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सिविल अपीलीय अधिकारिता
सिविल अपील संख्या 11047-11061/2018
(2018 की एसएलपी (सी) संख्या 30287-301 से उत्पन्न)
(डी संख्या 12356/2018)
सुमेर सिंह जाट और अन्य ...अपीलकर्ता
बनाम
अन्य राज्य और अन्य ...प्रतिवादी (ओं)
निर्णय
अभय मनोहर सप्रे, न्यायाधीश
JUDGMENT
1. अनुमति दी गई।
2. ये अपीलें राजस्थान उच्च न्यायालय, बेंच जयपुर क े द्वारा डी. बी. विशेष आदेश याचिका संख्या 794/2017 दिनांकित 20.9.2017, 908/2017 दिनांकित 06.10.2017, 792/2017, 801/2017 व 815/2017 दिनांकित 25.10.2017, 826/2017 दिनांकित 27.10.2017 और 816/2017 दिनांकित 01.11.2017 में पारित अंतिम निर्णयों और आदेशों क े विरुद्ध हैं ।
3. इन अपीलों क े निपटान क े लिए क ु छ तथ्यों का उल्लेख किए जाने की आवश्यकता है।
4. अपीलकर्ता संख्या 1 और कई अन्य ने जयपुर और जोधपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े समक्ष 09 फरवरी, 2017 क े आदेश और रिट याचिकाओं में एकल न्यायाधीश द्वारा पारित इसी तरह क े अन्य आदेशों क े खिलाफ अदालत क े भीतर अपील दायर की।
5. खण्ड पीठ ने आक्षेपित निर्णयों/आदेशों द्वारा एकल न्यायाधीश क े आदेशों की पुष्टि की और इसमें अपीलार्थियों द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया, जिन्होंने इस न्यायालय में विशेष अनुमति क े माध्यम से वर्तमान अपीलों को दाखिल की है ।
6. संक्षिप्त प्रश्न, जो इन अपीलों में विचारार्थ उठता है, यह हैकि क्या आक्षेपित आदेश विधि में बरकरार रखने योग्य हैं?
7. अपीलार्थियों क े लिए विद्वान अधिवक्ता सुश्री ऐश्वर्या भाटी और श्री शिव मंगल शर्मा और प्रतिवादी क े लिए विद्वान अधिवक्ता एएजी उपस्थित।
8. पक्षकारों क े विद्वान अधिवक्ता को सुनने क े बाद और मामले क े अभिलेख क े परिशीलन पर, हम अपील को मंजूर करने और मामले को गुण-दोष क े आधार पर नए सिरे से अपीलों पर निर्णय करने क े लिए उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ को भेजने क े लिए विवश हैं।
9. मामले को प्रतिप्रेषित करने की आवश्यकता इसलिए पैदा हुई है क्योंकि खण्ड पीठ ने अपीलों को खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया है।
10. हमारी राय में, इन मामलों में उत्पन्न मुद्दों पर किसी चर्चा की अनुपस्थिति में में और पक्षकारों द्वारा आग्रह किए गए प्रस्तुतियों पर किसी निष्कर्ष की अनुपस्थिति में में, आदेश की पुष्टि करना संभव नहीं है। वास्तव में, अपीलार्थियों द्वारा आग्रह किए गए किसी भी प्रस्तुतीकरण का उल्लेख मामले क े गुण-दोष क े आधार पर किसी भी तरह से नहीं किया गया है।
11. उपरोक्त कारण को ध्यान में रखते हुए, अपील सफल होती है और तदनुसार अनुज्ञात की जाती है। आक्षेपित निर्णयों/आदेशों को अपास्त किया जाता है।जिन अपीलों से ये अपीलें उठती हैं, उन्हें कानून क े अनुसार गुण-दोष क े आधार पर नए सिरे से निपटाने क े लिए उच्च न्यायालय क े समक्ष उनकी संबंधित संख्या में बहाल किया जाता है।
12. मामले को प्रतिप्रेषित करने क े लिए राय बनाने क े बाद, हमने विवाद क े गुण- दोष पर ध्यान नहीं दिया है। उच्च न्यायालय, इसलिए, हमारी किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना, योग्यता क े आधार पर अपीलों पर नए सिरे से फ ै सला करेगा।
13. हम उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वह अपीलों का निपटान यथासंभव शीघ्र, अधिमानतः 6 महीने क े भीतर करे। अभय मनोहर सप्रे, न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा, न्यायाधीश नई दिल्ली, 16 नवंबर, 2018 यह अनुवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल 'सुवास' क े जरिए अनुवादक की सहायता से किया गया है। अस्वीकरण: यह निर्णय पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीमित उपयोग क े लिए स्थानीय भाषा में अनुवादित किया गया है और किसी अन्य उद्देश्य क े लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। सभी व्यावहारिक और आधिकारिक उद्देश्यों क े लिए, निर्णय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक होगा और निष्पादन और कार्यान्वयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।