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ससवर्वल अपीलीय अधिकाररता
सिविल अपील िं. 1163/2007
मै. आहुजा ढाबा अपीलार्थी(यों)
द्र्वारा अमरीक ससिंह आहुजा
बनाम
दिल्ली वर्वकास प्राधिकरण
द्र्वारा इसक
े उपाध्यक्ष एर्विं अन्य प्रत्यर्थी(यों)
आदेश
JUDGMENT
(1) हमने अपीलार्थी की ओर से उपस्थर्थत वर्वद्र्वान अधिर्वक्ता श्री चिंद्र शेखर तर्था प्रततर्वािी सिं. 1 दि.वर्व.प्रा. की ओर से उपस्थर्थत वर्वद्र्वान अधिर्वक्ता श्री वर्वष्णु बी. सहयय को सुन सलया है | हमने अधिर्वक्ताओिं द्र्वारा दिए गए तकों पर वर्वचार ककया है तर्था आक्षेवपत तनणयय तर्था असभलेख पर उपलब्ि अन्य तथ्यों को भी िेख सलया है | (2) र्वािी का मुकद्िमा यह है कक र्वह खसरा सिं. 958/29 में वर्वर्वादित सिंपवि क े दहथसे पर अब भी काबबज़ है, जो कक उसक े अनुसार अभी तक तनष््ािंत सिंपवि है | श्री सहयय ने इस तक य का खिंडन ककया और तनर्वेिन ककया कक वर्वर्वादित भूसम दिल्ली वर्वकास प्राधिकरण को उसक े पूर्वयर्वती दिल्ली सुिार ट्रथट द्र्वारा हथतािंतररत की गयी है | ऐसा बयान ककया गया है कक दि.वर्व.प्रा., दिल्ली सुिार न्यास का उिरर्वती तनकाय होने क े नाते अब वर्वर्वादित सिंपवि का थर्वामी (मासलक) है | (3) अधिर्वक्तागण क े तनर्वेिन पर वर्वचार करते हुए तर्था आक्षेवपत तनणयय र्व असभलेख पर अन्य तथ्यों को िेखते हुए, हमें उच्च न्यायालय क े आक्षेवपत आिेश में िखल िेने की आर्वश्यकता नज़र नहीिं आती | (4) तिनुसार अपील खाररज की जाती है | (5) इस आपील का खाररज होना, र्वािी को उसक े सलए क़ानून क े अिंतगयत ककसी अन्य उपाय, यदि कोई उपलब्ि हो, ढूूँढने में रुकार्वट नहीिं होगा | (6) लिंबबत आर्वेिन, यदि कोई हो, को भी तनपटाया जाता है |............. न्यायािीश (आर. भानुमती)............. न्यायािीश (आर. सुभाष रेड्डी) नई दिल्ली, 24 जनर्वरी, 2019 अथर्वीकरण: िेशी भाषा में तनणयय का अनुर्वाि मुकद्द्मेबाज़ क े सीसमत प्रयोग हेतु ककया गया है ताकक र्वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एर्विं यह ककसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नहीिं ककया जाएगा| समथत कायायलयी एर्विं व्यार्वहाररक प्रयोजनों हेतु तनणयय का अिंग्रेज़ी थर्वरूप ही असभप्रमाणणत माना जाएगा और कायायन्र्वयन तर्था लागू ककए जाने हेतु उसे ही र्वरीयता िी जाएगी|