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भारति का सर्वोच्च न्यायालय
िसर्िवल अपील अिधिकािरतिा
िसर्िवल अपील सर्ंख्या_______________2018
िवशेष अनुमतिति यािचका (िसर्िवल) सर्ंख्या 21338/2017 सर्े उदूति
रामत प्रततिाप …..अपीलाथी
बनामत
आनंद क
ँ वर और अन्य …..प्रतत्यथी
िनणर य
एसर् अब्दुल नज़ीर, न्यायमतूितिर'
JUDGMENT
1. अनुमतिति प्रतदान की गयी।
2. इसर् अपील मते, अपीलकतिार ने एसर्.बी. िसर्िवल िद्वितिीय अपील सर्ंख्या 186/1998 मते पािरति िनणरय और आदेश िदनांक 08.08.2016 की वैधितिा और शुद्धतिा पर सर्वाल उठाया है, िजिसर्क े तिहति राजिस्थान उच्च न्यायालय क े जियपुर पीठ ने अपील की अनुमतिति दी और नीचे क े न्यायालयो क े िनणरय और जियपत को अपास्ति कर िदया और मतुकदमते को नए िसर्रे सर्े िनस्तिारण क े िलए िवचारण न्यायालय मते भेजि िदया।
3. अपीलकतिार-वादी इसर् मतुकदमते क े पिरसर्र का जिमतीनदार है, जिबिक प्रतितिवादी िकरायेदार है। वादी ने प्रतितिवादी क े िखिलाफ मतुकदमता सर्ंख्या 357/1984 राजिस्थान पिरसर्र (िकराए और बेदखिली िनयंतण) अिधििनयमत, 1950"(सर्ंक्षेप मते 'िकराया अिधििनयमत') की धिारा 13 (1) क े तिहति िकराए का भुगतिान न करने क े आधिार पर दायर की।
4. वादी क े अनुसर्ार, प्रतितिवादी ने 01.07.1981 सर्े 30.06.1984 तिक मतािसर्क िकराया देना बंद कर िदया। प्रतितिवादी ने िलिखिति बयान दायर िकया और कहा िक वह िनयिमतति रूप सर्े ओंकार िसर्ंह, जिो वादी का करीबी िरश्तिेदार है, को 31.05.1983 तिक का िकराया देतिा रहा है। िकराए क े भुगतिान करने पर, ओंकार िसर्ंह िकराए की रसर्ीद जिारी कर रहा था। प्रतितिवादी ने न्यायालय मते 31.12.1989 तिक का िकराया जिमता करने का भी दावा िकया है। इसर्क े अलावा, प्रतितिवादी ने दावा िकया िक वादी पिरसर्र को खिाली करने और दुसर्रो को बढे हुए िकराये पर देने क े उद्देश्य सर्े प्रतितिवादी और अपने अन्य िकरायेदारो को परेशान कर रहा है। उन्होने मतुकदमते को खिािरजि करने की प्रताथरना की।
5. िवचारण न्यायालय ने 20.7.1995 को मतुक़दमते का फ ै सर्ला वादी क े पक्ष मते िदया। प्रतितिवादी को िनदेिशति िकया गया िक वे अनुसर्ूची पिरसर्र को खिाली करे तिथा िकराए क े बकाया का भुगतिान करे। उक आदेश क े िखिलाफ, प्रतितिवादी ने अपील दायर की। हालाँिक, प्रतथमत अपीलीय न्यायालय ने 28.02.1998 को आदेश िदया था, चूंिक प्रतितिवादी की अनुपितिस्थिति क े कारण मतामतले को एक पक्षीय रखिा गया था, इसर्िलए िकराए का िनधिाररण िसर्फ र एक औपचािरकतिा थी और इसर्िलए, िवचारण न्यायालय ने िकराया अिधििनयमत की धिारा 13 (3) क े तिहति अनंितिमत िकराया िनधिारिरति ना करक े इसर्मते कोई तुिट नही की है । तिदनुसर्ार, प्रतथमत अपीलीय न्यायालय ने फ ै सर्ला सर्ुनाया। तिदनुसर्ार, पहले अपीलीय न्यायालय ने जियपत को यथावति रखिा। प्रतितिवादी ने उक आदेश को चुनौतिी देतिे हुए दूसर्री अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश िदनांक 08.08.2016 मते यह पािरति िकया िक िकराया अिधििनयमत की धिारा 13 (3) मते यह अिनवायर है जिहाँ तिक िकराए का अनंितिमत िनधिाररण का सर्म्बन्धि है और िकराए क े िनधिाररण क े िबना, व्यितिक्रमत क े आधिार पर बेदखिली का जियपत नही िदया जिा सर्कतिा है। उच्च न्यायालय ने मतुकदमते को िवचारण न्यायालय मते वापसर् भेजि िदया और िवचारण न्यायलय को यह िनदेश िदया की वे मतुकदमते की सर्ुनवाई की तिारीखि सर्े छह मतहीने क े भीतिर मतामतले को नए िसर्रे सर्े िनपटाए। जिैसर्ा िक ऊपर देखिा गया, प्रतितिवादी ने इसर् अपील मते उक िनणरय की वैधितिा और शुद्धतिा पर सर्वाल उठाया है।
6. अपीलाथी-वादी पक्ष क े वकील ने कहा िक प्रतितिवादी जिानबूझकर न्यायालय की प्रतिक्रया को िवफल करने क े िलए िवचारण न्यायालय क े सर्मतक्ष उपितिस्थति नही हुआ और इसर्िलए न्यायालय ने प्रतितिवादी क े िखिलाफ एक पक्षीय आदेश पािरति िकया। िकराए का िनधिाररण क े वल एक खिाली औपचािरकतिा होगी, िजिसर्े प्रतितिवादी क े द्विारा जिानबूझकर अनुपितिस्थिति क े कारण, एक पक्षीय सर्ुना जिा रहा था। अिधििनयमत की सर्ंशोिधिति धिारा 13 (3) का उद्देश्य, जिब बेदखिली का मतुकदमता लंिबति हो तिब अंतििरमत अविधि मते मतकान मतािलक क े िहतिो की रक्षा करना है । इसर्िलए, उच्च न्यायालय का इसर् मतामतले को िवचारण न्यायालय मते भेजिने का औिचत्य नही था। दूसर्री ओर, प्रतत्यथी-प्रतितिवादी-प्रतितिवादी की ओर सर्े उपितिस्थति विरष वकील ने कहा िक अिधििनयमत की धिारा 13 (3) और (4) अिनवायर प्रतक ृ िति क े है। ये धिाराएँ न्यायालय पर दाियत्व डालतिी है और इसर्क े पिरणामत भी धिारा 13 की उप-धिारा (5) या उप-धिारा (6) क े तिहति प्रतदान िकए गए है। जिब तिक इसर् तिरह का िनधिाररण नही होतिा है, धिारा 13 (6) लागू नही की जिा सर्कतिी है और एक िकरायेदार को िदया गया बहुमतूल्य अिधिकार ख़त्मत हो जिाएगा। प्रतत्यथी ने 08.08.1989 को अपना िलिखिति बयान िदया और िकराया िनधिाररण क े िलए, मतामतले को लगातिार स्थिगति िकया गया था। तिथ्यात्मतक रूप मते, तिीन मतहीने बीतिने क े बाद ही िकरायेदार क े िवरुद्ध एक पक्षीय काररवाई की गई और उसर्क े बाद, िकराया िनधिारिरति िकए िबना, बेदखिली का आदेश पािरति िकया गया था। वास्तिव मते, अपीलकतिार ने अिधििनयमत की धिारा 19 (4) A क े तिहति िकराया जिमता िकया है। इसर्िलए, उच्च न्यायालय द्विारा मतामतले को वािपसर् भेजिना न्यायोिचति है।
7. जिहाँ तिक िकये गए बहसर् का सर्वाल है, िवचारणीय प्रतश्न यह है िक क्या व्यितिक्रमत क े आधिार पर, अिधििनयमत की धिारा 13 (3) का अनुपालन करना बेदखिली क े िलए अिनवायर है और िकराए क े िबना, व्यितिक्रमत क े आधिार पर बेदखिली का कोई कोई भी जियपत पािरति नही िकया जिा सर्कतिा है।
8. मतुख्य तिथ्यो पर कोई िववाद नही है। वादी ने यह वाद धिारा 13 (1) (क) क े तिहति 01.07.1981 सर्े 30.06.1984 तिक की अविधि क े िलए िकराए क े भुगतिान नही करने क े कारण दायर िकया है। प्रतितिवादी ने अपना िलिखिति कथन 08.08.1989 को िदया। इसर्क े बाद, मतामतला अलग-अलग तिारीखिो को पेश हुआ और इसर्े िकराए क े िलए लगातिार स्थिगति िकया गया। वादी द्विारा मतामतला यह था िक िकराया 15 रुपये प्रतिति मताह तिक बढ़ाया गया, जिबिक प्रतितिवादी ने कहा िक िकराया 10 रुपये प्रतिति मताह था। अपीलकतिार क े वकील 24.04.1993 को अनुपितिस्थति रहे और उसर् िदन न्यायालय ने मतामतले को अगली तिारीखि दी और अगली तिारीखि 24.07.1993 को मतुक़ररर की गयी। अगली तिारीखि को पीठासर्ीन अिधिकारी छ ु ट्टी पर थे और मतामतले को अगली तिारीखि दी गयी और अगली तिारीखि 22.09.1993 को मतुक़ररर की गयी और इसर्क े बाद मतामतले मते सर्ुनवाई हुई। न्यायालय ने मतामतले मते कोई िवचारणीय िबंदु नही बनाया और मतामतले मते 20.07.1995 को जियपत प्रतदान िकया।
9. वादी ने यह दावा िकया िक प्रतितिवादी ने 01.07.1981 सर्े 30.06.1984 तिक क े िकराए क े भुगतिान मते व्यितिक्रमत की थी। प्रतितिवादी और ओंकार िसर्ंह क े बीच स्वत्व का िववाद था, िजिसर्क े िलए उक ओंकार िसर्ंह क े िखिलाफ मतुकदमता दायर िकया गया था। उक मतुकदमता मते जियपत 07.11.1983 को प्रतदान की गई थी और उक मतुकदमते क े दौरान प्रतितिवादी ने अिधििनयमत की धिारा 11A क े तिहति, न्यायालय मते िकराया जिमता िकया था।
10. यह स्पष है िक िवचारण न्यायालय ने अिधििनयमत की धिारा 13 (3) क े तिहति अनंितिमत िकराए क े िबना जियपत प्रतदान कर िदया। प्रतितिवादी द्विारा यह प्रतश्न उठाया गया िक क्या 13 (1) (क) क े तिहति िकरायेदार की बेदखिली क े मतामतले मते िवचारण न्यायालय द्विारा अनंितिमत िकराए का िनधिाररण करना धिारा 13 (3) क े तिहति अिनवायर है या िनदेशक है।
11. धिारा 13 (1) (क) क े तिहति िकरायेदार अगर िकराए क े भुगतिान मते व्यितिक्रमती है तिो उसर्क े बेदखिली का प्रतावधिान है जिो िनम्नानुसर्ार है: -
13. िकरायेदारो की बेदखिली: िकसर्ी कानून या अनुबंधि मते िनिहति होने क े बावजिूद, कोई भी न्यायालय कोई आदेश या जियपत मतकान मतािलक क े पक्ष मते पािरति नही करेगी देगी, चाहे वह जियपत प्रतदान करना हो, या िकरायेदार को बेदखिल करना हो जिबतिक वह िकराए को भुगतिान क े िलए तित्पर और तिैयार है। इसर्िलए, अिधििनयमत क े पूणर सर्ीमता तिक स्वीकायर, जिब तिक िक वह सर्ंतिुष न हो। ( ) a िक िकरायेदार ने न तिो भुगतिान िकया है और न ही उसर्ने छह मतहीने क े िलए िकराए की रािश का भुगतिान िकया है
12. राजिस्थान अिधििनयमत सर्ंख्या 14, 1976 की धिारा 13 (3) द्विारा सर्ंशोिधिति धिारा 8 ( ) i िदनांक 13-02-1976 इसर् प्रतकार है “"उप-धिारा (1) क े खिंड (क) क े तिहति बेदखिली क े वाद मते, उसर् उप-धिारा मते िनिदरष िकसर्ी अन्य आधिार क े सर्ाथ या उसर्क े िबना, न्यायालय, सर्ुनवाई की पहली तिारीखि को या िकसर्ी अन्य तिारीखि पर, उसर् मतामतले मते फ ै सर्ला कर सर्कतिी है जिो िलिखिति बयान दजिर करने क े तिीन मतहीने सर्े अिधिक नही होगा और मतुद्दो क े िनधिाररण सर्े पहले होगा, पक्षो की सर्ुनवाई क े बाद और िरकॉर्डर क े अनुसर्ार, अनंितिमत रूप सर्े िकराए की रािश को न्यायालय मते जिमता करने या िकरायेदार द्विारा मतकान मतािलक को भुगतिान करने का िनधिाररण करे। "उप- धिारा (1) क े खिंड (क) क े तिहति बेदखिली क े वाद मते, उसर् उप-धिारा मते िनिदरष िकसर्ी अन्य आधिार क े िबना, न्यायालय, सर्ुनवाई की पहली तिारीखि को या िकसर्ी अन्य तिारीखि पर, न्यायालय उसर् मतामतले मते फ ै सर्ला कर सर्कतिी है जिो िलिखिति बयान दजिर करने क े तिीन मतहीने सर्े अिधिक नही होगा और मतुद्दो क े िनधिाररण सर्े पहले होगा, पक्षो की सर्ुनवाई क े बाद और िरकॉर्डर क े अनुसर्ार, अनंितिमत रूप सर्े िकराए की रािश को न्यायालय मते जिमता करने या िकरायेदार द्विारा मतकान मतािलक को भुगतिान करने का िनधिाररण करे। ऐसर्े रािश की गणना उसर् िकराए की दर पर की जिाएगी िजिसर् पर वह अंितिमत रूप सर्े भुगतिान िकया गया था या उसर् अविधि क े िलए देय था िजिसर्क े िलए िकरायेदार ने उसर् अविधि क े बाद की अविधि सर्िहति िपछले मतहीने क े अंति तिक व्यितिक्रमत िकया हो िजिसर्मते ऐसर्ा िनधिाररण है, इसर् तिरह की रािश पर ब्याजि क े सर्ाथ छह प्रतितिशति प्रतिति वषर की दर सर्े गणना की जिातिी है, और इसर् प्रतकार की रािश िनधिारिरति ितििथ तिक देय होतिी है।
13. िकराया अिधििनयमत की धिारा 13 (4), (5) और (6), जिो िनम्नानुसर्ार है, को भी ध्यान देना आवश्यक है: 13(4) - िकरायेदार मतकान मतािलक को न्यायालय मते उप-धिारा (3) क े तिहति िनधिारिरति रािश का भुगतिान या जिमता करेगा, इसर् तिरह क े िनधिाररण की तिारीखि सर्े पंद्रह िदनो क े भीतिर, या इसर् तिरह क े आगे िदए गए सर्मतय क े भीतिर, जिो तिीन मतहीने सर्े अिधिक नही हो सर्कतिा है, बढ़ाया जिा सर्कतिा है। िकरायेदार मतहीने दर मतहीने, मतािसर्क िकराया उसर् अविधि तिक जिो िनधिाररण िकया गया है, को न्यायलय मते जिमता या मतकान मतािलक को भुगतिान करना होगा। प्रतत्येक सर्फल मतहीने क े पंद्रहवे या इसर् तिरह क े आगे क े सर्मतय क े भीतिर, जिो पंद्रह सर्े ज्यादा ना हो, न्यायालय द्विारा मतािसर्क दर पर बढ़ाया जिा सर्कतिा है, जिो उप-धिारा (3) क े तिहति न्यायालय द्विारा िकराया िनधिारिरति िकया गया था। 13 (5) यिद कोई िकरायेदार उप-धिारा (4) मते उिल्लिखिखिति िकसर्ी भी रािश को उसर्मते िनिदरष तिारीखि या सर्मतय क े अंदर जिमता करने या भुगतिान करने मते िवफल रहतिा है, तिो न्यायालय बचाव पक्ष क े बेदखिली क े िखिलाफ काररवाई की जिाएगी और सर्ुनवाई की कायरवाही करेगी। 13(6) यिद कोई िकरायेदार उप-धिारा (4) क े अनुसर्ार जिमता या भुगतिान करतिा है, तिो न्यायलय उसर्क े िखिलाफ उप-धिारा (1) क े खिंड (क) मते िनिदरष बेदखिली का कोई आदेश पािरति नही करेगा: बशतिे कोई िकरायेदार इसर् उप-धिारा क े तिहति िकसर्ी भी राहति का हकदार नही होगा, अगर िकसर्ी ऐसर्े आवासर् क े सर्ंबंधि मते धिारा 13-ए क े तिहति ऐसर्ा लाभ या लाभ प्रताप होतिा है, वह िफर सर्े उसर् आवासर् क े िकराए क े भुगतिान मते छह मतहीने तिक चूक करतिा है।"
14. िकराया अिधििनयमत की धिारा 13 (3) सर्े यह स्पष है िक 'होगा' का प्रतयोग' न्यायालय क े िलए एक अिनवायर दाियत्व िलखितिा है िक वह िलिखिति बयान क े दािखिल होने क े तिीन मतहीने क े भीतिर अनंितिमत िकराया तिय करे, लेिकन वह मतुद्दो को हल करने सर्े पहले हो। धिारा की भाषा अिनवायर है और िकसर्ी भी आवेदन क े बावजिूद, अनंितिमत िकराया िनधिारिरति करने क े िलए न्यायलय मते एक दाियत्व है। यिद न्यायालय द्विारा िनधिारिरति िकराया िकराएदार द्विारा धिारा 13 (4) क े तिहति प्रतदान िकया गया है, तिो िकरायेदार को बेदखिल करने का कोई आदेश धिारा 13 (1) (क) क े तिहति तियशुदा आधिार पर नही हो सर्कतिा है। अिधििनयमत क े 13 (6) सर्े इसर् प्रतकार यह स्पष है िक जिब तिक धिारा 13 (3) क े तिहति िनधिाररण नही होतिा है, तिब तिक धिारा 13 (6) का अनुपालन नही िकया जिा सर्कतिा है और िकरायेदार को िदया गया एक मतूल्यवान अिधिकार खिो जिाएगा। हमतारे िवचार मते, उच्च न्यायालय ने अिधििनयमत की धिारा 13 (3) को अिनवायर रूप सर्े सर्ही ठहराया है।
15. उपरोक चचार क े आधिार पर, हमतारा िवचार है िक इसर् अपील मते कोई गुण नही है, तिदनुसर्ार खिािरजि िकया जिातिा है। खिचर क े बारे मते आदेश नही िदया जिातिा है । एसर् अब्दुल नज़ीर, न्यायमतूितिर' न्यायमतूितिर एन. वी. रमतना, न्यायमतूितिर' न्यायमतूितिर नई िदल्लिखी, 21 अगस्ति, 2018