था।(3) उपरो त उप नयम (1) और (2) म क ु छ भी न हत होने क े बावजूद, संगमरमर और ेनाइट क े अलावा अ य ख नज क े लए सरकार भू म म खनन प टे क े लए े नयम 73 क े तहत प रसीमन क े बाद आवंटन क े लए आर त कया जाएगा। नई णाल अ धसूचना जार होने क तार ख से भावी होगी और अ धसूचना से पहले ा त आवेदन का नपटान इस अ धसूचना से पहले लागू च लत नयम क े अनुसार कया जाएगा। प रसीमन से पहले वभाग वारा सभी आव यक एन. ओ. सी. खर दे जाएंगे। इन सीमां कत भूखंड म से 50 तशत नीलामी वारा आवं टत कए जाएंगे और शेष 50 तशत न न ल खत े णय क े यि तय को आवं टत कए जाएंगे, येक ेणी क े खलाफ इं गत तशत क े अनुसारः - (i) ऐसे यि त जो शर/ख नज आधा रत उ योग था पत करने का काय करते ह; 10 तशत (ii) खान म कायरत अनुसू चत जा तय /अनुसू चत जनजा तय /अ य पछड़े वग / वशेष पछड़े वग से संबं धत मैनुअल मक; 5 तशत (iii) खान म अनुसू चत जा तय /अनुसू चत जनजा तय /अ य पछड़े वग / वशेष पछड़े वग क े अलावा अ य काम करने वाले मक; 5 तशत (iv) अनुसू चत जा त/अनुसू चत जनजा त/अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग क े यि त 20 तशत (v) गर बी रेखा से नीचे क े प म पहचाने गए यि त; 10 तशत (vi) राज थान से संबं धत अधसै नक बल क े सद य स हत पूव सै नक, जो थायी प से वकलांग हो गए ह या उन लोग क े आ त ह िजनक सेवा क े दौरान मृ यु हो गई है; 5 तशत (vii) राज थान रा य सरकार क े कमचार जो यूट क े दौरान थायी प से वकलांग हो गए ह या उन लोग क े आ त ह िजनक सेवा क े दौरान मृ यु हो गई है; 5 तशत (viii) राज थान क े बेरोजगार युवाओं क स म तयाँ; 30 तशत (ix) अ य यि त; 10 तशतआर त े म अ धसूचना क े 30 दन क े बाद आवेदन आमं त कए जाएंगे और अ धसूचना क े 30 दन क े बाद 30 दन क अव ध क े भीतर ा त आवेदन को उसी दन ा त माना जाएगा। आवेदन का नपटारा लॉटर क े मा यम से कया जाएगा। (vi) मौजूदा उप- नयम (4) क े बाद न न ल खत नया उप- नयम (5) जोड़ा जाएगा, अथात ्ः - "(5) य द कसी ऐसे ठेक े दार से अ पका लक अनुम त आवेदन ा त होता है िजसे रा य/रा य राजमाग (सड़क नमाण प रयोजना) क े लए काम दया गया है, तो उसे खनन प टे क े आवेदन पर ाथ मकता द जाएगी। अ पका लक पर मट आवेदन क तार ख से 3 मह ने पहले क अव ध न न ल खत शत क े अधीन - (ए) अनुबंध देने क तार ख से 6 मह ने क े भीतर अ पका लक पर मट आवेदन दायर कया गया है; (ख) रा य/रा य राजमाग (सड़क नमाण प रयोजना) आवेदन कए गए अ पका लक पर मट े से 100 क. मी. से अ धक दूर नह ं है; और (ग) अ पका लक अनुम त नयम 63 क शत क े अधीन होगी। बशत क यह उप नयम (5) 31 माच, 2012 तक लागू रहेगा और इसक े बाद सरकार वारा उनक फर से समी ा क जाएगी।"
6. पहल बार, थम अपीलकता ने नीलामी क या शु करना उ चत समझा, जब क यह प ट कया क 27.01.2011 से पहले ा त आवेदन का नपटान पहले लागू च लत नयम क े अनुसार कया जाएगा।
7. उपरो त नयम म अ धसूचना दनांक 03.04.2013 वारा से और संशोधन कया गया, िजसक े वारा सभी लं बत आवेदन को अ वीकार कया जाना है। नयम 4 उप- नयम (10): "(10) सरकार भू म म कोई भी खनन प टा, िजसम वन भू म भी शा मल है, िजसक े लए क सरकार वारा वन (संर ण) अ ध नयम, 1980 क े तहत मोड़ दया जाता है, आवेदक वारा आवेदन पर तब तक नह ं दया जाएगा जब तक क े का सीमांकन नह ं कया जाता है और सरकार वारा आवेदन आमं त नह ं कए जाते ह। नयम 3एन या नयम 11 क े उप- नयम (1) क े तहत तरजीह अ धकार रखने वाले यि त वारा तुत आवेदन को छोड़कर, िजनक े संबंध म नयम 19 क े अनुसार प टा वलेख न पा दत नह ं कया गया है, वे सभी आवेदन जो 27-01- 2011 तक सरकार भू म म तुत कए जाते ह, अ वीकार कर दए जाएंगे।" नयम 7 उप- नयम (1):
7. प टा देने क याः-(1) सरकार भू म म, खनन प टा पहले े का प रसीमन कए जाने क े बाद दया जाएगा, भूखंड को उपयु त प से मां कत कया जाएगा और आवेदन आमं त करने वाल अ धसूचना दो दै नक समाचार प म का शत क जाएगी, िजनम से कम से कम एक रा य तर पर है और दूसरा उस े म यापक चार करता है जहां प टा आवं टत कया जा रहा है। अ धसूचना आवेदन आमं त करने क इि छत त थ से कम से कम 30 दन पहले का शत क जाएगी और इसम वह त थ या अव ध होगी िजसक े भीतर आवेदन ा त कए जाएंगे। नयम 23ए क े उप- नयम (3) क े तहत ग ठत स म त क े इन न द ट भूखंड म से 50 तशत भूखंड आर त ह गे जो नीलामी/ न वदा वारा आवं टत कए जाएंगे और शेष 50 तशत येक ेणी क े खलाफ उि ल खत तशत क े अनुसार न न ल खत े णय क े यि तय को लॉटर क े मा यम से आवं टत कए जाएंगेः - (i) ऐसे यि त जो शर/ख नज आधा रत उ योग था पत करने का काय करते ह; 10 तशत (ii) खान म कायरत अनुसू चत जा त/अनुसू चत जनजा त/अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग से संबं धत शार रक मक और शार रक मक क वधवाएँ; 5 तशत (iii) खान म कायरत अनुसू चत जा तय /अनुसू चत जनजा तय /अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग क े अलावा मैनुअल मक और मैनुअल मक क वधवाएँ; 5 तशत (iv) अनुसूची जा त/अनुसूची जनजा त/अ य पछड़े वग/ वशेष पछड़े वग से संबं धत यि त; 20 तशत (v) "गर बी रेखा से नीचे" क े प म पहचाने गए यि त; 10 तशत (vi) राज थान से संबं धत अधसै नक बल क े सद य स हत वतं ता सेनानी/पूव सै नक जो थायी प से अ म हो गए ह या सेवा म रहते हुए मारे गए लोग क े आ त ह; 5 तशत (vii) राज थान रा य सरकार क े कमचार जो यूट क े दौरान थायी प से वकलांग हो गए ह या उन लोग क े आ त ह िजनक सेवा क े दौरान मृ यु हो गई है; 5 तशत (viii) उपरो त े णय (vi) और (vii) म शा मल यि तय क े अलावा वकलांग यि त ( वकलांग यि त); 5 तशत (ix) राज थान क े बेरोजगार युवाओं क स म तयाँ; और 25 तशत (x) अ य यि तः 10 तशत बशत क ख नज बाजर क े लए खनन प टे क े वल न वदा या नीलामी क े मा यम से दए जाएंगे।
8. हम डॉ. संघवी वारा बार म सू चत कया गया है क इन नयम म भी ई-नीलामी क े मा यम से एक नई या बनाने क े लए और संशोधन कए गए ह। उ त नवेदन पर यान देते हुए, हम उस संबंध म क ु छ नह ं कहना चाहते ह।
9. अंत म, ववा दत नयम, जो क दो काय करता ह-नीलामी क या जो पहले मौजूद थी, और जो सभी लं बत आवेदन को एक समान अवसर दान करता था, अथात पहले आओ पहले पाओ क े आधार पर वचार कया जाता था, वो नर त घो षत कया गया । पृ ठभू म त यः
10. अपीला थय वारा दनांक 23.05.2003 क अ धसूचना क े मा यम से लघु ख नज को प टे पर देने क े लए आवेदन आमं त कए गए थे। सैकड़ लोग ने अपने आवेदन कए। दनांक 5 क अ धसूचना 23.05.2003 क े बाद दनांक 24.04.2007 क अ धसूचना जार क गई िजसम चार गाँव क े लए कए गए आवेदन को नयम क े नयम 65ए क े तहत द शि त का योग करते हुए खा रज कर दया गया। नए आवेदन क े बाद प रसीमन क कवायद शु होने क उ मीद थी। इस कार, यह अ धसूचना, और बाद क अ धसूचना, े क त है, जो चार गाँव तक सी मत है और वह भी बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए जो पहले वाले क े उप-उ पाद क े अलावा और क ु छ नह ं है। क ु छ आवेदक वारा राज थान उ च यायालय क े सम रट या चकाएं दायर क गई थीं। तदनुसार उ ह अनुम त द गई थी, अ य बात क े साथ-साथ यह मानते हुए क इस तरह का तबंध क े वल चार िजल क े लए लागू होता है और कानून क नजर म इसे बनाए नह ं रखा जा सकता है य क ख नज वकास क े क थत हत म नयम क े नयम 65ए को लागू करने क े लए कोई साम ी उपल ध नह ं है। दनांक 1 क अ धसूचना को र द करते हुए, उ च यायालय ने वशेष प से अपीला थय को नदश दया क वे उसम रट या चकाकताओं क े आवेदन को पुनज वत कर और उन पर कानून क े अनुसार वचार कर।
11. 21.05.2009 पर उ च यायालय वारा पा रत आदेश क े बाद, 28.01.2011 क अ धसूचना क े मा यम से नयम म संशोधन कए गए, जैसा क हमने पहले उ लेख कया था। इसक े बाद, उ च यायालय क े आदेश क े अनुपालन म, उ च यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले उन आवेदक को राहत देने क े लए 16.11.2011 पर एक सरकार आदेश पा रत कया गया। कसी भी प टे क े अनुदान से पहले चनाई प थर क े आवेदक वारा रॉय ट क े भुगतान क े लए एक प रणामी सरकार आदेश भी 28.11.2011 पर पा रत कया गया था। इन दोन आदेश को रट या चकाकताओं क े अलावा क ु छ अ य आवेदक वारा पहले क े दौर म चुनौती द गई थी, अ य बात क े साथ-साथ यह तक देते हुए क समान लाभ उ ह भी दए जाने चा हए।
12. उ च यायालय ने दनांक 13.03.2013 का एक आदेश पा रत कया, िजसम कहा गया था क पहले क े नणय को आर. ई. एम. म एक नणय क े प म माना जाना चा हए, ले कन इस शत क े अधीन क सभी लं बत आवेदन पर नयम 4 और 7 क अ धसूचना दनांक 28.01.2011 वारा कए गए संशोधन क े अनुसार वचार कया जाना चा हए। "(i) क यथ रा य छह मह ने क अव ध क े भीतर रेत प थर और चनाई प थर क े लए उपल ध सभी खनन े का प रसीमन, सीमांकन और न द ट करने का काय करेगा, जैसा क व वान अ त र त महा धव ता वारा रा य क ओर से कहा गया है। (ii) इसक े बाद, रा य सरकार बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए खनन प ट क े अनुदान क े लए ऐसे च त े को इस शत क े साथ फर से अ धसू चत करेगी क य द चनाई प थर क े लए दए गए खनन प ट म बलुआ प थर भी उपल ध पाया जाता है तो बलुआ प थर क े लए रॉय ट और मृत कराए का भुगतान लागू होगा। (iii) क ऐसे खनन प ट क े लए अब तक दायर कए गए सभी आवेदन को पुनज वत और आगे क े आवेदन क े साथ माना जाएगा, जो अब बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए खनन प ट क े लए उपल ध च त े क े इस तरह क े पुनः अ धसूचना पर दायर कए जा सकते ह। पहले क े आवेदक को अपने पहले क े आवेदन को वापस लेने और इस तरह क े पुनः अ धसूचना क े अनुसरण म नए आवेदन दायर करने क वतं ता होगी। (iv) क उपरो त पैरा 10 (viii) क े अनुसार रा य सरकार क े तु तकरण क े अनुसार उस रा य ने अब तक ववा दत आदेश क े अनुसरण म कोई कारवाई नह ं क है, यह नदश दया जाता है क ववा दत आदेश अनुल नक क े अनुसरण म बलुआ प थर और चनाई प थर क े लए कोई खनन प टा नह ं दया जाएगा। 11 दनां कत 16/11/2011 और अनुल नक। 13 दनांक 28/11/2011 जब तक क इस नणय म दए गए नदश क े अनुसार ऐसे सभी आवेदन पर नणय नह ं लया जाता है। (v) क सभी आवेदन पर आज से एक वष क े भीतर एम. एम. सी. आर., 1986 क े संशो धत नयम 7 (3) क े अनुसार लॉटर क े आधार पर या नीलामी क े मा यम से नणय लया जाएगा, िजसे रा य सरकार वारा उ चत माना जा सकता है, ले कन 'पहले आओ पहले पाओ' स धांत क े आधार पर नह ं।"
13. मुकदमेबाजी क े पहले दौर क तरह, दूसरे दौर म भी पा रत आदेश को चुनौती नह ं द गई और इस लए दोन ह अं तम हो गए। यह यान देने यो य है क उ च यायालय ने 7 अपीला थय को खनन प टा देने क े लए पहले आओ पहले पाओ क े आधार को अपनाने का नदश देकर या चकाकताओं को राहत नह ं द, ले कन क े वल संशो धत नयम क े अनुसार।
14. पा रत आदेश से संक े त लेते हुए, 03.04.2013 पर एक और अ धसूचना जार क गई िजसम ववा दत संशोधन को पेश कया गया। जैसा क कहा गया है, सभी आवेदन को खा रज घो षत कर दया गया था, जब क नीलामी वारा से प ट क े 50 तशत अनुदान क सु वधा दान क गई थी, इसक े तहत उि ल खत े णय को छोड़कर जो वर यता क े हकदार ह। ववा दत आदेश वारा, उ च यायालय क ख ड पीठ ने संशोधन को तीन ाथ मक आधार पर अवैध घो षत कर दया, अथात ्- आवेदक क सुनवाई नह ं क गई है, और उनक े आवेदन को यायालय वारा वैध अपे ा और उनम न हत अ धकार क े स धांत पर पा रत पहले क े आदेश को देखते हुए पुनज वत कया जाना चा हए। अपीला थय का नवेदनः
15. अपीला थय क ओर से पेश व र ठ अ धव ता डॉ. संघवी ने कहा क उ च यायालय क े पहले क े नणय क े वल छोटे ख नज और बलुआ प थर से संबं धत ह और वह भी चार िजल क े व श ट संदभ म। उ च यायालय ने ववा दत आदेश म इस त य पर यान नह ं दया,और सभी छोटे ख नज क े लए लागू होने वाले नयम को पूर तरह से र द कर दया। उ च यायालय क े पहले क े फ ै सल का व धवत पालन कया गया था, और इस लए इसक े वपर त न कष त या मक प से गलत है। इसे न हत होने का दावा करने क े लए कोई तरजीह अ धकार उपल ध नह ं है। तवाद ओं को खनन म मौ लक अ धकार नह ं हो सकता है। उ च यायालय त थापन क या वारा से नए नयम को लागू करने वारा से संशोधन से जुड़े मामले म वैध अपे ा और ाकृ तक याय को नयं त करने वाले स धांत म जाने म गलत है। उ ह ने आगे कहा क ववा दत आदेश को दर कनार कया जा सकता है य क वे रा य क े सभी छोटे ख नज क े लए लागू कए जा रहे नए संशो धत नयम क े माग म बाधा बनगे। उ रदाताओं का नवेदनः
16. तवाद क ओर से अ धव ता-ऑन- रकॉड सु ी शोभा गु ता और अ धव ता-ऑन- रकॉड सु ी अं कता गु ता ने कहा क उ च यायालय का यह मानना सह था क ववा दत संशोधन और क ु छ नह ं बि क यायालय क े पहले क े फ ै सले को दर कनार करने का यास है। दशक से आवेदन को लं बत रखने का कोई औ च य नह ं है। य द आवेदन पर पहले वचार कया जाता तो प टे दए जाते। तवाद वारा खनन क े लए मांगे गए े बहुत बड़े नह ं ह और इस लए उनक े आवेदन पर त काल न ासं गक नयम क े तहत वचार कया जाना चा हए। ववा दत नयम को लागू करने वारा से कानून म वेष है। प रचचाःसह न हत
17. यह बहुत हद तक तय है क कसी भी कार क भू म, िजस पर सरकार का न हत अ धकार और नयामक नयं ण है, म सरकार भू म या म ट क े नीचे क े ख नज क े प टे क मांग करने वाले आवेदन पर कोई अ धकार न हत नह ं है। दूसरे श द म, क े वल आईपीएसओ फ ै टो 9 आवेदन दा खल करने से कोई अ धकार नह ं बनता है। संशोधन करने क सरकार क शि त, एक वतं होने क े नाते, लं बत आवेदन रा ते म नह ं आते ह। न हत होने क े अ धकार क े लए एक वैधा नक मा यता होनी चा हए। इस तरह क े अ धकार को अिजत करना होगा और कसी भी नणय को प रणामी त पैदा करनी होगी। जब कसी स म ा धकार वारा नीलामी जैसी बेहतर या वक सत करक े जन हत म कोई नणय लया जाता है, तो सरकार भू म पर प टे क मांग करने वाले आवेदक का अ धकार, य द कोई हो, अपने आप वाि पत हो जाता है। एक आवेदक को ख नज क े लाइसस क े अनुदान क मांग करने का वशेष अ धकार नह ं हो सकता है जब तक क एक अ ध नयम वारा तदनुसार सु वधा दान नह ं क जाती है। त मलनाडु रा य बनाम हंद टोन और अ य, (1981) 2 एस. सी. सी. 205: - "13. नवीनीकरण क े लए आवेदन पर वचार करने क े संबंध म व वान अ धव ता का एक और नवेदन यह था क G.O.Ms सं या 1312 (2 दसंबर, 1977) क तार ख से साठ दन या उससे अ धक समय पहले कए गए आवेदन को इस तरह नपटाया जाना चा हए जैसे क नयम 8-सी लागू नह ं हुआ था। यह भी तक दया गया क G.O.Ms सं या 1312 क तार ख से बहुत पहले कए गए प ट क े लए आवेदन को भी ऐसे नपटाया जाना चा हए जैसे क नयम 8-सी लागू नह ं हुआ था। नवेदन यह था क सरकार प टे क े अनुदान और नवीनीकरण क े लए आवेदन को लंबे समय तक लं बत रखने और फर नयम 8-सी क े आधार पर उ ह अ त हण करना करने क े लए तैयार नह ं थी, इस त य क े बावजूद क आवेदन उस तार ख से बहुत पहले कए गए थे िजस दन नयम 8-सी लागू हुआ था। हालां क यह सच है क ऐसे आवेदन को उ चत समय क े भीतर नपटाया जाना चा हए, ले कन इस कारण से यह नह ं कहा जा सकता है क एक उ चत समय म एक आवेदन का नपटान करने का अ धकार एक आवेदक को प टे क े लए आवेदन करने क े अ धकार क े साथ आवेदन करने क े समय लागू नयम क े आधार पर नपटाने का अ धकार देता है। कसी को भी प टे क े अनुदान या नवीनीकरण का न हत अ धकार नह ं है और कोई भी वशेष ावधान को लागू करक े कसी वशेष तर क े से नपटाए गए प टे क े अनुदान या नवीनीकरण क े लए आवेदन करने क े न हत अ धकार का दावा नह ं कर सकता है। कसी म भी कसी भी न हत अ धकार क अनुपि थ त म म, प टा क े लए आवेदन को इस त य क े बावजूद क आवेदन करने म लंबी देर हुई है, आवेदन क े नपटारे क तार ख को लागू नयम क े अनुसार नपटाया जाना आव यक है। इस लए, हम व वान अ धव ता क े इस नवेदन को त हण करना करने म असमथ ह क G.O.Ms सं या 1312 क तार ख से बहुत पहले कए गए प ट क े नवीनीकरण क े लए आवेदन को इस तरह नपटाया जाना चा हए जैसे क नयम 8-सी मौजूद नह ं था।" (जोर दया गया) 10 मौ लक अ धकार
18. खनन म मौ लक अ धकार नह ं रखने वाले आवेदक का सवाल अब एक कृ त नह ं है, मोनेट इ पात एंड एनज ल मटेड बनाम भारत संघ, (2012) 11 एस. सी. सी. 1 क ु छ काश डाल सकता है, "खनन म कोई मौ लक अ धकार नह ं है
133. अपीलकताओं ने झारखंड सरकार (पूववत बहार) से संबं धत भू म म खनन प टे क े लए आवेदन कया है और यह लौह अय क क े लए है जो 1957 क े अ ध नयम क अनुसूची I म शा मल एक ख नज है, िजसक े संबंध म क सरकार क पूव मंजूर क े बना कोई खनन प टा नह ं दया जा सकता है। यह कहने क ज रत नह ं है क कोई भी यि त 1957 क े अ ध नयम और 1960 क े नयम क े अलावा सरकार से संबं धत कसी भी भू म या सरकार से संबं धत कसी भी भू म म कसी भी अ धकार का दावा नह ं कर सकता है। कसी भी यि त को यह दावा करने का कोई मौ लक अ धकार नह ं है क उसे सरकार से संबं धत कसी भी भू म म खनन प टा या पूव ण लाइसस या अनुम त ा त टोह संचालन दया जाना चा हए। ओ. च ना पा रे डी, जे. क े हंद टोन [(1981) 2 एस. सी. सी. 205] (एस. सी. सी. पी. 233, पैरा 6) म न न ल खत कथन को उ धृत करना उपयु त है, हालां क लघु ख नज क े संदभ म, "6. िजस जन हत ने संसद को खंड 2 म न हत घोषणा करने क े लए े रत कया, वाभा वक प से खान क े व नयमन और ख नज क े वकास से संबं धत सभी मामल म सव प र वचार होना चा हए। उ ह ने आगे कहाः ( हंद टोन मामला [(1981) 2 एस. सी. सी. 205], एस. सी. सी. पृ ठ 217, पैरा 10)"
10. िजस अ ध नयम से हम संबं धत ह, खान और ख नज ( वकास और व नयमन) अ ध नयम का उ दे य ख नज का संर ण और ववेकपूण और भेदभावपूण दोहन करना है। नि चत प से, दुलभ ख नज क े मामले म, रा य या उसक एजसी वारा दोहन क अनुम त देना और नजी एज सय वारा दोहन को तबं धत करना संर ण और ववेकपूण दोहन का सबसे भावी तर का है। य द आप भ व य क े लए संर ण करना चाहते ह, तो आपको वतमान म नषेध करना चा हए। (जोर दया गया) 11 वैध अपे ा
19. वैध अपे ा एक कमजोर और शांत अ धकार है जैसा क एक क़ानून वारा नधा रत कया गया है। जब सरकार सभी पा यि तय को समान शत पर चुनाव लड़ने क सु वधा दान करने क े लए नीलामी क े मा यम से न प खेल शु करने का नणय लेती है, तो नि चत प से कोई यह तक नह ं दे सकता है क वह क े वल एक लं बत आवेदन क े आधार पर प टे का हकदार है। अ धकार अ ध नयमी नह ं होने क े कारण, अि त वह न होने क े अलावा, यह नि चत प से लागू करने यो य नह ं हो सकता है। ट. एन. बनाम हंद टोन (1981) 2 एस. सी. सी. 205 म दशक पहले तय कए गए इन पहलुओं पर अ ध नयम क े स धांत को समय-समय पर दोहराया जा रहा है। मोनेट इ पात एंड एनज ल मटेड (ऊपर): - "वैध अपे ा क े स धांत
183. चूँ क वचन नरोध और वैध अपे ा क े स धांत क े बीच समानताएँ ह य क ये दोन स धांत न प ता क अवधारणा पर आधा रत ह और ाकृ तक याय से उ प न होते ह, इस लए यह उ चत है क वैध अपे ा क े स धांत को भी यहाँ क े वल वचन नरोध और वैध अपे ा क े स धांत क े आधार पर था पत अपीला थय क े मामले क सराहना करने क े लए देखा जाता है। XXX XXX XXX
188. इस यायालय क े नणय को गुणा करना आव यक नह ं है। यह देखने क े लए पया त है क वैध अपे ा क े स धांत क े संबंध म न न ल खत स धांत अब अ छ तरह से था पत ह◌ः XXX XXX XXX 188.[3] जहां कसी ा धकरण का नणय कायकार नी त या कानून क े अनुसार सावज नक हत म था पत कया जाता है, वहां यायालय वैध अपे ा क े स धांत को लागू करक े इस तरह क े नणय म ह त ेप करने क े लए अ न छ ु क होगा। य द ऐसा करना जन हत म है तो शास नक नी त म प रवतन को रोकने क े लए वैध अपे ा स धांत का उपयोग नह ं कया जा सकता है। 188.[4] वैध अपे ा याशा से अलग है और एक याशा एक मुखर अपे ा क े बराबर नह ं हो सकती है। ऐसी अपे ाएं यायो चत, वैध और संर ण यो य होनी चा हए। 188.[5] वैध अपे ा क े संर ण क े लए अपे ा क पू त क आव यकता नह ं होती है जहां एक मुख सावज नक हत अ यथा क आव यकता होती है। दूसरे श द म, यि तगत लाभ को सावज नक हत को रा ता देना चा हए और वैध अपे ा क े स धांत को लागू नह ं कया जाएगा जो नजी लाभ क े लए सावज नक हत को अव ध कर सकता है।" (जोर दया गया)
20. क े रल रा य पेय (एम एंड एम) नगम ल मटेड बनाम पी. पी. सुरेश, (2019) 9 एस. सी. सी. 710: -
14. तवाद क ओर से मु य तक यह था क सरकार अपने वादे से बंधी हुई थी और इससे पीछे नह ं हट सकती थी। उ ह नरंतर रोजगार क एक अ य वैध अपे ा थी, जो सरकार आदेश दनांक 20-2-2002 से उपजी थी िजसे वापस नह ं लया जा सकता था। उ रदाताओं क ओर से आगे यह तुत कया गया क िजन लाभ का वादा कया गया था, उसे छ नने से पहले उ ह कोई अवसर नह ं दया गया था। उ रदाताओं क े इस तक क सराहना करने क े लए, वैध अपे ा क अवधारणा को समझना आव यक है।
15. इस यायालय ने भारत संघ बनाम हंदु तान वकास नगम मामले म वैध अपे ा क े स धांत को मा यता द है। [(1993) 3 एस. सी. सी. 499] य द कसी ा धकार वारा कया गया वादा प ट, प ट और प ट है, तो कोई यि त यह दावा कर सकता है क ा धकरण को पूर न प ता से वादे क े वपर त काय नह ं करना चा हए।
16. एम. जग नाथ राव, जे. ने पंजाब क यु नक े शंस ल मटेड बनाम भारत संघ [(1999) 4 एस. सी. सी. 727] म वैध अपे ा पर व तार से प ट कया। उ ह ने उ लेख कया (एस. सी. सी. पीपी म। 741-42, पैरा 27) स वल सेवा संघ प रषद बनाम स वल सेवा मं ी [1985 ए. सी. 374: (1984) 3 ड यू. एल. आर. 1174: (1984) 3 ऑल ई. आर. 935 (एच. एल.)] क े नणय म िजसम लॉड ड लॉक ने कहा था क एक वैध अपे ा उ प न होने क े लए, शास नक ा धकरण क े नणय को यि त को क ु छ लाभ या लाभ से वं चत करक े भा वत करना चा हए जो, "27. (i) उसे अतीत म नणय नमाता वारा आनंद लेने क अनुम त द गई थी और िजसे वह वैध प से तब तक जार रखने क अनुम त देने क उ मीद कर सकता है जब तक क उसे इसे वापस लेने क े लए क ु छ तकसंगत आधार नह ं बताए गए ह, िजस पर उसे ट पणी करने का अवसर दया गया है; या (ii) उसे नणय नमाता से आ वासन मला है क उ ह पहले यह तक देने क े लए कारण दए बना वापस नह ं लया जाएगा क उ ह वापस नह ं लया जाना चा हए। (एसी पी. 408)"
17. राव, जे. ने इस मामले म कहा क वैध अपे ा का या मक भाग एक अ यावेदन से संबं धत है क नणय लेने से पहले सुनवाई या अ य उपयु त या क जाएगी। स धांत का मूल भाग यह है क य द यह त न ध व कया जाता है क मूल कृ त का लाभ दया जाएगा या य द यि त पहले से ह लाभ क ाि त म है, तो इसे जार रखा जाएगा और इसम काफ बदलाव नह ं कया जाएगा, तो इसे लागू कया जा सकता है।
18. यह आर. वी. वारा आयोिजत कया गया है। रवीं न, जे. राम वेश संह बनाम बहार रा य [(2006) 8 एस. सी. सी. 381:2006 एस. सी. सी. (एल. एंड. एस.) 1986] म क वैध अपे ा एक कानूनी अ धकार नह ं है। अ धकार नह ं होने क े कारण, यह लागू करने यो य नह ं है। यह एक गभवती को हकदार बना सकता हैः (एस. सी. सी. पृ ठ 391, पैरा 15) (एस. सी. सी. पी. 391, पैरा 15)(क) अपे ा क े वफल होने से पहले कारण दखाने का अवसर; या(ख) इनकार क े कारण क े बारे म प ट करण देना। उ चत मामल म, अदालत एक नदश दे सकती ह िजसम ा धकरण को वादा क गई या या था पत था का पालन करने क आव यकता होती है। पया त वैध अपे ा
19. कसी यि त वारा क गई अपे ा को नी त या कानून क े क ु छ तक ू ल वचार क े अि त व क े कारण वैध नह ं पाया जा सकता है। [एच. ड यू. आर. वेड और सी. एफ. फो सथ, शास नक यव था ( यारहवां सं करण, ऑ सफोड यू नव सट ेस, 2014)।] शास नक नी तयाँ बदलती प रि थ तय क े साथ बदल सकती ह, िजसम सरकार क े राजनी तक रंग म बदलाव भी शा मल ह। इस तरह क े प रवतन करने क वतं ता क ु छ ऐसी है जो सरकार क े हमारे संवैधा नक प म न हत है। [ यूजेस बनाम वा य और सामािजक सुर ा वभाग, 1985 एसी 776,788: (1985) 2 ड यूएलआर 866 (एचएल)]
20. सावज नक हत म नी त को बदलने क नणय नमाताओं क वतं ता को मूल वैध अपे ा क े स धांत को लागू करने से बा धत नह ं कया जा सकता है।[फाइंडले, पुनः, 1985 एसी 318:(1984) 3 ड यू. एल. आर. 1159:(1984) 3 सभी ई. आर. 801 (एच. एल.)] जब तक सरकार मनमाने ढंग से या अनु चत तर क े से काय नह ं करती है, तब तक नी त म प रवतन कसी यि त या यि तय क े समूह क े परािजत होने क वैध अपे ा क े आधार पर या यक समी ा वारा ह त ेप क आव यकता नह ं है। व वेषपूण कानून
21. य य प तवाद क ओर से उपि थत व वान अ धव ताओं वारा यह तक दया गया है क ववा दत नयम क े वल नणय क े भाव को र द करने क े लए लाए गए ह, जैसा क चचा क गई है, हम ऐसा नह ं सोचते ह। अपीलकताओं ने पा रत आदेश का व धवत पालन कया है। अ यथा भी, अ ध नयम काफ हद तक तय है क कसी नणय क े आधार को हटाया जा सकता है और अदालत क े नणय को क़ानून क तरह नह ं माना जा सकता है, वशेष प से जब काय करने क शि त उपल ध हो और तदनुसार इसका उपयोग जन हत म कया जाता है। इस मामले को देखते हुए, हम संशोधन म कोई अ ध नयमी 14 वेष नह ं पाते ह। हम कलाभारती व ापन बनाम हेमंत वमलनाथ नर च नया, (2010) 9 एस. सी. सी. 437, को उ धृत करना चाहते ह। " व वेषपूण कानून
25. रा य वा तव म या कानून म दुभावना या वेष क े बना न प प से काय करने क े लए बा य है। "कानूनी वेष" या "कानून म वेष" का अथ है कानूनी बहाने क े बना कया गया क ु छ। यह एक ऐसा काय है जो बना कसी उ चत या संभा वत कारण क े गलत तर क े से और जानबूझकर कया गया है, और ज र नह ं क यह एक ऐसा काय है जो बुर भावना और बावजूद क े कया गया हो। यह दूसर क े अ धकार क उपे ा म जानबूझकर कया गया काय है। जहाँ वेष का ेय रा य को दया जाता है, वहाँ यह कभी भी रा य क ओर से यि तगत दुभावना या बावजूद का मामला नह ं हो सकता है। यह एक ऐसा काय है िजसे एक तरछ या अ य व तु क े साथ लया जाता है। इसका अथ है "उन वदेशी उ दे य क े लए वैधा नक शि त का योग िजनक े लए यह कानून म अ भ ेत है।" इसका अथ है दूसरे क े पूवा ह क े त कानून का सचेत उ लंघन, दूसर क े अ धकार क अवहेलना करने क े लए ा धकरण क ओर से एक ट झुकाव, जो इरादे इसक े हा नकारक काय से कट होते ह। (ए. डी. एम. जबलपुर बनाम शवकांत शु ला [(1976) 2 एस. सी. सी. 521: ए. आई. आर. 1976 एस. सी. 1207], एस. आर. वकटरमण बनाम भारत संघ [(1979) 2 एस. सी. सी. 491: 1979 एस. सी. सी. (एल एंड एस) 216: ए. आई. आर. 1979 एस. सी. 49], ए. पी. रा य बनाम गोवधनलाल प ट [(2003) 4 एस. सी. सी. 739: ए. आई. आर. 2003 एस. सी. 1941], बी. पी. एल. ल मटेड बनाम एस. पी. गु राजा [(2003) 8 एस. सी. सी. 567] और ड यू. बी. एस. ई. बी. बनाम दल प क ु मार रे [(2007) 14 एस. सी. सी. 568: (2009) 1 एस. सी. सी. (एल. एंड. एस.) 860]। भा वत नणय:
22. कसी भी मामले म, पहले दए गए उ च यायालय क े नणय ववा दत संशोधन क े रा ते म नह ं आते ह। वे क े वल बलुआ प थर क े संबंध म थे, जब क ववा दत फ ै सले म उ च यायालय ने इसे सभी छोटे ख नज पर लागू कया। उ च यायालय वारा दनांक 13.03.2013 म दए गए नणय म सभी आवेदन पर संशो धत नयम क े अनुसार वचार करने का नदश दया गया था। वा तव म, ववा दत आदेश म उ च यायालय का तक पहले पा रत आदेश क े वपर त है। ववा दत नयम को 1957 क े अ ध नयम क खंड 15 क े तहत द शि त का योग करते हुए पेश कया गया है। जैसा क इस यायालय वारा ऊपर न द ट नणय म कहा गया है, न तो कोई अ धकार है और न ह यह सरकार भू म पर कए गए आवेदन वारा से न हत होता है। कानून ऐसा करने क े लए स म ा धकार वारा संशोधन लाने म प को सुनने क सु वधा नह ं देता है। उ च 15 यायालय ने, हमारे सु वचा रत वचार म, इस त य को नजरअंदाज करते हुए मु द का पूर तरह से गलत अथ नकाला है क पहले अपीलकता को शि त का एक यायोजन है िजसका 1957 क े अ ध नयम क खंड 15 क े तहत दान कए जाने क े अनुसार सह उपयोग कया गया था।
23. पूवगामी कारण से, हम ववा दत नणय को दर कनार करने म कोई संकोच नह ं है और हम ऐसा करते ह। तदनुसार, ये सभी अपील वीकार क जाती ह। नतीजतन, लं बत आवेदन (आवेदन), य द कोई ह, तो उनका भी नपटारा कर दया जाता है। कोई लागत नह ं। याया धप त (ए. एस. बोप ना) याया धप त (एम. एम. सुंदरेश) नई द ल; 1 अग त, 2023 यह अनुवाद आ ट फ शयल इंटे लजस टूल 'सुवास'क े ज रए अनुवादक क सहायता से कया गया है। अ वीकरण: यह नणय प कार को उसक भाषा म समझाने क े लए सी मत उपयोग क े लए थानीय भाषा म अनुवा दत कया गया है और कसी अ य उ दे य क े लए इसका उपयोग नह ं कया जा सकता है। सभी यावहा रक और आ धका रक उ दे य क े लए, नणय का अं ेजी सं करण मा णक होगा और न पादन और काया वयन क े उ दे य से अं ेजी सं करण ह मा य होगा ।