Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या 2344/2023
(विवशेष अनुमति याति(का (आपराति क) संख्या 3152/2023 से उत्पन्न)
सालिलब उर्फ
2 शालू उर्फ
2 सलीम .....अपीलार्थी6 (गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ....प्रत्यर्थी6(गण)
विनण2य
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की जा ी है।
2. यह अपील भार ीय दंड संविह ा (संक्षेप में, "आईपीसी") की ारा 506 क े ह दंडनीय अपरा क े आरोप में एक आरोपी क े दृविKग विमर्ज़ाा2पुर पुलिलस स्टेशन, जिजला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश राज्य में दायर प्रार्थीविमकी (एर्फआईआर) संख्या 175/2022 11.08.2022 विदनांविक क े संबं में है और अपीलार्थी6 द्वारा दायर आपराति क प्रकीण[2] रिरट याति(का संख्या 13339/2022 को रद्द करने क े लिलए इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश क े लिWलार्फ विनदXशिश है, अस्वीकरण: “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण2य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण2य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" जिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने लिललिW याति(का को Wारिरज कर विदया और इस रह ऊपरोक्त प्रार्थीविमकी को रद्द करने से इनकार कर विदया।
3. प्रत्यर्थी6 संख्या 4 द्वारा दज[2] की गई विदनांविक प्रार्थीविमकी आर. 11.08.2022 इस प्रकार हैः- "सेवा में, उपविनरीक्षक, पुलिलस स्टेशन विमजा2पुर पॉल, जिजला सहारनपुरसादर विनवेदन है विक आवेविदका हुस्ना पत्नी इरफ़ान विनवासी ग्राम विमर्ज़ाा2पुर पॉल र्थीाना विमर्ज़ाा2पुर पॉल, जिजला सहारनपुर ने मविहला र्थीाने में इकबाल उर्फ 2 बाला और उसक े साशिर्थीयों क े विवरुद्ध मुकदमा अपरा संख्या 122/22 में आईपीसी की ारा 376 डी, 323, 120 बी, 452 जिजसकी जां( (ल रही है, क े ह प्रार्थी2ना पत्र विदया र्थीा।इसी कारण से Wुश6द पुत्र असगर र्थीा र्फारूक पुत्र मुस् ाक र्थीा महराज पत्नी र्फारूक विनवासीगण शाहपुर गड्डा, र्थीाना विमर्ज़ाा2पुर पॉल, जिजला सहारनपुर मुझ शिशकाय क ा2 को मकी दे रहे हैं। उन्होंने मुझसे र्फोन पर और सामने से कहा विक अगर ुमने यह मामला नहीं सुलझाया ो ुम्हें और ुम्हारे परिरवार को जान से मार विदया जायेगा और सुलेमान कबाड़ी ने मुझे विपस् ौल विदWाकर कहा विक हम लोग इकबाल उर्फ 2 बाला क े सार्थीी हैं। यविद कोई विनण2य नहीं लिलया गया है ो परिरणाम भुग ने क े लिलए ैयार रहना। आपसे कानूनी कार2वाई करने का अनुरो विकया जा ा है। मैं आपकी आभारी रहूंगी।"
4. इस प्रकार उपरोक्त प्रार्थीविमकी को पढ़ने से ऐसा प्र ी हो ा है विक पीविड़ ा अर्थीा2 ् हुस्ना (यहां प्रत्यर्थी6 संख्या 3) ने पहले आईपीसी की ारा dमशः 376 डी, 323, 120 बी, 354 ए और यौन अपरा ों से बच्चों का संरक्षण अति विनयम, 2012 की ारा dमशः 7 और 8 क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए हाजी इकबाल उर्फ 2 बाला (यहां अपीलार्थी6 क े ससुर), महमूद, जावेद, अलीशान, अस्वीकरण: अर्फजल और विदलशाद क े विवरूद्ध प्रार्थीविमकी संख्या 122/2022 दायर की र्थीी। यह कहा गया है विक जब उपरोक्त प्रार्थीविमकी संख्या 122/2022 की जां( (ल रही र्थीी, ब Wुश6द, र्फारुW, महाराज और सुलेमान नामक अशिभयुक्त व्यविक्तयों ने टेलीर्फोन पर और सार्थी ही व्यविक्तग रूप से पीविड़ को यह कह े हुए मकी दी र्थीी विक वे इकबाल उर्फ 2 बाला क े सार्थीी हैं और अगर वह उक्त प्रार्थीविमकी संख्या 122/2022 को वापस नहीं ले ी है, ो उसे और उसक े परिरवार क े सदस्यों को मार विदया जाएगा।
5. यहां अपीलार्थी6 अपने विवरूद्ध दायर प्रार्थीविमकी को रद्द करने की प्रार्थी2ना क े सार्थी आपराति क प्रकीण[2] रिरट याति(का संख्या 13339/2022 दायर करक े उच्च न्यायालय क े समक्ष गया।उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश 17.10.2022 विदनांविक क े माध्यम से प्रार्थीविमकी को रद्द करने से इनकार कर विदया।आदेश इस प्रकार हैः- "याति(काक ा2 क े विवद्वान अति वक्ता श्री इंद्र भान यादव, परिरवादी क े विवद्वान अति वक्ता श्री नविम श्रीवास् व और राज्य प्रत्यर्थिर्थीयों क े विवद्वान अति वक्ता ए. जी. ए. को सुना। इस याति(का में मांगी गई राह पुलिलस स्टेशन विमजा2पुर, जिजला सहारनपुर क े मुकदमा अपरा संख्या 175/2022 में आईपीसी की ारा 506 क े ह दायर आक्षेविप प्रार्थीविमकी 11.08.2022 विदनांविक को रद्द करने क े लिलए है। उपरोक्त मामले में याति(काक ा2 को विगरफ् ार न करने की प्रार्थी2ना की गई है। अस्वीकरण: याति(काक ा2 क े विवद्वान अति वक्ता ने कहा विक आक्षेविप प्रार्थीविमकी झूठी/गल /विमथ्यापूण[2] आरोपों पर दायर की गई है और े लिWलार्फ कोई अपरा नहीं बन ा है। विवद्वान एजीए ने एर्फआईआर को रद्द करने की प्रार्थी2ना का विवरो विकया, जो संज्ञेय अपरा का Wुलासा कर ी है। आक्षेविप प्रर्थीम सू(ना रिरपोट[2] क े अवलोकन से प्रर्थीमदृKया संज्ञेय अपरा होने का प ा (ल ा है।जां( क े दौरान अति सू(ना संख्या 1058/79-V-1-19-1 (क)-20-2018 विदनांक 6 जून 2019 को सम्मिम्मलिल करक े एकत्र की गई सामग्री क े आ ार पर आरोपों की सत्य ा का परीक्षण करना होगा और इसलिलए, हरिरयाणा राज्य और अन्य बनाम भजन लाल और अन्य, 1992 सम्मि€लमेंट (1) एससीसी 335 और मेसस[2] विनहारिरका इंफ्रास्ट्रक्(र प्राइवेट लिलविमटेड बनाम महाराK्र राज्य, एआईआर 2021 एससी 1918 और विवशेष अनुमति याति(का (आपराति क) संख्या 3262/2021 (लीलाव ी देवी उर्फ 2 लीलाव ी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) क े मामले में विदनांक 07.10.2021 को माननीय सव च्च न्यायालय द्वारा प्रति पाविद कानून क े मद्देनजर विनण[6] हुआ और आक्षेविप प्रार्थीविमकी में हस् क्षेप का कोई मामला नहीं बनाया गया है। इसलिलए, रिरट याति(का को Wारिरज विकया जा ा है और याति(काक ा2 कानून क े ह और कानून क े अनुसार अविग्रम जमान क े लिलए सक्षम न्यायालय क े समक्ष आवेदन करने क े लिलए विव(ार कर सक ा है। यह स्पK विकया जा ा है विक हमने याति(काक ा2 क े विवद्वान अति वक्ता द्वारा दी गई प्रस् ुति यों पर विनण2य नहीं लिलया है और अस्वीकरण: े लिलए कानून क े अनुसार उति( काय2वाही में उति( स् र पर विव(ार करने क े लिलए इन्हें Wुला छोड़ विदया गया है।"
6. उपरोक्त परिरम्मिस्र्थीति यों में, अपीलार्थी6 व 2मान अपील क े सार्थी इस न्यायालय क े समक्ष है। अपीलार्थी6 की ओर से विट€पशिणयां
7. अपीलार्थी6 की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री जिसद्धार्थी2 दवे ने अपने लिललिW क‡ में कहा हैः- "क) सादर विनवेदन है विक व 2मान एर्फआईआर में याति(काक ा2 का नाम नहीं है, लेविकन बाद में जां( क े दौरान 12.08.2022 को सीआरपीसी की ारा 161 क े ह दज[2] विकए गए कशिर्थी (श्मदीद सलमान, जिजसने कशिर्थी घटना का बयान विदया, क े बयान में पहली बार उसका नाम लिलया गया र्थीा और उक्त बयान क े आ ार पर, जीडी प्रविवविK संख्या 30 विदनांक 12.08.2022 क े ह भा.दं.सं. की ारा 147, 148, 149, 195- ए, 386, 504 और 506 क े ह प्रार्थीविमकी संख्या 175/2022 में अपरा जोड़ा गया।यह कहना उति( है विक प्रार्थीविमकी में कहीं भी शिशकाय क ा2 ने घटना क े समय और स्र्थीान पर कशिर्थी (श्मदीद गवाह सलमान की उपम्मिस्र्थीति का उल्लेW नहीं विकया है। W) प्रार्थीविमकी में लगाए गए आरोप न क े वल अर्थी2हीन; बे ुका हैं, बम्मि‹क अत्यति क अप्रातियक भी हैं क्योंविक प्रार्थीविमकी में घटना की ारीW और समय का कोई उल्लेW नहीं है। इसक े अलावा सव2व्यापी आरोपों क े अलावा आरोपी व्यविक्तयों क े लिWलार्फ कोई विवशेष आरोप नहीं है। याति(काक ा2 घटनास्र्थील क े समय और स्र्थीान, गांव विमजा2पुर, जिजला अस्वीकरण: सहारनपुर में मौजूद नहीं र्थीा, और वास् व में याति(काक ा2 स्र्थीायी रूप से क ुं जग्रांट, विवकासनगर, देहरादून, उत्तराWंड में रह रहा है। ग) सादर विनवेदन है विक कशिर्थी प्रार्थीविमकी विब‹क ु ल विमथ्यापूण[2] है, और उक्त प्रार्थीविमकी को पढ़ने पर, भार ीय दंड संविह ा की ारा 147,148,149,195-ए, 386,504 और 506 क े ह स्पK रूप से े विवरूद्ध नहीं बनाया गया है।प्रार्थीविमकी में संपूण[2] आरोप शिशकाय क ा2 द्वारा हाजी इकबाल उर्फ 2 बाला (याति(काक ा2 क े ससुर) और उसक े सदस्यों क े लिWलार्फ भार ीय दंड संविह ा की ारा 376, 323, 354 (ए) और यौन अपरा ों से बच्चों का संरक्षण अति विनयम, 2012 की ारा 7 और 8 क े ह दज[2] की गई विपछली एर्फआईआर संख्या 122/2022 विदनांक 21.06.2022 क े इद2-विगद[2] घूम ा है।यह कहा गया है विक याति(काक ा2 उक्त प्रार्थीविमकी संख्या 122/2022 में आरोपी नहीं है और इसलिलए याति(काक ा2 द्वारा शिशकाय क ा2 को उक्त प्रार्थीविमकी संख्या 122/2022 को वापस लेने की मकी देने का कोई सवाल ही नहीं र्थीा। घ) यह विक शिशकाय क ा2 को अन्य व्यविक्तयों क े लिWलार्फ इसी रह क े आ ारहीन और झूठे आरोप लगाने की आद है और उसने े ससुर हाजी इकबाल क े सार्थी राजनीति क म भेद विनपटाने क े लिलए उत्तर प्रदेश राज्य में व 2मान सत्तारूढ़ पक्षकार क े इशारे पर व 2मान प्रार्थीविमकी दज[2] की है क्योंविक वह एक प्रति द्वंद्वी राजनीति क पक्षकार से संबंति है और वह 2011 से 2016 क विव ान परिरषद का सदस्य र्थीा। ङ) यह कहा गया है विक प्रत्यर्थी6 ने याति(काक ा2 क े विवरूद्ध कशिर्थी रूप से दज[2] मामलों का उल्लेW विकए विबना गल रीक े से कहा है विक अस्वीकरण: याति(काक ा2 कई आपराति क मामलों में शाविमल है।याति(काक ा2 विकसी विगरोह का सदस्य नहीं है और उसे व 2मान मामले में जिसर्फ 2 इसलिलए र्फ ं साया जा रहा है क्योंविक वह हाजी इकबाल उर्फ 2 बाला का दामाद है और हाजी इकबाल उर्फ 2 बाला क े सदस्यों का पैरोकर भी कु छ मामले हैं जो विवद्वान विव(ारण न्यायालय और माननीय उच्च न्यायालय क े समक्ष लंविब हैं। () यह सम्मानपूव2क प्रस् ु विकया जा ा है विक याति(काक ा2 का कोई आपराति क इति हास नहीं है और व 2मान प्रार्थीविमकी संख्या 175/2022 क े अलावा उसक े लिWलार्फ कोई अन्य आपराति क मामला दज[2] नहीं है। छ) प्रर्थीम सू(ना रिरपोट[2] में लगाए गए आरोप प्रर्थीमदृKया याति(काक ा2 क े लिWलार्फ भार ीय दंड संविह ा की ारा 147,148,149,195-ए, 386,504 और 506 क े ह कोई मामला नहीं बना े हैं और इस प्रकार, प्रार्थीविमकी को रद्द होने का दायी है।यह उल्लेW करना सही है विक आरोप पत्र दायर विकए जाने क े बाद भी, प्रार्थीविमकी को रद्द करने की याति(का अदाल की शविक्तयों क े भी र है [क ृ पया देWें]: आनंद क ु मार मोहत्ता और एक अन्य बनाम राज्य (एन. सी. टी. विदल्ली), गृह और एक अन्य विवभाग (2019) 11 एस. सी. सी. 706 प्रस् र 14 और 16 पर। ज) उपरोक्त वर्थिण कारणों से, विवशेष अनुमति याति(का की अनुमति दी जाए और प्रार्थीविमकी संख्या 175/ 2022 विदनांक 11.08.2022 को रद्द करने से इनकार करने वाले माननीय उच्च न्यायालय क े आदेश को अपास् विकया जाए।” राज्य की ओर से विट€पशिणयां अस्वीकरण:
8. उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से उपम्मिस्र्थी विवद्वान अपर महाति वक्ता सुश्री गरिरमा प्रसाद ने अपनी लिललिW विट€पशिणयों में कहा हैः- "क) यह विक याति(काक ा2 विगरोह का सदस्य होने क े ना े और विगरोह क े अन्य सदस्य आपराति क विव(ार ारा वाले व्यविक्त हैं और समाज विवरो ी गति विवति यों में लिलप्त हैं और याति(काक ा2 विवशिभन्न अवै काय‡ में भी शाविमल है। W) यह विक शुरू में याति(काक ा2 का नाम प्रार्थीविमकी में नहीं र्थीा; हालाँविक, जां( एजेंसी ने जां( क े दौरान जोड़ा विक भार ीय दंड संविह ा की ारा 147, 148, 149, 195 ए, 386, 504, 506 जोड़ा गया है और याति(काक ा2 का नाम जोड़ा गया है। ग) प्रार्थीविमकी दज[2] होने क े बाद, विववे(क द्वारा जाँ( की गई, जाँ( क े दौरान याति(काक ा2 को दं. प्र. सं. की ारा 41 ए क े ह कई नोविटस जारी विकए गए लेविकन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं विदया और नोविटसों का जवाब नहीं विदया और उन्होंने वास् विवक सच्चाई का प ा लगाने क े लिलए जाँ( में सहयोग नहीं विकया।इसक े अलावा, यह र्थीा विक याति(काक ा2 र्फरार है और उसक े देश छोड़कर (ले जाने का संदेह है। घ) जाँ( क े दौरान, शिशकाय क ा2 का बयान दं. प्र. सं. की ारा 161 क े ह दज[2] विकया गया र्थीा और अन्य भौति क साक्ष्य एकत्र विकए गए र्थीे जिजसमें शिशकाय क ा2 का दावा साविब हो ा है। ङ) भार ीय दंड संविह ा की ारा 147,148,149,195 ए, 386, 504, 506 क े ह पुलिलस स्टेशन विमजा2पुर, जिजला सहारनपुर में दायर उपरोक्त एर्फ.आई.आर./अपरा संख्या 175/2022 में क ु ल (ार (4) आरोपी व्यविक्त हैं जिजनक े नाम Wुश6द, र्फारुW, महाराज, सुलेमान कबाड़ी हैं।आगे जाँ( क े दौरान, याति(काक ा2 का नाम भी जोड़ा गया अस्वीकरण: र्थीा, लेविकन क े वल याति(काक ा2 ही उक्त प्रार्थीविमकी को रद्द करने क े लिलए इस माननीय न्यायालय क े समक्ष आ ा है। () जाँ( पूरी हो (ुकी है और याति(काक ा2ओं क े लिWलार्फ आरोप पत्र दायर करने क े लिलए ैयार है, लेविकन माननीय न्यायालय क े स्र्थीगन आदेश विदनांक 02.01.2023 क े कारण आरोप पत्र प्रस् ु नहीं विकया जा सका। छ) जां( क े दौरान, सीआरपीसी की ारा 161 क े ह शिशकाय क ा2/पीविड़ का बयान दज[2] विकया गया, जिजसमें पीविड़ ा ने Wुलासा विकया है विक उस पर याति(काक ा2 संख्या 1 मोहम्मद इकबाल क े विगरोह क े सदस्यों द्वारा उपरोक्त एर्फआईआर संख्या 122/2022 में समझौ ा करने क े लिलए दबाव डाला गया र्थीा।इसक े अलावा, यह भी ब ाया गया विक Wुश6द पुत्र असगर, र्फारूक पुत्र मु ाक, मेहराज पुत्र र्फारूक और सुलेमान कबाड़ी पुत्र Wुरर्फान ने पीविड़ को मकी दी है और सुलेमान कबाड़ी ने विपस् ौल विदWाकर (े ावनी दी है विक अगर उसने समझौ ा नहीं विकया ो उसे परिरणाम भुग ने होंगे। उपरोक्त थ्यात्मक और कानूनी प्रस् ुति यों को ध्यान में रW े हुए, सादर विनवेदन विकया जा ा है विक याति(काक ा2ओं की व 2मान विवशेष अनुमति याति(का अनुकरणीय लाग क े सार्थी Wारिरज होने का दायी है और आपराति क प्रकीण[2] रिरट याति(का संख्या 13339/2022 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश 17.10.2022 विदनांविक को बनाये रWने का उत्तरदायी है।" विवश्लेषण अस्वीकरण:
9. पक्षकारों की ओर से उपम्मिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता को सुनने क े बाद और अशिभलेW पर उपम्मिस्र्थी सामग्री क े अवलोकन क े बाद, एकमात्र सवाल जो हमारे विव(ार क े लिलए आ ा है वह यह है द्वारा जहाँ क अपीलक ा2 का संबं है, क्या प्रार्थीविमकी को रद्द कर विदया जाना (ाविहए?
10. हम विनम्नलिललिW थ्यों पर ध्यान दे े हैंः-
1. यहां प्रार्थीविमकी में आरोपी व्यविक्तयों में से एक क े रूप में अपीलक ा2 को नाविम नहीं विकया गया है।अपीलक ा2 क े लिWलार्फ पूरी प्रार्थीविमकी में उसक े नाम से कोई आरोप नहीं है।
2. ऐसा प्र ी हो ा है विक प्रर्थीम सू(ना देने वाले का आगे का बयान दंड प्रविdया संविह ा की ारा 161 क े ह दज[2] विकया गया र्थीा और उक्त बयान में अपीलक ा2 का नाम सामने आया र्थीा।
11. प्रर्थीम सू(ना देने वाले ने अपने अगले बयान विदनांक 12.08.2022 में इस प्रकार कहाः-
8. ".....कल सुबह करीब 7 बजे मैं अपनी बेटी सालिलया क े सार्थी अपने भाई को देWने अपनी मां क े घर शाहपुर गढ़ा जा रही र्थीी जैसे ही पेट्रोल पंप से आगे पहुं(ी भी एक सर्फ े द रंग की अज्ञा नंबर की बोलेरो कार मेरे पास आकर रुकी, उसमें बैठे लोगों ने कार का शीशा नी(े कर लिलया। इसलिलए मैंने पह(ाना विक यह सुलेमान कबाड़ी है। यही कारण है विक सामने की सीट पर बैठे सुलेमान कार से नी(े उ रा और कहा विक बार- बार कहने क े बाद ुम्हें समझ में नहीं आया। हमने ुमको यह भी समझाया र्थीा विक हाजी इकबाल द्वारा लिलए गए र्फ ै सले क े बारे में शिशकाय न करें। लेविकन ुमको गाली देने क े बाद भी सहम नहीं हुए। अब हमारे जेल जाने और अदाल पर लगभग 10 लाW रुपये W(2 होंगे। ुम्हारे अस्वीकरण: विप ा ुमको क्या देंगे?विर्फर गाड़ी में बैठे सभी लोगों ने नी(े उ रकर मुझे घेर लिलया। राशिशद प्र ान महमूदपुर ने कहा विक या ो अब शिशकाय वापस ले लें या 10 लाW रुपये दें। अन्यर्थीा ुम विनति– रूप से मारी जाओगी। ुम्हारे सार्थी ुम्हारा परिरवार भी नहीं ब(ेगा।इसलिलए शाहपुर गडा विनवासी असलम उर्फ 2 शुभा ने अपनी जेब से एक विपस् ौल विनकाली और मेरी ओर इशारा विकया और कहा विक ुमने सुना, हमें कम से कम 10 लाW रुपये दें। वना2 मामला वापस ले लें। वना2, ुम्हें प ा है विक ुम्हारे बारे में विकसी को क ु छ भी प ा नहीं (लेगा। और अपने परिरवार से कहें विक हमारे लिWलार्फ गवाही न दें। अन्यर्थीा सभी मरने क े लिलए ैयार रहें। विपस् ौल को देWकर मैं और मेरी बेटी डर से भागने लगे। हमारी आवाज भी बाहर नहीं आ सकी। रायपुर क े राव आति र्फ ने कहा विक भागकर कहाँ जाओगी। और कब क भाग ी रहोगी? या ो कोई विनण2य लेंगे या 10 लाW रुपये देंगे या मरेंगे। पास में Wड़ा व्यविक्त, सालिलब उर्फ सालू पुत्र विदलशाद विनवासी क ुं जा ग्रांट विवकास नगर, देहरादून जो इकबाल उर्फ 2 बाला का भ ीजा और दामाद भी है, बार-बार कह रहा र्थीा विक उसने उसे कार में घेर लिलया।या ो वह र्फ ै सला करेगी या पैसे देगी या वह आज ही मरेगी। भी सलमान पुत्र ल ीफ़ विनवासी ग्राम विमर्ज़ाा2पुर जिजसे मैं पहले से जान ी र्थीी। वह अपनी बाइक पर आया और हमारे पास रुका और पूछा विक क्या हुआ। ो सुलेमान कबाड़ी ने कहा विक अब बहु समय हो गया है, लोग आने-जाने लगे हैं। यह कह े हुए लोग कार में बैठ गए और शाहपुर गडा की ओर भागे।मैं यहाँ सड़क पर बैठी रही। क ु छ समझ में नहीं आया।मैंने ये सब बा ें सलमान क े बेटे ल ीर्फ, विमस्टर Wुश6द, र्फारूक, महाराज को ब ाई जो मेरे परिरवार से हैं। ये लोग इकबाल उर्फ े लिWलार्फ मामले में र्फ ै सला लेने क े लिलए र्फोन पर मेरे परिरवार क े सदस्यों से बा करक े मुझे मकी दे े हैं। महोदय, मैं बहु चिं(ति हूं, क ृ पया मेरी मदद करें।यह मेरा अस्वीकरण: बयान है। महोदय, जिजन लोगों क े नाम मैंने आपको ब ाए हैं, वे इकबाल उर्फ 2 बाला क े घर आ े र्थीे, इसलिलए मैं उन्हें पहले से जान ा हूं।"
12. ऊपर उजिल्ललिW दज[2] आगे क े बयान क े सार्थी, जां( एजेंसी ने भा.दं.सं. की ारा 147,148,149,195 ए, 385 और 504 को जोड़ा।
13. हम कशिर्थी (श्मदीद गवाह सलमान क े एक पुलिलस बयान का भी उल्लेW कर सक े हैं। बयान इस प्रकार हैः- “ प्रत्यक्षदश[6] का बयान....सलमान पुत्र ल ीफ़ विनवासी क‹याव र्थीाना विमर्ज़ाा2पुर जनपद सहारनपुर ने पूछने पर ब ाया विक विदनांक 11.06.2022 को प्रा ः लगभग 7.00 बजे वह विकसी काम से अपने घर विमर्ज़ाा2पुर से शाहपुर गढ़ा जा रहा र्थीा, भी रास् े में मैंने देWा विक हमारे ही गाँव की श्रीम ी हुस्ना क े पास क ु छ लोग सड़क पर Wड़े हैं।जो हमारे आसपास क े हैं। जिजन्हें मैं अच्छी रह से जान ा हूं, जिजनमें से एक का नाम सुलेमान कबाड़ी पुत्र र्फ ु रकान विनवासी ग्राम विमर्ज़ाा2पुर पॉल, र्थीाना विमर्ज़ाा2पुर पॉल, जिजला सहारनपुर, नगर विमर्ज़ाा2पुर है र्थीा दूसरा व्यविक्त राशिशद पुत्र मो. विनवासी शाहपुर गढ़ा र्थीाना विमर्ज़ाा2पुर जिजला सहारनपुर और (ौर्थीे व्यविक्त का नाम आति र्फ पुत्र हमीद विनवासी रायपुर र्थीाना विमर्ज़ाा2पुर जिजला सहारनपुर और पां(वें व्यविक्त का नाम सलीब उर्फ 2 सालू पुत्र विदलशाद विनवासी क ुं जा ग्रांट विवकास नगर देहरादून है जो हाजी इकबाल उर्फ 2 बाला का रिरश् ेदार है सभी लोग सम्माविन व्यविक्त हैं और हमारे गांव विमर्ज़ाा2पुर में सभी का आना-जाना लगा रह ा है। ये लोग हाजी इकबाल उर्फ े सदस्यों क े लिWलार्फ लिलWे गए मामले में विनण2य लेने क े लिलए विमजा2पुर जिजले क े सहारनपुर गांव क े विमजा2पुर पॉल पुलिलस र्थीाने में रहने वाले इरर्फान की पत्नी हुस्ना को गाली दे रहे र्थीे और मकी दे रहे र्थीे। और लिललिW मामले में होने वाले अस्वीकरण: W(‡ क े लिलए पैसे की मांग कर रहे र्थीे। जब मैं यहाँ पहुँ(ा ो ये सभी लोग अपनी-अपनी बोलेरो गाड़ी में बैठ गए और शाहपुर गढा की ओर (ले गए। जहाँ श्रीम ी हुस्ना बदहवास बैठी हुई र्थीीं। जब मैंने उससे पूछा विक क्या हुआ, ो ये सारी बा ें मुझे हुस्ना देवी ने वहीं पर ब ाई ं। महोदय, यह स( है विक जब मैं मोटरसाइविकल लेकर वहाँ पहुँ(ा ो इन लोगों ने हुस्ना को घेर लिलया और पेट्रोल पंप क े सामने सड़क पर Wड़े होकर उसे मकी दे रहे र्थीे। इनमें से असलम क े हार्थी में विपस् ौल भी र्थीी। मैं विबना विकसी दबाव क े यह बयान दे रहा हूं। मैंने जो देWा है, वह आपको ब ा विदया है। मेरा विकसी से कोई लेना-देना नहीं है। यह मेरा बयान है।"
14. उपरोक्त से ऐसा प्र ी हो ा है विक पहले सू(नादा ा ने अपने आगे क े बयान में प्रार्थीविमकी में ब ाई गई कहानी से विब‹क ु ल अलग कहानी ब ाई। हम यह कहने की हद क नहीं जाएंगे क्योंविक अपीलक ा2 का नाम एर्फआईआर में नहीं है और पीविड़ ा क े आगे क े बयान में ही पहली बार यह Wुलासा हुआ विक यह स्वयं प्रर्थीम सू(ना रिरपोट[2] को रद्द करने का आ ार हो सक ा है। हालाँविक, मामले क े रिरकॉड[2] से कई अन्य उपम्मिस्र्थी परिरम्मिस्र्थीति याँ सामने आ रही हैं जो इंविग कर ी हैं विक मौजूदा मामला झूठे विनविह ार्थी‡ में से एक है।जैसा विक इकबाल उर्फ 2 बाला नाम से आरोप लगाया गया है, जिसर्फ 2 इसलिलए विक यहां अपीलक ा2 एक बहु ही दुदा] अपरा ी का दामाद है इसलिलये उसे भी आगे क े बयान क े माध्यम से शाविमल विकया गया है। यह ध्यान देने योग्य है विक पीविड़ ा ने अपनी एर्फआईआर में सलमान पुत्र ल ीर्फ की गांव विमर्ज़ाा2पुर पॉल में मौजूदगी का दूर-दूर क जिजd नहीं विकया है। हम यह सब क े वल यह विदWाने क े लिलए उजागर कर रहे हैं विक क ै से (रण -दर- (रण पूरा मामला गढ़ा गया। अस्वीकरण:
15. इस विवषय में एक अलग दृविKकोण है। ऐसा प्र ी हो ा है विक जाँ( एजेंसी ने आई. पी. सी. भा.दं.सं. 195 ए लागू की है। भा.दं.सं. की ारा 195 ए इस प्रकार हैः- " भार ीय दंड संविह ा की ारा 195A — विकसी व्यविक्त को विमथ्या साक्ष्य देने क े लिलए मकाना – जो कोई, विकसी दूसरे व्यविक्त को, उसक े शरीर, ख्याति या संपलित्त को अर्थीवा ऐसे व्यविक्त क े शरीर या ख्याति को, जिजसमें वह व्यविक्त विह बद्ध है, यह कारिर करने क े आशय से कोई क्षति करने की मकी दे ा है, विक वह व्यविक्त विमथ्या साक्ष्य दे ो वह दोनों में से विकसी भांति क े कारावास से, जिजसकी अवति सा वष[2] क की हो सक े गी या जुमा2ने से या दोनों से दंतिड विकया जाएगा; और यविद कोई विनद ष व्यविक्त ऐसे विमथ्या साक्ष्य क े परिरणामस्वरूप मृत्यु से या सा वष[2] से अति क क े कारावास से दोषजिसद्ध और दंडाविदK विकया जा ा है ो ऐसा व्यविक्त, जो मकी दे ा है, उसी दंड से दंतिड विकया जाएगा और उसी रीति में और उसी सीमा क दंडाविदK विकया जाएगा जैसे विनद ष व्यविक्त दंतिड और दंडाविदK विकया गया है।"
16. उपरोक्त प्राव ान क े एक सादे अध्ययन से संक े विमल ा है विक यविद विकसी व्यविक्त को उसक े व्यविक्त, प्रति ष्ठा या संपलित्त को (ोट पहुं(ाने की मकी दी गई है और ऐसी मविकयां उस व्यविक्त को झूठा साक्ष्य देने क े इरादे से दी जा ी हैं, ो यह भार ीय दंड संविह ा की ारा 195 ए क े ह अपरा होगा। हमारी राय में, प्रार्थीविमकी को पढ़ने और कशिर्थी (श्मदीद गवाह क े बयान सविह पहले सू(नादा ा क े आगे क े बयान पर, भार ीय दंड संविह ा की ारा 195 ए क े ह दंडनीय अपरा का गठन करने वाली विकसी भी सामग्री का Wुलासा नहीं विकया गया है। प्रार्थीविमकी में आरोप यह है विक आरोपी व्यविक्तयों ने भार ीय दंड संविह ा की ारा अस्वीकरण: 376 डी, 323, 120 बी, 354 ए और 452 क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए दज[2] अपनी पहली एर्फआईआर संख्या 122/2022 को वापस लेने क े लिलए प्रर्थीम सू(नादा ा को मकी दी और दबाव डाला। यह इंविग करने क े लिलए कु छ भी नहीं है विक आरोपी व्यविक्तयों ने प्रर्थीम सू(नादा ा को इस इरादे से मकी दी र्थीी विक प्रर्थीम सू(नादा ा अदाल क े समक्ष गल साक्ष्य दे। ारा 195 ए क े बाद क े भाग में यह सुस्पK विकया गया है विक झूठे साक्ष्य का अर्थी2 है न्यायालय क े समक्ष गल साक्ष्य। ऐसे झूठे साक्ष्यों पर यविद विकसी व्यविक्त को दोषी ठहराया जा ा है और सजा सुनाई जा ी है, ो मविकयां देने का दोषी पाए गए व्यविक्त को उसी रह और उसी सीमा क दंतिड विकया जाएगा, जिजस रह से ऐसे विनद ष व्यविक्त को दंतिड और सजा दी जा ी है। ारा 195 ए में "झूठा" शब्द को भार ीय दंड संविह ा की ारा 191 में जो समझाया गया है, उसक े संदभ[2] में पढ़ा जाना (ाविहए जो झूठे साक्ष्य और लोक न्याय क े विवरूद्ध अपरा क े अध्याय XI में आ ा है।इस प्रकार, भले ही हम प्रार्थीविमकी में लगाए गए आरोपों को स( मान े हैं, पर ारा 195 ए क े ह दंडनीय अपरा का गठन करने वाले विकसी भी त्व का Wुलासा नहीं विकया जा ा है। विकसी व्यविक्त को शिशकाय या प्रार्थीविमकी वापस लेने या विववाद से समझौ ा करने की मकी देना भार ीय दंड संविह ा की ारा 195 ए क े ह नहीं आयेगा।
17. उपरोक्त क े संदभ[2] में, हमें दंड प्रविdया संविह ा (सी.आर पी.सी.) की ारा 195 ए पर गौर करना (ाविहए।दंड प्रविdया संविह ा की ारा 195 ए इस प्रकार हैः- "दंड प्रविdया संविह ा की ारा 195A:- मकी इत्याविद क े मामले में सातिक्षयों क े लिलये प्रविdया — भार ीय दण्ड संविह ा (1860 का 45) की ारा 195-क क े अ ीन विकसी अपरा क े संबं में साक्षी या कोई अन्य व्यविक्त परिरवाद दालिWल कर सक े गा।" अस्वीकरण:
18. उपरोक्त प्राव ान को पढ़ने से यह संक े विमल ा है यविद विकसी गवाह या विकसी अन्य व्यविक्त को मविकयां विमल ी हैं और ऐसी मविकयां उस व्यविक्त को अदाल क े समक्ष झूठा साक्ष्य देने क े इरादे से दी जा ी हैं, ो ऐसा गवाह या व्यविक्त भार ीय दंड संविह ा की ारा 195 ए क े ह अपरा क े संबं में शिशकाय दज[2] कर सक ा है। यह कहने की आवश्यक ा नहीं है विक ऐसी शिशकाय साक्ष्य दज[2] करने वाले न्यायालय क े समक्ष दज[2] की जानी (ाविहए । दंड प्रविdया संविह ा की ारा 195 ए शिशकाय दज[2] करने का उपाय प्रदान कर ी है। "शिशकाय " का अर्थी2 है दंड प्रविdया संविह ा की ारा 2 (घ) क े ह परिरभाविष विकया गया है जो इस प्रकार हैः- " ारा 2 (घ) “परिरवाद” से इस संविह ा क े अ ीन मजिजस्ट्रेट द्वारा कार2वाई विकए जाने की दविK से मौलिWक या लिललिW रूप में उससे विकया गया यह अशिभकर्थीन अशिभप्रे है विक विकसी व्यविक्त ने, (ाहे वह ज्ञा हो या अज्ञा, अपरा विकया है, किंक ु इसक े अं ग[2] पुलिलस रिरपोट[2] नहीं है। स्पKीकरण -ऐसे विकसी मामले में, जो अन्वेषण क े प–ा ् विकसी असंज्ञेय अपरा का विकया जाना प्रकट कर ा है. पुलिलस अति कारी द्वारा की गई रिरपोट[2] परिरवाद समझी जाएगी और वह पुलिलस अति कारी जिजसक े द्वारा ऐसी रिरपोट[2] की गई है, परिरवादी समझा जाएगा;"
19. हम इस थ्य से अवग हैं विक भार ीय दंड संविह ा की ारा 195 ए एक संज्ञेय अपरा है।संज्ञेय अपरा में पुलिलस क े पास जाँ( करने की शविक्त हो ी है। हम इस सवाल पर नहीं जा रहे हैं विक क्या सीआरपीसी की ारा 195 की रोक आईपीसी की ारा 195 ए पर लागू होगी या नहीं जैसा विक हमने यह विव(ार विकया है विक व 2मान मामले क े थ्यों में भार ीय दंड संविह ा की ारा 195 ए क े ह अस्वीकरण: दंडनीय अपरा का गठन करने वाली विकसी भी सामग्री का Wुलासा नहीं विकया गया है।
20. हम इस थ्य पर ध्यान दे े हैं विक भार ीय दंड संविह ा की ारा 386 भी लागू की गई है।भार ीय दंड संविह ा की ारा 386 विकसी व्यविक्त को मौ या गंभीर (ोट क े डर में डालकर जबरन वसूली से संबंति है।भार ीय दंड संविह ा की ारा 386 इस प्रकार हैः- " ारा 386 विकसी व्यविक्त को मृत्यु या घोर उपहति क े भय में डालकर उद्दापन–जो कोई विकसी व्यविक्त को स्वयं उसकी या विकसी अन्य व्यविक्त की मृत्यु या घोर उपहति क े भय में डालकर उद्दापन करेगा, वह दोनों में से विकसी भाँति क े कारावास से, जिजसकी अवति दस वष[2] क की हो सक े गी, दम्मिण्ड विकया जायेगा और जुमा2ने से भी दण्डनीय होगा।”
21. भार ीय दंड संविह ा की ारा 383 में "उद्दापन" को विनम्नानुसार परिरभाविष विकया गया हैः- ”भार ीय दंड संविह ा की ारा 383 — उद्दापन –जो कोई विकसी व्यविक्त को स्वयं उस व्यविक्त को या विकसी अन्य व्यविक्त को कोई क्षति करने क े भय में साशय डाल ा है, और ए द्द्वारा इस प्रकार भय में डाले गए व्यविक्त को, कोई सम्पलित्त या मू‹यवान प्रति भूति या हस् ाक्षरिर या मुद्रांविक कोई (ीज, जिजसे मू‹यवान प्रति भूति में परिरवर्ति विकया जा सक े, विकसी व्यविक्त को परिरदत्त करने क े लिलए बेईमानी से उत्प्रेरिर कर ा है, वह “उद्दापन” कर ा है। दृKां (क) क यह मकी दे ा है विक यविद य ने उसको न नहीं विदया, ो वह य क े बारे में मानहाविनकारक अपमान लेW प्रकाशिश करेगा। अपने को अस्वीकरण: न देने क े लिलए वह इस प्रकार य को उत्प्रेरिर कर ा है। क ने उद्दापन विकया है। (W) क, य को यह मकी दे ा है विक यविद वह क को कु छ न देने क े संबं में अपने आपको आबद्ध करने वाला एक व(नपत्र हस् ाक्षरिर करक े क को परिरदत्त नहीं कर दे ा, ो वह य क े शिशशु को सदोष परिररो में रWेगा य व(नपत्र हस् ाक्षरिर करक े परिरदत्त कर दे ा है। क ने उद्दापन विकया है। (ग) क यह मकी दे ा है विक यविद य, W को क ु छ उपज परिरदत्त कराने क े लिलए शाम्मिस् युक्त बन् पत्र हस् ाक्षरिर नहीं करेगा और W को न देगा, ो वह य क े Wे को जो डालने क े लिलए लठै भेज देगा और ए द्द्वारा य को वह बं पत्र हस् ाक्षरिर करने क े लिलए और परिरदत्त करने क े लिलए उत्प्रेरिर कर ा है। क ने उद्दापन विकया है। (घ) क, य को घोर उपहति करने क े भय में डालकर बेईमानी से य को उत्प्रेरिर कर ा है विक वह एक कोरे कागज पर हस् ाक्षर कर दे या अपनी मुद्रा लगा दे और उसे क को परिरदत्त कर दे य उस कागज पर हस् ाक्षर करक े उसे क को परिरदत्त कर दे ा है। यहां, इस प्रकार हस् ाक्षरिर कागज मू‹यवान प्रति भूति में परिरवर्ति विकया जा सक ा है, इसलिलए क ने उद्दापन विकया है।”
22. अ ः उपरोक्त से यह स्पK है विक उद्दापन क े अपरा क े लिलए आवश्यक त्वों में से एक यह है विक पीविड़ को विकसी भी व्यविक्त को कोई संपलित्त या मू‹यवान प्रति भूति आविद देने क े लिलए बार बार कहना। कहने का ात्पय[2] है विक, संपलित्त को देने में सहमति होना (ाविहए न विक व्यविक्त को विकसी नुकसान होने क े डर में आकर विदया गया हो। (ोरी क े विवपरी, उद्दापन में सहमति एक त्व हो ा है और विनति– अस्वीकरण: रूप से पीविड़ को (ोट लगने क े डर से प्राप्त विकया जा ा है। उद्दापन में, पीविड़ को (ोट लगने क े डर में डाल कर उसकी इच्छा पर काबू पाना पड़ ा है। जबरदस् ी विकसी भी संपलित्त को लेना इस परिरभाषा क े ह नहीं आएगा।यह विदWाना होगा विक व्यविक्त को (ोट लगने क े डर से संपलित्त को छोड़ने क े लिलए उकसाया गया र्थीा। भार ीय दंड संविह ा में दी गई ारा क े दृKां इसे पूण[2] ः स्पK कर े हैं।
23. उपरोक्त संदभ[2] में, हम पटना उच्च न्यायालय की Wण्ड पीठ द्वारा रामयद सिंसह बनाम इम्परर आपराति क पुनरीक्षण संख्या 1931 (पैट) में की गई विनम्नलिललिW विट€पशिणयों का उल्लेW कर सक े हैंः - “यविद थ्य यह है विक याति(काक ा2ओं में से एक ने शिशकाय क ा2 का अंगूठा जबरन पकड़ लिलया र्थीा और उसक े विवरो क े बावजूद उसे कागज क े टुकड़े पर लगा विदया र्थीा, ो मैं सहम होऊ ं गा विक यह कहने का अच्छा आ ार है विक अपरा (ाहे जो भी हुआ हो और हो सक ा है यह उद्दापन का अपरा नहीं र्थीा क्योंविक शिशकाय क ा2 को (ोट क े डर से प्रेरिर नहीं विकया गया होगा बम्मि‹क वह क े वल वास् विवक शारीरिरक दबाव का विवषय रहा होगा।" यह अव ारिर विकया गया र्थीाः- “यह स्पK है विक यह परिरभाषा अशिभयोजन पक्ष क े लिलए यह साविब करना आवश्यक बना ी है विक पीविड़ ों नारायण और शिशवनंदन को Wुद को या दूसरों को (ोट पहुं(ाने क े डर में रWा गया र्थीा, और इसक े अलावा, बेईमानी से उन्हें अपने अंगूठे क े विनशान वाले कागजा देने क े अस्वीकरण: लिलए प्रेरिर विकया गया र्थीा। व 2मान मामले में अशिभयोजन पक्ष की कहानी इससे आगे नहीं जा ी है विक उनसे अंगूठे क े विनशान जबरन लिलए गए र्थीे। जबरन ले जाने का विववरण स्पK रूप से साक्ष्य क े रूप में नहीं रWा गया र्थीा। विव(ारण न्यायालय पीविड़ ों क े हार्थी को पकड़ने और विर्फर जबरन उनक े अंगूठे क े विनशान 'लिलए जाने' की बा कर ा है। …विन(ली अदाल ें क े वल पीविड़ क े अंगूठे की छाप को जबरन लेने की बा कर ी हैं; और (ूंविक इसमें आवश्यक रूप से पीविड़ को अपने अंगूठे की छाप (ऐसे कागजा जिजन्हें विनस्संदेह मू‹यवान प्रति भूति यों में परिरवर्ति विकया जा सक ा है) क े सार्थी कागजा देने क े लिलए प्रेरिर करना शाविमल नहीं है, इसलिलए मुझे यह मानना (ाविहए विक उद्दापन का अपरा स्र्थीाविप नहीं है।"
24. इस प्रकार, यह ध्यान देना प्रासंविगक है विक कहीं भी प्रर्थीम सू(नादा ा ने यह नहीं कहा है विक उसने डर से अशिभयुक्तों को 10 लाW रुपये का भुग ान विकया र्थीा। दूसरे शब्दों में कहें ो इस बा का संक े देने क े लिलए कु छ भी नहीं है विक डर में पड़े व्यविक्त द्वारा संपलित्त ( न) क े कब्जे का वास् विवक विव रण विकया गया र्थीा। ऐसी विकसी भी (ीर्ज़ा क े अभाव में जो दूर-दूर क यह संक े दे विक प्रर्थीम सू(नादा ा ने विकसी (ोट क े डर क े बाद एक विवशेष राशिश का भुग ान विकया र्थीा, भार ीय दंड संविह ा की ारा 386 क े ह कोई अपरा नहीं बनाया गया कहा जा सक ा है।
25. हालाँविक, जैसा विक पहले देWा गया है, प्रर्थीम सू(नादा ा द्वारा सामने रWा गया पूरा मामला मनगढ़ं और का‹पविनक प्र ी हो ा है। इस स् र पर, हम भजन लाल (उपरोक्त) क े मामले में प्रार्थीविमकी को रद्द करने क े लिलए इस न्यायालय द्वारा विन ा2रिर मापदंडों का उल्लेW कर सक े हैं। मापदंड इस प्रकार हैंः- "(1) जहां प्रर्थीम सू(ना रिरपोट[2] या शिशकाय में लगाए गए आरोप, भले ही उन्हें वास् विवक समझा जाए और पूरी रह से स्वीकार कर लिलया अस्वीकरण: जाए ो प्रर्थीम दृKया कोई अपरा नहीं बन ा है या आरोपी क े लिWलार्फ कोई मामला नहीं बन ा है। (2) जहां प्रार्थीविमकी क े सार्थी अन्य सामग्री में आरोप, यविद कोई हो, एक संज्ञेय अपरा का Wुलासा नहीं कर े हैं, ो संविह ा की ारा 156 (1) क े ह पुलिलस अति कारिरयों द्वारा जां( को उति( ठहराया जा सक ा है, जिसवाय इसक े विक दायरे में एक मजिजस्ट्रेट क े आदेश क े ह संविह ा की ारा 155(2) क े । (3) जहां प्रार्थीविमकी या शिशकाय में लगाए गए अविनयंवित्र आरोप और उसक े समर्थी2न में एकत्र विकए गए साक्ष्य विकसी भी अपरा क े होने का Wुलासा नहीं कर े हैं और आरोपी क े लिWलार्फ मामला बना े हैं। (4) जैसा विक संविह ा की ारा 155 (2) क े ह विव(ार विकया गया है, जहां प्रार्थीविमकी में आरोप एक संज्ञेय अपरा का गठन नहीं कर े हैं, लेविकन क े वल एक गैर-संज्ञेय अपरा का गठन कर े हैं, वहां एक पुलिलस अति कारी द्वारा मजिजस्ट्रेट क े आदेश क े विबना विकसी भी जां( की अनुमति नहीं दी जा ी है । (5) जहां एर्फआईआर या शिशकाय में लगाए गए आरोप इ ने अर्थी2हीन और स्वाभाविवक रूप से असंभव हैं, जिजनक े आ ार पर कोई भी विववेकशील व्यविक्त कभी भी इस विनष्कष[2] पर नहीं पहुं( सक ा है विक आरोपी क े लिWलार्फ काय2वाही क े लिलए पया2प्त आ ार है। (6) जहां संविह ा या संबंति अति विनयम (जिजसक े ह आपराति क काय2वाही शुरू की गई है) क े विकसी भी प्राव ान में संस्र्थीा और काय2वाही जारी रWने और/या जहां संविह ा या संबंति अति विनयम में कोई विवशिशK प्राव ान है, पीविड़ पक्षकार की शिशकाय क े लिलए प्रभावी विनवारण प्रदान करने क े लिलए एक स्पK कानूनी बा ा है। अस्वीकरण: (7) जहां विकसी आपराति क काय2वाही को स्पK रूप से असद्भावी रीक े से पेश विकया जा ा है और/या जहां काय2वाही असद्भावी रीक े से अशिभयुक्त से बदला लेने क े लिलए और विनजी और व्यविक्तग द्वेष क े कारण उसे रोकने क े उद्देश्य से शुरू की जा ी है।" हमारी राय में, व 2मान मामला ऊपर उजिल्ललिW पैरामीटर संख्या 1, 5 और 7 क े अं ग[2] आ ा है।
26. इस स् र पर, हम क ु छ महत्वपूण[2] विनरीक्षण करना (ाहेंगे.जब भी कोई आरोपी दंड प्रविdया संविह ा (सीआरपीसी) की ारा 482 क े ह अं र्निनविह शविक्तयों या संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह असा ारण क्षेत्राति कार का उपयोग करक े प्रार्थीविमकी या आपराति क काय2वाही को अविनवाय[2] रूप से इस आ ार पर रद्द करने क े लिलए अदाल क े समक्ष आ ा है विक ऐसी काय2वाविहयाँ स्पK रूप से परेशान करने वाली हैं या प्रति शो लेने क े गुप्त उद्देश्य से शुरू की गई हैं, ो ऐसी परिरम्मिस्र्थीति यों में न्यायालय का क 2व्य है विक वह प्रार्थीविमकी को साव ानी से और र्थीोड़ा अति क बारीकी से देWे।हम ऐसा इसलिलए कह े हैं क्योंविक एक बार जब परिरवादी व्यविक्तग प्रति शो आविद क े लिलए विकसी गुप्त उद्देश्य क े सार्थी आरोपी क े लिWलार्फ आगे बढ़ने का र्फ ै सला कर ा है, ो वह यह सुविनति– करेगा विक सभी आवश्यक अशिभव(नों क े सार्थी प्रार्थीविमकी/शिशकाय का बहु अच्छी रह से मसौदा ैयार विकया जाए।परिरवादी यह सुविनति– करेगा विक प्रार्थीविमकी/शिशकाय में विकए गए कर्थीन ऐसे हों विक वे कशिर्थी अपरा का गठन करने क े लिलए आवश्यक त्वों का Wुलासा करें।इसलिलए, न्यायालय क े लिलए यह पया2प्त नहीं होगा विक वह क े वल प्रार्थीविमकी/शिशकाय में विकए गए कर्थीनों पर गौर करे ाविक यह प ा लगाया जा सक े विक कशिर्थी अपरा का गठन करने क े लिलए आवश्यक त्वो का Wुलासा विकया गया है या नहीं। विनरर्थी2क या कKप्रद काय2वाही में, न्यायालय का यह क 2व्य अस्वीकरण: है विक वह मामले क े अशिभलेW से विनकली कई अन्य परिरम्मिस्र्थीति यों पर गौर करे और यविद आवश्यक हो ो उति( देWभाल और साव ानी क े सार्थी पंविक्तयों क े बी( में पढ़ने का प्रयास करे।दं.प्र.सं. की ारा 482 या संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह अपने क्षेत्राति कार का प्रयोग कर े समय न्यायालय को स्वयं को क े वल मामले क े (रण क ही सीविम रWने की आवश्यक ा नहीं है लेविकन उसे मामले की शुरुआ /पंजीकरण से जुड़ी समग्र परिरम्मिस्र्थीति यों क े सार्थी -सार्थी जां( क े दौरान एकत्र की गई सामग्री को भी ध्यान में रWने का अति कार है।उदाहरण क े लिलए व 2मान मामले को ले लें। इस अवति में कई प्रार्थीविमकी दज[2] की गई हैं।ऐसी परिरम्मिस्र्थीति यों की पृष्ठभूविम में कई एर्फआईआर का पंजीकरण महत्वपूण[2] हो जा ा है, जिजससे विनजी या विनजी द्वेष क े कारण प्रति शो लेने का मुद्दा सामने आ ा है, जैसा विक आरोप लगाया गया है।
27. मामले क े समग्र दृविKकोण में, जहाँ क अपीलक ा2 का संबं है, हम इस विनष्कष[2] पर पहुं(े हैं विक प्रार्थीविमकी संख्या 175/2022 विदनांविक 11.08.2022 को रद्द विकया जाना (ाविहए।यह स्पK है विक जैसा विक राज्य का मानना है विक अपीलार्थी6 का ससुर इकबाल उर्फ 2 बाला बहु ही दुदा] अपरा ी है, उसका दामाद यानी व 2मान अपीलार्थी6 जिजसे पहले क े आगे क े बयान में र्फ ं साया गया है सू(नादा ा भी अपरा ी है।
28. परिरणामस्वरूप, यह अपील सर्फल हो ी है और ए द्द्वारा अनुमति दी जा ी है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश को ए द्द्वारा अपास् विकया जा ा है। पुलिलस स्टेशन विमर्ज़ाा2पुर, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश राज्य में दज[2] प्रार्थीविमकी संख्या 175/2022 विदनांक 11.08.2022 से उत्पन्न आपराति क काय2वाही को ए द्द्वारा रद्द विकया जा ा है। अस्वीकरण:
29. यह स्पK करने की आवश्यक ा नहीं है विक इस विनण2य में की गई विट€पशिणयां क े वल विव(ारा ीन प्रार्थीविमकी और परिरणामी आपराति क काय2वाही क े उद्देश्य क े लिलए प्रासंविगक हैं।विकसी भी विट€पणी का विकसी भी लंविब आपराति क मुकदमे या विकसी अन्य काय2वाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ……………………………… (न्यायमूर्ति बी. आर. गवई) ……………………………… (न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला) नई विदल्ली 08 अगस्, 2023 अस्वीकरण: