Sumer Singh Jat v. Other State and Others

Supreme Court of India · 16 Nov 2018 · 2018 INSC 1073
Abhay Manohar Sapre; Indu Malhotra
Special Appeal Nos. 11047-11061 of 2018
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the Rajasthan High Court's dismissal of appeals without reasons and remanded the cases for fresh adjudication on merits.

Full Text
Translation output
भारत का सर्वो च्च न्यायालय
सिसविर्वोल अपीलीय अधि कारिरता
सिसविर्वोल अपील संख्या 11047-11061/2018
(2018 की एसएलपी (सी) संख्या 30287-301 से उत्पन्न)
(डी संख्या 12356/2018)
सुमेर सिंसह जाट और अन्य ...अपीलकता4
बनाम
अन्य राज्य और अन्य ...प्रधितर्वोादी (ओं)
विनर्ण4य
अभय मनोहर सप्रे, न्याया ीश
JUDGMENT

1. अनुमधित दी गई।

2. ये अपीलें राजस्थान उच्च न्यायालय, बेंच जयपुर क े द्वारा डी. बी. विर्वोशेष आदेश याधिचका संख्या 794/2017 विदनांविकत 20.9.2017, 908/2017 विदनांविकत 06.10.2017, 792/2017, 801/2017 र्वो 815/2017 विदनांविकत 25.10.2017, 826/2017 विदनांविकत 27.10.2017 और 816/2017 विदनांविकत 01.11.2017 में पारिरत अंधितम विनर्ण4यों और आदेशों क े विर्वोरुद्ध हैं ।

3. इन अपीलों क े विनपटान क े लिलए क ु छ तथ्यों का उल्लेख विकए जाने की आर्वोश्यकता है। 2018 INSC 1073

4. अपीलकता4 संख्या 1 और कई अन्य ने जयपुर और जो पुर में राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े समक्ष 09 फरर्वोरी, 2017 क े आदेश और रिरट याधिचकाओं में एकल न्याया ीश द्वारा पारिरत इसी तरह क े अन्य आदेशों क े लिखलाफ अदालत क े भीतर अपील दायर की।

5. खण्ड पीठ ने आक्षेविपत विनर्ण4यों/आदेशों द्वारा एकल न्याया ीश क े आदेशों की पुविZ की और इसमें अपीलार्थिथयों द्वारा दायर अपीलों को खारिरज कर विदया, सिजन्होंने इस न्यायालय में विर्वोशेष अनुमधित क े माध्यम से र्वोत4मान अपीलों को दालिखल की है ।

6. संधिक्षप्त प्रश्न, जो इन अपीलों में विर्वोचाराथ[4] उठता है, यह हैविक क्या आक्षेविपत आदेश विर्वोधि में बरकरार रखने योग्य हैं?

7. अपीलार्थिथयों क े लिलए विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता सुश्री ऐश्वया4 भाटी और श्री शिशर्वो मंगल शमा4 और प्रधितर्वोादी क े लिलए विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता एएजी उपस्थिस्थत।

8. पक्षकारों क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता को सुनने क े बाद और मामले क े अशिभलेख क े परिरशीलन पर, हम अपील को मंजूर करने और मामले को गुर्ण-दोष क े आ ार पर नए सिसरे से अपीलों पर विनर्ण4य करने क े लिलए उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ को भेजने क े लिलए विर्वोर्वोश हैं।

9. मामले को प्रधितप्रेविषत करने की आर्वोश्यकता इसलिलए पैदा हुई है क्योंविक खण्ड पीठ ने अपीलों को खारिरज करने का कोई कारर्ण नहीं बताया है।

10. हमारी राय में, इन मामलों में उत्पन्न मुद्दों पर विकसी चचा4 की अनुपस्थिस्थधित में में और पक्षकारों द्वारा आग्रह विकए गए प्रस्तुधितयों पर विकसी विनष्कष[4] की अनुपस्थिस्थधित में में, आदेश की पुविZ करना संभर्वो नहीं है। र्वोास्तर्वो में, अपीलार्थिथयों द्वारा आग्रह विकए गए विकसी भी प्रस्तुतीकरर्ण का उल्लेख मामले क े गुर्ण-दोष क े आ ार पर विकसी भी तरह से नहीं विकया गया है।

11. उपरोक्त कारर्ण को ध्यान में रखते हुए, अपील सफल होती है और तदनुसार अनुज्ञात की जाती है। आक्षेविपत विनर्ण4यों/आदेशों को अपास्त विकया जाता है।सिजन अपीलों से ये अपीलें उठती हैं, उन्हें कानून क े अनुसार गुर्ण-दोष क े आ ार पर नए सिसरे से विनपटाने क े लिलए उच्च न्यायालय क े समक्ष उनकी संबंधि त संख्या में बहाल विकया जाता है।

12. मामले को प्रधितप्रेविषत करने क े लिलए राय बनाने क े बाद, हमने विर्वोर्वोाद क े गुर्ण- दोष पर ध्यान नहीं विदया है। उच्च न्यायालय, इसलिलए, हमारी विकसी भी विटप्पर्णी से प्रभाविर्वोत हुए विबना, योग्यता क े आ ार पर अपीलों पर नए सिसरे से फ ै सला करेगा।

13. हम उच्च न्यायालय से अनुरो करते हैं विक र्वोह अपीलों का विनपटान यथासंभर्वो शीघ्र, अधि मानतः 6 महीने क े भीतर करे। अभय मनोहर सप्रे, न्याया ीश इंदु मल्होत्रा, न्याया ीश नई विदल्ली, 16 नर्वोंबर, 2018 यह अनुर्वोाद आर्टिटविफशिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुर्वोास' क े जरिरए अनुर्वोादक की सहायता से विकया गया है। अस्र्वोीकरर्ण: यह विनर्ण4य पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीविमत उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाविदत विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारिरक और आधि कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण4य का अंग्रेजी संस्करर्ण ही प्रामाशिर्णक होगा और विनष्पादन और काया4न्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करर्ण ही मान्य होगा।