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भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील नं.18300-18305 वर्ष& 2017
क
े न्द्रीय आबकारी और सेवाकर आयुक्त, नोएडा ....अपीलार्थी4(गण)
बनाम
मैसस& संजीवनी नॉन-फ
े रस& ट्रेडिंडग प्राइवेट लिलविमटेड ....प्रत्यर्थी4(गण)
विनण&य
न्यायमूर्ति , ए.क
े .सीकरी
इन अपीलों में उठाया गया विववाद्य आयाति एल्युविमविनयम स्क्र
े प क
े संबं में
सौदा मूल्य/आंकलन मूल्य से संबंति से है, जो ए स्मिस्मन प्रत्यर्थी4 द्वारा आयाति
विकया गया। प्रत्यर्थी4 ने उक्त एल्युविमविनयम स्क्र
े प क
े विवभिभन्न प्रकारों को 27 अगस्
2013 से 29 विदसम्बर 2014 की अवति में आयाति विकया र्थीा और आयाति मालों
का सौदा मूल्य की घोर्षणा कर े हुए उसक
े सम्बन् में आया कर भुग ान करने क
े
उद्देश्य से इनवॉयस व खरीदी ऑड&र क
े सार्थी 843 विबल प्रविवष्टी को दालिखल विकया।
घोविर्ष मूल्य को कम होना मान े हुए आंकलन अति कारी द्वारा इसे स्वीकार नहीं
विकया। दनुसार, उक्त घोविर्ष मूल्य अस्वीकार की गयी और आंकलिल मूल्य को बढ़ा े
हुए पुन&मूल्यांकन विकया गया।
JUDGMENT
(2) प्रत्यर्थी4 द्वारा माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दालिखल की गयी रिरट याति`का में, उच्च न्यायालय क े विनदaश पर उप आयुक्त आया शुल्क, नोएडा ने प्रत्यर्थी4 द्वारा घोविर्ष आंकलन मूल्य को अस्वीक ृ करने का कारण दे े हुए और आयाति मालों, स्क्र े प mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एल्युविमविनयम की विकस्म सार्थी ही सार्थी इसमें अन् र्विवष्ट दूसरी ा ुओं की उपस्मिस्र्थीति की मात्रा, क े मूल्य क े दृविष्टग इसमें वृतिh कर े हुए विदनांक 25 मा`& 2015 को एक सकारण आदेश पारिर विकया। (3) आयुक्त(अपील), क े न्द्रीय आबकारी और आया शुल्क, नोएडा क े समक्ष अपीले दालिखल कर आंकलन अति कारी द्वारा पारिर आंकलन आदेश विदनांविक 25 मा`& 2015 को `ुनौ ी दी गयी। ये सभी अपीलें खारिरज कर दी गयी। आयुक्त (अपील) क े आदेश को `ुनौ ी दे े हुए प्रत्यर्थी4 आया कर, आबकारी और सेवा कर अपील अति करण (ए स्मिस्मन पश्चा ् अति करण कहा गया) में आया। विदनांक 17 जनवरी 2017 क े आक्षेविप समान विनण&य से राजस्व द्वारा आंकलन मूल्य की वृतिh को विनरस् कर े हुए प्रत्यर्थी4 की अपीलों को स्वीक ृ विकया गया। अति करण का यह उक्त आदेश ही इन अपीलों की विवर्षयवस् ु है। (4) अति करण क े आदेश का सम्पूण& आ ार आक्षेविप आदेश क े प्रस् र 7 में है और `ूंविक इस प्रस् र में वह कारण है सिजसने अति करण को प्राति कारिरयों क े आदेश क े अपास् करने क े लिलए राजी विकया, नी`ें हम इस प्रस् र को प्रस् र 8 क े सार्थी रख े हैं सिजसने सम्पूण& रूप से अपीलों क े विनष्कर्ष& को प्रकट विकया. “7. प्रति स्प 4 कo को ध्यान में रखकर और अभिभलेख क े अवलोकन पर हम यह पा े हैं विक मूल प्राति कारी को आंकलन मूल्य की वृतिh पर सकारण आदेश पारिर करने क े लिलए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विनदaभिश विकया गया र्थीा। हम यह पा े है विक मूल प्राति कारी ने विदनांविक 25/03/2015 क े अपने मूल आदेश में रिरट याति`का क े आ ार पर विटप्पणी की और विवभाग क े पास उपलब् साक्ष्यों का ठीक रह से परीक्षण नहीं विकया सिजसका आंकलन मूल्य की वृतिh क े लिलए परीक्षण विकया जाना अपेतिक्ष र्थीा। आगे, हमने पा े हैं विक उपरोक्त विवति क दृष्टान् ों में जैसा विन ा&रिर विकया गया है और आया कर अति विनयम,1962 की ारा 14 में जैसा प्राव ाविन विकया गया है, आंकलन मूल्य पर वास् विवक भुग ान मूल्य क े आ ार पर पहुँ`ा जाना `ाविहए और मूल्य एकमात्र प्रति फल न होने की स्मिस्र्थीति में या यविद क्र े ा और विवक्र े ा सम्बस्मिन् व्यविक्त हैं ब यह स्र्थीाविप करने क े बाद विक मूल्य एकमात्र प्रति फल नहीं है आंकलन मूल्य अस्वीक ृ की जा सक ी है और अन्य साक्ष्यों क े ध्यान में रखकर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds आंकलन मूल्य पर पहुँ`ा जा सक ा है। उपलब् इन वादों में ऐसा अभ्यास नहीं विकया गया है। इसलिलए, हम विबल प्रविवष्टी क े सम्बन् में आंकलन मूल्य की वृतिh को अस्वीक ृ कर े हैं जो विनण[4] होने क े लिलए सभी अपीलों में शाविमल है और हम उक्त विबल प्रविवष्टी में अपीलार्थी4 द्वारा घोविर्ष आंकलन मूल्य पुन&स्र्थीाविप कर े हैं।
8. परिरणाम क े रूप में, हम अपील में सभी आक्षेविप आदेशों को अपास् कर े हैं और सभी अपीलों को स्वीक ृ कर े हैं। अपीलार्थी4 पारिरणाविमक अनु ोर्षों का हकदार होगा, यविद कोई, विवति क े अनुसार हो। (5) राजस्व क े विवद्वान अति वक्ता, श्री क े. रा ाक ृ ष्ण का यह शुh क & र्थीा विक स्वंय अति करण क े अनुसार, आदेश को पलटने का कारण मूल में है – (a) विक उसने विवभाग क े पास उपलब् साक्ष्यों का ठीक से परीक्षण नही विकया, सिजसका आंकलन मूल्य की वृतिh क े उद्देश्य क े लिलए परीक्षण विकया जाना जरूरी र्थीा। (b) आया कर अति विनयम,1962 की ारा 14 क े प्राव ानों और इसक े सम्बन् में विवति क दृष्टान् ों क े अनुसार, आंकलन मूल्य पर वास् विवक भुग ान मूल्य क े आ ार पर पहुँ`ा जाना `ाविहए और मूल्य एकमात्र प्रति फल न होने की स्मिस्र्थीति में या यविद क्र े ा और विवक्र े ा संबंति व्यविक्त हैं ब यह स्र्थीाविप होने क े बाद विक मूल्य एकमात्र प्रति फल नहीं है, आंकलन मूल्य अस्वीक ृ की जा सक ी है। हालांविक, इन वादों में ऐसा प्रयोग नहीं विकया गया है। (6) यह क & विदया गया र्थीा विक यविद मूल प्राति कारी /मूल्यांकन अति कारी विवभाग क े पास उपलब् साक्ष्यों का परीक्षण करनें में असफल रहे और मूल्य का एकमात्र प्रति फल न होने क े संबं में विव`ार नहीं विकया, अति करण को प्रकरण आंकलन अति कारी को साक्ष्यों का परीक्षण और उसक े अनुप्रयोग क े लिलए पुन&प्रेविर्ष कर देना `ाविहए र्थीा। दूसरे शब्दों में, श्री रा ाक ृ ष्णन क े क & का पूरा जोर इस पर र्थीा विक प्रत्यर्थी4/आंकलक द्वारा विदए गए सौदा मूल्य को स्वीकार कर े हुए अपीलों को सी े अनुमति नहीं दी जा सक ी र्थीी और इस संबं में आंकलन प्राति कारी को अन्य अवसर विदया जाना `ाविहए र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (7) यह क & आकर्ष&क प्र ी हो ा है, लेविकन क े वल भी जब अति करण क े उक्त अवलोकन को क े वल सरसरी ौर पर देख े हैं विक आंकलन अति कारी ने विवभाग क े पास उपलब् साक्ष्यों का परीक्षण नहीं विकया जो इस उद्देश्य क े लिलए आवश्यक र्थीे। हालांविक, अति करण क े अवलोकन को उनकी सम्पूण& ा और उस परिरप्रेक्ष्य में समझना होगा सिजनक े सम्बन् में ये बनाये गये हैं। अति करण ने स्पष्ट रूप से वर्णिण विकया है विक सीमा शुल्क अति विनयम की ारा 14 क े प्राव ानों और विवति क वादों में प्रति पाविद विकए गए सिसhान् ों (सिजसे विनण&य क े पूव& भाग में सन्दर्णिभ विकया गया ) क े अनुसार इन प्राव ानों को अर्थीा&स्मिन्व कर े हुए, वास् विवक भुग ान विकए गए मूल्य क े आ ार पर आंकलन मूल्य को विनकालना `ाविहए। उपरोक्त प्राव ान, अर्थीा& ् ारा 14, में प्रति स्र्थीाविप यह आ ारभू सिसhां है, जो इस न्यायालय द्वारा विदये गये विनण&यों की श्रृंखला से प्राप्त विकया जा सक ा है। (8) ईशर ट्रैक्टर लिलविमटेड बनाम सीमा शुल्क आयुक्त, मुम्बई 1(2001) 1 एससीसी 315 क े वाद में, इस न्यायालय ने विनम्न रूप से अव ारिर विकयाः “6. अति विनयम क े अन् ग& सीमा कर माल पर प्रभाय&(दायी) है। अति विनयम की ारा 14(1) क े अनुसार, कर का आक ं लन माल क े मूल्य पर विकया जा ा है। ारा 14(2) क े अन् ग& क े न्द्रीय सरकार द्वारा मूल्य विनतिश्च विकया जा सक ा है। जहाँ मूल्य इस रह विनतिश्च नहीं विकया गया है, ो मूल्य ारा 14(1) क े अन् ग& विन ा&रिर विकया जाना `ाविहए। ारा 14(1) क े अनुसार, मूल्य वह कीम मानी जाएगी सिजस पर ऐसे या इस प्रकार क े माल अन् रा&ष्ट्रीय व्यापार में- परिरदान क े समय और आया क े स्र्थीान पर सा ारण या बे`े जा े हैं, या विवक्रय क े लिलए प्रस् ाविव विकये जा े हैं। शब्द “सा ारण या” आवश्यक रूप से “असा ारण” या “विवशेर्ष” परिरस्मिस्र्थीति यों क े बविहष्करण को विववतिक्ष कर ा है। ारा 14 क े अस्मिन् म वाक्यांश द्वारा यह स्पष्टीक ृ है जो एक “सा ारण” विवक्रय को एक ऐसा “जहाँ विवक्र े ा और क्र े ा का एक दूसरे क े व्यापार में कोई विह नहीं है और कीम विवक्रय क े लिलए एकमात्र प्रति फल है...” ब ा ा है। ारा 14(1) में प्रति पाविद विकए गए इन ीन श o समय, स्र्थीान और विवशेर्ष परिरस्मिस्र्थीति यों की अनुपस्मिस्र्थीति में, आयाति मालों का मूल्य ारा 14(1-A) ) क े अन् ग& इसमें ब ायें गयें विनयमों क े अनुसार विन ा&रिर विकया जाना है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds XXX XXX XXX
9. ये अपवाद ारा 14(1) में पूव&व ् उhृ विवशेर्ष परिरस्मिस्र्थीति यों क े विवस् ार और व्याख्या में हैं। यह ब ा ा है विक जब क विकसी सौदे का वास् विवक भुग ान मूल्य अपवाद क े अन् ग& नहीं आ ा है, आया कर प्राति कारी सौदा मूल्य पर कर आकलन को बाध्य है।
12. विनयम 4(1) सौदा मूल्य को ब ा ा है। विनतिश्च पद का प्रयोग इंविग कर ा है विक सीमा शुल्क कर क े आक ं लन क े उद्देश्य क े लिलए मूल्य क े रूप में क्या स्वीकार विकया जाना `ाविहए वह विकसी सौदे क े लिलए वास् विवक भुग ान कीम है,जब क ारा 4(2) में ब ाये गये कारणों क े लिलए कीम अस्वीकार विकये जाने योग्य न हो। विनयम 4(1) की भार्षा क े सन्दभ& में “देय” को “विवशेर्ष सौदे” को सन्दर्णिभ कर े हुए पढ़ा जाना `ाविहए और सौदे क े सम्बन् में देय ा एक ऐसी स्मिस्र्थीति की परिरक् लपना कर ी है जहाँ कीम का भुग ान स्र्थीविग विकया जा सक ा है।
13. यह विक विनयम 4 जो विक अन्य विनयमों क े प्राव ानों द्वारा भी समर्णिर्थी है, प्रश्नग सौदे क सीविम है सिजसमें से प्रत्येक मूल्यांकन क े वैकस्मिल्पक प्रणाली की व्यवस्र्थीा कर ा है और माल क े मूल्य क े साक्ष्य को आंकलन क े अन् ग& से अन्यर्थीा को उनक े आंकलन मूल्य का आ ार होने को स्वीक ृ कर ा है। इस प्रकार, विनयम 5 एक ही समय में भार में आयाति एक जैसे मालों क े आ ार पर सौदा मूल्य अव ारिर करने की अनुज्ञा दे ा है; विनयम 6 प्रश्नग माल क े रूप में एक ही समय पर भार में आयाति समान मालों क े मूल्य पर सौदा मूल्य को अव ारिर करने की अनुज्ञा दे ा है। जहाँ भार में कोई समकालीन आया नहीं है, मूल्य ारा 7 क े अन् ग& इसमें प्राव ाविन रीक े से कटौ ी की प्रविक्रया द्वारा विन ा&रिर विकया जाना है। यविद मूल्य की विनयम 7-A) क े अन् ग& गणना होना संभव नहीं है। जब आयाति माल का मूल्य इन प्राव ानों में से विकसी क े अन् ग& विन ा&रिर नहीं विकया जा सक ा, ो मूल्य ारा 8 क े अन् ग&, “इन विनयमों क े सिसhां ों व सामान्य प्राव ानों और सीमा शुल्क अति विनयम, 1962 की ारा 14 क े उप ारा (1) क े अनुरूप उति` सा नों का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रयोग करक े और भार में उपलब् आँकडों क े आ ार पर” विन ा&रिर होना आवश्यक है। यविद विनयम 4 में प्रयुक्त “सौदा मूल्य” वाक्यांश विवशेर्ष सौदे क सीमा नहीं र्थीा ब अन्य विनयम जो अन्य सौदों और आँकडा को सन्दर्णिभ कर े हैं, अनाश्यक हो जायेंगे।
22. हमारे समक्ष मामले में, यह कभिर्थी नहीं है विक अपीलार्थी4 ने वास् विवक भुग ान को गल रूप से घोविर्ष विकया है। ना ही आयाति माल का गल वण&न र्थीा जैसा विक पवि‹या सेल्स कॉरपोरेशन (1993 Supp(4) एससीसी 57) क े वाद में र्थीा यह प्रत्यर्थी4 का वह वाद भी नहीं है विक विवशेर्ष आया विनयम 4(2) में ब ायी गयी विकसी भी परिरस्मिस्र्थीति में आ ा हो। सहायक कलेक्टर द्वारा विवक्र े ा क े मूल्य सू`ी क े सिसवाय ारा 4(1) क े अन् ग& सौदा मूल्य को अस्वीक ृ करने का कोई कारण नहीं विदया गया है।ऐसा करने में, सहायक कलेक्टर ने ना क े वल विनयम 4(2) को नजरअंदाज विकया बस्मिल्क विवक्र े ा क े मूल्य सू`ी क े आ ार पर भी काय& विकया जैसे विक मूल्य सू`ी सौदा मूल्य का विनर्विववाद प्रमाण हो। यह गल र्थीा और स्वयं द्वारा सौदा मूल्य को अस्वीक ृ करने का कारण नहीं हो सक ा।छ ू ट एक व्यवसातियक-स्वीकारयोग्य माप है सिजसका विवक्र े ा द्वारा स्टोक वि•यरेन्स सविह विवभिभन्न कारणों से सहारा लिलया जा सक ा है। मूल्य सू`ी वास् व में सामान्य कोटेशन से ज्यादा कु छ नहीं है यह सू`ीबh कीम पर छ ू ट को नहीं रोक ा है। वास् व में, मूल्य सू`ी क े संदभ& में छ ू ट की गणना की जा ी है विनःसन्देह इस वाद में स्वयं भार ीय अभिभक ा& द्वारा सामान्य परिरस्मिस्र्थीति यों में 30% क की छ ू ट र्थीी यहाँ अति रिरक्त कारक र्थीा विक प्रश्नग स्टॉ ं क पुराना र्थीा और यह 5 साल पुराने स्टॉक की एक बार की विबक्री र्थीी। जब कोई छ ू ट व्यावसातियक रूप से अनुज्ञेय है और यह विदखाने क े लिलए कु छ भी नहीं है विक इसे पुराने स्टॉक को खरीदने क े इच्छ ु क विकसी अन्य को नहीं विदया जाएगा, इसका कोई कारण नहीं है विक क्यों प्रश्नग घोविर्ष मूल्य को विनयम 4(1) क े अन् ग& स्वीकार नहीं विकया जाएगा।” (9) इसी प्रभाव क े उक्त सिसhान् ों को दोहरा े हुए अन्य विनण&य जैसे सीमा शुल्क आयुक्त, कलकत्ता बनाम साउर्थी इस्मि•डया टेलीविवजन(प्रा.) लिलविमटेड 2(2007)6 एससीसी 373, `ौ री भिशप ब्रेकस& बनाम सीमा शुल्क आयुक्त, अहमदाबाद 3(2010) 10 एससीसी 576 और सीमा शुल्क आयुक्त, विवशाखापत्तनम बनाम अग्रवाल इ•डस्ट्रीज लिलविमटेड 4(2012) 1 एससीसी 186 हैं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (10) इस प्रकार विवति स्पष्ट है। ारा 14(1) और ारा 14(1-A) ) क े अनुसार, मूल्यवर्ति कर क े लिलए दायी विकसी माल का मूल्य, कीम होना माना जा ा है जैसा इस प्राव ान में सन्दर्णिभ है। ारा 14(1) ारणा उपबन् है जैसा विक यह ऐसे माल क े माने गये मूल्य की बा कर ा है। इसलिलए, सामान्य ः आंकलन अति कारी को कीम क े आ ार पर काय& करना अपेतिक्ष है सिजसका वास् व में भुग ान विकया गया है और इसको आंकलन मूल्य/ सौदा मूल्य क े रूप में मानना अपेतिक्ष है। यह, सामान्य ः काय& का प्रक्रम है सिजसे आंकलन अति कारी द्वारा अनुसरण विकये जाने की आवश्यक ा हो ी है सौदा मूल्य पर पहुँ`ने का सिसhान् आंकलन मूल्य होना लागू हो ा है यह भी सीमा शुल्क मूल्य विन ा&रण विनयमावली क े विनयम 4(1) और विनयम 3(1) का प्रभाव है, अर्थीा& ्, न्यायविनण4यन करने वाला अति कारी वास् विवक भुग ान या माल क े देय मूल्य को सौदा मूल्य स्वीकर करने क े लिलए बाध्य है। हालांविक, इसक े अपवाद बनाये गये है और विनयम 4(2) में उसि˜लिख हैं। इस प्राव ान क े अनुसार, इ•ट्री ऑफ विबल में उसि˜लिख सौदा मूल्य को उसी स्मिस्र्थीति में छो‹ा जा सक ा है जब यह पाया जा ा है विक समान मूल्य या समान मालों का कोई भी आया एक ही समय में उच्च मूल्य पर विकया गया है या यविद क्र े ा और विवक्र े ा एक दूसरे से सम्बस्मिन् है। इस रह क े प्राव ान को लागू करने क े लिलए यह आकलन अति कारी पर अवलंविब है विक इ•ट्री ऑफ विबल में घोविर्ष सौदा मूल्य को क्यों अस्वीकार विकया जा रहा र्थीा, यह स्र्थीाविप करने क े लिलए विक कीम अक े ला प्रति फल नहीं है और सामग्री द्वारा समर्णिर्थी कारण देना सिजसक े आ ार पर आंकलन अति कारी अपने आंकलन मूल्य पर पहुँ`ा। (11) साउर्थी इस्मि•डया टेलीविवजन (प्रा.) लिलविमटेड में, न्यायालय ने स्पष्टीक ृ विकया कीम से मूल्य क ै सै विनकाला जा ा है और विकन परिरस्मिस्र्थीति यों में ारा 14(1) में विदया गया डीम्ड वैल्यू विनकाला जा सक ा है। उक्त विनण&य में विनम्नलिललिख परिर``ा& को नी`े उhृ करने की आवश्यक ा है- “10. हम इस सिसविवल अपील में विनम्नलिललिख कारणों से कोई योग्य ा नहीं पा े हैं। कीम से मूल्य विनकाला गया है। मूल्य कीम का फलन है। यह मूल्य का अव ारणात्मक अर्थी& है। ारा 2(41) क े अन् ग&, “मूल्य” को अति विनयम की ारा 14(1) क े अनुसार विन ा&रिर औस मूल्य क े रूप में परिरभाविर्ष विकया गया है। सीमा शुल्क अति विनयम, 1962 की ारा 14 माल क े मूल्यांकन को शासिस करने की विवति का कोर्ष मात्र है। सीमा शुल्क मूल्यांकन विनयमावली 1988 क े वल आयाति माल क े सम्बन् में बनाया गया है । विनया& माल क े मूल्यांकन को शासिस करने का कोई विनयम नहीं है। यह स्वंय ारा 14 क े आ ार पर विकया जाना `ाविहए। व &मान वाद में, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवभाग ने प्रत्यर्थी4 आया क को कीम क े सम्बन् में कभिर्थी गल घोर्षणा क े लिलए आरोप लगाया है। माल क े वण&न क े सन्दभ& में गल घोर्षणा का कोई आरोप नहीं है। व &मान वाद में, कम इनवॉयस बनाने का आरोप है। कम कीम का आरोप समकालीन आयाति समान माल क े कीम क े साक्ष्य द्वारा समर्णिर्थी विकया है विवभाग को यह साविब करना है विक प्रकट वास् विवक नहीं है। सीमा शुल्क अति विनयम की ारा 2(41) क े अन् ग& शब्द “मूल्य” विकसी माल क े सम्बन् में ारा 14(1) क े प्राव ानों क े अनुसार अव ारिर मूल्य है। विबल ऑफ इ•ट्री में घोविर्ष विकया गया मूल्य उक्त सन्दर्णिभ मूल्य है और मात्र इन्वॉयस कीम नहीं है।
12. हालांविक, विवभाग को इन्वॉयस कीम को अस्वीक ृ कर े हुए ऐसी अस्वीक ृ ति क े लिलए विनश्य`ात्मक कारण देना हो ा है ऐसा इसलिलए है क्योंविक इनवॉयस कीम आंकलन मूल्य का आ ार बन े हैं। इसलिलए, आंकलन मूल्य को गल या अस्वीकाय& क े रूप में अस्वीकार करने क े पहले, विवभाग को यह प ा लगाना हो ा है विक क्या उसी समय क े दौरान एक जैसे माल या समान माल का ऊ ँ `ीं कीम पर कोई आया हुआ है। जब क इस सम्बन् में साक्ष्य को एकवित्र विकया जा ा है, ब क ारा 14(1-A) ) को लगाने का प्रश्न उत्पन्न नहीं हो ा। ऐसे साक्ष्य की अनुपस्मिस्र्थीति में, इन्वॉयस कीम को सौदा मूल्य क े रूप में स्वीकार करना होगा। इन्वॉसय मूल्य का साक्ष्य है। आयाति माल क े मूल्य क े साक्ष्य क े रूप में आया क द्वारा प्रस् ु इन्वॉयस पर सन्देह प्रकट कर े हुए इसे अस्वीकार करना पया&प्त नहीं है। कम मूल्यांकन को साविब करना होगा। यविद कम मूल्यांकन का आरोप साक्ष्यों द्वारा या ुलनात्मक आया ों क े बारे में सू`ना द्वारा समर्णिर्थी नहीं विकया जा सक ा, ो सन्देह का लाभ आया क को विमलना `ाविहए। यविद विवभाग कम मूल्यांकन को आरोविप करना `ाह ा है, ो उसे विवस् ृ जाँ`, सामग्री को एकवित्र करना और पया&प्त साक्ष्य को भी देना `ाविहए। जब कम मूल्यांकन को आरोविप विकया गया है, विवभाग को इसे साक्ष्य द्वारा ुलनात्मक आया ों क े बारे में सू`ना को साविब करना होगा। कम मूल्यांकन को साविब करने क े लिलए, यविद विवभाग विनया& क देश में की गयी घोर्षणा पर विनभ&र रह ा है ो यह विदखाना हो ा है विक क ै से ऐसी घोर्षणा प्राप्त की गयी। हम स्पष्टीक ृ कर सक े हैं विक साक्ष्य क े कठोर विनयम काय&वाविहयों को विनण[4] करने पर लागू नहीं हो े हैं। वे न्यायालय की काय&वाही पर कठोर रूप से लागू हो े हैं। हालांविक, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds यहाँ क विक न्यायविनण&यन काय&वाही में, मूल्यांकन अति कारी को उन दस् ावेजों क े संभाविव मूल्य का परीक्षण करना हो ा है सिजन पर विवभाग द्वारा कम मूल्यांकन क े आरोप क े समर्थी&न में सहारा लिलया गया है। एक बार विवभाग ऊ ँ `ी कीम पर समकालीन आया क े साक्ष्यों को प्रस् ु कर े हुए उपरोक्त विवस् ार को साविब करने क े भार से मुक्त हो जा ा है ो यह स्र्थीाविप करने का भार आया क पर आ जा ा है विक उसक े द्वारा विनभ&र इन्वॉयस वै है। इसलिलए, कम इन्वॉयस का आरोप उसी प्रकार क े माल क े समकालीन आया की कीम क े साक्ष्य द्वारा समर्णिर्थी होना `ाविहए।
13. ारा 14(1) “माना गया मूल्य” क े बारे में ब ा ी है। इसलिलए, इन्वॉयस कीम विववाविद हो सक ी है। र्थीाविप, विवभाग को यह साविब करना है विक इन्वॉयस कीम गल है। जब ऊ ँ `ी कीम पर समकालीन आया का कोई साक्ष्य नहीं है, ो इन्वॉयस कीम स्वीक ृ होने क े लिलए दायी है। विनया& घोर्षणा में मूल्य, सीमा शुल्क मूल्यांकन विनयमावली क े अन् ग& आंकलन मूल्य क े अव ारण पर विनभ&र हो सक ी है और उस मूल्य को विन ा&रिर करने क े लिलए नहीं, सिजस पर माल समय और आया क े स्र्थीान पर सामान्य ः बे`े जा े हैं। यह वहाँ है जहाँ मूल्य और कीम में परिर``ा& में अव ारणात्मक अन् र आ ा है।” (12) आक्षेविप विनण&य में विदए गए अति करण क े अवलोकनों को उपरोक्त विनण&य में विवर्विनविदष्ट विवति क े सिसhान् ों क े प्रकाश में समझा जाना है, यद्यविप अति करण ने स्पष्ट रूप से उ˜ेलिख विकया है विक सामान्य विनयम है आंकलन मूल्य पर वास् विवक भुग ान की गयी कीम क े आ ार पर पहुँ`ा जाना `ाविहए जैसा विक सीमा शुल्क अति विनयम की ारा 14 द्वारा प्राव ाविन विकया गया है और इसक े द्वारा विवति विनण&यों में सन्दर्णिभ विकए गए हैं (अति करण क े प्रस् र 5 में अपने विनण&य में सन्दर्णिभ विकया जो इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद उपरोक्त सिसhान् ों का अनुसरण कर ा है)। (13) इसलिलए प्रत्यर्थी4 की ओर से उपस्मिस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता, श्री दुष्यन् ए. दवे, ने सही ही क & विदया विक आदेश को अपास् करने का कारण विदया गया विक सामान्य विनयम यह र्थीा विक आंकलन मूल्य पर वास् विवक भुग ान की गयी कीम क े आ ार पर पहुँ`ा जाना `ाविहए और इसको विबल ऑफ ए•ट्री में ब ाया गया र्थीा। अति करण ने स्पष्ट रूप से उ˜ेख विकया है विक यह घोविर्ष क े वल विनश्चयात्मक कारणों क े प्रयोग द्वारा अस्वीक ृ की जा सक ी र्थीी सिजनक े आ ार पर आंकलन अति कारी यह ारण कर सक ा र्थीा विक भुग ान कीम सौदा मूल्य का एकमात्र प्रति फल नहीं र्थीा। `ूँविक आंकलन प्राति कारी द्वारा विबल ऑफ ए•ट्री में घोविर्ष कीम को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अस्वीक ृ करने में इसका प्रयोग नहीं विकया गया है, मूल में आदेश इस प्रकार स्पष्ट ः गल र्थीा। (14) सीमा शुल्क आयुक्त बनाम प्रभु दयाल प्रेम `न्द 5(2010) 13 एससीसी 535 क े वाद में, इस न्यायालय ने लगभग समान प्रकार की परिरस्मिस्र्थीति का सामना विकया र्थीा। बाद में लन्दन मेटल एक्स`ेंज (संतिक्षप्त में LME) ) से प्राप्त इस प्रभाव की सू`ना क े आ ार पर विक ब्रास स्क्र े प और कॉपर स्क्र े प नाम क े दो मेटल की कीम आया क े विदनांक पर LME) में प्रत्यर्थी4 द्वारा घोविर्ष कीम से ज्यादा र्थीी, उक्त दो विबल ऑफ ए•ट्री पर कर विन ा&रिर ी से अति रिरक्त कर क्रमशः 90,248 रूपये और 1,94,035 रूपये की माँग की। अति करण द्वारा यह आदेश अपास् कर विदया गया और सीमा शुल्क द्वारा इसक े विवरूh अपील इन न्यायालय द्वारा खारिरज कर दी गयी। न्यायालय ने कर विन ा&रिर ी की दलील को स्वीकार कर े हुए उसि˜लिख विकया विक विबल ऑफ ए•ट्री में उनक े द्वारा घोविर्ष मूल्य को बढ़ाने क े लिलए राजस्व द्वारा विकसी भी समकालीन सामग्री से उनका सरोकार नहीं हुआ र्थीा। इसने अति करण क े विनम्नलिललिख विटप्पणीयों को भी उ˜ेलिख विकया- “व &मान वाद में जैसा विक उपरोक्त ब ाया गया है, यद्यविप उप आयुक्त द्वारा पारिर आदेश में समकालीन आया का सन्दभ& है ऐसे आया से सम्बस्मिन् कोई सामग्री हमारे समक्ष न ही रखी गयी है या विकसी भी समय अपीलार्थी4 द्वारा उपलब् करायी गयी। इसलिलए, इस वाद में मूल्यांकन जैसे विक LME) बुलैविटन क े आ ार पर शुh रूप से बनाये गये, आया क े विकसी पुविष्टकरण साक्ष्य क े विबना ऐसी कीम क े विनकट या पर लिलया जा ा है जो कानून क े अन् ग& अनुज्ञेय नहीं है। इसलिलए हम आक्षेविप आदेश को अपास् कर े हैं और अपील को स्वीक ृ कर े हैं।” अपीलों क े खारिरज कर े हुए, इस न्यायालय ने इस प्रकार अवलोकन विकयाः “यह अति करण क े पूव क्त आदेश से प्रकट हो ा है विक विकसी समकालीन आया या LME) द्वारा अति सूति` मूल्य को दर्णिश करने वाली विकसी अन्य सामग्री का कोई विववरण या ो न्यायविनण&यन करने वाले अति कारी द्वारा न्यायविनण&यन आदेश में सन्दर्णिभ नहीं विकया गया र्थीा या अपील की सुनवाई क े समय ऐसी सामग्री अति करण क े समक्ष रखी गयी र्थीी। राजस्व क े विवद्वान अति वक्ता अति करण क े उक्त अवलोकनें का ख•‹न करने में सक्षम नहीं हुए। मामले क े दृविष्टग अति करण द्वारा पारिर आदेश Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds में कोई दोर्ष नहीं पाया जा सक ा है जो विन ा&रिर क े विवरूh बनाई गयी अति रिरक्त माँग को अपास् कर ा हो।” (15) हम, इस प्रकार, इन अपीलों में कोई गुण नहीं पा े हैं और इसे खारिरज कर े हैं।............................. (न्यायमूर्ति, ए.क े. सीकरी)............................. (न्यायमूर्ति, एस. अब्दुल नजीर) नई विद˜ी 10 विदसम्बर 2018. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds