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भार क
े सव च्च न्यायालय में
आपराति क अपीलीय अति कारिर ा
आपराति क अपील संख्या 2343/2023
(एसएलपी (आपराति क) संख्या 2988/2023 से उद्भू )
हाजी इकबाल @बाला द्वारा विवशेष मुख् ारनामा... …अपीलक ा6(गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य … प्रति वादी(गण)
विनण6य
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला,
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गयी।
2. यह अपील भार ीय दंड संविह ा (संक्षेप में "आईपीसी") की ारा 376 घ और 506 क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए उत्तर प्रदेश राज्य क े सहारनपुर जिजले क े विमजा6पुर पुलिलस स्टेशन में दज[6] प्रथम सूचना रिरपोट[6] (एफआईआर) संख्या 195/2022 में मूल अभिभयुक्त संख्या 2 की ओर से दायर की गयी है और अपीलक ा6 द्वारा दायर आपराति क प्रकीण[6] रिरट यातिचका संख्या अस्वीकरण: “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण6य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनब[ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण6य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाभिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विbयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 15172/2022 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 17.10.2022 विदनांविक आदेश क े लिcलाफ विनदdभिश है, जिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने रिरट यातिचका को cारिरज कर विदया और इस रह उसमें उजिeलिc अपरा ों क े लिलए ऊपर उजिeलिc प्राथविमकी को रद्द करने से इनकार कर विदया।
3. "एक्स" द्वारा दज[6] कराई गई प्राथविमकी इस प्रकार हैः- "भिशकाय की प्रति -- सेवा में, प्रभारी विनरीक्षक महोदय थाना विमजा6पुर, जिजला-सहारनपुर। महोदय, यह विवनम्र ापूव6क अनुरो विकया जा ा है विक मेरा नाम एक्स पत्नी वाई विनवासी ग्राम कोट मस्टरका, थाना चचरौली, जिजला यमुना नगर, हरिरयाणा है।वष[6] 2011 में मेरे एक रिरश् ेदार ने मुझे ब ाया विक गांव सफीपुर में स्थिस्थ जमीन का एक भूcंड cसरा सं. 145/1 क्षेत्रफल 0.461 हेक्टेयर मभिण माजरा रोड, चंडीगढ़ विनवासी सुरेंद्र जोशी क े बेटे अनp क ु मार जोशी का था, उक्त मालिलक ने उक्त भूविम को बेचने का फ ै सला विकया था। इसे ध्यान में रc े हुए, मैंने 25.11.2011 को व 6मान भूविम क े विवbय क े लिलए विवbय विवलेc विनष्पाविद विकया। वष[6] 2012 में उक्त भूविम पर इकबाल उफ 6 बाला क े बेटे जावेद, अब्दुल वाविहद क े बेटे हाजी इकबाल उफ 6 बाला और अब्दुल वाविहद क े बेटे महमूद विनवासी कस्बा व थाना- विमजा6पुर, जिजला- सहारनपुर ने जबरन कब्जा कर लिलया। जब मैंने इन लोगों से मेरी जमीन cाली करने का अनुरो विकया ो इन लोगों ने मुझे मकाना शुरू कर विदया। मैंने इन लोगों से कई बार अनुरो विकया।हालांविक इन लोगों ने कब्जा नहीं छोड़ा। नवंबर 2018 क े महीने में, जावेद, उसक े भाई अलीशान और उनक े अति वक्ता जिजशान पुत्र जमील विनवासी पडली ग्रांट, थाना विमजा6पुर जिजला सहारनपुर ने मुझे ग्लोकल विवश्वविवद्यालय में ट्यूबवेल क े पास बा ची क े लिलए बुलाया।उसक े बाद इन लोगों ने मेरी अस्वीकरण: जमीन cाली करने क े लिलए, उन्होंने मुझे उनक े साथ शारीरिरक संबं बनाने क े लिलए मजबूर विकया।इसक े बाद जावेद ने अलीशान को बाजार से क ु छ cाने का सामान लाने क े लिलए भेजा।इसक े बाद, वहां मौजूद जावेद और उसक े अति वक्ता जिजशान ने मुझे ट्यूबवेल क े कमरे क े सामने लाने क े बाद मेरे साथ अलग-अलग बलात्कार विकया।इसक े बाद उन्होंने मकी दी विक अगर मैंने विकसी को ब ाया ो वे मेरी जान ले लेंगे।कु छ समय बाद अलीशान बाजार से सामान लेने क े बाद वहाँ आ ा है ब जावेद और जिजशान इस बहाने से उस जगह से चले जा े हैं विक वे बादशाही बाग की ओर जा रहे हैं। इसक े बाद अलीशान ने मुझे अक े ला पाकर, ट्यूबवेल क े कमरे में ले जाकर उसने भी मेरे साथ बलात्कार विकया।उसने मुझे मुंह cोलने पर जान से मारने की मकी दी। इसक े बाद मैं अपने घर लौट आयी।अगले सप्ताह मैं अपनी जमीन देcने क े लिलए वापस आयी।इसक े बाद मैं अफजल और उसक े अति वक्ता जिजशान से विमली।उन्होंने मुझे संवाद करने क े लिलए ट्यूबवेल क े सामने बुलाया। मेरी जमीन क े जबरन कब्जे को cाली करने क े बहाने, इकबाल क े बेटे अफजल और उसक े अति वक्ता जिजशान ने विफर से मेरे साथ जबरन बलात्कार विकया।विफर भी इन लोगों ने मेरी जमीन cाली नहीं की।कई बार जावेद और उसक े भाई अलीशान, अफजल और जिजशान ने मेरी जमीन cाली करने क े बहाने ब्लैकमेल विकया और अलग-अलग मेरे साथ बलात्कार का अपरा विकया।इन लोगों ने मुझे मकी देने क े बाद कहा विक मैं जमीन भूल जाऊ ं ।मैं कहना चाह ा हूं विक ये लोग बहु शविक्तशाली लोग हैं।पहले मेरी जान को c रा होने क े कारण, मैं ब क ु छ भी कहने में असमथ[6] थी।इसलिलए आपसे अनुरो है विक आप मेरी रिरपोट[6] दज[6] करें और आवश्यक कानूनी कार6वाई करें।यह मेरे लिलए विवनम्र न्याय होगा।" अस्वीकरण:
4. इस प्रकार, उपरोक्त प्राथविमकी क े सा ारण पठन से प ा चल ा है विक पीविड़ ा "एक्स" ग्राम कोट मस्टरका, थाना चचरौली, जिजला यमुना नगर, हरिरयाणा की विनवासी है। उसने अविम कु मार जोशी नाम क े व्यविक्त से ग्राम सफीपुर, बेह, सहारनपुर में स्थिस्थ 0.461 हेक्टेयर क्षेत्रफल की जमीन, जिजसका cसरा सं. 145/1 है, cरीदी थी।पीविड़ ा ने आरोप लगाया है विक वष[6] 2012 में अपीलक ा6 ने प्राथविमकी में नामजद दो अन्य अभिभयुक्त व्यविक्तयों क े साथ जबरन उक्त भूविम पर कब्जा कर लिलया और जब पीविड़ ा ने उनक े सामने भूविम cाली करने की भीc मांगी, ो उन्होंने उसे मकी देना शुरू कर विदया।नवंबर 2018 में, अन्य सह-अभिभयुक्त जावेद, अलीशान और उनक े अति वक्ता जिजशान ने पीविड़ को ग्लोकल विवश्वविवद्यालय में एक ट्यूबवेल क े पास उनसे विमलने क े लिलए कहा और जब पीविड़ उनसे विमलने गई, ो उन सभी ने उसे उसकी जमीन cाली करने क े बदले उनक े साथ शारीरिरक संबं बनाने क े लिलए मजबूर विकया। आरोप है विक उसका यौन शोषण करने क े बावजूद उन्होंने उसकी जमीन cाली नहीं की।आगे यह आरोप लगाया गया है विक सह-आरोपी अफजल, जिजशान, जावेद और अलीशान ने भी कई मौकों पर उसे ब्लैकमेल विकया था और उसक े साथ बलात्कार विकया था।
5. यद्यविप व 6मान अपीलक ा6 जो प्राथविमकी में अभिभयुक्त संख्या 2 क े रूप में नामजद है, उसक े लिcलाफ कोई विवशेष आरोप नहीं लगाया गया है।उसने यह प्राथ6ना कर े हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा cटcटाया विक जहां क उसका संबं है, प्राथविमकी को रद्द कर विदया जाए। उच्च न्यायालय ने 17.10.2022 विदनांविक आक्षेविप आदेश द्वारा आपराति क प्रकीण[6] रिरट अस्वीकरण: यातिचका संख्या 15172/2022 को नामंजूर कर विदया और इस रह अपीलक ा6 क े लिcलाफ प्राथविमकी को रद्द करने से इनकार कर विदया।
6. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश इस प्रकार हैः- "यातिचकाक ा6 की ओर से विवद्वान अति वक्ता श्री आई. बी. यादव व विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री रविवशंकर प्रसाद और राज्य - प्रति वाविदयों की ओर से विवद्वान एजीए को सुना। इस यातिचका में 25.08.2022 विदनांविक प्राथविमकी को रद्द करने की प्राथ6ना की गयी है जो मुकदमा अपरा संख्या 0195/2022 अन् ग[6] ारा 376-ड, 506 आईपीसी थाना विमजा6पुर, जिजला सहारनपुर क े रूप में दज[6] है। शुरुआ में, विवद्वान एजीए ने कहा विक यातिचकाक ा6 का 30 मुकदमों का लंबा आपराति क इति हास है।यातिचकाक ा6 क े विवद्वान अति वक्ता द्वारा इस थ्य पर प्रति वाद नहीं विकया जा रहा है।आक्षेविप प्रथम सूचना रिरपोट[6] क े प्रथमदृष्टया अवलोकन से संज्ञेय अपरा होने का प ा चल ा है।इसलिलए हरिरयाणा राज्य और अन्य बनाम भजन लाल और अन्य, 1992 सस्थि„लमेंट (1) एससीसी 335 था मैसस[6] विनहारिरका इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिलविमटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य एआईआर 2021 एससी 1918 क े मामले में और विवशेष अनुमति अपील (आपराति क) संख्या 3262/2021 (लीलाव ी देवी @ लीलाव ी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) क े मामले में, जो 07 अक्टूबर 2021 को विनणp हुआ था, माननीय सव च्च न्यायालय द्वारा प्रति पाविद कानून क े मद्देनजर, आक्षेविप प्रथम सूचना रिरपोट[6] में हस् क्षेप क े लिलए कोई मामला नहीं बन ा है। अस्वीकरण: इसलिलए रिरट यातिचका को cारिरज कर विदया जा ा है और यातिचकाक ा6 को कानून क े ह अनुमेय अविग्रम जमान /जमान क े लिलए सक्षम अदाल क े समक्ष आवेदन करने की स्वं त्र ा दी जा ी है।"
7. ऊपर उजिeलिc ऐसी परिरस्थिस्थति यों में, अपीलक ा6 व 6मान अपील क े साथ इस न्यायालय क े समक्ष आया है। अपीलक ा6 की ओर से विदए गए क
8. अपीलक ा6 की ओर से पेश विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री जिसद्धाथ[6] दवे ने अपनी लिललिc अभिभकथनों में कहा हैः- "क) सादर यह प्रस् ु विकया जा ा है विक कभिथ प्रथम सूचना रिरपोट[6] विबल्क ु ल झूठी और ुच्छ है और उक्त प्राथविमकी को पढ़ने पर, स्पष्ट रूप से व 6मान यातिचकाक ा6 क े लिcलाफ आईपीसी की ारा 376-घ और 506 क े ह अपरा नहीं बन ा है इस सव6व्यापी आरोप क े अलावा, विक यातिचकाक ा6 ने सह -अभिभयुक्त े साथ भिशकाय क ा6 की भूविम पर जबरन कब्जा कर लिलया था और यह विक वे मकी विदया कर े थे, न ो कोई ऐसा आरोप है विक यातिचकाक ा6 ने भिशकाय क ा6 क े साथ बलात्कार विकया था या उसने भिशकाय क ा6 क े साथ कोई यौन संबं भी बनाया था या उसने विकसी भी समय भिशकाय क ा6 को विकसी भी रह से मकी दी थी। अस्वीकरण: c) प्रथम सूचना रिरपोट[6] में आरोप न क े वल अस्पष्ट हैं, बस्थिल्क अत्यति क असंभव भी हैं क्योंविक नवंबर 2018 में हुई घटना क े हवाई(विबना सबू क े ) आरोप को छोड़कर, प्राथविमकी में घटना की ारीc और समय का कोई उeेc नहीं है। उक्त घटना कभिथ रूप से नवंबर 2018 में हुई थी, जबविक 4 साल की अत्यति क देरी क े बाद यानी 25.08.2022 को प्राथविमकी दज[6] कराई गई है। प्राथविमकी को पढ़ने पर, यह स्पष्ट हो ा है विक विववाद cसरा सं. 145/1, गाँव शफीपुर, बेह, जिजला सहारनपुर में स्थिस्थ भूविम क े संबं में है और यातिचकाक ा6 12 लाc रू. क े विवbय प्रति फल पर एक पंजीक ृ विबbी विवलेc विदनांक 10.10.2012 क े आ ार पर उक्त भूविम का एक सद्भावी cरीदार है और इसलिलए यातिचकाक ा6 द्वारा अपनी स्वयं की ही भूविम का भिशकाय क ा6 से जबरन कब्जा लेने का कोई सवाल ही नहीं था, विवशेष रूप से जब यह विदcाने क े लिलए कोई सबू नहीं है विक वह वास् व में उक्त भूविम की मालिलक है। यविद भिशकाय क ा6 को यातिचकाक ा6 क े लिcलाफ कोई भिशकाय थी ो वह यातिचकाक ा6 क े लिcलाफ झूठी प्राथविमकी दज[6] कराने क े बजाय, अदाल का दरवाजा cटcटा सक ी थी और वह भी 4 साल की अत्यति क देरी क े बाद दज[6] कराई गई थी, जिजसक े लिलए कोई स्पष्टीकरण नहीं है। ग) यह कहा गया है विक यद्यविप प्रति वाविदयों ने आरोप लगाया है विक यातिचकाक ा6 पति•मी उत्तर प्रदेश में एक cनन माविफया है, लेविकन अवै cनन क े संबं में यातिचकाक ा6 क े लिcलाफ एक भी मामला दज[6] नहीं है।इसक े अलावा यातिचकाक ा6 को विकसी भी प्राति करण या अदाल द्वारा cनन माविफया घोविष नहीं विकया गया है। अस्वीकरण: घ) प्रति वादी दुभा6वनापूण[6] ढंग से यातिचकाक ा6, जो ग्लोकल विवश्वविवद्यालय क े क ु लाति पति हैं, को एक c रनाक अपरा ी क े रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे हैं, जबविक थ्य यह है विक हर बार जब यातिचकाक ा6 और उसक े परिरवार क े सदस्यों को अदाल ों द्वारा सुरक्षा दी जा ी है, ो पुलिलस ुरं उनक े लिcलाफ नई प्राथविमविकयां दज[6] कर ी है, यह कहा गया है विक उत्तर प्रदेश राज्य यातिचकाक ा6 और उसक े सदस्यों को परेशान करने क े लिलए अपने प्रशासविनक और पुलिलस ंत्र का दुरुपयोग कर रही है और उनक े लिcलाफ झूठे मामले दज[6] कर रही है।इसक े अलावा राज्य क े अति कारिरयों ने न क े वल यातिचकाक ा6 क े ीन आवासीय घरों को अवै रूप से ध्वस् विकया है, बस्थिल्क उन व्यविक्तयों क े लिcलाफ भी झूठे आपराति क मामले दज[6] विकए गए हैं जो उन मामलों में, यातिचकाक ा6 और उसक े सदस्यों क े लिलए जमान ी हैं, जहां उन्हें जमान या अविग्रम जमान दी गई है। ड) यह कहा गया है विक वष[6] 2017 में उत्तर प्रदेश राज्य में सरकार बदलने क े बाद, सत्तारूढ़ दल सत्ता में आया और सरकार बदलने क े ुरं बाद, यातिचकाक ा6 को उसक े साथ सत्तारूढ़ दल क े कहने पर 30 से अति क आपराति क मामलों में झूठा फ ं साया गया। यद्यविप प्रति वादी राज्य यातिचकाक ा6 और उसक े परिरवार क े लिcलाफ दज[6] आपराति क मामलों पर यह विदcाने क े लिलए बहु अति क विनभ6र है विक वे आद न अपरा ी हैं, लेविकन आज क यातिचकाक ा6 को विकसी भी न्यायालय द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है और इसक े अलावा हर बार जब यातिचकाक ा6 या उसक े सदस्यों को इस माननीय न्यायालय या अस्वीकरण: माननीय उच्च न्यायालय से सुरक्षा (अविग्रम जमान या विगरफ् ारी पर रोक) विमल ी है, ो स्थानीय पुलिलस ुरं उनक े लिcलाफ झूठे मामले दज[6] कर ी है। च) यह कहा गया है विक कभिथ 10.05.2022 विदनांविक लुक आउट नोविटस व 6मान प्राथविमकी संख्या 195 क े दज[6] होने से बहु पहले जारी विकया गया था जो 25.08.2022 को दज[6] विकया गया था और इस रह से अप्रासंविगक है। छ) सादर यह कहा गया है विक कभिथ प्रथम सूचना रिरपोट[6] उत्तर प्रदेश राज्य में व 6मान सत्तारूढ़ दल क े इशारे पर दुभा6वनापूण[6] रीक े से संस्थिस्थ की गई है ाविक यातिचकाक ा6 से बदला लिलया जा सक े और उसक े साथ राजनीति क म भेद का विनपटारा विकया जा सक ें क्योंविक वह एक प्रति द्वंद्वी राजनीति क दल से संबंति है और वह 2011 से 2016 की अवति क विव ान परिरषद का सदस्य भी था।यातिचकाक ा6 सहारनपुर क े एक सम्माविन परिरवार से है और वह कई मा6थ[6] संस्थान चला रहा है। ज) प्रथम सूचना रिरपोट[6] में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया विकसी भी अपरा का गठन नहीं कर े हैं या यातिचकाक ा6 क े लिcलाफ आईपीसी की ारा 376-घ और 506 क े ह मामला नहीं बना े हैं और इस प्रकार, प्राथविमकी रद्द विकए जाने योग्य है।यह उeेc करना उतिच है विक आरोप पत्र दायर विकए जाने क े बाद भी, प्राथविमकी को रद्द करने की यातिचका अदाल की शविक्तयों क े ह है [क ृ पया आनंद क ु मार मोहट्टा और एक अन्य बनाम राज्य (विदeी अस्वीकरण: राष्ट्रीय राज ानी क्षेत्र), गृह विवभाग और एक अन्य (2019) 11 एससीसी 706 का पैराग्राफ 14 और 16 देcें]। i) ऊपर वर्णिण कारणों से, विवशेष अनुमति यातिचका को अनुमति दी जा सक ी है और 25.08.2022 विदनांविक एफआईआर संख्या 195/2022 को रद्द करने से इनकार करने वाले माननीय उच्च न्यायालय क े आदेश को अपास् विकया जाए।" राज्य की ओर से विदए गए क
9. उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान अपर महाति वक्ता सुश्री गरिरमा प्रसाद ने अपनी लिललिc अभिभकथनों में कहा हैः - "क) उपरोक्त प्राथविमकी में, क ु ल 6 अभिभयुक्त व्यविक्त जावेद, हाजी इकबाल उफ 6 बाला, महमूद, अफजल, अलीशान, जिजशान हैं, उपरोक्त अभिभयुक्त व्यविक्तयों में से क े वल अभिभयुक्त इकबाल उफ बाला ने इस माननीय न्यायालय क े समक्ष उक्त प्राथविमकी को रद्द करने क े लिलए व 6मान यातिचका दायर की है। c) विववेचना क े दौरान, भिशकाय क ा6 का बयान ारा 161 सीआरपीसी क े साथ-साथ 164 सीआरपीसी क े ह दज[6] विकया गया था, जिजसमें भिशकाय क ा6 ने परिरवाद क े कथानक का समथ6न विकया है। ग) विववेचना पूरी हो चुकी है और यातिचकाक ा6ओं क े लिcलाफ आरोप पत्र दालिcल विकए जाने क े लिलए ैयार है, लेविकन इस अस्वीकरण: माननीय न्यायालय क े स्थगन आदेश क े कारण आरोप पत्र प्रस् ु नहीं विकया जा सका। घ) यह उeेc करना उतिच है विक अन्य अभिभयुक्त व्यविक्तयों क े लिcलाफ आरोप पत्र दायर विकया गया है और विवचारण शुरू विकया गया है। ड़) यह सही है और स्वीकार विकया जा ा है विक व्यवस्था/सरकार क े परिरव 6न क े साथ, भिशकाय क ा6/भयभी लोग/पीविड़ व्यविक्त, जो गरीब व्यविक्त, गरीब विकसान, छोटे ठेक े दार हैं, वे गैंगस्टर इकबाल उफ 6 बाला और उसक े साथ-साथ सहयोविगयों क े लिcलाफ आपराति क भिशकाय दज[6] करने या दज[6] कराने क े लिलए आगे आने में समथ[6] हुए हैं।इन अपराति यों को पूव6व p व्यवस्था/सरकार द्वारा अवै समथ6न विदए जाने क े कारण कार6वाई नहीं की गई। च) यह कहा गया है विक कई मामलों में, इस माननीय न्यायालय ने यह अभिभविन ा6रिर विकया है विक बलात्कार का कोई भी बयान एक मविहला क े लिलए एक अत्यं अपमानजनक अनुभव है और जब क वह यौन अपरा की भिशकार नहीं हो ी है, ब क वह वास् विवक अपरा ी को छोड़कर विकसी को भी दोषी नहीं ठहराएगी।अभिभयोक्त्री क े साक्ष्य का मूल्यांकन कर े समय, अदाल ों को हमेशा यह ध्यान रcना चाविहए विक कोई भी आत्म -सम्माविन मविहला उस पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाकर अपना सम्मान दांव पर नहीं लगाएगी और इसलिलए आम ौर पर उसकी गवाही की पुविष्ट क े लिलए लाश करना अनावश्यक और अवांछनीय है। इसलिलए बलात्कार क े अस्वीकरण: मामलों में आपराति क मामला दज[6] करने में देरी अभिभयोजन क े मामले में घा क नहीं है। उपरोक्त थ्यात्मक और कानूनी दलीलों को ध्यान में रc े हुए, सादर यह प्रस् ु विकया जा ा है विक यातिचकाक ा6ओं की व 6मान विवशेष अनुमति यातिचका उदाहरणात्मक लाग क े साथ cारिरज विकए जाने क े लिलए दायी है और आपराति क प्रकीण[6] रिरट यातिचका संख्या 15172/2022 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 17.10.2022 विदनांविक आक्षेविप आदेश बरकरार रcे जाने योग्य है।” विवश्लेषण
10. पक्षकारों की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान अति वक्ता को सुनने क े बाद और अभिभलेc पर मौजूद दस् ावेजों को देcने क े बाद, एकमात्र सवाल जो हमारे विवचार क े लिलए आ ा है वह यह है विक क्या व 6मान अपीलक ा6 क े लिcलाफ दज[6] प्राथविमकी संख्या 195/2022 को रद्द कर विदया जाना चाविहए?
11. हम इस थ्य पर ध्यान दे े हैं विक पूरी एफआईआर में व 6मान अपीलक ा6 क े लिcलाफ बलात्कार या आपराति क मकी क े विकसी भी आरोप की कोई सुबगुबाहट नहीं है।प्राथविमकी क े सा ारण पठन पर जो कु छ भी विदcाई दे ा है वह यह है विक अपीलक ा6 को अभिभयुक्त संख्या 2 क े रूप में नामजद विकया गया है।अन्य सह-अभिभयुक्त व्यविक्त प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपीलक ा6 से संबंति हैं।अपीलक ा6 ग्लोकल विवश्वविवद्यालय का कु लपति है।हम अपीलक ा6 की ओर से पेश विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता द्वारा लगाए गए अस्वीकरण: राजनीति क पूवा6ग्रह आविद क े गंभीर आरोपों में नहीं जा सक े हैं, लेविकन साथ ही हमें इस थ्य को भी नजरअंदाज नहीं करना चाविहए विक विकसी न विकसी कारण से अपीलक ा6 को विनशाना बनाया जा रहा है। अपीलक ा6 को विहस्ट्रीशीटर क े रूप में विदcाया गया है।यविद प्राथविमकी अपीलक ा6 क े लिcलाफ क ु छ भी cुलासा नहीं कर ी है और यहां क विक विववेचना क े अं में भी, यविद अपीलक ा6 क े लिcलाफ इसमें कु छ भी आपलित्तजनक सामने नहीं आया है, ो अपीलक ा6 क े लिcलाफ आपराति क काय6वाही जारी रcना कानून की प्रविbया क े घोर दुरुपयोग क े अलावा और क ु छ नहीं होगा।ऐसा प्र ी हो ा है विक जहां क अन्य सह-अभिभयुक्तों का संबं है, विववेचना पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र भी दायर कर विदया गया है।आगे ऐसा प्र ी हो ा है विक विवचारण चल रहा है।
12. हमारा विवचार है विक व 6मान अपीलक ा6 क े लिcलाफ प्राथविमकी में विकसी विवशेष आरोप क े अभाव में, उच्च न्यायालय को एक रहस्यमय आदेश क े माध्यम से प्राथविमकी को रद्द करने से यह कह े हुए इनकार नहीं करना चाविहए था विक अपीलक ा6 की आपराति क पृष्ठभूविम है और प्राथविमकी प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपरा ों क े होने का cुलासा कर ी है।उच्च न्यायालय को पहले यह जानना चाविहए था विक अपीलक ा6 क े लिcलाफ विकस प्रकार क े आरोप लगाए गए हैं।क े वल प्राथविमकी में अपीलक ा6 का नाम होने से यह नहीं कहा जा सक ा विक अपरा उसक े द्वारा विकया गया था।यविद कभिथ अपरा क े संबं में कोई विवशेष भूविमका दी जा ी है या विकसी प्रकार की सविbय भागीदारी का आरोप लगाया जा ा है, ो यह एक अलग परिरदृश्य होगा। अस्वीकरण:
13. उपरोक्त में जोड़ने क े लिलए क ु छ और है और वही बा मामले की जड़ क जा ी है।हम इस थ्य पर ध्यान दे े हैं विक 2018 क े सामूविहक बलात्कार क े कभिथ क ृ त्य क े लिलए, लगभग चार साल की अवति क े बाद वष[6] 2022 में विकसी समय प्राथविमकी दज[6] की गई थी।हम प्राथविमकी दज[6] करने में देरी क े संबं में क ु छ भी नहीं कहना चाह े हैं क्योंविक अन्य अभिभयुक्त े लिcलाफ विवचारण चल रहा है।विवचारण न्यायालय स्वयं इस पहलू की जांच करेगा।इस बा को नजरअंदाज नहीं विकया जा सक ा है विक बलात्कार पीविड़ क े लिलए सबसे बड़ी पीड़ा और अपमान का कारण बन ा है, लेविकन साथ ही बलात्कार का एक झूठा आरोप आरोपी को भी उ ना ही कष्ट, अपमान और नुकसान पहुंचा सक ा है।अभिभयुक्त को झूठे विनविह ाथ[6] की संभावना से भी बचाया जाना चाविहए, विवशेष रूप से जहां बड़ी संख्या में अभिभयुक्त शाविमल हैं।इसक े अलावा, यह ध्यान में रcा जाना चाविहए विक व्यापक जिसद्धां यह है विक घटना क े समय एक घायल गवाह मौजूद था और आम ौर पर ऐसा गवाह वास् विवक हमलावरों क े बारे में झूठ नहीं बोलेगा, लेविकन यह मानने क े लिलए कोई उप ारणा या कोई आ ार नहीं है विक ऐसे गवाह का बयान हमेशा सही हो ा है या विबना विकसी बनावट या अति शयोविक्त क े हो ा है।[देलिcएः राजू और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य, (2008) 15 एससीसी 133]
14. इस स् र पर, हम क ु छ महत्वपूण[6] अवलोकन करना चाहेंगे। जब भी कोई अभिभयुक्त आपराति क प्रविbया संविह ा (सीआरपीसी) की ारा 482 क े ह अं र्निनविह शविक्तयों या संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह असा ारण अति कारिर ा का उपयोग करक े प्राथविमकी या आपराति क काय6वाही को इस अस्वीकरण: आ ार पर अविनवाय[6] रूप से रद्द कराने क े लिलए न्यायालय क े समक्ष आ ा है विक ऐसी काय6वाही स्पष्ट रूप से ुच्छ या परेशान करने वाली है या प्रति शो लेने क े लिलए गुप्त उद्देश्य से शुरू की जा ी है, ो ऐसी परिरस्थिस्थति यों में न्यायालय का क 6व्य है विक वह प्राथविमकी को साव ानी से और थोड़ी अति क बारीकी से देcे।हम ऐसा इसलिलए कह े हैं क्योंविक एक बार जब भिशकाय क ा6 व्यविक्तग प्रति शो आविद क े लिलए आरोपी क े लिcलाफ काय6वाही करने का फ ै सला कर ा है, ो वह यह सुविनति• करेगा विक सभी आवश्यक अभिभवचनों क े साथ प्राथविमकी/परिरवाद को बहु अच्छी रह से ैयार विकया गया है।भिशकाय क ा6 यह सुविनति• करेगा विक एफआईआर/परिरवाद में विकए गए कथन ऐसे हों विक वे कभिथ अपरा का गठन करने क े लिलए आवश्यक अवयव को दशा6यें।इसलिलए न्यायालय क े लिलए क े वल इ ना करना न्यायोतिच नहीं होगा विक वह यह सुविनति• करने क े उद्देश्य से प्राथविमकी/परिरवाद में विकए गए कथनों को देcे विक क्या कभिथ अपरा का गठन करने क े लिलए आवश्यक अवयव दर्णिश हो े हैं या नहीं। ुच्छ या परेशान करने वाली काय6वाविहयों में, न्यायालय का क 6व्य है विक वह अभिभकथनों क े अलावा मामले क े अभिभलेc से उभरने वाली अन्य उपस्थिस्थ परिरस्थिस्थति यों पर गौर करे और यविद आवश्यक हो, ो उतिच साव ानी और एहति या क े साथ भिछपी हुई चीजों को cोजने का प्रयास करे। सीआरपीसी की ारा 482 या संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह अपनी अति कारिर ा का प्रयोग कर े समय न्यायालय को cुद को क े वल मुकदमे क े चरण क ही सीविम रcने की आवश्यक ा नहीं है, बस्थिल्क उसे मामले की शुरुआ /दज[6] होने क े साथ-साथ विववेचना क े दौरान एकत्र की गई सामग्री की समग्र अस्वीकरण: परिरस्थिस्थति यों को ध्यान में रcने का अति कार है। उदाहरण क े लिलए व 6मान मामलें को ही लें।समय-समय पर कई एफआईआर दज[6] की गई हैं।ऐसी परिरस्थिस्थति यों की पृष्ठभूविम में कई एफआईआर का दज[6] होना महत्वपूण[6] हो जा ा है, जिजससे विनजी या व्यविक्तग द्वेष क े कारण प्रति शो लेने का मुद्दा सामने आ ा है, जैसा विक आरोप लगाया गया है।
15. मामले क े समग्र दृविष्टकोण में, हम आश्वस् हैं विक अपीलक ा6 पर कभिथ अपरा क े लिलए विवचारण करने क े लिलए कोई मामला नहीं बन ा है।
16. हमने प्रति वादीगण संख्या 1,[2] और 3 की ओर से दायर जवाबी शपथ पत्र पर भी गौर विकया है। उनक े जवाबी शपथ पत्र में भी, यह संक े देने क े लिलए क ु छ नहीं है विक अभिभयुक्त व्यविक्तयों में से एक, व 6मान अपीलक ा6 ने अपरा विकया था जैसा विक आरोप लगाया गया था। जवाबी शपथ पत्र में क े वल इ ना कहा गया है विक अपीलक ा6 एक c रनाक अपरा ी है और समय समय पर उसक े लिcलाफ विवभिभन्न अपरा ों क े लिलए कई प्राथविमविकयां दज[6] की गई हैं।
17. उपरोक्त कारणों से, यह अपील सफल हो ी है और ए द्द्वारा अनुमति प्रदान की जा ी है। उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश को ए द्द्वारा अपास् विकया जा ा है। जहां क व 6मान अपीलक ा6 का संबं है, उत्तर प्रदेश राज्य क े सहारनपुर जिजले क े विमजा6पुर थाने में दज[6] 25.08.2022 विदनांविक प्राथविमकी संख्या 195/2022 से उत्पन्न आपराति क काय6वाही को ए द्द्वारा अपास् विकया जा ा है। अस्वीकरण:
18. यह स्पष्ट करने की आवश्यक ा नहीं है विक इस विनण6य में की गई विट„पभिणयां क े वल प्रश्नग प्राथविमकी और परिरणामी आपराति क काय6वाही क े े लिलए प्रासंविगक हैं। इन विट„पभिणयों में से विकसी का भी विकसी भी लंविब आपराति क अभिभयोजन या विकसी अन्य काय6वाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ……………………………... (न्यायमूर्ति बी. आर. गवई) ……………………………... (न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला) नई विदeी; 08 अगस् 2023. अस्वीकरण: