Madhya Pradesh State v. Shabana B.

Supreme Court of India · 29 Aug 2018
R. Banumathi
Criminal Appeal No 1791 of 2011
criminal appeal_dismissed

AI Summary

The Supreme Court upheld the High Court's acquittal of the accused in a murder case due to material inconsistencies in the deceased's statements creating reasonable doubt.

Full Text
Translation output
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
दािक ण्डिक अपीलीय क्षेत्रािधिकार
दािक ण्डिक अपील सर्ंख्या 1791 वषर 2011
मध्य प्रदेश राज्य
बनाम
शबाना बी.
िनणरय
आर. बानुमथी, न्यायमूर्तितर - भा.द.सर्ं. की धिारा 302 क
े अधिीन अपराधि क
े िलए
प्रत्युत्तरदाता अिभयुक को दोषिसर्िद क
े पलटने द्वारा व्यिथत होकर मध्य प्रदेश राज्य
ने यह अपील दािखिल की है।
JUDGMENT

2. प्रत्युत्तरदाता-अिभयुक और मृतका फरीदा पडिोसर्ी थे । घटना की तारीखि िदनांक 19.4.2004 को प्रत्युत्तरदाता-अिभयुक ने मृतका फरीदा पर क े रोिसर्न उड़ेला और उसर्े आग लगाया। प्रत्युत्तरदाता का िवचारण भा.द.सर्ं. की धिारा 302 क े तहत अपराधि क े िलए िकया गया ।

3. कायरपालक मिजिस्टरेट, तहसर्ीलदार (अ.सर्ा.13) द्वारा िलिखित मृतका का मृत्युकािलक कथन (प्र.पी-25) क े आधिार पर, िवचारण न्यायालय ने प्रत्युत्तरदाता को भा.द.सर्ं. की धिारा 302 क े अधिीन दोषिसर्द िकया और उसर्े आजिीवन कारावासर् सर्े दिक ण्डित िकया । अपील मे, उच्च न्यायालय ने िनिदरष िकया िक डिॉ. राक े श चौकसर्े(अ.सर्ा.9) द्वारा, िजिसर्क े सर्मक्ष मृतका बयान िदया िक उसर्े उसर्क े पडिोसर्ी शबाना(प्रत्युत्तरदाता) और नूर्तराफ्जिा द्वारा जिलाया गया, जिो माता और पुत्री थी, इसर्का अिभिलिखित प्रथम मृत्युकािलक कथन क े बीच असर्ंगित है, जिबिक कायरपालक मिजिस्टरेट, तहसर्ीलदार (अ. सर्ा.13) क े सर्मक्ष, िजिसर्ने 18.4.2004 को मृतका का मृत्युकािलक कथन अिभिलिखित िकया था, िजिसर्क े सर्मक्ष मृतका ने कहा था िक उसर्े शबाना (प्रत्युत्तरदाता) ने आग लगायी गयी थी। उच्च न्यायालय ने िनधिारिरत िकया है िक डिॉ. राक े श चौकसर्े (अ.सर्ा.9) क े सर्मक्ष मृतका क े कथन और तहसर्ीलदार(अ.सर्ा.13) द्वारा िलिखित मृत्युकािलक कथन (प्र.पी -25) क े बीच असर्ंगितयाँ है और सर्ंदेह का लाभ प्रत्युत्तरदाता-अिभयुक को िदया जिाएगा। जिब दो युिकयुक मत है और उच्च न्यायालय ने एक ऐसर्ा मत अपनाया है, जिो सर्त्य मत है, तब हम दोषमुिक क े आदेश मे हस्तक्षेप की उपेक्षा करते हुए कोई सर्ारभूर्तत आधिार नही पाते।

4. अपील तदनुसर्ार खिािरजि की जिाती है । आर. बानुमथी, न्यायमूर्तितर िवनीत सर्रन, न्यायमूर्तितर नई िदल्ली 29 अगस्त, 2018