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भारतीय सर्वोच्च न्यायलय
दीर्वानी अपीलीय अधिकाररता
दीर्वानी अपील संख्या 12040 / 2018
वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 24745/2015 से उत्पन्न
यूतनयन ऑफ़ इंडिया एर्वं अन्य ...........अपीलार्थी(गण)
बनाम
िॉ. ओ. पी. तनझार्वन एर्वं अन्य ............प्रत्यर्थी(गण)
संग
दीर्वानी अपील संख्या 12112 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 15594/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12125-12127 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 7853-7855/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12143-12144 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 4271-4272/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12113 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 27273/2016 से उत्पन्न)
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 35861/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12114 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 15416/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12115 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 26723/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12116 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 16725/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12117 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 13531/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12142 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 38068/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12042 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 16856/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12099 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 15927/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12137-12138 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 22848-22849/2016 से उत्पन्न)
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 308/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12101 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 301/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12140-12141 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 38066-38067/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12128 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 17000/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12098 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 23922/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12135-12136 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 23104-23105/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12043 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 27438/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12104 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 302/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12133-12134 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 23110-23111/2016 से उत्पन्न)
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 305/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12130-12132 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 11456-11457/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12111 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 309/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12044 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 13640/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12129 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 23326/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12145 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 34736/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12146 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 28273/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12147-12149 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 32096-32098/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12100 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 30128/2016 से उत्पन्न)
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 36373/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12150 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 34724/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12102 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 32349/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12103 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 32357/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12105 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 32350/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12107 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 35332/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12108 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 32340/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12110 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 32347/2016 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12229 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 14514/2017 से उत्पन्न)
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 9464/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12095-12096 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 31554-31555/2018 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12047 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 33019 (िायरी सं.14576)/2018
से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12154-12157 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 33134-33137 (िायरी सं.
14578)/2018 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12151-12152 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 30035-30036/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12046 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 25929/2017 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12041 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 10820/2018 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12120 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 10825/2018 से उत्पन्न)
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 16578/2018 से उत्पन्न)
दीर्वानी अपील संख्या 12119 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 24792/2018 से उत्पन्न)
एर्वं
दीर्वानी अपील संख्या 12118 / 2018
(वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) संख्या 6045/2017 से उत्पन्न)
तनणणय
न्यायमूतिि अशोक भूषण
वर्वधि एर्वं तथ्यों क
े समान प्रश्नों को उठा रहे अपीलों का यह समूह
एक सार्थ सुना गया एर्वं एक समान तनणणय द्र्वारा तनर्णणत ककया जाता है |
समस्त अपीलें भारत संघ तनममत्त रक्षा मंत्रालय एर्वं अन्य द्र्वारा दायर की
गई हैं जो उच्च न्यायलय क
े तनणणय एर्वं क
े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण, प्रिान पीठ ददल्ली एर्वं क
े न्रीय प्रशासतनक अधिकरणों क
े मभन्न अन्य पीठों
क
े तनणणयों पर प्रश्न उठाती हैं | क
े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण, प्रिान पीठ
एर्वं क
े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण क
े मभन्न अन्य पीठों ने यहााँ उन
प्रत्यर्थीगण द्र्वारा दायर ककये गये मूल आर्वेदन पत्रों को स्र्वीकार ककया है
जो रक्षा मंत्रालय क
े अंतगणत आने र्वाले सभी रक्षा अनुसन्िान एर्वं वर्वकास
े रूप
में कायणरत हैं | भारत संघ ने उक्त उल्ल्लर्ित तीनो वर्वभागों में कायण कर
रहे र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01.01.1996 से रू. 2,000/- एर्वं 01.01.2006 से
रू. 4,000/- क
े वर्वशेष र्वेतन को संस्र्वीकृ तत दी है |
JUDGMENT
2. प्रत्यर्थीगण द्र्वारा मूल आर्वेदन पत्र इस तनदेश हेतु दायर ककये गए र्थे कक भारत संघ एर्वं अन्य को तनदेमशत ककया जाए कक र्वह पेंशन एर्वं पेंशन संबंिी प्रयोजना हेतु वर्वशेष र्वेतन को धगने | अपीलों क े इस समूह क े प्रत्यर्थीगण रक्षा अनुसन्िान एर्वं वर्वकास संगठन, परमाणु ऊजाण वर्वभाग एर्वं अंतररक्ष वर्वभाग में कायण कर रहे र्थे, उपरोक्त तीनो वर्वभागों में कायण कर रहे प्रत्यर्थीगण/ र्वैज्ञातनकों द्र्वारा क े समक्ष उठाये गये मुद्दे एर्वं मााँगे गये अनुतोष प्रर्वृवत्त अनुसार समान र्थे एर्वं क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण क े प्रिान पीठ एर्वं अन्य पीठों ने पेंशन संबंिी लाभों क े मलय उपरोक्त वर्वशेष र्वेतन को माने जाने की मांग को स्र्वीकार ककया र्था | उच्च न्यायलय ने भी उन ररट याधचकाओं को िाररज कर ददया है ल्जनमें क े आदेशों को चुनौती दी गई र्थी | उक्त तनणणयों से व्यधर्थत होकर भारत संघ इन अपीलों में आया है |
3. उपरोक्त मलर्ित तीनो वर्वभागों क े र्वैज्ञातनक द्र्वारा उठाये गए मुद्दे एक समान होने क े कारण इन अपीलों क े इस समूह क े फ ै सले क े मलये क े र्वल दीर्वानी अपील संख्या 12040/2018 - भारत संघ एर्वं अन्य बनाम िॉ. ओ. पी. तनझार्वन एर्वं अन्य क े अमभर्वाको में नोदटस देना पयाणप्त होगा ल्जसे मुख्य अपील क े रूप में माना जा रहा है |
4. अब हम आगे बढ़ते हैं और दीर्वानी अपील संख्या 12040/2018-भारत संघ एर्वं अन्य बनाम िॉक्टर ओ. पी. तनझार्वन एर्वं अन्य क े तथ्यों को देिते हैं |
5. प्रत्यर्थीगण िॉक्टर ओ. पी. तनझार्वन एर्वं अन्य रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन (एतद्पश्चात “DRDO” से तनदेमशत), रक्षा मंत्रालय में र्वैज्ञातनक ‘जी’ में कायणरत र्थे जहााँ से र्वह सेर्वातनर्वृत्त हुए | रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन क े र्वैज्ञातनक ‘जी’ रू. 5900-7300/- क े र्वेतनमान में परमाणु ऊजाण वर्वभाग (एतद्पश्चात ‘िी.ए.ई.’ से तनदेमशत) एर्वं अंतररक्ष वर्वभाग (एतद्पश्चात ‘िी.ओ.एस.’ से तनदेमशत) में कायण कर रहे र्वैज्ञातनक / अमभयंता - H क े सार्थ कायण कर रहे र्थे | पााँचर्वे क े न्रीय र्वेतन आयोग ने रू. 5900-7300 एर्वं रू. 5900-6700 क े र्वेतनमान हेतु एक समान अनुसंशोधित र्वेतनमान रू. 18400-22400 की मसफाररश की | पााँचर्वे क े न्रीय र्वेतन आयोग द्र्वारा र्वैज्ञातनक अधिकारी H एर्वं र्वैज्ञातनकगण ‘जी’ को ददया जाने र्वाला र्वेतन एक समान र्वेतन में ममला ददया गया एर्वं छठे र्वेतन आयोग क े अंतगणत रू. 18400-22400 क े र्वेतन को रू. 37400- 67000 में पररशोधित कर ददया गया| उपरोक्त तीनो र्वैज्ञातनक वर्वभागों अर्थाणत DRDO, DOS, एर्वं DAE क े र्वैज्ञातनको ने रू. 5900-7300 क े र्वेतनमान (पूर्वण पररशोधित) में रहने र्वाले र्वैज्ञातनको / अमभयंताओं को उधचत मुआर्वज़ा देने क े मलए मुकद्दमा लगाया | समकक्ष समीक्षा की अनुर्वताण में भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय ने रू. 18400-22400 क े र्वेतनमान र्वाले र्वैज्ञातनको को पृर्थक उच्च र्वेतनमान क े बदले प्रततमास रु. 2000/- क े वर्वशेष र्वेतन की संस्र्वीकृ तत देने का फ ै सला ककया | उपरोक्त तीनो वर्वभागों द्र्वारा एक आदेश ददनांक 03.02.1999 को जारी ककया गया | आदेश 03.02.1999 में उपरोक्त र्वेतनमान को ददनांक 01.01.1996 से संस्र्वीकृ तत प्रदान ककया गया|
6. रक्षा मंत्रालय, रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन द्र्वारा एक आदेश, 14.05.1999 को जारी ककया गया ल्जसमे प्रस्तार्व र्था कक रक्षा मंत्रालय द्र्वारा पृर्थक रूप से समस्त प्रयोजनों हेतु जैसा मूल तनयम 9(21) क े अंतगणत र्वेतन क े रूप में पररभावषत है र्वैसे वर्वशेष र्वेतन को देने का प्रस्तार्व ददया जा रहा है | ल्जस संबंि में रक्षा मंत्रालय क े अनुमोदन प्राप्त करने क े बाद आगे क े तनदेश जारी ककये जायेंगे | भारत सरकार, अंतररक्ष वर्वभाग ने 12.08.1999 को एक आदेश पाररत ककया ल्जसमे यह उल्ल्लर्ित र्था कक, वर्वशेष र्वेतन को DA, HRA, Pension, etc. जैसे प्रयोजनों हेतु र्वेतन क े भाग क े रूप में नहीं माना जायगा | अंतररक्ष वर्वभाग में कायण कर रहे र्वैज्ञातनकों द्र्वारा मूल आर्वेदन पत्र संख्या 1135/2002 दायर ककया गया ल्जसमें O.M. 12.08.1999 द्र्वारा जारी स्पष्टीकरण आदेश पर प्रश्न उठाया गया जो वर्वशेष र्वेतन को पेंशन क े भाग क े रूप में नहीं मानने से संबंधित र्था | क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण, ददल्ली क े प्रिान पीठ ने O.A. को ददनांक 14.05.2003 क े आदेश द्र्वारा स्र्वीकार ककया ल्जसमे यह माना गया कक, प्रतत मास रू. 2000/- क े वर्वशेष र्वेतन को ददनांक 01.01.1996 से पेंशन सम्बन्िी लाभों क े प्रयोजनों हेतु र्वेतन क े भाग क े रूप में माना जाएगा | अंतररक्ष वर्वभाग ने भी अपने पूर्वण आदेश, ददनांक 12.08.1999 को आशोधित करते हुए एक अनुर्वती आदेश, ददनांक 11.07.2003 जारी ककया है जो इस प्रभार्व का है कक, महंगाई भत्ता क े प्रयोजनों हेतु वर्वशेष र्वेतन को र्वेतन का भाग नहीं माना जाएगा परन्तु उसको पेंशन-सम्बन्िी लाभों क े मलए ददनांक 01.01.1996 से र्वेतन का भाग माना जाएगा | ददनांक 13.07.2004 को अंतररक्ष वर्वभाग ने ओ.ए. सं 1153/2002 क े अंतगणत क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण क े आदेश पर भरोसा करते हुए पेंशन सम्बन्िी लाभ हेतु रू. 2000/- क े वर्वशेष र्वेतन क े लाभ को बढ़ा ददया | रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन में कायण करने र्वाले र्वैज्ञातनको ने भी इस प्रार्थणना क े सार्थ कक, पेंशन क े प्रयोजनों हेतु रू. 2000/- क े वर्वशेष र्वेतन को माना जाए ओ.ए. सं 184/2006 दायर ककया र्था जो ओ. ए. आदेश ददनांक 29.03.2007 द्र्वारा स्र्वीकार ककया गया ल्जसमे यह माना गया कक वर्वशेष र्वेतन को भी पेंशन-सम्बन्िी लाभ क े मलए माना जाएगा | क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण, हैदराबाद क े तनणणय, ददनांक 29.03.2007 क े वर्वरुद्ि भारत संघ ने ररट याधचका सं. 267/2008 दायर की जो ररट याधचका उच्च न्यायलय, आंध्र प्रदेश क े तनणणय, ददनांक 25.09.2009 द्र्वारा ख़ाररज कर दी गई | आन्ध्र प्रदेश उच्च न्यायालय, हैदराबाद क े तनणणय क े वर्वरुद्ि वर्वशेष अनुमतत याधचका (दीर्वानी) सं. 4842/2009 दायर की गई जो तनम्न आदेश द्र्वारा ददनांक 29.04.2009 को ख़ाररज कर दी गई: - “सुना गया | वर्वलंब माफ़ ककया गया | प्रस्तुत मुकद्दमे क े तथ्यों को देिते हुए हमें आक्षेवपत तनणणय और आदेश में हस्तक्षेप करने का मन नहीं | वर्वशेष अनुमतत याधचका ख़ाररज की जाती है | तर्थावप वर्वधि का प्रश्न िुला छोड़ा गया है |”
7. रक्षा मंत्रालय, रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन ने ददनांक 13.05.2009 को एक आदेश जारी ककया ल्जसमें यह प्रार्विान र्था कक, र्वेतनमान रू. 18400-22400/- र्वाले र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01.01.1996 से प्रतत मास ददया जाने र्वाला रू. 2000/- का वर्वशेष र्वेतन एर्वं प्रतत मास रू. 10,000/- क े पदक्रम र्वेतन सदहत र्वेतन बैंि-4 (रू. 37400-67000) र्वाले र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01.01.2006 से प्रतत मास ददया जाने र्वाला रू. 4000/- का वर्वशेष र्वेतन पेंशन और पेंशन सम्बन्िी लाभों हेतु धगना जाएगा | यह उल्लेिनीय है कक रू. 2000/- का वर्वशेष र्वेतन ददनांक 01.01.2006 से बढ़ाकर रू. 4000/- कर ददया गया र्था | प्रत्यर्थी िॉ. ओ. पी. तनझार्वन एर्वं अन्य ने क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण, प्रिान पीठ, नई ददल्ली क े समक्ष ओ. ए. सं. 1750/2012 दायर ककया ल्जसमें यह मशकायत की गई र्थी कक, यद्यवप आदेश, ददनांक 13.05.2009 द्र्वारा रू. 18400-22400/- क े र्वेतनमान र्वाले र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01.01.1996 से प्रतत मास ददया जाने र्वाला रू. 2000/- क े वर्वशेष र्वेतन को और रू. 10,000/- पदक्रम र्वेतन सदहत र्वेतन बैंि-4 (रू. 37400-67000) र्वाले र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01.01.2006 से प्रतत मास ददया जाने र्वाला रू. 4000/- क े वर्वशेष र्वेतन को पेंशन और पेंशन सम्बन्िी लाभों हेतु धगने जाने क े मलए राष्रपतत की संस्र्वीकृ तत ममल गई र्थी, उक्त आदेश लागू नहीं ककया गया है | आगे यह अमभर्वचन ककया गया कक कई र्वैज्ञातनकों ने ल्जन्होंने हैदराबाद पीठ, बैंगलोर पीठ और प्रिान पीठ, नई ददल्ली क े समक्ष मुकद्दमे दायर ककए हैं, जहााँ आदेश जारी ककए गए र्थे, उस पदक्रम र्वाले अमुक र्वैज्ञातनकों क े संबंि में आदेश लागू ककया गया परन्तु आर्वेदनकताणओं को लाभ अभी तक नहीं ममला | यह अमभर्वचन ककया गया कक आर्वेदनकताणओं क े क ु छ सहकममणओं को समान लाभ प्रदान करना और उन्हें उक्त लाभ नहीं देना मनमानी और भेदभार्वपूणण है | प्रत्यर्थीगण ने ओ. ए. में प्रार्थणना की कक, प्रत्यर्थीगण को तनदेमशत ककया जाए कक, अपने ही आदेश ददनांक 13.05.2009 कक शतो क े अंतगणत रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन क े र्वैज्ञातनकों को ददया जाने र्वाला पेंशन एर्वं पेंशन सम्बन्िी लाभ पररशोधित ककया जाए | यह भी प्रार्थणना की गयी कक, प्रत्यर्थीगण को इसका भी तनदेश ददया जाए कक, पेंशन एर्वं पेंशन संबंधित लाभों क े पुनरीक्षण पररशोिन में अनार्वश्यक रूप से लम्बा समय लगता है, तो रू. 2000/- अर्थर्वा रू. 4000/- को ध्यान में रिते हुए वर्वशेष र्वेतन एर्वं उसक े ब्याज़ को धगनते हुए आर्वेदनकताणओं को पेंशन एर्वं पेंशन संभंधि लाभों क े बकाया क े भुगतान करने का तनदेश ददया जाए | क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण, प्रिान पीठ, नई ददल्ली ने ओ. ए. सं. 1750/2012 क े अपने तनणणय, ददनांक 22.01.2013 द्र्वारा स्र्वीकार ककया, एर्वं तनम्न तनदेश जारी ककये, “(1) पेंशन एर्वं पेंशन सम्बन्िी प्रयोजनों हेतु ददनांक 01.01.1996 से अनुज्ञेय रु. 2000/- क े वर्वशेष र्वेतन एर्वं ददनांक 01.01.2006 से अनुज्ञेय रु. 4000/- क े वर्वशेष र्वेतन को उनक े क्रमशः पदक्रम र्वेतन में धगने जाने क े मलये आर्वेदनकताणओं क े दार्वो को स्र्वीकार ककया जाता है जैसा कक, ओ. एम. ददनांक 13.05.2009 में बताया गया है | (2) आगे यह तनदेश ददया जाता है कक जो उपरोक्त में ददये गये पात्र श्रेणीयों में आते हों, उन्हें इस अधिकरण में आने क े अपेक्षक्षत हुए बबना इस लाभ को उन्हें ददया जाता है | (3) तनस्संदेह यह एक अपर्वाद का मामला है एर्वं वर्वधि क े प्रश्न को अवर्वतनल्श्चत छोड़ा जाता है |
8. अधिकरण क े तनणणय एर्वं आदेश ददनांक 22.01.2013 क े वर्वरुद्ि भारत संघ ने ददल्ली उच्च न्यायलय में ररट याधचका सं. 3095/2014 दायर ककया जो ररट याधचका िण्िपीठ द्र्वारा अपने तनणणय ददनांक 18.07.2014 द्र्वारा ख़ाररज कर दी गई | दीर्वानी अपील सं. 12040/2018-भारत संघ एर्वं अन्य बनाम िॉक्टर ओ. पी. तनझार्वन एर्वं अन्य ददल्ली उच्च न्यायलय क े तनणणय ददनांक 18.07.2014 क े वर्वरुद्ि दायर की गई है |
9. जैसा कक ऊपर उल्ल्लर्ित है, इस समूह में अन्य मुख्यतर अपीलें क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण, प्रिान पीठ, नई ददल्ली एर्वं अन्य पीठों क े तनणणयों क े वर्वरुद्ि दायर की गई है, ल्जनमें रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन, परमाणु ऊजाण वर्वभाग एर्वं अंतररक्ष वर्वभाग क े वर्वभागों में कायण कर रहे र्वैज्ञातनकों को क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण ने क ु छ अनुतोष प्रदान ककया है |
10. हमने श्रीमती वपंकी आनंद भारत की फ़ाल्ज़ल अततररक्त महा सोमलमसटर एर्वं कनणल श्री बाला सुब्रह्मण्यम को अपीलार्थीगण तनममत्त सुना है | श्री तनिेश गुप्ता फ़ाल्ज़ल र्वररष्ठ अधिर्वक्ता एर्वं मभन्न अपीलों में प्रत्यर्थीगण हेतु कई अन्य फ़ाल्ज़ल अधिर्वक्तागण को भी सुना है |
11. अपीलार्थीगण क े फ़ाल्ज़ल अधिर्वक्ता का तनर्वेदन है कक क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण एर्वं उच्च न्यायालय द्र्वारा पाररत तनणणय एर्वं आदेश मूल तनयमो क े तनयम 9 (21) (a) (i) एर्वं क े न्रीय शहरी सेर्वा पेंशन तनयम, (एतद्पश्चात 1972 क े तनयम क े रूप में तनदेमशत) क े तनयम 33 का िुला उल्लंघन करते है | र्वेतन की पररभाषा जो कक मूल तनयम 9(21)(a)(i) में अन्ततनणदहत है “वर्वशेष र्वेतन” को र्वेतन की पररभाषा से बाहर तनकालता है अतः ददनांक 01.01.1996 से रु. 2000/- क े एर्वं ददनांक 01.01.2006 से रु. 4000/- क े “वर्वशेष र्वेतन” को र्वेतन में सम्ममलत नहीं ककया जा सकता एर्वं इसमलए इसे 1972 तनयम क े तनयम 33 में पररभावषत पररलल्ब्ियों की पररभाषा से बाहर ककया जाएगा | क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण तर्था उच्च न्यायलय का तनणणय ल्जसमें यह माना गया है कक पेंशन को जोड़ने हेतु वर्वशेष र्वेतन को धगना जाए वर्वधिक अर्वस्र्था अधितनयम की भाषा अर्थाणत तनयम 9(21)(a)(i) को पररर्वततणत नहीं कर सकता जो स्पष्ट एर्वं असंददग्ि है | यह तथ्य कक क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण एर्वं उच्च न्यायलय द्र्वारा पूर्वण में पाररत आदेश क े वर्वरुद्ि भारत संघ द्र्वारा दायर की गई ररट याधचकाएं एर्वं वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं ख़ाररज कर दी गई हैं वर्वधिक अर्वस्र्था में कोई पररर्वतणन नहीं पैदा करतीं | वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं प्रारम्भ में ही ख़ाररज कर दी गईं एर्वं इस न्यायालय ने वर्वशेष अनुमतत याधचकाओं में से एक में वर्वधि क े प्रश्न को िुला छोड़ा है | आगे यह तथ्य कक अन्य सामान्य रूप से एक ही अर्वस्र्था में रहने र्वाले र्वैज्ञातनकों क े वर्वषय में क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण / उच्च न्यायलय द्र्वारा पाररत र्वाले आदेश अंततम हो चुक े है एर्वं भारत संघ द्र्वारा लागू भी कर ददए गए हैं, र्वह भी इस न्यायालय को वर्वधि क े िुले प्रश्न का फ ै सला करने से नहीं रोक सकते | इस न्यायलय क े कर्िल बी.जे. अक्कारा (सेवातर्वृत्त) बर्ाम भारि सरकार एवं अन्य, (2006) 11 SCC 709 में पाररत तनणणय पर भरोसा ककया गया | यह तनर्वेदन ककया गया है कक क े न्रीय प्रशासतनक अधिकरण और उच्च न्यायलय द्र्वारा पाररत ककये गये आदेशो क े चलते भारत संघ पर वर्वत्तीय रूप से बड़ा प्रभार्व पड़ने र्वाला है | अंत में यह तनर्वेदन ककया गया कक सातर्वें क ें रीय र्वेतन आयोग ने र्वैज्ञातनकों को वर्वशेष र्वेतन देने की मनाही कर दी है जो संकल्प अधिसूचना ददनांक 01.07.2017 द्र्वारा अधिसूधचत ककया जा चुका है |
12. प्रत्यर्थीगण क े फ़ाल्ज़ल अधिर्वक्ता अपीलार्थीगण क े तनर्वेदन को गलत मसद्ि करते हुए प्रततरोि करते हैं कक ददनांक 01.01.1996 से लागू रुपये 2000/- का वर्वशेष र्वेतन पृर्थक उच्च र्वेतनमान क े बदले में ददया गया र्था जो ददनांक 03.02.1999 क े आदेश ल्जसक े द्र्वारा वर्वशेष र्वेतन की संस्र्वीकृ तत दी गई र्थी से स्पष्ट है अतः यह मूल तनयम 9(25) में पररभावषत वर्वशेष र्वेतन की प्रर्वृवत्त में नहीं है एर्वं इस प्रकार तनयम 9(21)(a)(i) में अन्ततनणदहत र्वेतन की पररभाषा से ख़ाररज ककये जाने का पात्र नहीं है | क े र्वल वर्वशेष र्वेतन, जो मूल तनयम 9(25) की पररभाषा में आता है, र्वेतन की पररभाषा से अलग होने लायक है| इस प्रकार अलग से उच्च र्वेतनमान क े स्र्थान पर प्रत्यधर्थणयों को ददया गया 2000/- रूपये का वर्वशेष र्वेतन पेंशन सम्बन्िी लाभों में गणना ककये जाने योग्य है तर्था क ें रीय प्रशासतनक प्राधिकरण र्व उच्च न्यायालयों ने प्रत्यधर्थणयों क े इस दार्वे को स्र्वीकार करने में कोई त्रुदट नहीं की है | इसक े अततररक्त्त प्रत्यधर्थणयों को राहत इसमलए दी गई है क्योंकक इसी प्रकार क े प्रत्यधर्थणयों को स्र्वयं भारत संघ द्र्वारा पहले से ही यह लाभ ददया जा चुका है | पेंशन की गणना में रु. 2000/- या रु. 4000/- क े वर्वशेष र्वेतन का समार्वेश न ककया जाना प्रत्याधर्थणयों को उनक े पेंशन क े अधिकार से र्वंधचत करना होगा जो उन्होंने संघ को मूल्यर्वान सेर्वाएं प्रदान करने पर प्राप्त ककया है |
13. हमने पक्षकारों क े वर्वद्र्वान अधिर्वक्ताओं क े तक ण पर वर्वचार ककया है और अमभलेिों का अर्वलोकन ककया है ।
14. अमभलेि पर अमभर्वचन और पक्षकारों की ओर से वर्वद्र्वान अधिर्वक्ताओं द्र्वारा ददए गए तकों से, अपील क े इस बैच में तनम्नमलर्ित मुद्दे वर्वचार हेतु उठते हैं:- (i) क्या अपीलाधर्थणयों को पेंशन की गणना हेतु 2000 या 4000 रूपये क े वर्वशेष र्वेतन को समार्वेमशत करने का तनदेश देने र्वाले क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण/ उच्च न्यायालयों क े आक्षेवपत तनणणय पर प्रश्न करने से रोका गया है क्योंकक वपछले चरणों में क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण / उच्च न्यायालयों द्र्वारा पाररत इसी प्रकार क े आदेश भारत संघ द्र्वारा दार्िल वर्वशेष अनुमतत याधचकाओं क े ख़ाररज होने क े कारण पूणणता प्राप्त कर चुक े हैं? (ii) क्या पेंशन की गणना हेतु 2000/- या 4000/- रूपये क े वर्वशेष र्वेतन को समार्वेमशत करने का तनदेश देने र्वाले क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण एर्वं उच्च न्यायालयों क े तनणणयों को लागू करने क े आदेशों को कक्रयाल्न्र्वत करने र्वाले भारत संघ द्र्वारा जारी आदेश से भारत संघ पूर्वण तनणणयों पर प्रश्न उठाने से बाधित /वर्वबंधित है? (iii) क्या िीआरिीओ, िीएई तर्था िीओएस क े र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01.01.1996/01.01.2006 से क्रमशः अनुमत 2000 या 4000 रूपये का वर्वशेष र्वेतन को 1972 तनयमों क े अंतगणत सेर्वातनर्वृवत्त लाभ की गणना हेतु तनयम 9 (21)(क)(i) में दी गई र्वेतन की पररभाषा में शाममल करना होगा?
15. इससे पहले कक हम उपरोक्त मुद्दों पर पक्षकारों की ओर से वर्वद्र्वान अधिर्वक्ताओं क े द्र्वारा ददए गए तकों पर वर्वचार करें, यह आर्वश्यक है कक पेंशन की गणना और भारत संघ द्र्वारा जारी ककए गए क ु छ आदेशों से संबंधित र्वैिातनक प्रार्विानों को देिा जाए ।
16. मूल तनयमों का तनयम 9 (21) (क) (i) "र्वेतन" को पररभावषत करता है, जो इस प्रकार है:- (21)(क) “र्वेतन” से अमभप्राय है सरकारी कमणचारी द्र्वारा आहररत मामसक रामश जैसे- (i) वर्वशेष र्वेतन अर्थर्वा उसकी र्वैयल्क्तक योग्यताओं क े कारण प्रदान ककए र्वेतन क े अततररक्त र्वेतन जो उसक े द्र्वारा िाररत ककसी स्र्थाई या स्र्थानापन्न पद या ऐसे पद ल्जस पर र्वह कािर में अपनी ल्स्र्थतत की र्वजह से हकदार है क े मलए मंजूर ककया गया है, एर्वं (ii) वर्वदेश र्वेतन, वर्वशेष र्वेतन तर्था र्वैयल्क्तक र्वेतन, एर्वं (iii) कोई अन्य पररलल्ब्ियां जो कक राष्रपतत द्र्वारा वर्वशेष रूप से र्वेतन क े रूप में श्रेणीबद्ि हैं |
17. मूल तनयम 9(25) में वर्वशेष र्वेतन को पररभावषत ककया गया है जो इस प्रकार है:- (25) “ववशेष वेिर्” से अमभप्राय है ककसी सरकारी कमणचारी अर्थर्वा पद की पररलल्ब्ियों में र्वेतन क े रूप में र्वृद्धि जो कक तनम्न को ध्यान में रिते हुए प्रदान की गई है- (क) वर्वशेष रूप से कदठन प्रकृ तत क े कायण; अर्थर्वा (ि) कायण अर्थर्वा ल्जम्मेदारी में कोई वर्वशेष र्वृद्धि पदोन्नतत पर र्वेतन क े तनिाणरण क े मलए वर्वमभन्न श्रेणी क े सरकारी कमणचाररयों को वर्वशेष र्वेतन प्रदान करने तर्था इसक े प्रततपादन क े सम्बन्ि में आदेशों हेतु, देिें इस संग्रह का पररमशष्ट-8 | क ें रीय सरकारी कमणचाररयों क े अन्य सरकारी वर्वभागों, क ं पतनयों, तनगमों आदद में स्र्थानांतरण पर प्रतततनयुल्क्त (कायण) भत्ते क े नाम से ददए जाने र्वाले वर्वशेष र्वेतन क े सम्बन्ि में आदेशों हेतु, देिें इस संग्रह का पररमशष्ट-5 |
18. क ें रीय सरकारी कमणचाररयों की पेंशन का भुगतान क ें रीय मसवर्वल सेर्वा पेंशन तनयम, 1972 द्र्वारा तनयंबत्रत होता है | 1972 तनयमों का तनयम 33 पररलल्ब्ियों को इस प्रकार पररभावषत करता है:
33. पररलब्धियां [शब्द ‘पररलल्ब्ियां’ से अमभप्राय है मूल तनयमों क े तनयम 9 (21)(क)(i) में पररभावषत मूल र्वेतन जो एक सरकारी कमणचारी अपनी सेर्वातनर्वृवत्त अर्थर्वा मृत्यु की ततधर्थ से तुरंत पहले प्राप्त कर रहा र्था; तर्था इसमें धचककत्सा अधिकारी को तनजी प्रैल्क्टस क े बदले में ददया जाने र्वाला प्रैल्क्टसबंदी भत्ता भी शाममल होगा |] [स्पष्टीकरण- सेर्वातनर्वृवत्त लाभों की गणना हेतु ल्स्र्थरता र्वेतन र्वृद्धि पररलल्ब्ियों क े रूप में मानी जाएगी |] xxxxxxxxxxxxxxxxxxx
19. जैसा कक ऊपर उल्ल्लर्ित है, चौर्थे क ें रीय र्वेतन आयोग क े अंतगणत र्वैज्ञातनक ‘छ’ रु. 5900-6700 का र्वेतनमान तर्था र्वैज्ञातनक ‘ज’ रु. 5900- 7300 का र्वेतनमान प्राप्त कर रहे र्थे | पांचर्वें क ें रीय र्वेतन आयोग क े कक्रयान्र्वयन पर उपरोक्त दोनों र्वेतनमान रु. 18400-22400 क े एक ही र्वेतनमान में ममला ददए गए और र्वैज्ञातनक अधिकारी ‘ज’ क े रूप में पदनाममत ककये गए | समकक्ष समीक्षा पर ददनांक 01.01.1996 से रु. 2000/- क े वर्वशेष र्वेतन की मंजूरी की मसफाररश की गई | इस सम्बन्ि में एक आदेश ददनांक 03.02.1999 जारी ककया गया ल्जसका सम्बंधित भाग इस प्रकार है:- “सं. िीआरिीओ/यूएस101-ए/र्वी सीपीसी/एमपीिी/िी(आर एंि िी) भारत सरकार रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास वर्वभाग, नई ददल्ली 03 फरर्वरी 1999 सेर्वा में, महातनदेशक, अनुसन्िान एर्वं वर्वकास, रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन, रक्षा मंत्रालय, नई ददल्ली वर्वषय:वैज्ञातर्कों क े ललए प्रोत्साहर् अिोहस्ताक्षरी को यह कहने का तनदेश ककया गया है कक वर्वभाग में र्वैज्ञातनकों को प्रोत्साहन देने क े मामले की जांच रणनीतत अनुप्रयोग हेतु उच्च तकनीक एर्वं तंत्र क े वर्वकास में उनकी भूममका को ध्यान में रिते हुए सरकार द्र्वारा की गई है| सभी सुसंगत तत्र्वों को ध्यान में रिते हुए तर्था र्वैज्ञातनकों को सर्वोत्तम योगदान देने हेतु आकवषणत करने, रोकने, प्रेररत तर्था प्रोत्सादहत करने क े उद्देश्य से राष्रपतत तनम्न मंजूरी सहषण देते हैं:
2. ददनांक 01 जनर्वरी, 1996 से (1) समकक्ष समीक्षा क े पश्चात रु. 18400-22400 क े र्वेतनमान क े र्वैज्ञातनकों को अलग से उच्च र्वेतनमान क े स्र्थान पर रु. 2000/- प्रतत माह का वर्वशेष र्वेतन| xxxxxxxxxxxxxxxx”
20. जैसा कक ऊपर उल्ल्लर्ित है, वर्वमभन्न कायाणलयी ज्ञापन-पत्रों द्र्वारा क ु छ स्पष्टीकरण जारी ककए गए र्थे जैसे अन्तररक्ष वर्वभाग, भारत सरकार द्र्वारा जारी कायाणलयी ज्ञापन-पत्र ददनांक 12.08.1999 कक वर्वशेष र्वेतन को िीए, एचआरए आदद क े प्रयोजनों हेतु र्वेतन का भाग नहीं समझा जायेगा ल्जसकी र्वजह से क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण में भारत सरकार द्र्वारा जारी स्पष्टीकरण आदेश पर प्रश्न करने र्वाले मूल आर्वेदन दार्िल ककए गए हैं तर्था क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण ने पेंशन क े प्रयोजनों हेतु वर्वशेष र्वेतन की संगणना में र्वैज्ञातनकों क े दार्वे को स्र्वीकार ककया | िीआरिीओ, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने वर्वशेष रूप से एक आदेश ददनांक 13.05.2009 जारी ककया है ल्जसमें सरकार ने उपरोक्त वर्वशेष र्वेतन को पेंशन एर्वं पेंशन सम्बन्िी लाभों में गणना करने का तनणणय मलया | कायाणलयी ज्ञापन पत्र ददनांक 13.05.1999 इस प्रकार है: “टेली: 23007252 सं. सीएचआरिी 83101/प्रोत्साहन- 6 सीपीसी/सी/पी/01 रक्षा मंत्रालय, रक्षा अनुसंिान एर्वं वर्वकास संगठन मानर्व संसािन वर्वकास तनदेशालय ‘बी’ ब्लाक, िीआरिीओ भर्वन नई ददल्ली- 110105 13 मई, 2019 तनदेशक (सभी प्रयोगशाला/संस्र्थान) वर्वषय: र्वैज्ञातनकों हेतु प्रोत्साहन- पेंशन सम्बंधित प्रयोजनों हेतु वर्वशेष र्वेतन की गणना उपरोक्त वर्वषय पर रक्षा मंत्रालय क े पत्र िीएचआरिी/85101/प्रोत्साहन/VI-सीपीसी/सी/पी/01/ 1376/2009/िी(आर एंि िी) ददनांक 13 मई, 2009 इसक े सार्थ अग्रेवषत है|
2. उपरोक्त सरकारी पत्र क े अनुसार रु. 18400- 22400 क े र्वेतनमान क े र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01 जनर्वरी, 1996 से ददए गए रु. 2000/- प्रततमाह क े वर्वशेष र्वेतन एर्वं रु. 10,000/- प्रततमाह क े ग्रेि र्वेतन सदहत र्वेतन बैंि-4 (रु. 37400-67000) क े र्वैज्ञातनकों को ददनांक 01 जनर्वरी, 2006 से ददए गए रु. 4000/- प्रततमाह क े वर्वशेष र्वेतन की गणना पेंशन एर्वं पेंशन सम्बन्िी लाभों में होगी|
3. यह अनुरोि है कक सभी र्वैज्ञातनक ‘छ’, जो तदनुक ू ल सेर्वातनर्वृत्त हुए हैं, क े पीपीओ को सुिारने की आर्वश्यक कायणर्वाही की जाए| हस्ता/- (टी. चन्र बानू) अततररक्त्त तनदेशक, एचआरिी कृ ते िीजीआर एंि िी xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx”
21. जैसा कक ऊपर उल्ल्लर्ित है, उक्त वर्वज्ञल्प्त पर भरोसा करते हुए प्रत्यर्थीगण ने मूल आर्वेदन पत्र दायर ककये ल्जसमें यह दार्वा ककया गया है कक उनक े सम्बन्ि में आदेश लागू नहीं ककये गए हैं, और पेंशन क े प्रयोजनों हेतु वर्वशेष र्वेतन क े धगने जाने से र्वो र्वंधचत ककये गए हैं, ल्जस दार्वे को क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण द्र्वारा अपने आदेश, ददनांक 22.1.2003 से स्र्वीकृ त ककया गया है ल्जसक े वर्वरुद्ि ददल्ली उच्च न्यायालय ने ररट याधचका को ख़ाररज कर ददया और र्वही भारत संघ द्र्वारा दीर्वानी अपीलों में मुख्य मुकद्दमा दायर करने का कारण बना |
22. अब हम प्रर्थम एर्वं द्वर्वतीय मुद्दे को एक सार्थ लेते हैं | दो पहलू हैं जो उपरोक्त मुद्दों क े सम्बन्ि में देिे जाने योग्य हैं | प्रर्थमतः एक ही अर्वस्र्था र्वाले र्वैज्ञातनकों द्र्वारा दायर ककये गए मूल आर्वेदन पत्र क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण द्र्वारा स्र्वीकार ककये गए र्थे ल्जनक े वर्वरुद्ि क ु छ ररट याधचकाएं उच्च न्यायालय द्र्वारा भी िाररज कर दी गई र्थीं और उच्च न्यायालय अर्थर्वा क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण क े तनणणय क े वर्वरुद्ि जब भारत संघ द्र्वारा मामला इस न्यायालय में पहुंचा तो वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं भी ख़ाररज कर दी गयीं | इस न्यायालय द्र्वारा पाररत आदेशों में से एक आदेश जो वर्वशेष याधचका (दीर्वानी) सं 4842/2009 में पाररत ककया गया र्था, मुख्य दीर्वानी अपील में संलग्न पी-1 क े रूप में प्रस्तुत ककया गया है | इस न्यायालय ने ददनांक 20.04.2009 क े आदेश में माना कक “प्रस्तुत मुकद्दमे क े तथ्यों को देिते हुए हम आक्षेवपत तनणणय एर्वं आदेश में हस्तक्षेप करने क े इच्छ ु क नहीं हैं | वर्वशेष अनुमतत याधचका ख़ाररज की जाती है | तर्थावप वर्वधि का प्रश्न िुला रहेगा” | भारत संघ द्र्वारा क ु छ अन्य वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं भी दायर की गई र्थीं जो प्रर्थमतः ही ख़ाररज कर दी गई र्थीं | क्योंकक वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं प्रर्थमतः ही ख़ाररज कर दी गई र्थीं, इसमलए अपीलार्थीगण को उन मुद्दों को उठाने से नहीं रोका जा सकता, जो मुद्दे इस न्यायालय में इन अपीलों में उठाये जाने हैं | इस न्यायालय द्र्वारा वर्वधि क े प्रश्न को िुला छोड़ने का पररणाम भी यही होना र्था जैसा कक ऊपर देिा गया | हम इसमलए प्रत्यर्थीगण क े फ़ाल्ज़ल अधिर्वक्ता क े तनर्वेदन को स्र्वीकार करने हेतु सहमत नहीं हैं कक वर्वधि क े उस प्रश्न पर मुद्दों को उठाने से भारत संघ को रोक ददया गया है जो इस न्यायालय द्र्वारा पूर्वण में िुला छोड़ा गया र्था | इस प्रकार अपीलार्थीगण द्र्वारा उठाये गए वर्वधि क े प्रश्न को तनर्णणत करने हेतु हम आगे बढ़ते हैं | मामले क े दूसरे पहलू पर आते हुए अर्थाणत पेंशन की गणना हेतु वर्वशेष र्वेतन क े लाभ को अपीलार्थीगण द्र्वारा स्र्वतः देने क े फ ै सले को क्या अब भी अपीलार्थीगण को यह स्र्वतंत्रता होगी कक र्वो मुद्दे को उठायें ? हमने भारत सरकार क े आदेश, ददनांक 13.5.2009 को पहले ही देिा है ल्जसमें यह तनदेश र्था कक पेंशन संबंिी प्रयोजन हेतु वर्वशेष र्वेतन को धगना जाए | हमने पहले ही देिा है कक र्वषण 1999 में भारत संघ द्र्वारा एक स्पष्टीकरण आदेश जारी ककया गया र्था कक पेंशन क े प्रयोजन हेतु वर्वशेष र्वेतन को र्वेतन का भाग नहीं माना जायेगा | यह प्रतीत होता है कक उपरोक्त फ ै सला सरकार द्र्वारा मूल तनयम 9(21)(a)(i) में ददए गए र्वेतन की पररभाषा पर भरोसा करते हुए मलया गया र्था, तत्पश्चात क ें रीय प्रशासतनक अधिकरण द्र्वारा मभन्न आदेश जारी ककये गए जैसा कक ऊपर देिा गया ल्जनमें तनदेश ददया गया र्था कक पेंशन की गणना हेतु वर्वशेष र्वेतन को र्वेतन में जोड़कर धगना जाए, ल्जनको वर्वस्तार से हमने ऊपर देिा है | उपरोक्त आदेशों को पहले ही लागू करक े क्या भारत सरकार अपने फ ै सले पर स्र्वयं ही प्रश्न उठा सकती है जबकक उनका लाभ ददया जा चुका है |
23. अपीलार्थीगण क े फ़ाल्ज़ल अधिर्वक्ता ने कनणल बी.जे. अक्कारा (सेर्वातनर्वृत्त) बनाम भारत सरकार एर्वं अन्य (उपरोक्त) में इस न्यायालय क े तनणणय पर भरोसा ककया है | उपरोक्त मुकद्दमे में एक मुद्दा यह र्था जो मुद्दा संख्या (iii) है जैसा कक पैरा संख्या 10 में देिा गया है जो तनम्न प्रभार्व का है: “10. ककये गए प्रततरोि पर वर्वचार हेतु तनम्न प्रश्न उठते हैं: xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx (iii) क्या प्रत्यर्थीगण से ल्जन्होंने समान मुद्दे पर क े.सी. गगण (िॉ.) बनाम भारत संघ में ददल्ली उच्च न्यायालय क े फ ै सले को स्र्वीकार करक े एर्वं लागू करक े अपेक्षा की जा सकती है कक र्वो पररपत्र, ददनांक 11.09.2001 को रद्द करक े रक्षा सेर्वा धचककत्सीय अधिकारीगण को भी र्वैसे ही लाभ पहुंचाए | xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
24. मुद्दा सं. (iii) का उत्तर देते हुए पैरा सं. 24, 25 एर्वं 26 में तनम्न माना गया है: “24. प्रत्यर्थीगण ने एक शपर्थ पत्र, ददनांक 01.08.2006 दायर ककया है ल्जसमें स्र्वीकार ककया गया है कक ददल्ली उच्च न्यायालय क े फ ै सले क े अनुसरण में पररपत्र ददनांक 29.10.1999 को र्वापस ले मलया गया र्था परन्तु स्पष्ट ककया गया है कक यह क े र्वल शहरी धचककत्सीय अधिकारीगण क े सम्बन्ि में र्वापस हुआ र्था जो उक्त ररट याधचकाओं में याधचकाकताण र्थे एर्वं समस्त शहरी धचककत्सीय अधिकारीगण क े सम्बन्ि में नहीं | यह प्रततरोि ककया गया है कक यह तथ्य कक क ु छ व्यल्क्तयों क े मुकद्दमे में उच्च न्यायालय क े फ ै सले को माना गया अर्थर्वा लागू ककया गया, जनदहत में भारत संघ द्र्वारा समान याधचकाओं क े वर्वरोि करने क े रास्ते में अड़चन नहीं पैदा कर सकता |
25. महाराष्र राज्य बनाम ददगंबर (1995) 4 SCC 683 में इस न्यायालय द्र्वारा एक समान प्रततरोि पर वर्वचार ककया गया र्था | इस न्यायालय ने माना कक (SCC पृष्ठ सं 691, पैरा सं. 16):- “कभी-कभी जैसा कक राज्य तनममत्त व्यक्त ककया गया है कक ररट याधचकाओं में उच्च न्यायालय द्र्वारा ददए गए अमुक तनणणयों क े वर्वरुद्ि राज्य सरकार अपील नहीं दायर करने का वर्वकल्प चुनती है जब उन्हें इक्का-दुक्का मामले क े तौर पर देिा जाता है एर्वं इस योग्य नहीं समझा जाता कक समस्या क े समािान हेतु संवर्विान क े अनुच्छेद 136 क े अंतगणत इस न्यायालय क े वर्वर्वेकाधिकार की शरण ली जाए | कभी कभी यह भी संभर्व हो सकता है कक राज्य सरकार क ु छ मामलों में गलत सलाह अर्थर्वा लापरर्वाही अर्थर्वा सम्बंधित अधिकारीगण क े अनुधचत व्यर्वहार क े चलते अपीलें दायर नहीं करे | आगे यह भी संभर्व है कक जब उच्च न्यायालय क े तनणणयों क े वर्वरुद्ि वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं राज्य द्र्वारा दायर की जाएाँ तो संवर्विान क े अनुच्छेद 136 क े अंतगणत वर्वर्वेकाधिकार का प्रयोग करते हुए इस न्यायालय द्र्वारा र्वैसी वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं नहीं सुनी जाएाँ, चाहे इस कारण कक र्वो इन्रादी मामले क े रूप में वर्वचार ककये जाएाँ अर्थर्वा इस कारण से कक र्वो ऐसे मामले नहीं वर्वचार ककये जाएाँ जो राज्य क े दहत को गंभीर रूप से प्रभावर्वत करते हों | अतः हमारे वर्वचार में राज्य द्र्वारा क ु छ समान मामलों में अपील नहीं दायर करना अर्थर्वा क ु छ समान मामलों में इस न्यायालय द्र्वारा ही क ु छ वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं ख़ाररज कर ददया जाना समान मामलों में ककसी वर्वशेष अनुमतत याधचका अर्थर्वा वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं दायर करने से राज्य को र्वल्जणत नहीं ककया जा सकता जब राज्य द्र्वारा यह वर्वचार ककया जाए कक ऐसी वर्वशेष अनुमतत याधचका अर्थर्वा वर्वशेष अनुमतत याधचकाएं नहीं दायर करना और उन्हें देिना राज्य क े दहत अर्थर्वा जनदहत को गंभीर रूप से प्रभावर्वत करने र्वाला कायण होगा |
26. उपरोक्त दटप्पणीयााँ इस मुकद्दमे पर भी लागू होती हैं | उच्च न्यायालय क े एक वर्वशेष तनणणय को राज्य द्र्वारा चुनौती नहीं दी जा सकती है जब वर्वत्तीय पररणाम नाम मात्र हों अर्थर्वा जब अपील समय सीमा से बाधित हो | जब देि रहे अधिकाररयों से भूल हो जाए अर्थर्वा लापरर्वाही बरती जाए अर्थर्वा गलत वर्वधिक सलाह क े कारण अर्थर्वा सम्बंधित मुद्दे की गंभीरता अर्थर्वा व्यापकता को न समझने की र्वजह से भी चुनौती नहीं दी जा सकती | तर्थावप जब समान मामले तत्पश्चात उत्पन्न हो जाएाँ एर्वं वर्वत्तीय लफड़ों की व्यापकता समझी जाए तो राज्य को र्वल्जणत नहीं ककया जा सकता अर्थर्वा उस पर प्रततबन्ि नहीं लगाया जा सकता कक र्वो तत्पश्चाती फ ै सलों को चुनौती दे अर्थर्वा तत्पश्चाती ररट याधचकाओं का वर्वरोि करे यद्यवप समान मुद्दे से सम्बंधित ककसी मुकद्दमे क े तनणणय को अन्य लोगों क े वर्वषय में अंततम रूप ददया गया र्था | तनस्संदेह अर्वस्र्था को मभन्न रूप से देिा जाएगा जब याधचकाकताणगण इसका अमभर्वचन करें एर्वं इसे मसद्ि कर दें कक राज्य ने “मुंह देिा” ढंग अपनाया र्था ल्जसका उद्देश्य क े र्वल यह र्था कक भेदभार्वपूणण एर्वं गुप्त उद्देश्यों क े चलते याचीगण को र्वंधचत ककया जा सक े | जब ऐसा हो तो | तथ्यों एर्वं पररल्स्र्थततयों को देिते हुए न ही पूर्वण न्याय और न ही वर्वबंि का मसद्िांत लागू होता है | वर्वधिर्वत अपेक्षा अर्थर्वा ईमानदारी र्वाले प्रशासतनक वर्वधि मसद्िांत भी लागू नहीं होते हैं | अतः यह तथ्य कक क ु छ मुकद्दमों में पररपत्र, ददनांक 29.10.1999 (रक्षा मंत्रालय क े पररपत्र, ददनांक 11.09.2001 क े समरूप) को माना गया है एर्वं फ ै सला अंततम हो चुका है पररपत्र, ददनांक 11.09.2001 का प्रततरोि करने अर्थर्वा प्रर्वृत्त करने क े रास्ते में राज्य को बाधित नहीं करेगा |
25. उपरोक्त मुकद्दमे में इस न्यायालय द्र्वारा मानी गई वर्वधि प्रस्तुत मुकद्दमे क े तथ्यों पर लागू होती है एर्वं हम इस तनष्कषण पर पहुाँचते हैं कक यह तथ्य कक अपीलार्थीगण ने क ें रीय प्रशासतनक प्राधिकरणों तर्था उच्च न्यायालयों द्र्वारा पाररत पूर्वण आदेशों को लागू ककया है एर्वं पेंशन की गणना क े प्रयोजन हेतु वर्वशेष र्वेतन को र्वेतन में सल्म्ममलत करने का आदेश जारी ककया है, भारत संघ को उन मुद्दों को दोबारा उठाने से नहीं रोका जा सकता एर्वं यहााँ पूर्वण न्याय और वर्वबंि क े मसद्िांत लागू नहीं होते हैं |
26. अब हम मुख्य मुद्दा अर्थाणत् मुद्दा सं. (iii) पर आते हैं| प्रत्यर्थी क े फ़ाल्ज़ल अधिर्वक्ता क े द्र्वारा ल्जस प्रस्तुतीकरण पर ज़ोर ददया गया र्वह यह है कक रु. 2000/- का वर्वशेष र्वेतन जो कक कायाणलय ज्ञापन ददनांक 03.02.1999 द्र्वारा अनुमोददत ककया गया र्था, हालांकक रु. 2000/- की कधर्थत रामश को वर्वशेष र्वेतन क े रूप में र्वर्णणत करता है, परन्तु उपयुणक्त भुगतान का र्वास्तवर्वक रूप वर्वशेष र्वेतन नहीं र्था जैसा कक, मूल तनयम 9(25) में पररभावषत है| उक्त भुगतान एक अलग उच्च र्वेतनमान क े बदले में र्था|
27. हम मूल तनयम 9(25) में अिोरेिांककत ककए वर्वशेष र्वेतन क े अर्थण पर र्वावपस आते हैं तर्था उपरोक्त तनयमानुसार, वर्वशेष र्वेतन का अर्थण है “ककसी सरकारी कमणचारी अर्थर्वा पद की पररलल्ब्ियों में र्वेतन क े रूप में र्वृद्धि”| वर्वशेष र्वेतन र्वह है ल्जसको (क) वर्वशेष कायण की कदठनता को अर्थर्वा (ि) कायण में वर्वमशष्ट अनुर्वृद्धि अर्थर्वा ल्ज़म्मेदारी को ध्यान में रिकर ददया जाता है|
28. प्रश्न ल्जसका उत्तर ददया जाना है र्वह यह है कक क्या प्रत्यर्थीगण को वर्वशेष र्वेतन क े रूप में अनुमोददत की गई 2000/- रु. की रामश को तनयम 9(25) की पररभाषा क े अंतगणत सल्म्ममलत ककया गया र्था| जब हम ददनांक 03.02.1999 क े ज्ञापन को देिते हैं तो र्वहााँ एक सुस्पष्ट वर्वर्वरण है कक 2000/- रु. प्रतत माह का वर्वशेष र्वेतन क े र्वल रूपए 18,400–22,400 र्वेतनमान क े र्वैज्ञातनकों को ही एक अलग उच्च र्वेतनमान क े बदले समकक्ष समीक्षा क े पश्चात् अनुमोददत ककया गया है| आदेश यह स्पष्ट नहीं करता कक इसे र्वैज्ञातनकों को कतणव्यों क े वर्वमशष्ट कमणठ प्रकार अर्थर्वा प्रत्यधर्थणयों क े वर्वमशष्ट गुण/कायण क े कारण उन्हें अनुमोददत ककया गया| 2000/- रु. की वर्वशेष र्वेतन क े रूप में रामश की उत्पवत्त र्वैज्ञातनकों द्र्वारा उठाई गई पररर्वेदनाओं क े कारण र्थी जब चौर्थे क े न्रीय र्वेतन आयोग क े अंतगणत दो र्वेतनमानों को पााँचर्वे क े न्रीय र्वेतन आयोग द्र्वारा एक र्वेतनमान में ममला मलया गया र्था अर्थाणत् रु. 18,400–22,400/- में र्वैज्ञातनक जो रु. 6700– 7300/- क े र्वेतनमान में र्थे उन्होंने पररर्वेदनाओं को उठाया र्था तर्था समकक्ष समीक्षा क े कारण सरकार ने एक अलग उच्च र्वेतनमान क े बदले वर्वशेष र्वेतन को अनुमोददत ककया| ददनांक 13.02.1999 क े ज्ञापन को एक क ै बबनेट सधचर्वालय को सयुंक्त क ै बबनेट पेपर तैयार एर्वं प्रस्तुत करा क े तीनों उल्ल्लर्ित वर्वभागों द्र्वारा असंगतत को हटाने हेतु प्राप्त ककया गया जो सभी र्वैज्ञातनकों से संबंधित र्था, जो पााँचर्वे क े न्रीय र्वेतन आयोग से पहले रु. 5900-7300/- क े र्वेतनमान (पूर्वण संशोधित) में र्थे तर्था उच्च र्वेतनमान क े हकदार र्थे परन्तु पााँचर्वे क े न्रीय र्वेतन आयोग क े समय उन्हें तनम्न र्वेतनमान में आंतरातयक रूप से ममला ददया गया र्था| यदद ददनांक 13.02.1999 की मंजूरी की उत्पवत्त को सही अर्थों में मलया जाए तो यह स्पष्ट है कक कधर्थत अनुमोदन अर्थर्वा लाभ का वर्वस्तार मूल तनयम 9 (25) में तनदहत वर्वशेष र्वेतन की पररभाषा में उपयुक्त नहीं बैठता, बल्ल्क र्वह र्वेतन संरचना की असंगतत को हटाने हेतु र्था| भारत संघ द्र्वारा बाद में की गई व्याख्या तर्था र्वेतन की पररभाषा में रु. 2000/- की वर्वशेष र्वेतन रामश का लाभ न देने का तनणणय ददनांक 03.02.1999 क े कायाणलय ज्ञापन में आने र्वाले शब्द “वर्वशेष र्वेतन” को लेने से र्था |
29. मूल तनयम 9(21)(ए)(i) की पररभाषा स्पष्ट रूप से तनम्नमलर्ित दो को र्वेतन की पररभाषा से स्पष्ट रूप से बाहर रिती है अर्थाणत् (i) वर्वशेष र्वेतन को अर्थर्वा (ii) उसकी र्वैयल्क्तक योग्यताओं क े आिार पर ददए गए र्वेतन को| मूल तनयम 9(21)(ए)(i) में आने र्वाले शब्द वर्वशेष र्वेतन को तनयम 9(25) में तनदहत वर्वशेष र्वेतन की पररभाषा से तनकलने र्वाले अर्थण को लेना होगा| तनयम 9(25) में पररभावषत वर्वशेष र्वेतन सरकारी कमणचारी अर्थर्वा ककसी वर्वमशष्ट ऐसे पद को जो कदठन प्रकृ तत क े कायण र्वाले पद को देिे, अर्थर्वा कायण में वर्वमशष्ट अनुर्वृद्धि अर्थर्वा उत्तरदातयत्र्व जो कक कतणव्यों क े आर्वश्यक कायण संपादन तर्था कायण में वर्वमशष्ट अनुर्वृद्धि से सम्बंधित हो, को अनुमोददत है| दूसरा उपर्वाद अर्थाणत् इसको र्वृवत्तक अहणताओं को ध्यान में रि कर स्र्वीकृ त करना यह भी दशाणता है कक वर्वशेष र्वेतन क े र्वल व्यल्क्त को र्वृवत्तक अहणताओं को ध्यान में रिते हुए है| अतः वर्वशेष र्वेतन उपरोक्त कारकों की मान्यता में है तर्था उपरोक्त पररल्स्र्थततयों में क्षततपूततण क े मलए है| वर्वशेष र्वेतन की स्र्वीकृ तत वर्वमशष्ट उद्देश्यों से तर्था वर्वमशष्ट ल्स्र्थती एर्वं पररल्स्र्थततयों की अनुकक्रया में की जाती है| अतः तनयम 9(21)(ए)(i) में पररभावषत र्वेतन से वर्वशेष र्वेतन को अलग करना वर्वर्वेकपूणण है परंतु प्रत्यर्थीगण को ददनांक 03.02.1999 क े कायाणलय ज्ञापन द्र्वारा ददया गया वर्वशेष र्वेतन तनयम 9(25) में उल्ल्लर्ित ककसी भी पररल्स्र्थततयों में से नहीं र्था| बल्ल्क रु. 2000/- का उक्त लाभ अलग उच्च र्वेतनमान क े बदले में र्था| अतः यह स्पष्ट है कक 2000/- रु की वर्वशेष र्वेतन की स्र्वीकृ तत अलग उच्च र्वेतनमान क े बदले में र्थी जो तनयम 9(25) द्र्वारा अपेक्षक्षत वर्वशेष र्वेतन क े रूप में उपयुक्त नहीं बैठती| अतः ददनांक 03.02.1999 क े कायाणलय ज्ञापन द्र्वारा स्र्वीकृ त की गई अनुर्वृद्धि भी वर्वशेष र्वेतन में सही नहीं बैठती ल्जसको तनयम 9(21)(ए)(i) क े अंतगणत दी गई र्वेतन की पररभाषा से बाहर रिा गया| अतः ददनांक 01.01.1996 से 2000/- रु का अततररक्त लाभ जो कक वर्वशेष र्वेतन क े प्रकार का है उसको तनयम 9(21)(ए)(i) क े अंतगणत दी गई र्वेतन की पररभाषा में, लाभों क े र्वास्तवर्वक रूप को ध्यान में रिते हुए ल्जसको समकक्ष समीक्षा क े आिार पर र्वैज्ञातनकों तक बढ़ाया गया र्था, सल्म्ममलत ककया जाएगा| अतः हम क ें रीय प्रशासतनक अधिकरणों अर्थर्वा उच्च न्यायालयों क े फ ै सलों, ल्जनमें यह माना गया है कक ददनांक 01.01.1996 से रु. 2000/- एर्वं ददनांक 01.01.2006 से रु.4000/- क े वर्वशेष र्वेतन की रामश को पेंशन को धगनने क े आिार हेतु र्वेतन क े भाग क े रूप में माना जाए को क ु छ गलत नहीं मानते हैं| उपरोक्त में उल्ल्लर्ित कारणों क े देिते हुए इन अपीलों में हम क ु छ भी गुणर्वंता नहीं पाते ल्जन्हें तदानुसार िाररज ककया जाता है| न्या..................... (अशोक भूषण) न्या.................... (एल. नागेश्र्वर रार्व) नई ददल्ली, जनर्वरी 03, 2019 अस्वीकरण: देशी भाषा में तनणणय का अनुर्वाद मुकद्द्मेबाज़ क े सीममत प्रयोग हेतु ककया गया है ताकक र्वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एर्वं यह ककसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नहीं ककया जाएगा| समस्त कायाणलयी एर्वं व्यार्वहाररक प्रयोजनों हेतु तनणणय का अंग्रेज़ी स्र्वरूप ही अमभप्रमार्णत माना जाएगा और कायाणन्र्वयन तर्था लागू ककए जाने हेतु उसे ही र्वरीयता दी जाएगी |