Rajasthan State Road Transport Corporation v. Phool Chand

Supreme Court of India · 20 Sep 2018
Abhay Mohan Sapre; Abdul Nazir
Civil Appeal No 1756 of 2010
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that in wrongful dismissal cases, back wages are discretionary and modified the award from full to 50% back wages payable to the deceased employee's legal representatives.

Full Text
Translation output
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
िसर्िवल अपीलीय अिधिकािरता
िसर्िवल अपील सर्ंख्या 1756/2010
राजस्थान राज्य सर्ड़क पिरवहन िनगम, जयपुर -- अपीलाथी
बनाम
श्री फ
ू ल चंद (मृतक), उसर्क
े िविधिक प्रतितिनिधि क
े द्वारा -- प्रतत्यथी
िनणरय
न्यायमूितर अभय मोहन सर्प्रते, यह अपील राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ क
े द्वारा खंड पीठ िवशेष अपील (िरट)
यािचका 912/1998 मे पािरत अंितम िनणरय और आदेश िदनांक 12.02.2008 क
े िखलाफ
प्रतस्तुत की गयी िजसर्मे उच्च न्यायालय ने अपीलाथी द्वारा दािखल अपील खािरज कर िदया । उच्च
न्यायालय क
े खंडपीठ ने एकल पीठ िसर्िवल िरट यािचका सर्ंख्या 5534/1996 मे एकल पीठ
द्वारा पािरत आदेश िदनांक 4.07.1998 को बरक़रार रखा।
JUDGMENT

2. इसर् मामले क े िनपटारे क े िलए, क ु छ तथ्य िजसर्मे एक लघु प्रतश्न शािमल है, का उल्लेख करना आवश्यक है।

3. इसर् अपील मे िनपटारे क े िलए एक लघु प्रतश्न सर्ामने आया है िजसर्मे कहा गया है िक क्या िनचली अदालत जैसर्े उच्च न्यायालय और श्रम न्यायालय क े द्वारा मृतक कमरचारी को पूरी मजदूरी प्रतदान िकया जाना न्यायोिचत है िजसर्मे उन्होंने उसर्क े िनलंबन आदेश को यह कह कर खािरज कर िदया िक वो गलत कानून है और इसर्क े फलस्वरूप अपीलाथी को पुनः सर्ेवा मे बहाल करने का आदेश िदया।

4. अपीलाथी राजस्थान राज्य का एक राज्य सर्ड़क पिरवहन िनगम है। मृतक फ ू ल चंद अपीलाथी क े यहाँ चालक क े रूप मे कायररत था।

5. फ ू ल चंद जब सर्ेवारत थे, उन्हे कई अवसर्रों पर सर्ेवा मे लापरवाही का दोषी पाया गया और इसर् पर िवभागीय कायरवाही हुई िजसर्क े तहत उन्हे सर्ेवा सर्े बखारस्त कर िदया गया। उनक े िखलाफ यह आरोप लगाया गया िक मृतक कमरचारी िनयिमत रूप सर्े अपने कायर सर्े अनुपित स्थत था, िजसर्े सर्ािबत िकया गया।

6. अपनी बखारस्तगी सर्े आक्षेिपत हो कर फ ू ल चंद ने श्रम न्यायालय मे आवेदन दािखल िकया। श्रम न्यायालय द्वारा अपने अवाडर िदनांक 26.02.1996 मे फ ू ल चंद क े िखलाफ आरोप को सर्ािबत पाया परन्तु सर्जा की मात्रा मे हस्तक्षेप िकया।

7. श्रम न्यायालय ने सर्ेवा सर्े बखारस्तगी की सर्जा को बदल कर "चार वािषरक पदक्रम वेतन वृिद सर्ंचयी प्रतभाव सर्े रोक/ख़त्म" िकया और आदेश िदया िक मृतक कमरचारी को पुनः बहाल कर, उन्हे 13 वषर की अविधि की पूरी मजदूरी प्रतदान की जायेगी(16.11.1983 24.02.1996) to ।

8. श्रम न्यायालय क े इसर् अवाडर सर्े व्यिथत होकर, अपीलाथी (िनयोक्ता) ने राजस्थान उच्च न्यायालय मे एक िरट यािचका दायर की। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अपने आदेश िदनांक 14.07.1998 मे इसर्े खािरज कर िदया और श्रम न्यायलय क े द्वारा पािरत अवाडर को यथावत रखा गया।

9. एकल पीठ क े आदेश सर्े व्यिथत होकर, अपीलाथी ने इसर्ी उच्च न्यायालय क े सर्मकक्ष पीठ मे अपील दायर की। अपने आलोच्य आदेश मे, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने िवशेष अपील को खािरज कर दी और एकल पीठ क े द्वारा पािरत आदेश को बरकरार रखे जाने सर्े व्यिथत होकर अपीलाथी िनयोक्ता ने इसर् न्यायालय मे िवशेष अनुमित यािचका अपील दािखल की।

10. पक्षकारो क े िवद्वान अिधिवक्ताओ को सर्ुनने और वाद क े अिभलेख को देखने क े बाद, हम वाद को आंिशक रूप सर्े अनुमित देते है और आलोच्य आदेश को सर्ंशोिधित करते हुए, मृतक कमरचारी(उनक े कानूनी प्रतितिनिधि) क े िपछले पूणर मजदूरी की जगह 50 % मजदूरी देने का आदेश देते है।

11. हमारे िवचार मे, िनचली न्यायालय इसर्े देखने मे पूरी तरह िवफल रहा िक न्यायालय बखारस्तगी/िनलंबन क े आदेश को अपास्त करने क े िनष्कषर क े तौर पर अप्रतदत मजदूरी को प्रतदान करने का आदेश नही दे सर्कता। अन्य शब्दों मे कहे, कमरचारी को कोई अिधिकार नही है िक वो िनयोक्ता सर्े अपने अप्रतदत मजदूरी को अिधिकार क े तौर पर मांग करे क्योंिक न्यायालय ने उसर्क े पक्ष मे िनलंिबत आदेश को अपास्त िकया है और उसर्े पुनः बहाल करने का आदेश िदया है।

12. ऐसर्े मामलों मे, कमरचारी क े िलए यह जरुरी है िक वे सर्ाक्ष्य क े सर्ाथ प्रतस्तुत हो और सर्ािबत करे िक वे िनलंबन क े बाद कही और काम करक े, कोई फायदा नही िलया और उसर्क े पासर् अपने तथा पिरवार की देखरेख करने क े िलए, कमाई का कोई जिरया नही था। िनयोक्ता को भी यह अिधिकार है िक वह कमरचारी क े िखलाफ अन्यथा सर्ािबत करे अथारत्, कमरचारी उसर् प्रतासर्ंिगक अविधि क े दौरान, सर्ेवारत था और लाभ ले रहा था और इसर् प्रतकार सर्े वह अप्रतदत मजदूरी पाने का अिधिकारी नही है। हालाँिक, इसर्े सर्ािबत करने का प्रतारंिभक दाियत्व कमरचारी क े ऊपर है।

13. क ु छ मामलों मे, न्यायालय अप्रतदत मजदूरी को देने सर्े पूरी तरह सर्े इनकार कर सर्कता है, क ु छ मामलों मे, प्रतत्येक मामले क े तथ्य और सर्ाक्ष्य को देखते हुए और अपने न्याियक िववेक का प्रतयोग करते आंिशक लाभ दे सर्कता है। प्रतश्न, जैसर्े िक अप्रतदत मजदूरी को िकसर् प्रतकार तय िकया जाना है, अप्रतदत मजदूरी का अवाडर पािरत करने क े सर्मय िकन कारकों का ध्यान रखना है तथा प्रतारंिभक बोझ िकन लोगो पर िनिहत है आिद को न्यायालय द्वारा प्रतत्येक मामलो मे िवस्तारपूवरक चचार िकया गया है और इन प्रतश्नो को िविधिसर्म्मत िनपटाया भी गया है। । वास्तव मे, यह अब अिनणीत िवषय नही है। इसर् तरह क े मामले है, मध्य प्रतदेश राज्य िवद्युत बोडर बनाम (श्रीमती) जरीना बीई, (2003) 6 एसर्सर्ीसर्ी 141, जी.एम. हरयाणा रोडवेज बनाम रुधिन िसर्ंह, (2005) 5 एसर्सर्ीसर्ी 591, उतर प्रतदेश राज्य ब्रासर्वैयेर िनगम बनाम उदय नारायण पांडे, (2006) 1 एसर्सर्ीसर्ी 479, जे.क े. िसर्ंथेिटक्सर् िलिमटेड बनाम क े.पी. अग्रवाल और अन्य (2007) 2 एसर्सर्ीसर्ी 433, महानगर पिरवहन िनगम बनाम वी वेकटेशन, (2009) 9 एसर्सर्ीसर्ी 601, जगबीर िसर्ंह बनाम हिरयाणा राज्य क ृ िष िवपणन बोडर और अन्य (2009) 15 एसर्सर्ीसर्ी 327) और दीपाली गुंडू सर्ुरवसर्े बनाम क्रांित जूिनयर अध्यापक महािवद्यालय (डी.एड.) और अन्य (2013) 10 एसर्सर्ीसर्ी 324।

14. इसर्िलए, न्यायालय को कई कारकों पर िवचार करने की आवश्यकता है जो उपरोक्त मामले मे िनधिारिरत िकए गए है तथा इसर् पर िनष्कषर पहुंचना िक क्या यह अप्रतदत मजदूरी क े अवाडर क े िलए एक उपयुक्त मामला है और, यिद हां, तो िकसर् हद तक।

15. अब इसर् मामले क े तथ्य पर आते है, यहां हम पाते है िक न श्रम न्यायालय ने और न ही उच्च न्यायालय ने उक्त कानून क े िसर्दांतों को ध्यान मे रखा । इसर्ी तरह, िकसर्ी भी पक्ष द्वारा ना ही कोई प्रताथरना िकया, ना ही कोई सर्ाक्ष्य प्रतस्तुत कर महत्त्वपूणर तथ्य को सर्ािबत िकया है िजसर्सर्े न्यायालय उन्हे अप्रतदत मजदूरी क े िलए तैयार हो।

16. दूसर्री ओर, हम पाते है िक श्रम अदालत ने क े वल एक पंिक्त मे अपीलाथी (िनयोक्ता) को िनदेश िदया िक वह मृतक कमरचारी को लम्बी अविधि क े अप्रतदत मजदूरी का भुगतान करे और उसर्े पुनः सर्ेवा मे बहाल करे ।

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17. इसर्िलए, हम इसर् तरह सर्े िनचली अदालतों द्वारा कमरचारी क े पक्ष मे पािरत पूणर अप्रतदत मजदूरी पर सर्हमित नही दे सर्कते है जो हमारी राय मे, िनित श्चत रूप सर्े अपीलाथी(िनयोक्ता) क े िखलाफ पक्षपात है ।

18. हालांिक, मामले क े सर्भी तथ्यों और पिरित स्थितयाँ क े मद्देनजर, मामले क े िनपटारे मे लगी लम्बी अविधि, मृतक कमरचारी द्वारा इसर्मे खचर हुए पैसर्े और उनक े मृत्यु क े पश्चात उनक े िविधिक प्रततिनिधि क े सर्म्बन्धि मे इसर् तथ्य को पाते है िक कमरचारी फ ू लचंद की मृत्यु हो गयी है और न्यायिहत मे हम यह उिचत और न्यायसर्ंगत पाते है िक प्रतत्यथीगण(स्व. फ ू ल चाँद क े िविधिक प्रतितिनिधि) को क ु ल प्रतदत मजदूरी का 50% प्रतदान की जाय।

19. सर्ंिवधिान क े अनुच्छेद 142 मे िनिहत अपने शिक्त का प्रतयोग करते हुए, अप्रतदत मजदूरी प्रतदान करने क े सर्म्बन्धि मे लागू िविधि िसर्दांत को दोहराते हुए, पक्षकारो को पयारप न्याय िदया जा सर्क े ।

20. उपरोक्त चचार की रैशनी मे, इसर् अपील को स्वीकार करते हुए आंिशक रूप सर्े अनुमित दी जाती है। आलोच्य आदेश को ऊपर उिल्लिखत सर्ीमा तक सर्ंशोिधित िकया गया है।

21. रािश को गणना करक े, इसर् िनणरय क े 3 माह क े भीतर उिचत पड़ताल करने क े बाद, अपीलाथी उसर्े प्रतत्यथी को प्रतदान करे । न्यायमूितर अभय मोहन सर्प्रते न्यायमूितर एसर् अब्दुल नज़ीर नई िदल्ली 20 िसर्तम्बर 2018